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“युद्ध और शांति” पाश की कविता | Meaning, Deep Analysis & Lyrics

पाश की कविता "युद्ध और शांति": सत्ता की 'शांति' का पाखंड और संघर्ष के 'प्रेम' का घोषणापत्र

दुनिया का हर शोषक तंत्र अपने नागरिकों को एक अफीम चटाता है, जिसका नाम है—'शांति'। यदि "23 मार्च" में पाश ने शहादत को भुनाने वाले नेताओं को नंगा किया था, तो "युद्ध और शांति" उस पूरी व्यवस्था पर एक वैचारिक बम है जो हमें लड़ना भूलकर 'रेंगने' पर मजबूर करती है। यह कविता स्थापित करती है कि जो शांति आपको कायर बना दे, वह दरअसल बाघ के जबड़े में टपकता हुआ आपका ही खून है।

साहित्यशाला के इस मंच पर हम पाश के सबसे उग्र मार्क्सवादी और अस्तित्ववादी दर्शन को डिकोड करने जा रहे हैं। पाश कहते हैं कि युद्ध (संघर्ष) विनाश नहीं है, बल्कि वह बच्चों के लिए खिलौने, बीवियों के लिए दूध और माँ के लिए ऐनक लाने का एकमात्र रास्ता है। यह कविता उन बुद्धिजीवियों पर एक गहरा तमाचा है जो 'शांति' का जाप करते हुए आम आदमी को फाँसी के फंदे तक पहुँचा देते हैं।

Pash roaring from the stage against the illusion of peace

शांति के पाखंड को चीरकर 'युद्ध' (संघर्ष) का आह्वान करती यह विद्रोही आवाज़...

कविता का मूल पाठ: युद्ध और शांति

▶ पूर्ण देवनागरी कविता (यहाँ क्लिक करें)
हम जिन्होंने युद्ध नहीं किया तुम्हारे शरीफ़ बेटे नहीं हैं ज़िंदगी! वैसे हम हमेशा शरीफ़ बनना चाहते रहे हमने दो रोटियों और ज़रा-सी रज़ाई के एवज़ में युद्ध के आकार को सिकोड़ना चाहा... हम संदूक़ में छिप-छिपकर युद्ध को टालते रहे युद्ध से बचने की लालसा में हम बहुत छोटे हो गए कभी तो थके हुए बाप को अन्नखाऊ बुड्ढे का नाम दिया कभी चिंताग्रस्त बीवी को चुड़ैल का साया कहा... शांति कहीं नहीं होती— आत्मा में छिपे गीदड़ों का हौंकना ही सब कुछ है शांति—घुटनों में गुर्दन देकर ज़िंदगी को सपने में देखने की कोशिश है... शांति पुरस्कार लेते कवियों की बढ़ी हुई बाज़ुओं का ‘टुंड’ है शांति मंत्रियों के पहने हुए खद्दर की चमक है शांति और कुछ नहीं है या शांति गांधी का जाँघिया है जिसकी तनियों को चालीस करोड़ आदमियों को फाँसी लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है शांति माँगने का अर्थ युद्ध को ज़िल्लत के स्तर पर लड़ना है... युद्ध इश्क़ के शिखर का नाम है युद्ध लहू से मोह का नाम है युद्ध जीने की गर्मी का नाम है युद्ध कोमल हसरतों के मालिक होने का नाम है युद्ध शांति की शुरुआत का नाम है... युद्ध ख़ुद को मोह भरा संबोधन है युद्ध हमारे बच्चों के लिए धारियोंवाली गेंद बनकर आएगा युद्ध हमारी बहनों के लिए कढ़ाई के सुंदर नमूने लाएगा युद्ध हमारी बीवियों के स्तनों में दूध बनकर उतरेगा युद्ध बूढ़ी माँ के लिए नज़र की ऐनक बनेगा युद्ध हमारे बुज़ुर्गों की क़ब्रों पर फूल बनकर खिलेगा... और कुछ नहीं, बस युद्ध ही इस घोड़े की लगाम बन सकेगा।

स्रोत : पुस्तक: लहू है कि तब भी गाता है (पृष्ठ 46) | अनुवाद: चमनलाल

▶ Hinglish Transliteration (Click to read)
Hum jinhone yuddh nahi kiya Tumhare shareef bete nahi hain zindagi!... Hum sandook mein chhip-chhipkar yuddh ko taalte rahe Yuddh se bachne ki laalsa mein hum bahut chhote ho gaye... Shanti kahin nahi hoti— Aatma mein chhipe geedadon ka haunkna hi sab kuch hai... Ya shanti Gandhi ka jaanghiya hai Jiski taniyon ko chalees karod aadmiyon ko Phansi lagane ke liye istemaal kiya ja sakta hai... Yuddh ishq ke shikhar ka naam hai Yuddh lahoo se moh ka naam hai... Yuddh humari biwiyon ke stano mein Doodh bankar utrega... Aur kuch nahi, bas yuddh hi is ghode ki lagaam ban sakega.

