मैथिली छठ पूजा गीत लिरिक्स का सबसे बड़ा संग्रह (Maithili Chhath Puja Geet)
छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह बिहार, मिथिलांचल और पूर्वांचल की आत्मा है। जब कार्तिक मास की ठंडी हवाएं चलती हैं, तो घर-आँगन से लेकर नदियों के घाटों तक केवल एक ही स्वर गूंजता है— छठी मईया और भगवान भास्कर (सूर्य देव) के पावन गीत।
चाहे वह शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) की जादुई आवाज़ हो, अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) का भक्तिमय स्वर हो, या गाँव की महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत— इन गीतों में समाजवाद, प्रकृति प्रेम, भाई-बहन का स्नेह और एक माँ का अटूट विश्वास झलकता है।
साहित्यशाला (Sahityashala) के इस विशेष महा-संग्रह में हमने इंटरनेट पर उपलब्ध सबसे प्रसिद्ध और भावुक 'मैथिली एवं भोजपुरी छठ पूजा गीतों' (Maithili Chhath Puja Geet Lyrics) को उनके असली अर्थ, सांस्कृतिक महत्व और वीडियो के साथ संकलित किया है।
🎵 सभी प्रसिद्ध छठ गीतों की सूची (Click to Read Lyrics & Meaning)
नीचे दिए गए किसी भी गीत पर क्लिक करें और उसके पूरे लिरिक्स (Devanagari & Hinglish), गहरे अर्थ और वीडियो का आनंद लें:
- 1. कांचहि बांस केर गहबर लिरिक्स (सामाजिक समरसता)
- 2. हमरो पर होइयौ सहाय लिरिक्स (माँ का समर्पण)
- 3. हमरो के पार लगैया परमेसरी मइया (आस्था की नाव)
- 4. अपने तS जाइ छ हो भैया लिरिक्स (भाई-बहन का प्रेम)
- 5. अंगना में पोखरि खुनायल लिरिक्स (घर बना घाट)
- 6. कोन जल पटैबS मालिन लिरिक्स (पवित्र फूल)
- 7. डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै (समानता का गीत)
- 8. केरबा जे फड़ल छै घौद सँ (प्रसाद की पवित्रता)
- 9. हाथ सटकुनियाँ हो दीनानाथ (बाँझिन की पुकार)
- 10. बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ (स्त्री का दर्द)
- 11. हे छठि मैया हरु दुख मोर (परदेसी की याद)
- 12. मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया (आदर्श परिवार)
- 13. आठ ही काठ के कोठरिया (शारदा सिन्हा का गीत)
- 14. अंगना में पोखरी खनायब (माता का स्वागत)
- 15. उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा (अनुराधा पौडवाल)
- 16. पहिले पहिल हम कईनी लिरिक्स (पहली बार छठ)
- 17. अरघ के बेर (अनुराधा पौडवाल)
- 18. कोपी कोपी बोलेली छठी मैया (घाट सजावट गीत)
- 19. हो दीनानाथ - सोना सट कुनिया (चमत्कारी गीत)
🌸 छठ गीतों की अमर सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत
छठ के गीत केवल शब्द नहीं हैं; वे एक सम्पूर्ण समाजशास्त्र (Sociology) और दर्शन (Philosophy) हैं। इन गीतों में जो विविधता और गहराई देखने को मिलती है, वह अद्भुत है:
- सामाजिक समरसता का पाठ: गीतों में 'डोमिन बेटी' और 'मालिन बेटी' को भगवान के दरबार में सबसे आगे खड़ा दिखाया गया है। यह साबित करता है कि प्रकृति की पूजा में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता।
- नियम और पवित्रता: 'केरबा जे फड़ल छै घौद सँ' और 'कोपी-कोपी बोलेली' जैसे गीत सिखाते हैं कि भगवान को अर्पित की जाने वाली वस्तु और स्थान (घाट) पूरी तरह से शुद्ध और अछूता होना चाहिए।
- स्त्रियों का दर्द और समर्पण: 'बेर-बेर अरजलौँ' और 'हाथ सटकुनियाँ' जैसे गीतों में उस निस्संतान महिला का दर्द उभर कर आता है जिसे समाज ठुकरा देता है, लेकिन सूर्य देव उसे गले लगाते हैं।
