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Mahadevi Verma Hindi Poem- ढुलकते आँसू सा सुकुमार - कौन? | महादेवी वर्मा हिंदी कविता

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महादेवी वर्मा की हिंदी कविता - संसार - निश्वासों का नीड़ | Mahadevi Verma Hindi Poems

महादेवी वर्मा की हिंदी कविता - संसार - निश्वासों का नीड़ Mahadevi Verma Hindi Poems महादेवी वर्मा जी की हिंदी कविता - संसार - निश्वासों का नीड़  Mahadevi Verma Hindi Poems निश्वासों का नीड़, निशा का बन जाता जब शयनागार, लुट जाते अभिराम छिन्न मुक्तावलियों के बन्दनवार, तब बुझते तारों के नीरव नयनों का यह हाहाकार, आँसू से लिख लिख जाता है ‘कितना अस्थिर है संसार’! हँस देता जब प्रात, सुनहरे अंचल में बिखरा रोली, लहरों की बिछलन पर जब मचली पड़तीं किरनें भोली, तब कलियाँ चुपचाप उठाकर पल्लव के घूँघट सुकुमार, छलकी पलकों से कहती हैं ‘कितना मादक है संसार’! महादेवी वर्मा जी की हिंदी कविता - संसार - निश्वासों का नीड़  Mahadevi Verma Hindi Poems देकर सौरभ दान पवन से कहते जब मुरझाये फूल, ‘जिसके पथ में बिछे वही क्यों भरता इन आँखों में धूल’? ‘अब इनमें क्या सार’ मधुर जब गाती भँवरों की गुंजार, मर्मर का रोदन कहता है ‘कितना निष्ठुर है संसार’! स्वर्ण वर्ण से दिन लिख जाता जब अपने जीवन की हार, गोधूली, नभ के आँगन में देती अगणित दीपक बार, हँसकर तब उस पार तिमिर का कहता बढ-बढ पारावार, ‘बीते युग, पर बना हुआ है अब तक मतव

मन से मन का दीप जलाओ | Diwali Poems In Hindi | Happy Diwali Poems 2023

मन से मन का दीप जलाओ जगमग-जगमग दि‍वाली मनाओ मन से मन का दीप जलाओ | Diwali Poems In Hindi | Happy Diwali Poems 2023 धनियों के घर बंदनवार सजती निर्धन के घर लक्ष्मी न ठहरती मन से मन का दीप जलाओ घृणा-द्वेष को मिल दूर भगाओ घर-घर जगमग दीप जलते नफरत के तम फिर भी न छंटते जगमग-जगमग मनती दिवाली गरीबों की दिखती है चौखट खाली खूब धूम धड़काके पटाखे चटखते आकाश में जा ऊपर राकेट फूटते काहे की कैसी मन पाए दिवाली मन से मन का दीप जलाओ | Diwali Poems In Hindi | Happy Diwali Poems 2023 अंटी हो जिसकी पैसे से खाली गरीब की कैसे मनेगी दीवाली खाने को जब हो कवल रोटी खाली दीप अपनी बोली खुद लगाते गरीबी से हमेशा दूर भाग जाते अमीरों की दहलीज सजाते फिर कैसे मना पाए गरीब दि‍वाली दीपक भी जा बैठे हैं बहुमंजिलों पर वहीं झिलमिलाती हैं रोशनियां पटाखे पहचानने लगे हैं धनवानों को वही फूटा करती आतिशबाजियां यदि एक निर्धन का भर दे जो पेट सबसे अच्छी मनती उसकी दि‍वाली हजारों दीप जगमगा जाएंगे जग में भूखे नंगों को यदि रोटी वस्त्र मिलेंगे दुआओं से सारे जहां को महकाएंगे आत्मा को नव आलोक से भर देगें मन से मन का दीप जलाओ  Diwali Poems In

ये 6 तरीके आपको एक बेहतरीन शायर बना देंगे... Ye 6 Tarike Aapko Ek Behtareen Shayar Bana Denge

