आए जिस-जिस की हिम्मत हो (पूर्ण कविता) अटल बिहारी वाजपेयी | Aaye Jis-Jis Ki Himmat Ho संक्षेप में: 'आए जिस-जिस की हिम्मत हो' अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक अत्यंत ओजस्वी और आक्रामक देशभक्ति कविता है। यह रचना सोए हुए भारतीय पौरुष को जगाने, हमारे ऐतिहासिक और पौराणिक गौरव को याद दिलाने और विदेशी शक्तियों के सामने घुटने न टेकने का सिंहनाद है। राष्ट्रकवि अटल बिहारी वाजपेयी की कविता 'आए जिस-जिस की हिम्मत हो' (Aaye Jis-Jis Ki Himmat Ho) भारतीय साहित्य में वीर रस और राष्ट्रवाद का एक अप्रतिम उदाहरण है। जब देश की अस्मिता पर सवाल उठे या जब समाज अपने पौराणिक और ऐतिहासिक गौरव को भूलकर आलस्य में डूबने लगे, तब वाजपेयी जी की यह रचना एक शंखनाद का काम करती है। इस कविता में उन्होंने राम, कृष्ण, अर्जुन, चन्द्रगुप्त और चाणक्य जैसे महानायकों का स्मरण करते हुए देश के युवाओं को ललकारा है कि वे अपनी सोई हुई शक्ति को पहचानें। आइए इस ऊर्जा से भरी रचना का पूर्ण पाठ पढ़ें और इसके गहन अर्थ को समझें। सोने की लंका की मिट्टी लख कर भरता आह प्रभंज...
“झाँसी की रानी” 1857 के विद्रोह को लोक-स्मृति, वीर रस और नारी शक्ति के रूप में रूपांतरित करने वाली अमर कविता है। झाँसी की रानी (Jhansi Ki Rani) केवल एक कविता नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम का 'विजय गीत' है। सुभद्रा कुमारी चौहान की यह रचना 1857 की क्रांति और नारी शक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है। साहित्यशाला (Sahityashala) पर आज हम इस कविता का संपूर्ण पाठ (Full Text) , Hinglish Transliteration , और गहन विश्लेषण (Detailed Analysis) प्रस्तुत कर रहे हैं। "बुझा दीप झाँसी का..." – The fierce defense of Jhansi Fort. यह कविता हमें याद दिलाती है कि कैसे महिलाओं ने अपनी इच्छा से विद्रोह किया और इतिहास बदल दिया, ठीक वैसे ही जैसे हमने कुछ औरतों की विद्रोही कहानियों में पढ़ा है। Exam Relevance (UPSC / NET / Academic) विषय: 1857 का स्वतंत्रता संग्राम (History) साहित्य: वीर रस और राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा (Hindi Literature) महत्व: ...