सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

आधुनिक युग में बौद्ध धर्म और ब्राह्मणवाद: पुनर्विचार और पुनर्निर्माण | Yogendra Tripathi

याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल: नागार्जुन की प्रेम और विरह की कविता | Yaad Aata Hai Tumhara Sindoor Tilkit Bhaal with Meaning

याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल: नागार्जुन की प्रेम और विरह की कविता | Yaad Aata Hai Tumhara Sindoor Tilkit Bhaal with Meaning

याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल नागार्जुन की प्रेम और विरह की कविता  Yaad Aata Hai Tumhara Sindoor Tilkit Bhaal with Meaning

याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल: नागार्जुन की कविता का गहन विश्लेषण और भावार्थ

जब भी famous Indian poets की बात होती है, तो जनकवि नागार्जुन का नाम सम्मान से लिया जाता है। उनकी रचनाएं अक्सर online Hindi literature courses का हिस्सा होती हैं क्योंकि वे सीधे दिल से निकलकर आम आदमी की कहानी कहती हैं। उनकी सबसे मार्मिक कविताओं में से एक है "याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल", जो प्रेम, विरह और अपनी जड़ों से दूर एक प्रवासी के दर्द को दर्शाती है।

यह कविता सिर्फ एक याद नहीं, बल्कि भावनाओं का एक पूरा संसार है। यदि आप Yaad Aata Hai Tumhara Sindoor Tilkit Bhaal meaning या इसकी व्याख्या खोज रहे हैं, तो यह विश्लेषण आपके लिए है।

कविता: याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल

कवि: नागार्जुन 

घोर निर्जन में परिस्थिति ने दिया है डाल!

याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल!


कौन है वह व्यक्ति जिसको चाहिए न समाज?

कौन है वह एक जिसको नहीं पड़ता दूसरे से काज?


चाहिए किसको नहीं सहयोग?

चाहिए किसको नहीं सहवास?


कौन चाहेगा कि उसका शून्य में टकराए यह उच्छ्वास?

हो गया हूँ मैं नहीं पाषाण


जिसको डाल दे कोई कहीं भी

करेगा वह कभी कुछ न विरोध


करेगा वह कुछ नहीं अनुरोध

वेदना ही नहीं उसके पास


उठेगा फिर कहाँ से निःश्वास

मैं न साधारण, सचेतन जंतु


यहाँ हाँ-ना किंतु और परंतु

यहाँ हर्ष-विषाद-चिंता-क्रोध


यहाँ है सुख-दुख का अवबोध

यहाँ है प्रत्यक्ष औ’ अनुमान


यहाँ स्मृति-विस्मृति सभी के स्थान

तभी तो तुम याद आतीं प्राण,


हो गया हूँ मैं नहीं पाषाण!

याद आते स्वजन


जिनकी स्नेह से भींगी अमृतमय आँख

स्मृति-विहंगम को कभी थकने न देंगी पाँख


याद आता मुझे अपना वह ‘तरउनी’ ग्राम

याद आतीं लीचियाँ, वे आम


याद आते मुझे मिथिला के रुचिर भू-भाग

याद आते धान


याद आते कमल, कुमुदिनि और तालमखान

याद आते शस्य-श्यामल जनपदों के


रूप-गुण-अनुसार ही रखे गए वे नाम

याद आते वेणुवन के नीलिमा के निलय अति अभिराम


धन्य वे जिनके मृदुलतम अंक

हुए थे मेरे लिए पर्यंक


धन्य वे जिनकी उपज के भाग

अन्न-पानी और भाजी-साग


फूल-फल औ’ कंद-मूल अनेक विध मधु-मांस

विपुल उनका ऋण, सधा सकता न मैं दशमांश


ओह, यद्यपि पड़ गया हूँ दूर उनसे आज

हृदय से पर आ रही आवाज़


धन्य वे जन, वही धन्य समाज

यहाँ भी तो हूँ न मैं असहाय


यहाँ भी हैं व्यक्ति औ’ समुदाय

किंतु जीवन भर रहूँ फिर भी प्रवासी ही कहेंगे हाय!