ये 6 तरीके आपको एक बेहतरीन शायर बना देंगे   परिचय: कविता सावधानीपूर्वक तैयार किए गए शब्दों के माध्यम से भावनाओं, विचारों और विचारों को व्यक्त करने की कला है। यह एक ऐसा माध्यम है जो व्यक्तियों को उनकी कल्पना की गहराई में जाने और एक अनोखे और रचनात्मक तरीके से गहन संदेशों को संप्रेषित करने की अनुमति देता है। यदि आपको शब्दों का शौक है और कवि बनने की इच्छा है, तो यह लेख आपको इस खूबसूरत यात्रा को शुरू करने के बारे में आवश्यक अंतर्दृष्टि और मार्गदर्शन प्रदान करेगा। पढ़ें, विसर्जित करें, और अवशोषित करें: कवि बनने के लिए सबसे पहले एक पेटू पाठक बनना होगा। विभिन्न युगों और शैलियों के प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं में तल्लीन हों। क्लासिक्स, समकालीन कविता पढ़ें और विभिन्न शैलियों का अन्वेषण करें। भाषा की सुंदरता में खुद को डुबोएं और दूसरों के शब्दों को खुद को प्रेरित करने दें। पढ़ने के माध्यम से, आप न केवल अपनी शब्दावली का विस्तार करेंगे बल्कि कविता में प्रयुक्त तकनीकों और संरचनाओं की गहरी समझ भी प्राप्त करेंगे। विभिन्न रूपों के साथ प्रयोग: कविता असंख्य रूपों में आती है, जैसे सॉनेट्स, हाइकु, मुक्त छंद

Mahadevi Verma Ji Ki Hindi Kavita - अतिथि से | Atithi Se - महादेवी वर्मा जी की हिंदी कविता

Mahadevi Verma Ji Ki Hindi Kavita  महादेवी वर्मा जी की हिंदी कविता  अतिथि से | Atithi Se बनबाला के गीतों सा निर्जन में बिखरा है मधुमास, इन कुंजों में खोज रहा है सूना कोना मन्द बतास। नीरव नभ के नयनों पर हिलतीं हैं रजनी की अलकें, जाने किसका पंथ देखतीं बिछ्कर फूलों की पलकें। मधुर चाँदनी धो जाती है खाली कुलियों के प्याले, बिखरे से हैं तार आज मेरी वीणा के मतवाले; पहली सी झंकार नहीं है और नहीं वह मादक राग, अतिथि! किन्तु सुनते जाओ टूटे तारों का करुण विहाग। - महादेवी वर्मा

टॉप 10 सबसे प्रसिद्ध हिंदी लेखक | Hindi Ke Top 10 Sbse Mahaan Lekhak

टॉप 10 सबसे प्रसिद्ध हिंदी लेखक Hindi Ke Top 10 Sbse Mahaan Lekhak  परिचय : हिंदी साहित्य का एक समृद्ध इतिहास रहा है, और इसके विशाल चित्रपट में अनेक कवियों ने अपने गहरे छंदों के साथ एक अमिट छाप छोड़ी है।  प्रेम की गीतात्मक अभिव्यक्तियों से लेकर जीवन की जटिलताओं पर मार्मिक प्रतिबिंबों तक, हिंदी कवियों ने अपनी काव्य शक्ति से पीढ़ियों को मोहित किया है।  इस लेख में, हम सभी समय के शीर्ष 10 हिंदी कवियों का जश्न मनाने के लिए हिंदी कविता की दुनिया में तल्लीन हैं, जिनका योगदान आज भी पाठकों को प्रेरित और प्रतिध्वनित करता है। कबीर दास: 15वीं शताब्दी में जन्मे कबीर दास हिंदी के सबसे सम्मानित कवियों में से एक हैं। उनके विचारोत्तेजक छंदों ने धार्मिक सीमाओं को लांघते हुए सामाजिक टिप्पणी के साथ आध्यात्मिक ज्ञान को सहज रूप से मिश्रित किया। कबीर के दोहे, या दोहे, सभी धर्मों की एकता में उनके विश्वास को दर्शाते हैं और आत्म निरीक्षण और आत्म-साक्षात्कार के महत्व पर जोर देते हैं। मिर्जा गालिब : मिर्जा गालिब, जिन्हें अक्सर "मुगल युग के अंतिम महान कवि" के रूप में जाना जाता है, उर्दू और हिंदी कविता मे

