राजधानी में 15 हजार छात्रों का शक्ति प्रदर्शन: "लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन संस्थाओं पर बिना प्रमाण सवाल उठाना देश का अपमान"
क्या राजनीतिक लाभ के लिए देश की संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास का माहौल बनाना जायज है? नई दिल्ली (5 नवंबर 2026) को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और देशभर के विश्वविद्यालयों से आए निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों ने इसी सवाल को लेकर एक बड़ा विमर्श खड़ा कर दिया है।
अभाविप (ABVP) के 'अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ' अभियान के अंतर्गत आयोजित इस विशाल छात्र जुटान के बाद छात्रसंघ पदाधिकारियों ने मीडिया को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक जनादेश (Democratic Mandate) के सम्मान और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर अपना बेबाक पक्ष रखा।
🔥 प्रेस वार्ता की 3 सबसे बड़ी बातें:
- जनादेश सर्वोपरि: लोकतंत्र केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के निर्णय और संस्थागत विश्वास का नाम है।
- तुलना पर ऐतराज: बांग्लादेश और नेपाल की राजनीतिक परिस्थितियों से भारत के परिपक्व लोकतंत्र की तुलना करना पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है।
- विपक्ष से सवाल: यदि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल हैं, तो केवल रैलियों में आरोप लगाने के बजाय प्रमाणों के साथ संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष बात रखनी चाहिए।
देशभर के छात्र नेताओं का दिल्ली में जमावड़ा
15 हजार से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता वाले इस राष्ट्रीय महाजुटान में दिल्ली, पंजाब, लद्दाख, उत्तराखंड, ओडिशा, असम एवं पूर्वोत्तर सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों ने एक स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए अविश्वास का वातावरण बनाना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को खोखला करता है।
💡 छात्र राजनीति का वर्तमान परिदृश्य: हाल ही में डीयू में छात्रसंघ चुनावों को लेकर भी कई सवाल उठे थे। (विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें: Delhi University DUSU Elections Boycott Reality), ऐसे में इस राष्ट्रीय जुटान के मायने और भी अहम हो जाते हैं।
मंच पर प्रमुख रूप से कौन रहा उपस्थित?
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) के अध्यक्ष यश डबास, सचिव रिया छावड़ी, संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह, पूर्व डूसू सचिव अपराजिता एवं पूर्व डूसू संयुक्त सचिव शिवांगी खारवाल उपस्थित रहे। इनके अलावा पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष अंकित भिदान एवं पूर्व अध्यक्ष गौरववीर सोहल; लद्दाख विश्वविद्यालय के निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि; डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष नवदीप राणा; उत्कल विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष अभिराम; गुवाहाटी विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष मानस प्रतिम कलिता तथा JNU के पूर्व संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने भी अपना पक्ष रखा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी का सीधा प्रहार: "हवा-हवाई आरोप लगाना बंद करे विपक्ष"
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने अपने वक्तव्य में कांग्रेस और विपक्ष को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में चुनाव जीतना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण चुनावी जनादेश और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करना भी है।"
📢 'स्मैश द पैट्रियार्की' (Smash the Patriarchy) पर राहुल गांधी से सवाल:
डॉ. सोलंकी ने राहुल गांधी के बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से महिला नेतृत्व की बात करना अलग है, लेकिन कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके अपने संगठन में महिलाओं को वास्तविक निर्णायक नेतृत्व देने के क्या ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
(संदर्भ: महिलाओं के वास्तविक नेतृत्व और सशक्तिकरण की ऐसी ही एक सकारात्मक मिसाल हाल ही में राजधानी कॉलेज में देखने को मिली थी। पढ़ें: राजधानी कॉलेज NCWEB मंगलदीपोत्सव: DU में महिला सशक्तिकरण का जीवंत मंच)
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि सरकारें जनता के मत से बनती और बदलती हैं, सड़कों पर अराजकता फैलाकर नहीं। भारत का लोकतंत्र नेपाल या बांग्लादेश की तरह नहीं है; इसकी जड़ें ऐतिहासिक चेतना और संवैधानिक मजबूती पर टिकी हैं।
छात्र नेताओं का संयुक्त संदेश: "विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने के केंद्र नहीं हैं"
प्रेस वार्ता के अंत में छात्रसंघ पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा, "हम सभी विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक जनादेश से चुनकर आए हैं। सत्ता पक्ष से सवाल पूछना स्वाभाविक है, लेकिन बिना प्रमाण चुनाव प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करना करोड़ों मतदाताओं के विश्वास से खिलवाड़ है।"
विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र केवल राजनीति ही नहीं करते, बल्कि वे अपने भविष्य, मानसिक स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। त्योहारी सीजन में जहां दीपावली की कविताओं ने छात्रों को मानसिक सुकून (संदर्भ: Art of Being Happy DU Notes) दिया है, वहीं उनके सामने रहने के खर्च और इंटर्नशिप जैसी ठोस चुनौतियां भी हैं।
📚 विश्वविद्यालयों के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट्स (कैंपस से जुड़ी अन्य खबरें):
निष्कर्ष:
छात्र प्रतिनिधियों का यह स्पष्ट संदेश है कि भारत का युवा लोकतंत्र को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों या अराजकता के साथ नहीं खड़ा है। वे देश की संवैधानिक व्यवस्था, राष्ट्रीय एकता, सकारात्मक विमर्श और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के साथ मजबूती से खड़े हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. दिल्ली में आयोजित इस छात्र महाजुटान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस महाजुटान का उद्देश्य 'अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ' अभियान के तहत लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करना और बिना प्रमाण संवैधानिक संस्थाओं (जैसे चुनाव आयोग) पर अविश्वास फैलाने की प्रवृत्ति का विरोध करना था।
2. डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सोलंकी ने कहा कि विपक्ष और राहुल गांधी द्वारा बिना प्रमाण चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना और भारत के लोकतंत्र की तुलना नेपाल व बांग्लादेश से करना देश की लोकतांत्रिक परिपक्वता का अपमान है।
3. प्रेस वार्ता में किन प्रमुख विश्वविद्यालयों के छात्र नेता शामिल हुए?
प्रेस वार्ता में दिल्ली विश्वविद्यालय (DUSU), पंजाब विश्वविद्यालय (PU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), लद्दाख, उत्तराखंड, और गुवाहाटी विश्वविद्यालय के निर्वाचित अध्यक्ष और पूर्व पदाधिकारी शामिल हुए।