सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

'वही त्रिलोचन है' कविता का भावार्थ | फकीरी और स्वाभिमान का आत्मकथ्य (पूर्ण विश्लेषण)

औरतें कविता: रमाशंकर यादव विद्रोही | कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से

औरतें कविता – रमाशंकर यादव विद्रोही | कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से पूर्ण कविता और विश्लेषण

🔥 क्या सचमुच कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से मृत्यु चुनी थी — या इतिहास ने उनके बयान बदल दिए?

रमाशंकर यादव विद्रोही की कविता ‘औरतें’ (Auratein Kavita), जिसकी शुरुआत "कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से" जैसी मारक पंक्तियों से होती है, हिंदी साहित्य की सबसे सशक्त रचनाओं में गिनी जाती है। यह मात्र एक कविता नहीं है, बल्कि हिंदी के आधुनिक स्त्री-विमर्श में प्रतिरोध-काव्य (resistance poetry) की केंद्रीय आवाज़ मानी जाती है।

साहित्यिक पाठकों द्वारा अक्सर auratein poem खोजते हुए इस रचना तक पहुँचना यह साबित करता है कि पितृसत्तात्मक इतिहास, धर्म और न्याय व्यवस्था के खिलाफ विद्रोही का यह खुला ऐलान आज भी कितना प्रासंगिक है। रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हिंदी के वे जनकवि थे, जिनकी कविताएँ सीधे सामाजिक अन्याय और सत्ता-संरचनाओं को चुनौती देती हैं।

औरतें कविता – रमाशंकर यादव विद्रोही (Auratein Kavita by Vidrohi)
रमाशंकर यादव 'विद्रोही' की कालजयी रचना 'औरतें'

📖 ज़रूर पढ़ें: विद्रोही जी की एक और तीखी और क्रांतिकारी कविता 'धर्म' (मेरे गाँव में लोहा लगते ही)। यहाँ पढ़ें »

औरतें कविता का पूर्ण पाठ (Auratein Poem Lyrics)

कुछ औरतों ने
अपनी इच्छा से
कुएँ में कूदकर जान दी थी,
ऐसा पुलिस के रिकार्डों में दर्ज है।

और कुछ औरतें
चिता में जलकर मरी थीं,
ऐसा धर्म की किताबों में लिखा है।

मैं कवि हूँ,
कर्ता हूँ,
क्या जल्दी है,
मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित,
दोनों को एक ही साथ
औरतों की अदालत में तलब कर दूँगा,
और बीच की सारी अदालतों को
मंसूख कर दूँगा।

मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूँगा,
जिन्हें श्रीमानों ने
औरतों और बच्चों के ख़िलाफ़ पेश किया है।

मैं उन डिक्रियों को निरस्त कर दूँगा,
जिन्हें लेकर फ़ौजें और तुलबा चलते हैं।
मैं उन वसीयतों को ख़ारिज कर दूँगा,
जिन्हें दुर्बल ने भुजबल के नाम की होंगी।

मैं उन औरतों को
जो कुएँ में कूदकर या चिता में जलकर मरी हैं,
फिर से ज़िंदा करूँगा,
और उनके बयानात को
दुबारा क़लमबंद करूँगा,
कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया!
कि कहीं कुछ बाक़ी तो नहीं रह गया!
कि कहीं कोई भूल तो नहीं हुई!

क्योंकि मैं उन औरतों के बारे में जानता हूँ
जो अपने एक बित्ते के आँगन में
अपनी सात बित्ते की देह को
ता-ज़िंदगी समोए रही और
कभी भूलकर बाहर की तरफ़ झाँका भी नहीं।

और जब वह बाहर निकली तो
औरत नहीं, उसकी लाश निकली।
जो खुले में पसर गई है,
माँ मेदिनी की तरह।

एक औरत की लाश धरती माता
की तरह होती है दोस्तो!
जो खुले में फैल जाती है,
थानों से लेकर अदालतों तक।

मैं देख रहा हूँ कि
जुल्म के सारे सबूतों को मिटाया जा रहा है।
चंदन चर्चित मस्तक को उठाए हुए पुरोहित,
और तमग़ों से लैस सीनों को फुलाए हुए सैनिक,
महाराज की जय बोल रहे हैं।

वे महाराज जो मर चुके हैं,
और महारानियाँ सती होने की तैयारियाँ कर रही हैं।
और जब महारानियाँ नहीं रहेंगी,
तो नौकरानियाँ क्या करेंगी?
इसलिए वे भी तैयारियाँ कर रही हैं।

मुझे महारानियों से ज़्यादा चिंता
नौकरानियों की होती है,
जिनके पति ज़िंदा हैं और
बेचारे रो रहे हैं।

कितना ख़राब लगता है एक औरत को
अपने रोते हुए पति को छोड़कर मरना,
जबकि मर्दों को
रोती हुई औरतों को मारना भी
ख़राब नहीं लगता।