Hindi Nature Poems | प्रकृति पर कविताएँ | Poem On Nature In Hindi

प्रकृति पर कविताएँ | Poem On Nature In Hindi - Poem In Hindi Kavita  चाह हमारी "प्रभात गुप्त" छोटी एक पहाड़ी होती झरना एक वहां पर होता उसी पहाड़ी के ढलान पर काश हमारा घर भी होता बगिया होती जहाँ मनोहर खिलते जिसमें सुंदर फूल बड़ा मजा आता जो होता वहीं कहीं अपना स्कूल झरनों के शीतल जल में घंटों खूब नहाया करते नदी पहाड़ों झोपड़ियों के सुंदर चित्र बनाया करते होते बाग़ सब चीकू के थोड़ा होता नीम बबूल बड़ा मजा आता जो होता वहीँ कहीं अपना स्कूल सीढ़ी जैसे खेत धान के और कहीं केसर की क्यारी वहां न होता शहर भीड़ का धुआं उगलती मोटर गाड़ी सिर पर सदा घटाएं काली पांवों में नदिया के कूल बड़ा मजा आता जो होता वहीं कहीं अपना स्कूल रह रहकर टूटता रब़ का क़हर खंडहरों मे तब्दील होते शहर सिहर उठ़ता है ब़दन देख आतक़ की लहर आघात से पहली उब़रे नही तभी होता प्रहार ठ़हर ठहर क़ैसी उसकी लीला है ये क़ैसा उमड़ा प्रकति क़ा क्रोध विनाश लीला क़र क्यो झुझलाक़र क़रे प्रकट रोष अपराधी जब़ अपराध क़रे सजा फिर उसकी सब़को क्यो मिले पापी ब़ैठे दरब़ारों मे ज़नमानष को पीड़ा क़ा इनाम मिले हुआ अत्याचार अविरल इस जग़त जननी पर पहर – पहर क़ितना

Famous Poems

महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली हिंदी कविता - Mahabharata Poem On Arjuna

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता || || Mahabharata Poem On Arjuna ||   तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास लगे | कुरुक्षेत्र का महासमर एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ शंखनाद जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका मर्दन शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को मीच जड़ा, गाण्डिव पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की तासीर यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||    सुनी बात माधव की तो अर्जुन का चेहरा उतर गया, एक धनुर्धारी की विद्या मानो चूहा कुतर गया | बोले पार्थ सुनो कान्हा - जितने

सादगी तो हमारी जरा देखिये | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics | Nusrat Fateh Ali Khan Sahab

Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics सादगी तो हमारी जरा देखिये   सादगी तो हमारी जरा देखिये,  एतबार आपके वादे पे कर लिया | मस्ती में इक हसीं को ख़ुदा कह गए हैं हम,  जो कुछ भी कह गए वज़ा कह गए हैं हम  || बारस्तगी तो देखो हमारे खुलूश कि,  किस सादगी से तुमको ख़ुदा कह गए हैं हम ||   किस शौक किस तमन्ना किस दर्ज़ा सादगी से,  हम करते हैं आपकी शिकायत आपही से || तेरे अताब के रूदाद हो गए हैं हम,  बड़े खलूस से बर्बाद हो गए हैं हम ||

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! || Karna Par Hindi Kavita || || Poem On Karna || अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte सारा जीवन श्रापित-श्रापित , हर रिश्ता बेनाम कहो, मुझको ही छलने के खातिर मुरली वाले श्याम कहो, तो किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, कैसे-कैसे इंसान हुए, अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte || माँ को कर्ण लिखता है || अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte कि मन कहता है, मन करता है, कुछ तो माँ के नाम लिखूं , एक मेरी जननी को लिख दूँ, एक धरती के नाम लिखूं , प्रश्न बड़ा है मौन खड़ा - धरती संताप नहीं देती, और धरती मेरी माँ होती तो , मुझको श्राप नहीं देती | तो जननी माँ को वचन दिया है, जननी माँ को वचन दिया है, पांडव का काल नहीं हूँ मैं, अरे! जो बेटा गंगा में छोड़े, उस कुंती का लाल नहीं हूँ

