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Kahani Karn Ki Poem Lyrics By Abhi Munde (Psycho Shayar) | कहानी कर्ण की - Karna Par Hindi Kavita

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पुरानी लखनऊ के उन गलियों में - Purani Lucknow Ke Unn Galiyon Mein | Harsh Nath Jha

पुरानी लखनऊ के उन गलियों में - Purani Lucknow Ke Unn Galiyon Mein | Harsh Nath Jha पुरानी लखनऊ के उन गलियों में मुझे दुकानें बेशुमार दिखे  पहनावा, खाना, फैशन, मज़हब, मुझे खानदानी व्यापार दिखे।  उन पतली पगडंडियों पे चलकर, पुराने आशिक़ हज़ार दिखे टुंडे-कबाबी, पान-गिलौरी मुझे खानदानी व्यापार दिखे।  गुलाबी शामें, कुल्हड़ की चाय दुकानों पे हलचल, बहार दिखा दिखा लहज़ा, दिखी तहज़ीब मुझे खानदानी व्यापार दिखा।  पैसे की गमक, औ' दशकों की मेहनत वफादारी का कारोबार दिखा  पुरानी लखनऊ की उस शाम में मुझे खानदानी व्यापार दिखे।   - हर्ष नाथ झा

बिहार का परिचय | Bihar Ka Parichay Hindi Kavita - Bihar Par Hindi Kavita

बिहार का परिचय | Bihar Ka Parichay मैं उस भूमि से आता हूँ जिसने रक्त से भारत सींचा है मैं उस भूमि से आता हूँ जिसने विद्या को तम से खींचा है | मैं उस भूमि से आता हूँ जिसकी लेखनी युद्ध न हारी थीं मैं उस भूमि से आता हूँ नागार्जुन की धधक चिंगारी थी | मैं उस भूमि से आता हूँ जहाँ हर शत्रु को झुकना पड़ा मैं उस भूमि से आता हूँ जहाँ शंकर को रुकना पड़ा | मैं उस भूमि से आता हूँ जहाँ शिखा ने शौर्य को हराया था मैं उस भूमि से आता हूँ जहाँ यूनानियों को मौर्य ने हराया था | मीठे गीत सुनकर जिनके भद्रकाल भी दास बने  पाश्चात्य संस्कृति समक्ष जिनके एक तुच्छ उपहास बने | जहाँ आकर गाँधी जी भारत के महात्मा बने  जहाँ दिव्य ज्ञान प्राप्त कर बुद्ध एक परमात्मा बने | महावीर और अशोक ने जहाँ शांति का उपदेश दिया  अंदर ख़ुद जलते रहकर बस प्रेम का सन्देश दिया | नागार्जुन, मंडन मिश्र विद्यापति का अंश हूँ  मैं हर्ष नाथ, वेद व्यास और पराशर मुनि का वंश हूँ | मैं उस भूमि से आता हूँ जिसने रक्त से भारत को सींचा है  मैं उस भूमि से आता हूँ जिसने विद्या को तम से खींचा है | - हर्ष

ये जहाँ ख़ुदा का - हर्ष नाथ झा | Ye Jahaan Khuda Ka

ये जहाँ ख़ुदा का ये जहाँ ख़ुदा का कितना नायाब है न जानो तो उलझन और जानो तो ख़्वाब है कितने गुल, कितने अब्र-ए-बहार हैं कुछ को है दर्द कुछ को हक़-ए-इंतिख़ाब है | देखा यहाँ तो ग़म बेशुमार है हद है खुशी की दौलत-ए-खुमार है आरज़ू हैं सबकी दुआएँ हज़ार हैं कुछ को जलन है और कुछ को प्यार है | मुन्तज़िर हैं कईं कई ख़ुद में इज़्तिरार हैं की है उन्होंने मेहनत पर थोड़े बेकरार हैं शिद्दत से चाहा था उन्होंने मंज़िल को अपनी मशक्कत पे उन्हें पूरा ऐतबार है | इंसाफ़-ए-ख़ुदा जहाँ में क्या खूब है है छाँव यहाँ तो वहाँ पर धूप है रंगीन फूलों का है गुलदस्ता बनाया इंसाफ़-ए-ख़ुदा जहाँ में क्या खूब है | - हर्ष नाथ झा Harsh Nath Jha Harsh Nath Jha Poems Poems By Harsh Nath Jha

अभी न जाओ प्राण - Abhi Na Jao Praan | Hindi Poem For Class 8 | Class 8 Hindi Poem

