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Sampurna "Kahani Karna Ki" Poem Lyrics in Hindi & English – Abhi Munde (Psycho Shayar)

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde
(Psycho Shayar)

"Kahani Karn Ki" (popularly known as Sampurna) is a viral spoken word performance that reimagines the Mahabharata from the perspective of the tragic hero, Suryaputra Karna. Written by Abhi Munde (Psycho Shayar), this poem questions the definitions of Dharma and righteousness.

ज़रूर पढ़ें: इसी महाभारत युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया था। पढ़ें रामधारी सिंह दिनकर की वो ओजस्वी कविता:
➤ कृष्ण की चेतावनी: रश्मिरथी सर्ग 3 (Lyrics & Meaning)

Abhi Munde performing Sampurna Karna Poem (Psycho Shayar) live on stage
Abhi Munde (Psycho Shayar) performing the viral poem "Sampurna"

कहानी कर्ण की (Sampurna) - Full Lyrics

पांडवों को तुम रखो, मैं कौरवों की भीड़ से,
तिलक-शिकस्त के बीच में जो टूटे ना वो रीड़ मैं |
सूरज का अंश हो के फिर भी हूँ अछूत मैं,
आर्यवर्त को जीत ले ऐसा हूँ सूत पूत मैं |

कुंती पुत्र हूँ, मगर न हूँ उसी को प्रिय मैं,
इंद्र मांगे भीख जिससे ऐसा हूँ क्षत्रिय मैं ||

आओ मैं बताऊँ महाभारत के सारे पात्र ये,
भोले की सारी लीला थी किशन के हाथ सूत्र थे |
बलशाली बताया जिसे सारे राजपुत्र थे,
काबिल दिखाया बस लोगों को ऊँची गोत्र के ||

सोने को पिघलाकर डाला शोन तेरे कंठ में,
नीची जाती हो के किया वेद का पठंतु ने |
यही था गुनाह तेरा, तू सारथी का अंश था,
तो क्यों छिपे मेरे पीछे, मैं भी उसी का वंश था ?

ऊँच-नीच की ये जड़ वो अहंकारी द्रोण था,
वीरों की उसकी सूची में, अर्जुन के सिवा कौन था ?
माना था माधव को वीर, तो क्यों डरा एकलव्य से,
माँग के अंगूठा क्यों जताया पार्थ भव्य है ?

रथ पे सजाया जिसने कृष्ण-हनुमान को,
योद्धाओं के युद्ध में लड़ाया भगवान को |
नंदलाल तेरी ढाल, पीछे अंजनेय थे,
नियति कठोर थी जो दोनों वंदनीय थे ||

ऊँचे-ऊँचे लोगों में मैं ठहरा छोटी ज़ात का,
खुद से ही अंजान मैं, ना घर का ना घाट का |
सोने सा था तन मेरा, अभेद्य मेरा अंग था,
कर्ण का कुंडल चमका लाल नीले रंग का ||

इतिहास साक्ष्य है, योद्धा मैं निपुण था,
बस एक मजबूरी थी, मैं वचनों का शौकीन था |

Mahabharata poetry book Rashmirathi - Inspiration for Karna Poems
"पांडवों को तुम रखो"
"अगर ना दिया होता वचन, वो मैंने कुंती माता को,
पांडवों के खून से, मैं धोता अपने हाथ को ||"

साम, दाम, दंड, भेद सूत्र मेरे नाम का,
गंगा माँ का लाडला मैं खामखां बदनाम था |
कौरवों से हो के भी, कोई कर्ण को ना भूलेगा,
जाना जिसने मेरा दुख वो कर्ण-कर्ण बोलेगा ||

भास्कर पिता मेरे, हर किरण मेरा स्वर्ण है,
वन में अशोक मैं, तू तो खाली पर्ण है |
कुरुक्षेत्र की उस मिट्टी में, मेरा भी लहू जीर्ण है,
देख छान के उस मिट्टी को कण-कण में कर्ण लींन है ||


Meaning: "Pandavo Ko Tum Rakho"

The most viral stanza of this poem, "Pandavo ko tum rakho, Main Kauravo ki bheed se," reflects the pivotal moment in the Mahabharata where Kunti meets Karna to reveal his true birthright.

Here, Psycho Shayar (Abhi Munde) captures Karna's refusal to abandon his friend Duryodhana. Even though he knows the Kauravas may lose ("Tilak-Shikast"), he chooses to be their "Reed" (Spine/Support). He highlights the hypocrisy of society—he is a "Sut-Putra" (son of a charioteer) to them, despite being a "Surya-Ansh" (part of the Sun God). This section resonates deeply with the youth due to its themes of loyalty and fighting against discrimination.

About the Poet: Psycho Shayar (Abhi Munde)

Abhi Munde, widely known by his stage name Psycho Shayar, is an Indian spoken word artist. His aggressive yet emotional delivery style has made "Sampurna" a cult classic in Hindi poetry circles.

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Frequently Asked Questions

Who wrote the poem Kahani Karn Ki?

The poem was written and performed by Abhi Munde, popularly known as Psycho Shayar.

Is this the "Pandavo ko tum rakho" poem?

Yes, this poem (Sampurna) is famous for the viral line "Pandavo ko tum rakho, main Kauravo ki bheed se."

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