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चल पड़े जिधर दो डग-मग में... | Chal Pade Jidhar Do Dag-Mag Mein - सोहन लाल द्विवेदी

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जिस तट पर प्यास बुझाने से अपमान प्यास का होता हो | Uss Tat Par Pyaas Bujhane Se Pyasa Mar Jana Behtar Hai

जिस तट पर प्यास बुझाने से अपमान प्यास का होता हो | Uss Tat Par Pyaas Bujhane Se Pyasa Mar Jana Behtar Hai जिस तट पर | Jis Tat Par... जिस तट पर प्यास बुझाने से अपमान प्यार का होता हो‚ उस तट पर प्यास बुझाने से प्यासा मर जाना बेहतर है। जब आंधी‚ नाव डुबो देने की अपनी ज़िद पर अड़ जाए‚ हर एक लहर जब नागिन बनकर डसने को फन फैलाए‚ ऐसे में भीख किनारों की मांगना धार से ठीक नहीं‚ पागल तूफानों को बढ़कर आवाज लगाना बेहतर है। जिस तट पर प्यास बुझाने से अपमान प्यास का होता हो  Jis Tat Par Pyaas Bujhane Se  कांटे तो अपनी आदत के अनुसारा नुकीले होते हैं‚ कुछ फूल मगर कांटों से भी ज्यादा जहरीले होते हैं‚ जिनको माली आंखें मीचे‚ मधु के बदले विष से सींचे‚ ऐसी डाली पर खिलने से पहले मुरझाना बेहतर है। जिस तट पर प्यास बुझाने से अपमान प्यास  का होता हो  Jis Tat Par Pyaas Bujhane Se जो दिया उजाला दे न सके‚ तम के चरणों का दास रहे‚ अंधियारी रातों में सोये‚ दिन में सूरज के पास रहे‚ जो केवल धुआं उगलता हो‚ सूरज पर कालिख मलता हो‚ ऐसे दीपक का जलने से पहले बुझ जाना बेहतर है। ~  बुद्धिसेन शर्मा मोटिवेशनल पोयम्स इन हिंदी | Motivat

Khuddar Mere Shehar Ka Faakon Se Mar Gaya | खुद्दार मेरे शहर का फ़ाको से मर गया

Khuddar Mere Shehar Ka Faakon Se Mar Gaya | खुद्दार मेरे शहर का  फाँकों  से मर गया खुद्दार मेरे शहर का फाँकों से मर गया राशन जो आ रहा था वो अफ़सर के घर गया चढ़ती रही मज़ार पे चादर तो बेशुमार  बाहर जो एक फ़क़ीर था सर्दी से मर गया  रोटी अमीर-ए-शहर के  कुत्तों ने छीन ली फ़ाका गरीब-ए-शहर के बच्चों  में बँट  गया चेहरा बता रहा था की मारा  है  भूख ने  हाकिम ने कह दिया के कुछ खा के मर गया |

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक - aah ko chāhiye ik umr asar hote tak | Mirza Ghalib Ghazal

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक - Aah ko chāhiye ik umr asar hote tak Mirza Ghalib Ghazal आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक  कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक  दाम-ए-हर-मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग  देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक  आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब  दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक  ता-क़यामत शब-ए-फ़ुर्क़त में गुज़र जाएगी उम्र  सात दिन हम पे भी भारी हैं सहर होते तक  हम ने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन  ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक  परतव-ए-ख़ुर से है शबनम को फ़ना की ता'लीम  मैं भी हूँ एक इनायत की नज़र होते तक  यक नज़र बेश नहीं फ़ुर्सत-ए-हस्ती ग़ाफ़िल  गर्मी-ए-बज़्म है इक रक़्स-ए-शरर होते तक  ग़म-ए-हस्ती का 'असद' किस से हो जुज़ मर्ग इलाज  शम्अ हर रंग में जलती है सहर होते तक 