औरतें रोती जाती हैं,
मरद मारते जाते हैं।
औरतें और ज़ोर से रोती हैं,
मरद और ज़ोर से मारते हैं।
औरतें ख़ूब ज़ोर से रोती हैं,
मरद इतने ज़ोर से मारते हैं कि
वे मर जाती हैं।

इतिहास में वह पहली औरत कौन थी,
जिसे सबसे पहले जलाया गया,
मैं नहीं जानता,
लेकिन जो भी रही होगी,
मेरी माँ रही होगी।

लेकिन मेरी चिंता यह है कि
भविष्य में वह आख़िरी औरत कौन होगी,
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा,
मैं नहीं जानता,
लेकिन जो भी होगी
मेरी बेटी होगी,
और मैं ये नहीं होने दूँगा।

- रमाशंकर यादव 'विद्रोही'

कविता का भावार्थ और स्त्री-विमर्श (Literary Analysis)

विद्रोही की "Auratein Kavita" महज़ एक स्त्री-करुणा का गीत नहीं है, बल्कि यह शोषितों की अदालत है। कविता की शुरुआती पंक्तियाँ—"कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से..."—पुलिस के रिकॉर्ड और धर्मग्रंथों पर गहरा व्यंग्य करती हैं। विद्रोही यहाँ स्त्री-मृत्यु को निजी घटना नहीं, बल्कि संस्थागत हिंसा का दस्तावेज़ बनाते हैं। पुलिस, धर्म और न्याय—तीनों पर एक साथ प्रश्न उठता है।

कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से - औरतें कविता का दृश्य (Auratein Poem visual)
"कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से..." - इतिहास और व्यवस्था पर विद्रोही का व्यंग्य।

घरेलू पिंजरे और इतिहास का सच

कवि उस भारतीय घरेलू व्यवस्था की भयावह तस्वीर खींचता है जहाँ औरत अपनी "सात बित्ते की देह" को "एक बित्ते के आँगन" में जीवन भर समेटे रखती है। जहाँ पारंपरिक कविताओं में, जैसे महादेवी वर्मा की बया हमारी चिड़िया रानी में आँगन को एक सुरक्षित घोंसले के रूप में देखा गया, वहीं विद्रोही इसे एक आजीवन कारावास मानते हैं, जहाँ से औरत केवल एक लाश बनकर ही बाहर निकलती है। यह घरेलू स्थान के भीतर छिपी उस घुटन को उजागर करता है जिसे समाज सामान्य जीवन मानकर स्वीकार करता रहा है।

स्त्री विमर्श और प्रतिरोध कविता - रमाशंकर यादव विद्रोही (Women Empowerment Poem in Hindi)
'औरतें रोती जाती हैं, मरद मारते जाते हैं' - घरेलू हिंसा का विचलित करने वाला सच।

पितृसत्तात्मक हिंसा का दुष्चक्र

कविता का सबसे विचलित करने वाला हिस्सा वह है जहाँ कवि लिखता है: "औरतें रोती जाती हैं, मरद मारते जाते हैं"। यह हिंसा का वह नंगा सच है जिसे समाज अक्सर ढंकने की कोशिश करता है। एक औरत की लाश को विद्रोही "माँ मेदिनी" (धरती) के समान मानते हैं, जो थानों से लेकर अदालतों तक पसरी हुई है, लेकिन व्यवस्था उसके न्याय के सबूत मिटाने में लगी है।

निष्कर्ष: विद्रोही का ऐतिहासिक संकल्प

कवि इतिहास में जलाई गई पहली औरत को अपनी माँ और भविष्य में जलाई जाने वाली आखिरी औरत को अपनी बेटी मानता है। और अंत में वह एक क्रांतिकारी घोषणा करता है: "और मैं ये नहीं होने दूँगा।"

हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श की कविता - और मैं ये नहीं होने दूँगा (Resistance Poetry in Hindi)
"लेकिन जो भी होगी मेरी बेटी होगी, और मैं ये नहीं होने दूँगा।" - एक कवि का संकल्प।

आज ‘औरतें कविता’ हिंदी साहित्य में स्त्री-विमर्श की सबसे चर्चित रचनाओं में मानी जाती है। रमाशंकर यादव विद्रोही की यह कविता केवल प्रतिरोध नहीं, बल्कि सामाजिक स्मृति की पुनर्स्थापना है। यह एक ऐसी रचना है जो women empowerment poems की श्रेणी में मील का पत्थर साबित होती है।


विद्रोही जी की आवाज़ में 'एक औरत की जली हुई लाश'

रमाशंकर यादव विद्रोही की आवाज़ में स्त्री-विमर्श सुनना उनकी कविता के राजनीतिक ताप को और गहराई से समझने में मदद करता है। नीचे उनकी एक और अत्यधिक प्रसिद्ध कविता "एक औरत की जली हुई लाश" का वीडियो देखें:


Auratein Poem - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

औरतें कविता किसने लिखी है?

औरतें कविता हिंदी के प्रसिद्ध जनकवि रमाशंकर यादव 'विद्रोही' द्वारा लिखी गई है।

"कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से" किस कविता की पंक्ति है?

