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सुना था कि बेहद सुनहरी है दिल्ली - Suna Tha Ki Behad Sunheri Hai Dilli | Imran Pratapgarhi

सुना था कि बेहद सुनहरी है दिल्ली - Suna Tha Ki Behad Sunheri Hai Dilli

कोई ला के दे दे मुझे लाल मेरा | Koi La Ke De De Mujhe Lal Mera

"Suna Tha Ki Behad Sunheri Hai Dilli" – यह सिर्फ एक कविता की पंक्ति नहीं, बल्कि दिल्ली की सियासत पर एक गहरा तंज है। इमरान प्रतापगढ़ी की यह रचना एक माँ की तड़प और बेबसी को आवाज़ देती है, जो 'सुनहरी' दिल्ली में इंसाफ के लिए भटक रही है।

इस लेख में हम इस मशहूर और मार्मिक कविता के पूरे बोल (Lyrics) पढ़ेंगे और इसके पीछे छिपे गहरे अर्थ को समझेंगे।

सुना था कि बेहद सुनहरी है दिल्ली,
समंदर-सी ख़ामोश, गहरी है दिल्ली।
मगर एक माँ की सदा सुन न पाए,
तो लगता है — गूंगी है, बहरी है दिल्ली।
सुना था कि बेहद सुनहरी है दिल्ली - Suna Tha Ki Behad Sunheri Hai Dilli, featuring an image of Safdarjung's Tomb in Delhi.
वो आँखों में अश्कों का दरिया समेटे,
वो उम्मीद का इक नज़रिया समेटे।
यहाँ कह रही है, वहाँ कह रही है,
तड़प कर के ये एक माँ कह रही है —
"कोई पूछता ही नहीं हाल मेरा...!
कोई ला के दे दे मुझे लाल मेरा!"
उसे ले के वापस चली जाऊँगी मैं,
पलट कर कभी फिर नहीं आऊँगी मैं।
बुढ़ापे का मेरे सहारा वही है,
वो बिछड़ा तो ज़िंदा ही मर जाऊँगी मैं।
वो छह दिन से है लापता, ले के आए —
कोई जा के उसका पता ले के आए।
वही है मेरी ज़िंदगी की कमाई,
वही तो है सदियों का आमाल मेरा।
कोई ला के दे दे मुझे लाल मेरा!
A minaret of a Delhi monument against a blue sky, representing the "sunheri" Delhi from the poem 'Suna Tha Ki Behad Sunheri Hai Dilli'.

ये चैनल के एंकर कहाँ मर गए हैं?
ये गाँधी के बंदर कहाँ मर गए हैं?
मेरी चीख़ और मेरी फ़रियाद कहना,
ये मोदी से इक माँ की रूदाद कहना।
कहीं झूठ की शख्सियत बह न जाए,
ये नफ़रत की दीवार ढह न जाए।
है इक माँ के अश्कों का सैलाब साहब —
कहीं आपकी सल्तनत बह न जाए।
उजड़ सा गया है गुलिस्तां वतन का,
नहीं तो था भारत से खुशहाल मेरा।
कोई ला के दे दे मुझे लाल मेरा।
मोहम्मद इमरान "प्रतापगढ़ी"

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निष्कर्ष

"Suna Tha Ki Behad Sunheri Hai Dilli" महज़ एक कविता नहीं, बल्कि एक आईना है जो 'सुनहरी' दिल्ली की चकाचौंध के पीछे की कठोर हक़ीक़त को बयां करता है। यह रचना एक माँ के दर्द के ज़रिए सत्ता के गलियारों तक एक ज़रूरी और तल्ख़ सवाल पहुँचाती है।

हमें उम्मीद है कि इमरान प्रतापगढ़ी की यह मार्मिक कविता (Hindi Poem) और इसका गहरा अर्थ आपको पसंद आया होगा। इस कविता पर आपकी क्या राय है, हमें नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएँ।

लेखक के बारे में: इमरान प्रतापगढ़ी 

मोहम्मद इमरान "प्रतापगढ़ी" एक मशहूर भारतीय शायर और राजनीतिज्ञ हैं। वह अपनी बेबाक और संवेदनशील शायरी के लिए जाने जाते हैं, जो अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सीधी टिप्पणी करती है।

उनकी शायरी में आम आदमी का दर्द, व्यवस्था पर तंज और क्रांति की आवाज़ साफ़ सुनाई देती है। अपनी प्रभावशाली नज़्मों के लिए प्रसिद्ध, इमरान प्रतापगढ़ी वर्तमान में एक राजनेता के रूप में भी सक्रिय हैं और राज्यसभा के सदस्य हैं।

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