कृष्ण की चेतावनी - KRISHNA KI CHETAWANI | रश्मिरथी - रामधारी सिंह " दिनकर " | Mahabharata Poems |

|| कृष्ण की चेतावनी - KRISHNA KI CHETAWANI || || रश्मिरथी - रामधारी सिंह " दिनकर " || | MAHABHARATA POEMS | | MAHABHARATA POEMS IN HINDI | Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप - घाम , पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर । सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को, दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को, भगवान हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी दो न्याय, अगर तो, आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम , रखों अपनी धरती तमाम | हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे !! दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका, उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य , साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है ||   जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी हरि ने भ

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है - dil-e-naadaan tujhe huaa kyaa hai | Mirza Ghalib Ghazal

 दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है - Dil-E-Nadaan Tujhe Hua Kya Hai Ghazal Mirza Ghalib Ghazal dil-e-naadaan tujhe huaa kyaa hai aakhir is dard kii davaa kyaa hai ham hain mushtaaq aur vo bezaar yaa ilaahii ye maajaraa kyaa hai main bhii muunh me zabaan rakhataa huun kaash puuchho ki muddaa kyaa hai jab ki tujh bin nahii.n koii maujuud phir ye hangaamaa, ai Khudaa kyaa hai hamako unase vafaa kii hai ummiid jo nahii.n jaanate vafaa kyaa hai TRANSLATION- Innocent heart, what has happened to you? Alas, what is the cure to this pain? We are interested, and they are displeased, Oh Lord, what is this affair? I too possess a tongue- just ask me what I want to say. Though there is none present without you, then oh God, what is this noise about? I expected faith from those who do not even know what faith is.  दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है  आख़िर इस दर्द की दवा क्या है  हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार  या इलाही ये माजरा क्या है  मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ  काश पूछो कि मुद्दआ' क्या है  जब कि तुझ

Mai Pal Do Pal Ka Shayar Hu Hindi Lyrics - मैं पल दो पल का शायर हूँ | Sahir Ludhiyanvi

Mai Pal Do Pal Ka Shayar Hu Hindi Lyrics - मैं पल दो पल का शायर हूँ Sahir Ludhiyanvi |  साहिर लुधियानवी  मैं पल दो पल का शाइ'र हूँ पल दो पल मिरी कहानी है  पल दो पल मेरी हस्ती है पल दो पल मिरी जवानी है  मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए  कुछ आहें भर कर लौट गए कुछ नग़्मे गा कर चले गए  वो भी इक पल का क़िस्सा थे मैं भी इक पल का क़िस्सा हूँ  कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ  पल दो पल में कुछ कह पाया इतनी ही सआ'दत काफ़ी है  पल दो पल तुम ने मुझ को सुना इतनी ही इनायत काफ़ी है  कल और आएँगे नग़्मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले  मुझ से बेहतर कहने वाले तुम से बेहतर सुनने वाले  हर नस्ल इक फ़स्ल है धरती की आज उगती है कल कटती है  जीवन वो महँगी मुद्रा है जो क़तरा क़तरा बटती है  सागर से उभरी लहर हूँ मैं सागर में फिर खो जाऊँगा  मिट्टी की रूह का सपना हूँ मिट्टी में फिर सो जाऊँगा  कल कोई मुझ को याद करे क्यूँ कोई मुझ को याद करे  मसरूफ़ ज़माना मेरे लिए क्यूँ वक़्त अपना बरबाद करे  मैं पल दो पल का शाइ'र हूँ - साहिर लुधियानवी

कविता और कविताओं के प्रकार: एक सूक्ष्म विश्लेषण | Kavita Aur Kavitayon Ke Prakaar