यह रमाशंकर यादव 'विद्रोही' जी की बहुचर्चित कविता 'औरतें' की शुरुआती पंक्तियाँ हैं।

विद्रोही जी की कविता 'औरतें' का मुख्य विषय क्या है?

इस कविता का मुख्य विषय स्त्री उत्पीड़न, पितृसत्तात्मक हिंसा और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिरोध है।

📢 Sirf Padhein Nahi, Likhein Bhi!
Article, Kahani, Vichar, ya Kavita — Hindi, English ya Maithili mein. Apne shabdon ko Sahityashala par pehchan dein.

Submit Your Content →

Famous Poems

Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning Explained

Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning Explained Discover the Soulful Charkha Lyrics in English If you've been searching for Charkha lyrics in English that capture the depth of Punjabi folk emotion, look no further. In this blog, we take you on a journey through the original lyrics, their Hinglish transliteration, Hindi translation, and poetic English translation. We also dive into the symbolism and meaning behind this heart-touching song. Whether you're a lover of Punjabi folk, a poetry enthusiast, or simply curious about the emotions behind the spinning wheel, this complete guide to the "Charkha" song will deepen your understanding. Original Punjabi Lyrics of Charkha Ve mahiya tere vekhan nu, Chuk charkha gali de vich panwa, Ve loka paane main kat di, Tang teriya yaad de panwa. Charkhe di oo kar de ole, Yaad teri da tumba bole. Ve nimma nimma geet ched ke, Tang kath di hullare panwa. Vasan ni de rahe saure peke, Mainu tere pain pulekhe. ...

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) | Karna Poem

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) "Kahani Karn Ki" (popularly known as Sampurna ) is a viral spoken word performance that reimagines the Mahabharata from the perspective of the tragic hero, Suryaputra Karna . Written by Abhi Munde (Psycho Shayar), this poem questions the definitions of Dharma and righteousness. ज़रूर पढ़ें: इसी महाभारत युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया था। पढ़ें रामधारी सिंह दिनकर की वो ओजस्वी कविता: ➤ कृष्ण की चेतावनी: रश्मिरथी सर्ग 3 (Lyrics & Meaning) Quick Links: Lyrics • Meaning • Poet Bio • Watch Video • FAQ Abhi Munde (Psycho Shayar) performing the viral poem "Sampurna" कहानी कर्ण की (Sampurna) - Full Lyrics पांडवों को तुम रखो, मैं कौरवों ...

Do Naavon Par Pair Pasare Aise Kaise Lyrics & Meaning - दो नावों पर पाँव पसारे ऐसे कैसे | Asad Akbarabadi

Do Naavon Par Pair Pasare Aise Kaise: The Viral Heartbreak Anthem By Asad Akbarabadi | Unlocking the Meaning of Emotional Duality ⚠️ The Truth Behind the Idiom Have you ever felt the crushing weight of being "just an option"? The phrase "Do Naavon Par Pair Pasare" is more than just a muhavara (idiom); it is a psychological indictment of modern love. It describes the exhausting, impossible act of balancing two conflicting lives, leaving the heart torn at the seams . हिंदी मूल (Full Lyrics) दो नावों पर पाँव पसारे ऐसे कैसे वो भी प्यारा हम भी प्यारे ऐसे कैसे सूरज बोला बिन मेरे दुनिया अंधी है हँस कर बोले चाँद सितारे ऐसे कैसे तेरे हिस्से की ख़ुशियों से बैर नहीं पर मेरे हक़ में सिर्फ ख़सारे ऐसे कैसे गालों पर बोसा दे कर जब चली गई वो कहते रह गए होंठ बिचारे ऐसे कैसे — असद अकबराबादी (Asad Akbarabadi) ...

50+ होली पर कविताएं | Holi Par Hasya Kavita & Best Hindi Poems Collection

होली पर कविता - Holi Par Hindi Poems होली रंगों, उमंगों और प्रेम का त्यौहार है। साहित्यशाला पर प्रस्तुत है हिंदी साहित्य की चुनिंदा और बेहतरीन होली कविताओं का विशाल संग्रह। विषय सूची (Table of Contents) 1. होली पर हास्य कविताएं (Funny Poems) 2. बच्चों के लिए होली कविता (Kids Poems) 3. होली की सर्वश्रेष्ठ कविताएं (Best Collection) 4. पौराणिक और पारंपरिक होली (Ram-Sita & Braj) 5. सामाजिक संदेश और देशभक्ति (Social Message) 6. होली का महत्व और कहानी (Essay & Story) 1. होली पर हास्य कविताएं (Holi Funny Poems) होली का मज़ा हंसी-ठिठोली के बिना अधूरा है। पेश हैं कुछ गुदगुदाने वाली हास्य कविताएं। बैगन जी की होली - कृष्ण कुमार यादव टेढ़े-मेढ़े बैगन जी होली पर ससुराल चले बीच सड़क पर लुढ़क-लुढ़क कैसी ढुलमुल चाल चले...