मरूँगा तो चिता पर दो फूल देंगे डाल

समय चलता जाएगा निर्बाध अपनी चाल


सुनोगी तुम तो उठेगी हूक

मैं रहूँगा सामने (तस्वीर में) पर मूक


सांध्य नभ में पश्चिमांत-समान

लालिमा का जब करुण आख्यान


सुना करता हूँ, सुमुखि, उस काल

याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल।

जनकवि नागार्जुन - Yaad Aata Hai Tumhara Sindoor Tilkit Bhaal कविता के रचयिता (People's Poet Nagarjun - Author of the poem "Yaad Aata Hai Tumhara Sindoor Tilkit Bhaal")

कविता का भावार्थ और व्याख्या (Detailed Analysis)

यह रचना separation poetry का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चलिए इस कविता के गहरे अर्थ और भावों को समझते हैं, जो इसे best Hindi poetry की सूची में स्थान दिलाते हैं।

प्रेम और स्मृति का प्रतीक: "सिंदूर तिलकित भाल"

कविता की आत्मा "सिंदूर तिलकित भाल" पंक्ति में बसती है। यह सिर्फ एक छवि नहीं, बल्कि कवि के लिए प्रेम, स्थायित्व और अपने घर का प्रतीक है। जब भी वे अकेलेपन से घिरते हैं, तो पत्नी की यही स्मृति उन्हें भावनात्मक सहारा देती है। यह पंक्ति इस कविता को सबसे बेहतरीन love poems in Hindi में से एक बनाती है।

प्रवासी जीवन पर हिंदी कविता का दर्द

नागार्जुन यहाँ एक प्रवासी के मन की व्यथा को आवाज देते हैं। वे कहते हैं कि शहर में लोग और समुदाय तो हैं, लेकिन अपनेपन की कमी है। उन्हें हमेशा "प्रवासी ही कहेंगे हाय!" – यह पंक्ति शहर में अपनी पहचान खो चुके लाखों लोगों के दर्द को बयां करती है। यह कविता प्रवासी जीवन पर हिंदी कविता का एक जीवंत दस्तावेज है।

मातृभूमि और प्रकृति से जुड़ाव

पत्नी की याद के साथ ही कवि को अपने गाँव 'तरउनी', मिथिला की लीची, आम, धान और कमल की याद आती है। यह दिखाता है कि इंसान अपनी जड़ों से कभी अलग नहीं हो सकता। ये स्मृतियाँ ही उसके अकेलेपन का एकमात्र सहारा हैं।

जनकवि नागार्जुन: एक परिचय

बाबा नागार्जुन हिंदी साहित्य के उन स्तंभों में से हैं जिनकी रचनाओं को समझने के लिए किसी विशेष ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। उनकी सीधी-सपाट भाषा गहरे से गहरा घाव करने और मरहम लगाने की क्षमता रखती है। यदि आप भारतीय साहित्य को गहराई से समझना चाहते हैं, तो आपको Nagarjun poetry collection अवश्य पढ़नी चाहिए। उनकी किताबें अक्सर best Hindi poetry books की सूची में शामिल होती हैं और ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हैं।


अन्य कविताएं पढ़ें


इस कविता की कौन-सी पंक्ति आपको सबसे ज़्यादा पसंद आई? नीचे कमेंट्स में बताएं।

Famous Poems

Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning Explained

Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning Explained Discover the Soulful Charkha Lyrics in English If you've been searching for Charkha lyrics in English that capture the depth of Punjabi folk emotion, look no further. In this blog, we take you on a journey through the original lyrics, their Hinglish transliteration, Hindi translation, and poetic English translation. We also dive into the symbolism and meaning behind this heart-touching song. Whether you're a lover of Punjabi folk, a poetry enthusiast, or simply curious about the emotions behind the spinning wheel, this complete guide to the "Charkha" song will deepen your understanding. Original Punjabi Lyrics of Charkha Ve mahiya tere vekhan nu, Chuk charkha gali de vich panwa, Ve loka paane main kat di, Tang teriya yaad de panwa. Charkhe di oo kar de ole, Yaad teri da tumba bole. Ve nimma nimma geet ched ke, Tang kath di hullare panwa. Vasan ni de rahe saure peke, Mainu tere pain pulekhe. ...