कविता और कविताओं के प्रकार: एक सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तावना: कविता, भाषा की सुंदरता और भावनाओं की गहराई का अद्वितीय साधन है। इस लेख में, हम कविता के विभिन्न प्रकारों के रहस्यों को सुलझाएंगे और इसकी रोचक दुनिया को समझेंगे। भूमिका: कविता के माध्यम से मैं अपनी भावनाओं को साझा करता हूं और इस आद्यतन में आपको विभिन्न प्रकारों की सुंदरता को अनुभव करने का मौका मिलेगा। विभिन्न प्रकारों की कविताएँ: 1. गाथा कविता: गाथा कविता मेरी भावनाओं को एक किस्से की भाषा में व्यक्त करने का एक अद्वितीय तरीका है। यह रूप मेरे अंतर की कहानियों को साझा करने का साधन है। 2. सोनेट: सोनेट एक छोटी, सुंदर रचना है जो एक विशिष्ट विचार या भाव को व्यक्त करने के लिए बनाई जाती है। इसमें 14 पंक्तियाँ होती हैं और एक निश्चित छंद का पालन किया जाता है। 3. हाइकू: हाइकू, जापानी परंपरागत रूप, अत्यंत संक्षेप में विशेष भावनाएं प्रकट करता है। यह तबीयत और प्राकृतिक सौंदर्य को सुंदरता से जोड़ता है। 4. अकान्त रचना: अकान्त रचना भावनात्मकता का एक उत्कृष्ट रूप है जो आत्मा की गहराईयों में लेने का प्रयास करती है। इसमें भावनाओं का आत्मीय अन्वेषण

Famous Poems

महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली हिंदी कविता - Mahabharata Poem On Arjuna

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता || || Mahabharata Poem On Arjuna ||   तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास लगे | कुरुक्षेत्र का महासमर एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ शंखनाद जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका मर्दन शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को मीच जड़ा, गाण्डिव पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की तासीर यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||    सुनी बात माधव की तो अर्जुन का चेहरा उतर गया, एक धनुर्धारी की विद्या मानो चूहा कुतर गया | बोले पार्थ सुनो कान्हा - जितने

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ | Mahabharata Par Kavita

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ  || Mahabharata Par Kavita ||   तलवार, धनुष और पैदल सैनिक   कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की  प्रतिक्षा  में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखन  में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन   शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव   पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||    सुनी बात माधव की तो अर्जुन का चेहरा उतर गया, एक  धनुर्धारी  की विद्या मानो चूहा कुतर गया | बोले पार्थ सुनो कान्हा - जितने ये सम्मुख खड़े हुए है, हम तो इन से सीख-स

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! || Karna Par Hindi Kavita || || Poem On Karna || अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte सारा जीवन श्रापित-श्रापित , हर रिश्ता बेनाम कहो, मुझको ही छलने के खातिर मुरली वाले श्याम कहो, तो किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, कैसे-कैसे इंसान हुए, अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte || माँ को कर्ण लिखता है || अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte कि मन कहता है, मन करता है, कुछ तो माँ के नाम लिखूं , एक मेरी जननी को लिख दूँ, एक धरती के नाम लिखूं , प्रश्न बड़ा है मौन खड़ा - धरती संताप नहीं देती, और धरती मेरी माँ होती तो , मुझको श्राप नहीं देती | तो जननी माँ को वचन दिया है, जननी माँ को वचन दिया है, पांडव का काल नहीं हूँ मैं, अरे! जो बेटा गंगा में छोड़े, उस कुंती का लाल नहीं हूँ

सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है - Sach Hai Vipatti Jab Aati Hai

  सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है रामधारी सिंह "दिनकर" हिंदी कविता दिनकर की हिंदी कविता   सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं। मुख से न कभी उफ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग-निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को। है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में ? खम ठोंक ठेलता है जब नर , पर्वत के जाते पाँव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है । गुण बड़े एक से एक प्रखर, हैं छिपे मानवों के भीतर, मेंहदी में जैसे लाली हो, वर्तिका-बीच उजियाली हो। बत्ती जो नहीं जलाता है, रोशनी नहीं वह पाता है। पीसा जाता जब इक्षु-दण्ड , झरती रस की धारा अखण्ड , मेंहदी जब सहती है प्रहार, बनती ललनाओं का सिंगार। जब फूल पिरोये जाते हैं, हम उनको गले लगाते हैं। वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ ? अतुलित यश क्रेता कौन हुआ? नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ ? जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर ना

