मन से मन का दीप जलाओ: Heart-Touching Happy Diwali Poems in Hindi (भावार्थ सहित) That Will Touch Your Soul!
जब करोड़ों की आतिशबाजी से आसमान चमक उठता है, तब फुटपाथ पर बैठे उस भूखे बच्चे की आँखों में कैसी दिवाली जलती होगी? दीपावली (Diwali) केवल मिट्टी के दीयों या बिजली की झालरों का त्यौहार नहीं, बल्कि मुरझाए हुए दिलों को रोशन करने का महापर्व है। जहाँ एक ओर हम Festival of Lights पर अपने आलीशान घरों को बंदनवारों से सजाते हैं, वहीं समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिसके लिए यह उत्सव भी आम दिनों जैसा ही संघर्षमय और सूना होता है। हमारी आज की मुख्य कालजयी कविता 'मन से मन का दीप जलाओ' समाज की इसी कड़वी सच्चाई को बेबाकी से बयां करती है। जिस तरह नई शोहरत और पैसे का नशा इंसान की संवेदनाओं को धुंधला कर देता है—जैसा कि आपने हमारी बहुचर्चित ग़ज़ल पोस्ट 'अभी ये दौलत नयी-नयी है' में पढ़ा और महसूस किया होगा—ठीक उसी तरह अमीरी की चकाचौंध में हमें अक्सर गरीबों की चौखट का अंधेरा दिखाई नहीं देता। यह विशेष साहित्यिक प्रस्तुति केवल एक कविता नहीं, बल्कि मानवता का एक जीवंत दस्तावेज है। विद्यालयों के काव...