अभी न जाओ प्राण - Abhi Na Jao Praan. Hindi Poem For Class 8 | Class 8 Hindi Poem अभी न जाओ  प्राण ! प्राण में प्यास शेष है, प्यास शेष है, अभी बरुनियों के  कुञ्जों मैं छितरी छाया, पलक-पात पर थिरक रही रजनी की माया, श्यामल यमुना सी पुतली के कालीदह में, अभी रहा फुफकार नाग बौखल बौराया, अभी प्राण-बंसीबट में बज रही बंसुरिया, अधरों के तट पर चुम्बन का रास शेष है। अभी न जाओ  प्राण ! प्राण में प्यास शेष है। प्यास शेष है। अभी स्पर्श से  सेज सिहर उठती है, क्षण-क्षण, गल-माला के फूल-फूल में पुलकित कम्पन, खिसक-खिसक जाता उरोज से अभी लाज-पट, अंग-अंग में अभी अनंग-तरंगित-कर्षण, केलि-भवन के तरुण दीप की रूप-शिखा पर, अभी शलभ के जलने का उल्लास शेष है। Hindi Poem For Class 8 | Class 8 Hindi Poem अभी न जाओ  प्राण! प्राण में प्यास शेष है, प्यास शेष है। अगरु-गंध में मत्त  कक्ष का कोना-कोना, सजग द्वार पर निशि-प्रहरी सुकुमार सलोना, अभी खोलने से कुनमुन करते गृह के पट देखो साबित अभी विरह का चन्द्र -खिलौना, रजत चांदनी के खुमार में अंकित अंजित- आँगन की आँखों में नीलाकाश शेष है। अभी न जाओ  प्राण! प्राण में प्यास शेष है,

Suna Hai Log Use Aankh Bhar Ke Dekhte Hain - सुना है लोग उसे आँख भर | Ahmad Faraz Ki Ghazal

Suna Hai Log Use Aankh Bhar Ke Dekhte Hain - सुना है लोग उसे आँख भर Ahmad Faraz Ki Ghazal सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं  सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं  सुना है रब्त है उस को ख़राब-हालों से  सो अपने आप को बरबाद कर के देखते हैं  सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उस की  सो हम भी उस की गली से गुज़र के देखते हैं  सुना है उस को भी है शेर ओ शाइरी से शग़फ़  सो हम भी मो'जिज़े अपने हुनर के देखते हैं  सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं  ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं  सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है  सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं  सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं  सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं  सुना है हश्र हैं उस की ग़ज़ाल सी आँखें  सुना है उस को हिरन दश्त भर के देखते हैं  सुना है रात से बढ़ कर हैं काकुलें उस की  सुना है शाम को साए गुज़र के देखते हैं  सुना है उस की सियह-चश्मगी क़यामत है  सो उस को सुरमा-फ़रोश आह भर के देखते हैं  सुना है उस के लबों से गुलाब जलते हैं  सो हम बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं  सुना है आइना तिमसाल है जबीं उस की  ज

Jab Purane Khaton Ko | जब पुराने ख़तों को...| Love Poems In Hindi | Harsh Nath Jha

जब पुराने ख़तों को... जब पुराने ख़तों को खोला था मैंने कुछ झूठें लब्ज़ों को तौला था मैंने उम्मीदों की जब थी चादर हटाई एक अरसे बाद, आँखों से बोला था मैंने | रोया नहीं, पर ख़ुद पर हँसा था देखा वहाँ गर्द-ए-वफ़ा जमा था फिर दिखा मुझे उस कागज़ पर वादा जिस कागज़ पर मुझे सदा गुमाँ था | क्यों उन खतों में हैं डूबने की चाहत ? मिलती क्यों नहीं कुछ ज़ख्मों से राहत ? क्यों फिर खड़ा हूँ उसी मोड़ पर मैं जहाँ पर हुआ था कल ही मैं आहत | दिया था दोस्ती का उसने सहारा मैं बस जहाँ में उससे था हारा माँगी हर माफ़ी जो उसको न खोऊँ राह खोकर राही है होता आवारा | उसका भी हक़ था उन खतों पर भी उतना मैंने उसको दिल से चाहा था जितना मुझे देख ख़ुदा भी तब रोया होगा पूछ लो उसी से मैं रोया था कितना | क्यों उन खतों की स्याही फिर फैली ? क्यों उन्हें किताबों में मैं हर बार छिपाऊँ ? क्यों न उनको मैं जला फिर से पाया  ? क्यों उन्हें ख़ुद को मैं हर रोज़ दिखाऊँ ? तब तरस गईं थीं आँखें मेरी पर पहली चिट्ठी तेरी आयी नहीं ' खैरियत है सब ' बस ये पूछ लेते बस तेरी ये बात मुझे भायी नहीं बस तेरी ये बात मुझे भायी नहीं | - हर्ष नाथ झा Love Poem