- प्रकृति और पर्यावरण: हर गीत में नदियों (गंगा मैया), सूर्य (दीनानाथ), पौधों (बांस, केले, अड़हुल) का जिक्र है, जो अतुल्य भारत की पर्यावरण-संरक्षण की मूल भावना को दर्शाता है।
इन गीतों की मिठास हमें मैथिली सोहर (जुग जुग जिया सु ललनवा) और महाकवि विद्यापति की महान रचनाओं की याद दिलाती है। साहित्य अकादमी और IGNCA द्वारा संरक्षित ये गीत हमारी बिहार पर्यटन की अमूल्य धरोहर हैं।
▶️ टॉप छठ गीतों की वीडियो प्लेलिस्ट (Video Jukebox)
अपने घर को भक्तिमय बनाने के लिए इन सुपरहिट छठ गीतों को ज़रूर सुनें।
📜 लोक-साहित्य और मौखिक परंपरा (Folk Literature)
छठ के गीत सदियों से श्रुति (Oral Tradition) का हिस्सा रहे हैं। ये किसी किताब में नहीं लिखे गए थे, बल्कि पीढ़ियों से एक माँ ने अपनी बेटी को, एक सास ने अपनी बहू को गाकर सिखाए। यह मिथिला के सांस्कृतिक परिवेश (Cultural Landscape) का सबसे जीवंत दस्तावेज़ है।
जिस प्रकार सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की 'राम की शक्ति पूजा' में भगवान राम सूर्य की उपासना कर शक्ति का आह्वान करते हैं ("होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन"), ठीक उसी प्रकार एक साधारण ग्रामीण महिला छठ के गीतों के माध्यम से अपने परिवार और समाज के लिए असीम ऊर्जा और कृपा का आह्वान करती है। यह हमारी मौखिक विरासत का वह साहित्य है जिसे साहित्य अकादमी द्वारा संरक्षित किया जा रहा है।
🌅 छठ महापर्व के चार दिन और उनके विशेष गीत
छठ का पर्व चार दिनों तक चलता है, और हर दिन का अपना एक विशेष लोकगीत होता है:
- Day 1: नहाय-खाय (Nahay-Khay): इस दिन घर की साफ-सफाई और मन की शुद्धि के गीत गाए जाते हैं। जैसे— "अंगना में पोखरी खनायब"।
- Day 2: खरना (Kharna): इस दिन पवित्र प्रसाद (रसियाव/खीर) बनाया जाता है। प्रसाद की पवित्रता दर्शाने वाले गीत गाए जाते हैं— "केरबा जे फड़ल छै घौद सँ"।
- Day 3: संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya): डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस समय करुणा, दुख निवारण और परिवार की मंगलकामना के गीत गाए जाते हैं— "हाथ सटकुनियाँ हो दीनानाथ" या "बेर-बेर अरजलौँ"।
- Day 4: उषा अर्घ्य (Usha Arghya): उगते हुए सूर्य का उल्लास के साथ स्वागत किया जाता है। इस समय ऊर्जा से भरे गीत गाए जाते हैं— "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा"।
🤝 सामाजिक समरसता और प्रकृति (Social Harmony & Nature)
इन गीतों में एक समतामूलक समाज (Egalitarian Society) की स्थापना की गई है। बिहार पर्यटन विभाग भी इस बात को रेखांकित करता है कि भगवान के सामने कोई ऊँच-नीच नहीं है।
गीत "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" और "कोन जल पटैबS मालिन" इस बात का प्रमाण हैं कि समाज के हर वंचित वर्ग की भागीदारी इस पूजा में सर्वोच्च है। इसके अलावा, नदियों, तालाबों और वनस्पतियों (बांस, केले, गन्ना) की पूजा अतुल्य भारत की पर्यावरण-संरक्षण की मूल भावना को पुष्ट करती है।
📖 भोजपुरी और मैथिली का शब्दकोश (Linguistic Glossary)
छठ के गीत अवधी, भोजपुरी, बज्जिका और मैथिली बोलियों की सीमाओं को तोड़कर एक साझी सांस्कृतिक भावना का निर्माण करते हैं। इन पारंपरिक शब्दों के अर्थ यहाँ समझें:
| पारंपरिक शब्द (Word) | मूल स्रोत (Etymology) | अर्थ और संदर्भ (Meaning & Usage) |
|---|---|---|
| भिनसरवा (Bhinsarva) | भोजपुरी/बज्जिका | मैथिली में इसे 'भिनसर' (Bhinsar) कहा जाता है। इसका अर्थ है 'तड़के सुबह' या अरुणोदय (Dawn)। |