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ | Mahabharata Par Kavita

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ  || Mahabharata Par Kavita ||   तलवार, धनुष और पैदल सैनिक   कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की  प्रतिक्षा  में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखन  में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन   शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव   पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||    सुनी बात माधव की तो अर्जुन का चेहरा उतर गया, एक  धनुर्धारी  की विद्या मानो चूहा कुतर गया | बोले पार्थ सुनो कान्हा - जितने ये सम्मुख खड़े हुए है, हम तो इन से सीख-स

वे खुद त्रेता के राम है - Hindi Poem On Shri Krishna | Mahabharata Poems

 वे खुद त्रेता के राम है Hindi Poem On Shri Krishna

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi Mahabharata Poem On Arjuna अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna तलवार,धनुष और पैदल सैनिक  कुरुक्षेत्र मे खड़े हुये, रक्त पिपासू महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुये | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महासमर की  प्रतिक्षा  में सारे टाँक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखने में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पाञ्चजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सबका गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन  शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव  पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||   अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna सुनी बात माधव की तो अर्जु

सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है - Sach Hai Vipatti Jab Aati Hai

  सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है रामधारी सिंह "दिनकर" हिंदी कविता दिनकर की हिंदी कविता   सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं। मुख से न कभी उफ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग-निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को। है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में ? खम ठोंक ठेलता है जब नर , पर्वत के जाते पाँव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है । गुण बड़े एक से एक प्रखर, हैं छिपे मानवों के भीतर, मेंहदी में जैसे लाली हो, वर्तिका-बीच उजियाली हो। बत्ती जो नहीं जलाता है, रोशनी नहीं वह पाता है। पीसा जाता जब इक्षु-दण्ड , झरती रस की धारा अखण्ड , मेंहदी जब सहती है प्रहार, बनती ललनाओं का सिंगार। जब फूल पिरोये जाते हैं, हम उनको गले लगाते हैं। वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ ? अतुलित यश क्रेता कौन हुआ? नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ ? जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर ना

रानी पद्मिनी और गोरा, बादल पर नरेंद्र मिश्र की रुला देने वाली कविता | Gora Badal Poem

पद्मिनी गोरा बादल नरेंद्र मिश्र ( Narendra Mishra ) रानी पद्मिनी और गोरा, बादल पर नरेंद्र मिश्र की रुला देने वाली कविता

अग्निपथ (Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan

अग्निपथ - हरिवंश राय बच्चन  Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । Agneepath Poem By Harivansh Rai Bachchan Agneepath Poem In Hinglish Vriksh hon bhale khade, hon ghane hon bade, Ek patra chhah bhi maang mat, maang mat, maang mat, Agnipath, Agnipath, Agnipath. Tu na thakega kabhi tu na thamega kabhi tu na mudega kabhi, Kar shapath, Kar shapath, Kar shapath, Agnipath, Agnipath, Agnipath. अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan Ye Mahaan Drishya hai, Chal raha Manushya hai, Ashru, swed,

Talvar, Dhanush Aur Paidal Sainik Kavita - तलवार धनुष और पैदल सैनिक

  Talvar , Dhanush Aur Paidal Sainik Kavita तलवार धनुष और पैदल सैनिक महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna   Talvar, Dhanush Aur Paidal Sainik Kavita तलवार धनुष और पैदल सैनिक तलवार, धनुष  और पैदल सैनिक   कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा समर की  प्रतीक्षा  में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास   लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पाचजण्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सबका गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन  शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव   पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||    Talvar, Dhanush Aur Paidal Sainik Kavit