सादगी तो हमारी ज़रा देखिए | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics (Nusrat Fateh Ali Khan)

सादगी तो हमारी ज़रा देखिए | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics (Nusrat Fateh Ali Khan)   यहाँ Saadgi To Hamari Zara Dekhiye (सादगी तो हमारी जरा देखिये) के पूरे लिरिक्स दिए गए हैं। यह उस्ताद नुसरत फतह अली खान साहब द्वारा अमर की गई एक कालजयी क़व्वाली है। यह ग़ज़ल अपने गहरे, दिल को छू लेने वाले अर्थ और प्यार की सादगी भरी अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। कई प्रशंसक इस क़व्वाली को इसकी प्रसिद्ध पंक्तियों से भी खोजते हैं। इस पोस्ट में "लोग डरते हैं कातिल की परछाई से" और "अपना अंजाम सब हमको मालूम था" जैसी मशहूर पंक्तियों के पूरे और सही बोल शामिल हैं। सादगी तो हमारी के संपूर्ण लिरिक्स नीचे हिंदी और रोमन अंग्रेजी में पढ़ें। सादगी तो हमारी जरा देखिये,  एतबार आपके वादे पे कर लिया | मस्ती में इक हसीं को ख़ुदा कह गए हैं हम,  जो कुछ भी कह गए वज़ा कह गए हैं हम  || बारस्तगी तो देखो हमारे खुलूश कि,  किस सादगी से तुमको ख़ुदा कह गए हैं हम || किस शौक किस तमन्ना किस दर्ज़ा सादगी से,  हम करते हैं आपकी शिकायत आपही से || तेरे अताब के रूदाद हो गए हैं हम,  बड़े खलूस...

Aadmi Chutiya Hai Song Lyrics - फूलों की लाशों में ताजगी चाहता है, आदमी चूतिया है | Rahgir Song Lyrics

Aadmi Chutiya Hai Song Lyrics फूलों की लाशों में ताजगी चाहता है, आदमी चूतिया है फूलों की लाशों में ताजगी चाहता है फूलों की लाशों में ताजगी ताजगी चाहता है आदमी चूतिया है, कुछ भी चाहता है फूलों की लाशों में ज़िंदा है तो आसमान में उड़ने की ज़िद है ज़िंदा है तो आसमान में उड़ने की ज़िद है मर जाए तो मर जाए तो सड़ने को ज़मीं चाहता है आदमी चूतिया है काट के सारे झाड़-वाड़, मकाँ मकाँ बना लिया खेत में सीमेंट बिछा कर ज़मीं सजा दी, मार के कीड़े रेत में काट के सारे झाड़-वाड़, मकाँ बना लिया खेत में सीमेंट बिछा कर ज़मीं सजा दी, मार के कीड़े रेत में लगा के परदे चारों ओर क़ैद है चार दीवारी में मिट्टी को छूने नहीं देता, मस्त है किसी खुमारी में मस्त है किसी खुमारी में और वो ही बंदा अपने घर के आगे आगे नदी चाहता है आदमी चूतिया है टाँग के बस्ता, उठा के तंबू जाए दूर पहाड़ों में वहाँ भी डीजे, दारू, मस्ती, चाहे शहर उजाड़ों में टाँग के बस्ता, उठा के तंबू जाए दूर पहाड़ों में वहाँ भी डीजे, दारू, मस्ती, चाहे शहर उजाड़ों में फ़िर शहर बुलाए उसको तो जाता है छोड़ तबाही पीछे कुदरत को कर दाग़दार सा, छोड़ के अपनी स्याही पीछे छोड़ के अपनी स्याही ...

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) | Karna Poem

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) "Kahani Karn Ki" (popularly known as Sampurna ) is a viral spoken word performance that reimagines the Mahabharata from the perspective of the tragic hero, Suryaputra Karna . Written by Abhi Munde (Psycho Shayar), this poem questions the definitions of Dharma and righteousness. Quick Links: Lyrics • Meaning • Poet Bio • Watch Video • FAQ Abhi Munde (Psycho Shayar) performing the viral poem "Sampurna" कहानी कर्ण की (Sampurna) - Full Lyrics पांडवों को तुम रखो, मैं कौरवों की भीड़ से, तिलक-शिकस्त के बीच में जो टूटे ना वो रीड़ मैं | सूरज का अंश हो के फिर भी हूँ अछूत मैं , आर्यवर्त को जीत ले ऐसा हूँ सूत पूत मैं | 👉 Must Read: सूर्यपुत्र कर्ण पर कवि वि...
Follow my blog with Bloglovin