इन्दु जी, इन्दु जी, क्या हुआ आपको?
Indu Ji Indu Ji Kya Hua Aapko - Nagaarjun
भारतीय राजनीति के इतिहास में 25 जून 1975 की तारीख काले अक्षरों में दर्ज है। यह वह दौर था जब लोकतंत्र की आवाज़ को सलाखों के पीछे कैद कर दिया गया था। जब बड़े-बड़े पत्रकार और कवि सत्ता के डर से खामोश थे, तब एक फक्कड़ कवि—बाबा नागार्जुन—ने अपनी कलम को हथियार बनाया।
उनकी कविता "इन्दु जी, इन्दु जी, क्या हुआ आपको?" केवल एक कविता नहीं, बल्कि सत्ता के नशे में चूर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ एक चार्जशीट (Charge-sheet) है। इसमें उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के लोकतांत्रिक मूल्यों और इंदिरा गांधी की तानाशाही के बीच के अंतर को बेबाकी से उजागर किया है।
|| कविता पाठ ||
इन्दु जी, इन्दु जी, क्या हुआ आपको?
सत्ता की मस्ती में, भूल गई बाप को?
इन्दु जी, इन्दु जी, क्या हुआ आपको?
बेटे को तार दिया, बोर दिया बाप को!
आपकी चाल-ढाल देख- देख लोग हैं दंग,
हकूमती नशे का वाह-वाह कैसा चढ़ा रंग |
सच-सच बताओ भी, क्या हुआ आपको ?
यों भला भूल गईं बाप को!
छात्रों के लहू का चस्का लगा आपको,
काले चिकने माल का मस्का लगा आपको |
किसी ने टोका तो ठस्का लगा आपको,
अन्ट-शन्ट बक रही जनून में |
शासन का नशा घुला खून में ||
फूल से भी हल्का,
समझ लिया आपने हत्या के पाप को |
इन्दु जी, इन्दु जी, क्या हुआ आपको?
बेटे को तार दिया,
बोर दिया बाप को!
बचपन में गांधी के पास रहीं,
तरुणाई में टैगोर के पास रहीं |
अब क्यों उलट दिया ‘संगत’ की छाप को?
क्या हुआ आपको?
रानी-महारानी आप,
नवाबों की नानी आप |
नफाखोर सेठों की अपनी सगी माई आप,
काले बाजार की कीचड़ आप, काई आप ||
सुन रहीं, गिन रहीं,
गिन रहीं, सुन रहीं |
सुन रहीं, सुन रहीं,
गिन रहीं, गिन रहीं ||
हिटलर के घोड़े की एक-एक टाप को,
एक-एक टाप को, एक-एक टाप को |
छात्रों के खून का नशा चढ़ा आपको,
यही हुआ आपको |
यही हुआ आपको ||
कविता का मर्म: सत्ता, पुत्र-मोह और लोकतंत्र
1. "बेटे को तार दिया, बोर दिया बाप को"
यह पंक्ति कविता का प्राण है। यहाँ 'बेटे' का संदर्भ संजय गांधी (Sanjay Gandhi) से है, जिनका आपातकाल के दौरान असंवैधानिक दबदबा था। 'बाप' से आशय जवाहरलाल नेहरू से है। नागार्जुन आरोप लगाते हैं कि इंदु जी ने पुत्र-मोह में नेहरू के लोकतांत्रिक मूल्यों को 'बोर' (डुबो) दिया है। यह वही पीड़ा है जो नागार्जुन की अन्य राजनीतिक कविताओं में भी झलकती है।
2. "हिटलर के घोड़े की टाप"
कवि ने इंदिरा गांधी के शासन की तुलना सीधे हिटलर (Hitler) की तानाशाही से की है। "घोड़े की टाप" पुलिस और सेना के उस दमन का प्रतीक है जो छात्रों और आंदोलनकारियों पर ढाया जा रहा था। नागार्जुन ने चेताया कि यह आवाजें (टाप) इतिहास में गूंजेंगी।
3. नफाखोर सेठों की माई
नागार्जुन "जनकवि" थे। उन्होंने देखा कि 'गरीबी हटाओ' का नारा देने वाली सरकार असल में "खद्दर धारी" मुनाफेखोरों और काले बाज़ारियों की संरक्षक बन गई थी।