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महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली हिंदी कविता - Mahabharata Poem On Arjuna

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता || || Mahabharata Poem On Arjuna ||   तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास लगे | कुरुक्षेत्र का महासमर एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ शंखनाद जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका मर्दन शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को मीच जड़ा, गाण्डिव पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की तासीर यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||    सुनी बात माधव की तो अर्जुन का चेहरा उतर गया, एक धनुर्धारी की विद्या मानो चूहा कुतर गया | बोले पार्थ सुनो कान्हा - जितने

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ | Mahabharata Par Kavita

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ  || Mahabharata Par Kavita ||   तलवार, धनुष और पैदल सैनिक   कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की  प्रतिक्षा  में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखन  में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन   शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव   पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||    सुनी बात माधव की तो अर्जुन का चेहरा उतर गया, एक  धनुर्धारी  की विद्या मानो चूहा कुतर गया | बोले पार्थ सुनो कान्हा - जितने ये सम्मुख खड़े हुए है, हम तो इन से सीख-स

सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है - Sach Hai Vipatti Jab Aati Hai

  सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है रामधारी सिंह "दिनकर" हिंदी कविता दिनकर की हिंदी कविता   सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं। मुख से न कभी उफ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग-निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को। है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में ? खम ठोंक ठेलता है जब नर , पर्वत के जाते पाँव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है । गुण बड़े एक से एक प्रखर, हैं छिपे मानवों के भीतर, मेंहदी में जैसे लाली हो, वर्तिका-बीच उजियाली हो। बत्ती जो नहीं जलाता है, रोशनी नहीं वह पाता है। पीसा जाता जब इक्षु-दण्ड , झरती रस की धारा अखण्ड , मेंहदी जब सहती है प्रहार, बनती ललनाओं का सिंगार। जब फूल पिरोये जाते हैं, हम उनको गले लगाते हैं। वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ ? अतुलित यश क्रेता कौन हुआ? नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ ? जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर ना

रानी पद्मिनी और गोरा, बादल पर नरेंद्र मिश्र की रुला देने वाली कविता | Gora Badal Poem

पद्मिनी गोरा बादल नरेंद्र मिश्र ( Narendra Mishra ) रानी पद्मिनी और गोरा, बादल पर नरेंद्र मिश्र की रुला देने वाली कविता

अग्निपथ (Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan

अग्निपथ - हरिवंश राय बच्चन  Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ । Agneepath Poem By Harivansh Rai Bachchan Agneepath Poem In Hinglish Vriksh hon bhale khade, hon ghane hon bade, Ek patra chhah bhi maang mat, maang mat, maang mat, Agnipath, Agnipath, Agnipath. Tu na thakega kabhi tu na thamega kabhi tu na mudega kabhi, Kar shapath, Kar shapath, Kar shapath, Agnipath, Agnipath, Agnipath. अग्निपथ(Agneepath) - हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan Ye Mahaan Drishya hai, Chal raha Manushya hai, Ashru, swed,

Kahani Karn Ki Poem Lyrics By Abhi Munde (Psycho Shayar) | कहानी कर्ण की - Karna Par Hindi Kavita

Kahani Karn Ki Poem Lyrics By Psycho Shayar   कहानी कर्ण की - Karna Par Hindi Kavita पांडवों  को तुम रखो, मैं  कौरवों की भी ड़ से , तिलक-शिकस्त के बीच में जो टूटे ना वो रीड़ मैं | सूरज का अंश हो के फिर भी हूँ अछूत मैं , आर्यवर्त को जीत ले ऐसा हूँ सूत पूत मैं |   कुंती पुत्र हूँ, मगर न हूँ उसी को प्रिय मैं, इंद्र मांगे भीख जिससे ऐसा हूँ क्षत्रिय मैं ||   कुंती पुत्र हूँ, मगर न हूँ उसी को प्रिय मैं, इंद्र मांगे भीख जिससे ऐसा हूँ क्षत्रिय मैं ||   आओ मैं बताऊँ महाभारत के सारे पात्र ये, भोले की सारी लीला थी किशन के हाथ सूत्र थे | बलशाली बताया जिसे सारे राजपुत्र थे, काबिल दिखाया बस लोगों को ऊँची गोत्र के ||   सोने को पिघलाकर डाला शोन तेरे कंठ में , नीची जाती हो के किया वेद का पठंतु ने | यही था गुनाह तेरा, तू सारथी का अंश था, तो क्यों छिपे मेरे पीछे, मैं भी उसी का वंश था ?   यही था गुनाह तेरा, तू सारथी का अंश था, तो क्यों छिपे मेरे पीछे, मैं भी उसी का वंश था ? ऊँच-नीच की ये जड़ वो अहंकारी द्रोण था, वीरों की उसकी सूची में, अर्जुन के सिवा कौन था ? माना था माधव को वीर, तो क्यों डरा एकल

