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Karna Poem: रणभूमि में छल करते हो (Lyrics) | सारा जीवन श्रापित (Abhi Munde)

Last Updated: November 27, 2025

Quick Answer: The viral poem "Ranbhoomi Me Chhal Karte Ho" by Kumar Sambhav questions why Krishna used deception (Chhal) to defeat Karna. It highlights the injustice of the Mahabharata war. The post also includes the famous "Sara Jeevan Shrapit" (Sampurna Karna) lyrics by Psycho Shayar.

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए?

Karna Par Hindi Kavita (Full Lyrics) | Tum Kaise Bhagwan Hue

Karna questioning Krishna in Battle - Ranbhoomi me chhal karte ho
Danveer Karna challenging the ethics of the Kurukshetra War.

In the grand epic of Mahabharata, Karna stands as the ultimate symbol of friendship, charity, and tragedy. Unlike Arjuna, who had Krishna's guidance, Karna faced curses from his teacher Parashurama and rejection from his mother Kunti.


Poem 1: Ranbhoomi Me Chhal Karte Ho (Complete Lyrics)

This powerful composition by Kumar Sambhav is a direct confrontation. Karna asks Krishna how he can be called God when he used deceit to kill an unarmed warrior.

सारा जीवन श्रापित-श्रापित, हर रिश्ता बेनाम कहो,
मुझको ही छलने के खातिर मुरली वाले श्याम कहो |
तो किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती,
कैसे-कैसे इंसान हुए...
अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए !

Part 2: Karna to Mother Kunti (Maa Ko Patra)

कि मन कहता है, मन करता है, कुछ तो माँ के नाम लिखूं ,
एक मेरी जननी को लिख दूँ, एक धरती के नाम लिखूं |
प्रश्न बड़ा है मौन खड़ा - धरती संताप नहीं देती,
और धरती मेरी माँ होती तो, मुझको श्राप नहीं देती |

तो जननी माँ को वचन दिया है, जननी माँ को वचन दिया है,
पांडव का काल नहीं हूँ मैं,
अरे! जो बेटा गंगा में छोड़े, उस कुंती का लाल नहीं हूँ मैं |

तो क्या लिखना इन्हें प्रेम की पाती, क्या लिखना इन्हें प्रेम की पाती,
जो मेरी ना पहचान हुए,
अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ?

Part 3: Karna to Father Surya (Surya Putra)

कि सारे जग का तम हरते, बेटे का तम ना हर पाए |
इंद्र ने विषम से कपट किये, बस तुम ही सम ना कर पाए |
अर्जुन की सौगंध की खातिर, बादल ओट छुपे थे तुम |
और श्री कृष्ण के एक इशारे, कुछ पल अधिक रुके थे तुम |

तो पार्थ पराजित हुआ जो मुझसे, तुम को रास नहीं आया |
देख के मेरे रण-कौशल को, कोई भी पास नहीं आया |
दो पल जो तुम रुक जाते तो, दो पल जो तुम रुक जाते तो,
अपना शौर्य दिखा देता |
मुरली वाले के सम्मुख, अर्जुन का शीश गिरा देता |

बेटे का जीवन हरते हो, बेटे का जीवन हरते हो,
तुम कैसे दिनमान हुए !
रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए |

Part 4: Karna to Guru Dronacharya

पक्षपात का चक्रव्यूह क्यों द्रोण नहीं तुम से टूटा ?
और सर्वश्रेष्ठ अर्जुन ही हो, बस मोह नहीं तुम से छूटा |
एकलव्य का लिया अंगूठा, मुझको सूत बताते हो,
अरे! खुद दौने में जन्म लिया और मुझको जात दिखाते हो |

Part 5: The Curse of Parashurama

अब धरती के विश्व विजेता परशुराम की बात सुनो,
अरे! एक झूठ पर सब कुछ छीना नियति का आघात सुनो |
तो देकर भी जो ग्यान भुलाया, कैसा शिष्टाचार किया |
अरे! दानवीर इस सूर्यपुत्र को तुमने जिंदा मार दिया |

फिर भी तुमको ही पूजा है तुम ही बस सम्मान हुए,
अरे रणभूमि में छल करते हो तुम कैसे भगवान हुए ?

Karna Poem: रणभूमि में छल करते हो (Lyrics) | सारा जीवन श्रापित (Abhi Munde)

Arjun vs. Karna: A Comparison

Feature Arjuna Karna
Teacher Dronacharya Parashurama
Weapon Gandiva Vijaya Dhanush
Destiny Protector of Dharma Victim of Circumstance

Poem 2: Sara Jeevan Shrapit (Sampurna Karna Lyrics)

Often searched as "Sampurna Karna Lyrics", this track by Abhi Munde (Psycho Shayar) has become an anthem for the heartbroken.

सारा जीवन श्रापित-श्रापित, हर रिश्ता बेनाम कहो,
मुझको ही छलने के खातिर मुरली वाले श्याम कहो |
एकलव्य का लिया अंगूठा, मुझको सूत बताते हो,
खुद दौने में जन्म लिया और मुझको जात दिखाते हो |

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Analysis: The Paradox of Divinity (Tum Kaise Bhagwan Hue)

The Core Conflict: The poem operates on the literary device of Virodhabhas (Paradox). It juxtaposes the romantic image of Krishna as "Murali Wale" (the flute player) against his role as a ruthless war strategist who advises "Chhal" (deceit). Karna asks a fundamental theological question: Can God still be considered God if he breaks the rules of righteousness to establish righteousness?

Rasa Theory: The poem is a blend of Veer Rasa (Heroism) and Karuna Rasa (Pathos). Unlike the Pandavas who fought for land and kingdom, Karna fought for Mitrata (Friendship) and Vachan (Promise). His tragedy lies in the fact that his greatest virtues—charity (Danveer) and loyalty—were weaponized against him by the divine forces themselves.

Symbolism: The "Wheel" (Chakra) appears twice in Karna's life metaphorically. First, the Chakravyuha of discrimination he faced from Dronacharya, and finally, the literal wheel of his chariot sinking into the earth, sealing his fate.

Frequently Asked Questions

Q: Who wrote the poem 'Ranbhoomi Me Chhal Karte Ho'?
A: This popular Hindi poem about Karna is written by poet Kumar Sambhav. It challenges the ethics of the Mahabharata war.

Q: What is 'Sampurna Karna' or 'Sara Jeevan Shrapit' poem?
A: Sampurna Karna, popularly known as 'Sara Jeevan Shrapit Shrapit', is not a spoken word piece by Psycho Shayar (Abhi Munde) that retells Karna's life story and curses in a modern performance style.

Q: Why is Karna called Danveer?
A: He famously donated his divine armor (Kavach and Kundal) to Lord Indra, even knowing it would lead to his death.

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