दार्शनिक और राजनीतिक विश्लेषण: 'शांति' का भ्रम

पाश इस कविता में 'False Pacifism' (झूठे शांतिवाद) की धज्जियाँ उड़ाते हैं। समाज हमेशा हमें 'शरीफ़' बनने और समझौता करने (Adjustment) की सीख देता है। इसी समझौते (शांति) की चाहत में एक आम इंसान इतना 'छोटा' हो जाता है कि वह व्यवस्था से लड़ने के बजाय अपने ही घर में आर्थिक तंगी (Finance) का गुस्सा अपने थके हुए बाप ("अन्नखाऊ बुड्ढा") और भूखी बीवी ("चुड़ैल का साया") पर उतारता है। पाश कहते हैं कि यह कायरता है; यह "आत्मा में छिपे गीदड़ों का हौंकना है।"

गांधीवादी शांति और सत्ता का खद्दर

कविता का सबसे विस्फ़ोटक और विवादास्पद हिस्सा वह है जहाँ पाश लिखते हैं—"शांति गांधी का जाँघिया है, जिसकी तनियों को चालीस करोड़ आदमियों को फाँसी लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।" यह पंक्ति भारतीय राज्य के State-Sponsored Non-violence पर सबसे भयंकर व्यंग्य है। पाश का तर्क है कि शासक वर्ग 'शांति' और 'अहिंसा' का पाठ इसलिए पढ़ाता है ताकि शोषित और भूखी जनता (अदम गोंडवी की ग़ज़लों का यथार्थ) कभी बग़ावत न कर सके। यह शांति दुष्यंत कुमार के "गूँगे निकल पड़े हैं ज़बाँ की तलाश में" को चुप कराने की साज़िश है।

'युद्ध' की नई परिभाषा: प्रेम और सृजन का शिखर

पाश के लिए 'युद्ध' खून-खराबा नहीं है। युद्ध 'वर्ग-संघर्ष' (Class Struggle) है।

  • युद्ध एक जुझारू खेल (Sportsmanship) की तरह "जीने की गर्मी का नाम है।"
  • युद्ध सृजन है: "बच्चों के लिए गेंद", "बीवियों के स्तनों में दूध", और "बूढ़ी माँ की नज़र की ऐनक"।

जब तक इंसान अपने हक़ के लिए लड़ेगा नहीं, तब तक उसे यह बुनियादी ज़रूरतें नहीं मिलेंगी। "युद्ध के बग़ैर हम बहुत अकेले हैं... युद्ध ही इस घोड़े (निरंकुश सत्ता) की लगाम बन सकेगा।"

Young portrait of revolutionary poet Avtar Singh Sandhu Pash in black and white

इन आँखों ने 'शांति' के पीछे छिपकर हँसने वाले शोषकों का असली चेहरा देखा था...

निष्कर्ष: क्या आप संदूक़ में छिपे हैं या युद्ध कर रहे हैं?

पाश की यह कविता हमें झकझोरती है कि हम 'शांति' के नाम पर अपनी कायरता को न छिपाएँ। जो शांति आपको आपकी चेतना और अधिकारों से वंचित कर दे, वह शांति नहीं, एक धीमा ज़हर है। सच्चा प्रेम और जीवन केवल उस 'युद्ध' के पार है, जहाँ आप अपने अस्तित्व के लिए लड़ना सीख जाते हैं।

विद्रोह और यथार्थ की ऐसी ही अचूक कविताओं के लिए Sahityashala.in और हमारे अन्य प्रभागों जैसे English Poetry तथा Maithili Poems के साथ गहराई से जुड़े रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. पाश ने 'शांति' को एक धोखा क्यों कहा है?

पाश का मानना है कि शासक वर्ग 'शांति' का पाठ इसलिए पढ़ाता है ताकि शोषित जनता कभी बग़ावत न कर सके। उनके लिए शांति का मतलब है अत्याचार सहते हुए चुप रहना और कायरों की तरह संदूक में छिपकर ज़िंदगी बिताना।

2. कविता में 'गांधी के जाँघिए' वाली पंक्ति का क्या अर्थ है?

यह राज्य-प्रायोजित शांतिवाद (State-sponsored pacifism) पर एक कठोर कटाक्ष है। कवि कहता है कि अहिंसा के जिस आवरण (जाँघिए) के पीछे सत्ता छिपती है, असल में उसी का इस्तेमाल करके वह करोड़ों गरीबों की आवाज़ को घोंटती (फाँसी लगाती) है।

3. पाश के लिए 'युद्ध' का असली अर्थ क्या है?

पाश के लिए युद्ध कोई खून-खराबा या देशों की लड़ाई नहीं है; यह 'वर्ग-संघर्ष' (Class Struggle) और अपने अधिकारों की लड़ाई है। वे इसे 'इश्क़ का शिखर' मानते हैं, क्योंकि इसी संघर्ष से बच्चों के लिए खिलौने और घर में रोटी आती है।

पाश को सुनें और समझें (Video Analysis)

Watch the deep philosophical breakdown of 'Yuddh aur Shanti' on YouTube

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