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Maa Par Hindi Kavita: जननी है | Mother’s Day Poems in Hindi (Emotional & Inspiring)

Maa Par Hindi Kavita | Mother's Day Poems in Hindi | जननी है

माँ — ममता, त्याग और हर जीवन की प्रथम प्रेरणा। इस संग्रह में माँ पर बेहतरीन हिंदी कविताएँ और उद्धरण दिए गए हैं।

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Maa Par Hindi Kavita — Mother's Day Poems in Hindi | जननी है कविता का चित्र | माँ और बच्चे का प्रेम दर्शाता चित्र
चित्र: Maa Par Hindi Kavita — जननी है | Mother's Day Poems in Hindi | माँ और बच्चे के प्रेम का प्रतीकात्मक चित्र।

परिचय — माँ की ममता और प्रेरणा

माँ — वह अनमोल शक्ति जो हर जीवन को संवारती है। यह कविता संग्रह माँ, जननी और मातृभूमि के प्रति प्रेम, त्याग और करुणा को समर्पित है।

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यह लेख माँ-सम्बंधी कविताओं का एक संकलन है — पढ़ें, साझा करें और अपने प्रियजनों के साथ बाँटें।

माँ पर कविता

मैय्या तु ईश्वर का रूप अनूप

हमारी भाषा हिंदी ,जननी है,

हे मैय्या तु ईश्वर का रूप अनूप
हो गर्मी में छाँव सर्दी में धूप
ममता दया प्रेम करुणा है खूब
यही है जननी तेरा वास्तविक स्वरुप

जननी है तु जग में सबसे प्यारी
गाये तेरी महिमा दुनिया सारी
तेरे ही आँचल की छाँव में माता
बचपन बनता है यौवन
करना संतान को सुख समर्पित
होता है तेरा जीवन

हिमालय जैसा गौरव तेरा
तु ही लाये नित नया सवेरा
हृदय में तुम्हारे प्रेम की नदियाँ
अविरल बह रही बीती सदियाँ

कभी ना हटी ममता में पीछे
ईश्वर का दर्जा भी तेरे नीचे
क्योकि ईश्वर को भी तुने जन्म दिया
तेरे सीने से लग स्तनपान किया

हर युग में तेरी महिमा निराली
संतान की रक्षा के खातिर
बनी तु गौरी, बनी तु काली
बड़ी अलौकिक बड़ी ही न्यारी
तेरी छवि सदा रही रब से प्यारी

तेरा हर देवी में वास है
देव भी करे तुझ पे विश्वास है
करता रहेगा तेरा वंदन
तब तक यह संसार
जब तक प्रेम इस जहां में
और जीवित है संसार

महिला और पुत्र — माँ की ममता | Maa Par Hindi Kavita फोटो
माँ की ममता — जीवन की पहली प्रेरणा। (Image credit: Unsplash / Akshat Vats)

जनक-जननी और जाया

जन्म लिया जब धरा पे तुमने, जननी ने जग दिखलाया

ऊँगली थाम नेह से तुमको जनक ने चलना सिखलाया

वे भूखे पेट सोए होंगे, पेट तुम्हारा भरने को

रात-रात भर जागे होंगे, सपने पूरे करने को।

देव तुल्य हैं चरणों में उनके, सचमुच स्वर्ग समाया

ऊँगली थाम नेह से तुमको जनक ने चलना सिखलाया।

कड़वे शब्दों के न करना, दिल पर उनके वार कभी

और न करना जीवन में है, उन पर अत्याचार कभी।

क्योंकि वे तो सदा चाहते, सुखी रहे उनका जाया

ऊँगली थाम नेह से तुमको जनक ने चलना सिखलाया।

यदि बन श्रवण माँ बाप की सेवा तुम कर जाओगे

ईश्वर की भी कृपा रहेगी, सुखमय जीवन पाओगे।

रही सदा है मात-पिता की, शुभ आशीषों की छाया

ऊँगली थाम नेह से तुमको जनक ने चलना सिखलाया।

जननी जन्मभूमि — उद्धरण

मैं माँ को बहुत प्यार करता था
कभी अपने मुँह से नहीं कहा मैंने।
टिफ़िन के पैसे बचाकर
कभी-कभी ख़रीद लाता था सन्तरे
लेटे-लेटे माँ की आँखें डबडबा जाती थीं...
माँ और परिवार — माँ पर हिंदी कविता | Maa Par Hindi Kavita
मातृछाया — बचपन से यौवन तक। (Image credit: Unsplash)

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