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Nagaarjun Hindi Poems - Baar Baar Haara Hai | बार-बार हारा है - नागार्जुन हिंदी कविता

 बार-बार हारा है

बाबा नागार्जुन हिंदी कविता

Baba Nagaarjun Hindi Poems

गोआ तट का मैं मछुआरा
सागर की सद्दाम तरंगे
मुझ से कानाफूसी करतीं

Nagaarjun Hindi Poems - Baar Baar Haara Hai | बार-बार हारा है - नागार्जुन हिंदी कविता

नारिकेल के कुंज वनों का
मैं भोला-भाला अधिवासी
केरल का वह कृषक पुत्र हूँ
‘ओणम’ अपना निजी पर्व है'


नौका-चालन का प्रतियोगी
मैं धरती का प्यारा शिशु हूँ
श्रम ही जिसकी अपनी पूँजी
छल से जिसको सहज घृणा है
मैं तो वो कच्छी किसान हूँ
लवण-उदधि का खारा पानी
मुझसे बार-बार हारा है...

सौ-हजार नवजात केकड़े
फैले हैं गुनगुन धूप में
देखो तो इनकी ये फुर्ती
वरुण देव को कितनी प्रिय है !
मैं भी इन पर बलि-बलि जाऊँ !
मैं भी इन पर बलि-बलि जाऊँ
मेरी इस भावुकता मिश्रित
बुद्धू पन पर तुम मुसकाओ
पागल कह दो, कुछ भी कह दो
पर मैं भी इन पर बलि-बलि जाऊँ !

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नागार्जुन

Nagaarjun Hindi Poems - Baar Baar Haara Hai | बार-बार हारा है - नागार्जुन हिंदी कविता

(23 जनवरी 1985) 

बाबा नागार्जुन की हिंदी कविता

Hindi Poems Of Baba Nagaarjun

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