हिगिंस-मैकाले कॉम्प्लेक्स: क्या फर्राटेदार अंग्रेजी और विदेशी सूट भारत में एक नया 'जातिवाद' बन गए हैं?
हिगिंस-मैकाले कॉम्प्लेक्स: क्या फर्राटेदार अंग्रेजी और विदेशी सूट भारत में एक नया 'जातिवाद' बन गए हैं? आईआईएमसी (IIMC) के गेस्ट फैकल्टी और टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार निर्मल्या दत्ता के 'द वीकली वाइन' न्यूज़लेटर के सौजन्य से—समझिए कैसे अंग्रेजी भाषा आधुनिक भारत में योग्यता का अंतिम पैमाना बन गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के 'द वीकली वाइन' में निर्मल्या दत्ता द्वारा प्रकाशित लेख की झलक, जो भाषा और पहनावे के सामाजिक प्रभाव को उजागर करती है। कल्पना कीजिए एक बेहद आम दृश्य की... एक व्यक्ति अपने कार्यालय में कुर्ता-पायजामा पहनकर जाता है। गार्ड उसे रोकता है और कथित तौर पर उसका पहचान पत्र दो बार चेक करता है। कुछ ही दिनों बाद, वही व्यक्ति एक महंगा और शानदार विदेशी सूट (Bespoke Suit) पहनकर उसी गेट से अंदर आता है। इस बार, वही सुरक्षा गार्ड अपनी जगह से खड़ा होकर उसे एक शानदार सैल्यूट ठोकता है। ऐसा क्यों हुआ? यह केवल कपड़ों का मामला नहीं है...