| कोपी-कोपी (Kopi-Kopi) | संस्कृत 'कोप' (Kopa) | इसका अर्थ है 'दैवीय क्रोध' (Divine wrath)। रामचरितमानस में भी इसका प्रयोग देवताओं के गुस्से के लिए हुआ है। |
| दुबीया (Dubiya) | दूर्वा घास (Dūrvā) | पवित्र घास, लेकिन घाट की सीढ़ियों पर इसे अवांछित माना जाता है क्योंकि घाट एकदम साफ़ होने चाहिए। |
| उजारी (Ujari) | भोजपुरी धातु | जड़ से उखाड़ फेंकना। अशुद्धियों या मकड़ी के जालों को हटाने के संदर्भ में। |
🎤 कलाकार और सांस्कृतिक धरोहर (Cultural Legacy)
इन गीतों की आत्मा को आधुनिक युग में जीवित रखने का श्रेय महान कलाकारों को जाता है। पद्म भूषण शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) जी की आवाज़ के बिना पूर्वांचल में छठ अधूरा माना जाता है। इसी तरह अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) और अनु दुबे (Anu Dubey) ने इन पारंपरिक गीतों को ढोलक (Dholak), हारमोनियम और पारंपरिक तालियों के साथ सहेज कर रखा है। यूनेस्को (UNESCO) के अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के मानकों पर यह भारत की सबसे मजबूत लोक परंपरा है।
📱 Instagram Reels & WhatsApp Status के लिए परफेक्ट टिप्स
क्या आप अपने सोशल मीडिया के लिए इन गीतों का उपयोग करना चाहते हैं?
- Instagram Reels के लिए (घाट सजावट): अनु दुबे के 'कोपी कोपी बोलेली' का 0:45 से 1:15 तक का हिस्सा (ए रउरा घाटे दुबीया छिलवाई देबो) घाट सफाई के वीडियो पर लगाएं।
- WhatsApp Status के लिए (उषा अर्घ्य): अनुराधा पौडवाल के 'उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा' की शुरुआत की पंक्तियां भोर के समय स्टेटस पर लगाने के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।
- पारिवारिक प्रेम के लिए: शारदा सिन्हा जी के 'अपने तS जाइ छ हो भैया' गीत को भाई-बहन के प्रेम को दर्शाने वाले वीडियो में इस्तेमाल करें।
❓ छठ पूजा गीतों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र 1: छठ के गीतों में 'दीनानाथ' और 'छठी मईया' कौन हैं?
दीनानाथ (Deenanath): यह भगवान सूर्य (Sun God) का नाम है, जिसका अर्थ है 'दीनों (गरीबों) के नाथ'।
छठी मईया (Chhathi Maiya): लोक मान्यताओं और वेदों के अनुसार, छठी मईया सूर्य देव की मानस बहन हैं और बच्चों की रक्षा करने वाली 'षष्ठी देवी' (Goddess Shashti) का स्वरूप हैं। गीतों में इन दोनों की ही आराधना की जाती है।
प्र 2: मैथिली और भोजपुरी छठ गीतों में क्या अंतर है?
दोनों ही भाषाओं के गीतों का मूल भाव बिल्कुल एक समान है— पवित्रता, प्रकृति प्रेम और सूर्य देव की उपासना। अंतर केवल बोली और उच्चारण का होता है। यह भारतीय संस्कृति के उस विशाल 'सांस्कृतिक परिवेश' को दर्शाता है जहाँ भाषाएं अलग होकर भी भावनाएं एक हैं।
प्र 3: इन गीतों में 'सूप' और 'बहँगी' का क्या महत्व है?
सूप (बांस की टोकरी) शुद्धता का प्रतीक है जिसमें भगवान को चढ़ाने वाला प्रसाद (ठेकुआ, फल) रखा जाता है। 'बहँगी' बांस का वह ढांचा है जिस पर सूप रखकर पुरुष श्रद्धालु उसे अपने कंधे पर उठाकर घाट तक ले जाते हैं। यह शारीरिक श्रम और भक्ति का प्रतीक है।
🙏 जय छठी मईया! जय दीनानाथ!
साहित्यशाला (Sahityashala) का यह प्रयास है कि हमारे भारत देश की यह महान मौखिक परंपरा डिजिटल रूप में हमेशा के लिए सुरक्षित रहे। अगर आपके परिवार में कोई छठ करता है या कोई परदेस में रहकर घर की याद कर रहा है, तो उन्हें यह महा-संग्रह (Collection) ज़रूर भेजें।
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