RBI ने दिए रेपो रेट बढ़ाने के संकेत
त्योहारी सीजन में आम आदमी की जेब पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। हालिया आर्थिक रिपोर्ट्स के अनुसार, लगातार बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबाव के कारण यह कदम उठाना लगभग तय माना जा रहा है।
कितना बढ़ सकता है रेपो रेट?
वर्तमान में आरबीआई का रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है। लेकिन नोमुरा और एचएसबीसी जैसी बड़ी वित्तीय संस्थाओं की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर और दिसंबर के बीच रेपो रेट में 0.50% तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो साल के अंत तक रेपो रेट 5.75% तक पहुंच जाएगा। फरवरी 2023 के बाद यह रेपो रेट में होने वाला सबसे बड़ा बदलाव होगा।
लोन की EMI पर क्या होगा सीधा असर?
रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर बैंक से लिए गए फ्लोटिंग रेट लोन्स पर पड़ता है। अगर रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप बैंक भी अपने ग्राहकों के लिए ब्याज दरें बढ़ा देते हैं।
इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनका होम लोन या कार लोन चल रहा है। ब्याज दर बढ़ने से या तो आपकी मासिक ईएमआई (EMI) की राशि बढ़ जाएगी, या फिर आपके लोन चुकाने की कुल अवधि (Tenure) लंबी हो जाएगी। फिक्स्ड रेट वाले लोन पर इसका कोई त्वरित प्रभाव नहीं पड़ेगा।
RBI क्यों ले सकता है यह फैसला?
इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे कई मुख्य कारण हैं। सबसे बड़ा कारण खुदरा महंगाई दर है, जो आरबीआई के 4% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे क्रूड ऑयल का असर सीधा घरेलू महंगाई पर पड़ता है। ऐसे में लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट बढ़ाना एक जरूरी उपाय बन जाता है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरबीआई आम आदमी को राहत देता है या फिर महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दरों का बोझ बढ़ाता है। लोन धारकों को अपनी आर्थिक योजना इसी संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखकर बनानी चाहिए।