Hindu Tan Man, Hindu Jeevan | हिंदु तन मन, हिन्दु जीवन, रग-रग हिन्दु मेरा परिचय

 Hindu Tan Man, Hindu Jeevan हिंदु तन मन, हिन्दु जीवन, रग-रग हिन्दु मेरा परिचय Atal  Bihari  Vajpayee  Hindi Poems अटल बिहारी वाजपेयी  की  हिंदी कवितायेँ  Hindu Tan Man, Hindu Jeevan हिंदु तन-मन, हिन्दु जीवन , रग-रग हिन्दु मेरा परिचय ॥ मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार क्षार। डमरू की वह प्रलयध्वनि हूं जिसमे नचता भीषण संहार। रणचंडी की अतृप्त प्यास , मैं दुर्गा का उन्मत्त हास । मैं यम की प्रलयंकर पुकार , जलते मरघट का धुँआधार। फिर अंतरतम की ज्वाला से, जगती मे आग लगा दूं मैं। यदि धधक उठे जल, थल, अंबर, जड़, चेतन तो कैसा विस्मय ? हिन्दु तन मन, हिन्दु जीवन, रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥ मैं आदि पुरुष, निर्भयता का वरदान लिये आया भू पर। पय पीकर सब मरते आए, मैं अमर हुआ लो विष पीकर। अधरों की प्यास बुझाई है, पी कर मैने वह आग प्रखर । हो जाती दुनिया भस्मसात , जिसको पल भर में ही छूकर। भय से व्याकुल फिर दुनिया ने प्रारंभ किया मेरा पूजन। मैं नर, नारायण, नीलकण्ठ बन गया न इसमे कुछ संशय । हिन्दु तन मन, हिन्दु जीवन, रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥ Hindu Tan Man, Hindu Jeevan | हिंदु तन मन, हिन्दु जीवन, रग-

सादगी तो हमारी जरा देखिये | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics | Nusrat Fateh Ali Khan Sahab

Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics सादगी तो हमारी जरा देखिये   सादगी तो हमारी जरा देखिये,  एतबार आपके वादे पे कर लिया | मस्ती में इक हसीं को ख़ुदा कह गए हैं हम,  जो कुछ भी कह गए वज़ा कह गए हैं हम  || बारस्तगी तो देखो हमारे खुलूश कि,  किस सादगी से तुमको ख़ुदा कह गए हैं हम || किस शौक किस तमन्ना किस दर्ज़ा सादगी से,  हम करते हैं आपकी शिकायत आपही से || तेरे अताब के रूदाद हो गए हैं हम,  बड़े खलूस से बर्बाद हो गए हैं हम ||

कृष्ण की चेतावनी - KRISHNA KI CHETAWANI | रश्मिरथी - रामधारी सिंह " दिनकर " | Mahabharata Poems |

|| कृष्ण की चेतावनी - KRISHNA KI CHETAWANI || || रश्मिरथी - रामधारी सिंह " दिनकर " || | MAHABHARATA POEMS | | MAHABHARATA POEMS IN HINDI | Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप - घाम , पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर । सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को, दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को, भगवान हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी दो न्याय, अगर तो, आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम , रखों अपनी धरती तमाम | हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे !! दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका, उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य , साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है ||   जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी हरि ने भ

रानी पद्मिनी और गोरा, बादल पर नरेंद्र मिश्र की रुला देने वाली कविता | Gora Badal Poem

पद्मिनी गोरा बादल नरेंद्र मिश्र ( Narendra Mishra ) रानी पद्मिनी और गोरा, बादल पर नरेंद्र मिश्र की रुला देने वाली कविता

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi Mahabharata Poem On Arjuna अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna तलवार,धनुष और पैदल सैनिक  कुरुक्षेत्र मे खड़े हुये, रक्त पिपासू महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुये | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महासमर की  प्रतिक्षा  में सारे टाँक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखने में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पाञ्चजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सबका गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन  शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव  पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||   अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna सुनी बात माधव की तो अर्जु

अग्निपथ (Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan

अग्निपथ - हरिवंश राय बच्चन  Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । Agneepath Poem By Harivansh Rai Bachchan Agneepath Poem In Hinglish Vriksh hon bhale khade, hon ghane hon bade, Ek patra chhah bhi maang mat, maang mat, maang mat, Agnipath, Agnipath, Agnipath. Tu na thakega kabhi tu na thamega kabhi tu na mudega kabhi, Kar shapath, Kar shapath, Kar shapath, Agnipath, Agnipath, Agnipath. अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan Ye Mahaan Drishya hai, Chal raha Manushya hai, Ashru, swed,