Hindu Tan Man, Hindu Jeevan | हिंदु तन मन, हिन्दु जीवन, रग-रग हिन्दु मेरा परिचय

 Hindu Tan Man, Hindu Jeevan हिंदु तन मन, हिन्दु जीवन, रग-रग हिन्दु मेरा परिचय Atal  Bihari  Vajpayee  Hindi Poems अटल बिहारी वाजपेयी  की  हिंदी कवितायेँ  Hindu Tan Man, Hindu Jeevan हिंदु तन-मन, हिन्दु जीवन , रग-रग हिन्दु मेरा परिचय ॥ मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार क्षार। डमरू की वह प्रलयध्वनि हूं जिसमे नचता भीषण संहार। रणचंडी की अतृप्त प्यास , मैं दुर्गा का उन्मत्त हास । मैं यम की प्रलयंकर पुकार , जलते मरघट का धुँआधार। फिर अंतरतम की ज्वाला से, जगती मे आग लगा दूं मैं। यदि धधक उठे जल, थल, अंबर, जड़, चेतन तो कैसा विस्मय ? हिन्दु तन मन, हिन्दु जीवन, रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥ मैं आदि पुरुष, निर्भयता का वरदान लिये आया भू पर। पय पीकर सब मरते आए, मैं अमर हुआ लो विष पीकर। अधरों की प्यास बुझाई है, पी कर मैने वह आग प्रखर । हो जाती दुनिया भस्मसात , जिसको पल भर में ही छूकर। भय से व्याकुल फिर दुनिया ने प्रारंभ किया मेरा पूजन। मैं नर, नारायण, नीलकण्ठ बन गया न इसमे कुछ संशय । हिन्दु तन मन, हिन्दु जीवन, रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥ Hindu Tan Man, Hindu Jeevan | हिंदु तन मन, हिन्दु जीवन, रग-

कृष्ण की चेतावनी - KRISHNA KI CHETAWANI | रश्मिरथी - रामधारी सिंह " दिनकर " | Mahabharata Poems |

|| कृष्ण की चेतावनी - KRISHNA KI CHETAWANI || || रश्मिरथी - रामधारी सिंह " दिनकर " || | MAHABHARATA POEMS | | MAHABHARATA POEMS IN HINDI | Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी   वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप - घाम , पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर । सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को, दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को, भगवान हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी दो न्याय, अगर तो, आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम , रखों अपनी धरती तमाम | हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे !! दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका, उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य , साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है ||   जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है || Krishna Ki Chetawani - कृष्ण की चेतावनी हरि

सादगी तो हमारी जरा देखिये | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics | Nusrat Fateh Ali Khan Sahab

Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics सादगी तो हमारी जरा देखिये   सादगी तो हमारी जरा देखिये,  एतबार आपके वादे पे कर लिया | मस्ती में इक हसीं को ख़ुदा कह गए हैं हम,  जो कुछ भी कह गए वज़ा कह गए हैं हम  || बारस्तगी तो देखो हमारे खुलूश कि,  किस सादगी से तुमको ख़ुदा कह गए हैं हम ||   किस शौक किस तमन्ना किस दर्ज़ा सादगी से,  हम करते हैं आपकी शिकायत आपही से || तेरे अताब के रूदाद हो गए हैं हम,  बड़े खलूस से बर्बाद हो गए हैं हम ||

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi Mahabharata Poem On Arjuna अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna तलवार,धनुष और पैदल सैनिक  कुरुक्षेत्र मे खड़े हुये, रक्त पिपासू महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुये | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महासमर की  प्रतिक्षा  में सारे टाँक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखने में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पाञ्चजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सबका गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन  शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव  पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||   अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna सुनी बात माधव की तो अर्जु