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मिथिला पंचांग 2026-2027 (PDF): इतिहास, महत्व और व्रत-त्यौहार की पूरी सूची!

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100+ मैथिली छठ पूजा गीत लिरिक्स: सबसे बड़ा संग्रह (PDF/Video)

📅 छठ महापर्व 2026: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक (13 नवंबर - 16 नवंबर) की हार्दिक शुभकामनाएँ! मैथिली छठ पूजा गीत लिरिक्स का सबसे बड़ा संग्रह (Maithili Chhath Puja Geet) छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह बिहार, मिथिलांचल और पूर्वांचल की आत्मा है। जब कार्तिक मास की ठंडी हवाएं चलती हैं, तो घर-आँगन से लेकर नदियों के घाटों तक केवल एक ही स्वर गूंजता है— छठी मईया और भगवान भास्कर (सूर्य देव) के पावन गीत । चाहे वह शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) की जादुई आवाज़ हो, अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) का भक्तिमय स्वर हो, या गाँव की महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत— इन गीतों में समाजवाद, प्रकृति प्रेम, भाई-बहन का स्नेह और एक माँ का अटूट विश्वास झलकता है। साहित्यशाला (Sahityashala) के इस विशेष महा-संग्रह में हमने इंटरनेट पर उपलब्ध सबसे प्रसिद्ध और भावुक 'मैथिली एवं भोजपुरी छठ पूजा गीतों' (Maithili Chhath Puja Geet Lyrics) को उनके असली अर्थ, सांस्कृतिक...

कोपी कोपी बोलेली छठी मैया लिरिक्स: घाट सजावट का रोंगटे खड़े करने वाला गीत!

कोपी कोपी बोलेली छठी मैया लिरिक्स (Kopi Kopi Boleli) छठ पर्व केवल आस्था का नहीं, बल्कि कठोर अनुशासन और घाटों की पवित्रता (Ritual Purity) का भी त्योहार है। जब नदी के घाटों की सफाई में ज़रा सी भी कमी रह जाती है, तो माता का क्या आदेश होता है और भक्त किस प्रकार उन्हें मनाते हैं— इस बेहद मीठे संवाद को अनु दुबे (Anu Dubey) की सुरीली आवाज़ में "कोपी कोपी बोलेली छठी मैया" गीत में पिरोया गया है। इससे पहले हमने "अरघ के बेर हो पूजन के बेर" में भगवान सूर्य की स्तुति देखी थी, "पहिले पहिल हम कईनी" में पहली बार व्रत करने वालों का समर्पण महसूस किया था और "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में समाज के हर वर्ग की पुकार सुनी थी। जहाँ "अंगना में पोखरी खनायब" में घर के आँगन को सजाया गया था, वहीं यह गीत सीधे तौर पर नदी के घाटों की सजावट और माता के प्रति सेवा-भाव से जुड़ा है। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और छठी मईया को मनाएं ...

रुला देने वाली 5 हिंदी कविताएँ: सिस्टर्स डे और रक्षाबंधन पर भाई-बहन का अटूट प्रेम

(अपडेटेड: रक्षाबंधन विशेष) "किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा" — मुनव्वर राना क्या आपने कभी सोचा है कि एक सूत के कच्चे धागे में इतना भावनात्मक वज़न कैसे हो सकता है? एक ऐसा रिश्ता जो बचपन की निर्दोष नोकझोंक से शुरू होकर, जीवन के सबसे अँधेरे मोड़ों पर एक अभेद्य ढाल बन जाता है। अगस्त का महीना आते ही हवाओं में रिश्तों की मिठास घुलने लगती है। एक तरफ जहाँ अगस्त का पहला रविवार 'सिस्टर्स डे' (Sister's Day) के रूप में बहनों के निस्वार्थ त्याग का जश्न मनाता है, वहीं सावन की पूर्णिमा रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) के पावन पर्व को लेकर आती है। साहित्य अकादेमी द्वारा संरक्षित अभिलेखों से लेकर विश्व साहित्य के आधुनिक विमर्शों तक, भाई-बहन के इस शाश्वत प्रेम को अनेक रूपों में उकेरा गया है। साहित्यशाला के इस विशेष संस्करण में, हम आपके लिए हिंदी साहित्य की 5 ऐसी कालजयी और संपूर्ण...

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