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प्रकृति पर 6 हिंदी कविताएँ: वर्षा, बसंत और हरियाली का सौंदर्य | Hindi Poems On Nature

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ - Aree Kaan Kholkar Suno Parth | Mahabharata Poem On Arjuna


अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi

Mahabharata Poem On Arjuna

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ - Aree Kaan Kholkar Suno Parth | Mahabharata Poem On Arjuna
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

तलवार,धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र मे खड़े हुये,
रक्त पिपासू महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुये |
कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे,
एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे |
महासमर की प्रतिक्षा में सारे टाँक रहे थे जी,
और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || 

 
रणभूमि के सभी नजारे देखने में कुछ खास लगे,
माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे |
कुरुक्षेत्र का महासमर एक पल में तभी सजा डाला,
पाञ्चजन्य उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला |
हुआ शंखनाद जैसे ही सबका गर्जन शुरु हुआ,
रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका मर्दन शुरु हुआ |
कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को मीच जड़ा,
गाण्डिव पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा |
आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की तासीर यहाँ,
इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||
 

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता ||  || Mahabharata Poem On Arjuna ||
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna
सुनी बात माधव की तो अर्जुन का चेहरा उतर गया,
एक धनुर्धारी की विद्या मानो चूहा कुतर गया |
बोले पार्थ - सुनो कान्हा! जितने ये सम्मुख खड़े हुए है,
हम तो इन से सीख-सीख कर सारे भाई बड़े हुए है |
इधर खड़े बाबा भिष्म ने मुझको गोद खिलाया है,
गुरु द्रोण ने धनुष-बाण का सारा ग्यान सिखाया है |
सभी भाई पर प्यार लुटाया कुंती मात हमारी ने,
कमी कोई नहीं छोड़ी थी, प्रभू माता गांधारी ने |
ये जितने गुरुजन खड़े हुए है सभी पूजने लायक है,
माना दुर्योधन-दुःशासन थोड़े से नालायक है |
मैं अपराध क्षमा करता हूँ, बेशक हम ही छोटे है,
ये जैसे भी है आखिर माधव, सब ताऊ के बेटे है ||
 
छोटे-से भू-भाग की खातिर हिंसक नहीं बनूंगा मैं,
 
स्वर्ण ताककर अपने कुल का 

विध्वंसक नहीं बनूंगा मैं,
खून सने हाथों को होता, राज-भोग अधिकार नहीं |
परिवार मारकर गद्दी मिले तो सिंहासन स्वीकार नहीं,
रथ पर बैठ गया अर्जुन, मुँह माधव से मोड़ दिया,
आँखों में आँसू भरकर गाण्डिव हाथ से छोड़ दिया ||

 
गाण्डिव हाथ से जब छूटा माधव भी कुछ अकुलाए थे,
शिष्य पार्थ पर गर्व हुआ, और मन ही मन हर्षाए थे |
मन में सोच लिया अर्जुन की बुद्धि ना सटने दूंगा,
समर-भूमि में पार्थ को कमजोर नहीं पड़ने दूंगा |
धर्म बचाने की खातिर इक नव अभियान शुरु हुआ,
उसके बाद जगत गुरु का गीता ग्यान शुरु हुआ ||

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता ||  || Mahabharata Poem On Arjuna ||
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

एक नजर ! एक नजर ! एक नजर ! एक नजर !

एक नजर में, रणभूमि के कण-कण डोल गये माधव,
टक-टकी बांधकर देखा अर्जुन एकदम बोल गये माधव -
पार्थ मुझे पहले बतलाते मैं संवाद नहीं करता,

पार्थ मुझे पहले बतलाते मैं संवाद नहीं करता |
तुम सारे भाइयों की खातिर कोई विवाद नहीं करता,
पांचाली के तन पर लिपटी साड़ी खींच रहे थे वो,
दोषी वो भी उतने ही है जबड़ा भींच रहे थे जो |
घर की इज्जत तड़प रही कोई दो टूक नहीं बोले,
पौत्र बहू को नग्न देखकर गंगा पुत्र नहीं खौले |

पौत्र बहू को नग्न देखकर गंगा पुत्र नहीं खौले |

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता ||  || Mahabharata Poem On Arjuna ||
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna
तुम कायर बन कर बैठे हो ये पार्थ बड़ी बेशर्मी है,
संबंध उन्हीं से निभा रहे जो लोग यहाँ अधर्मी है |

धर्म के ऊपर यहाँ आज भारी संकट है खड़ा हुआ,
और तेरा गांडीव पार्थ, रथ के कोने में पड़ा हुआ |
धर्म पे संकट के बादल तुम छाने कैसे देते हो,
कायरता के भाव को मन में आने कैसे देते हो |
 
हे पांडू के पुत्र ! 
हे पांडू के पुत्र !

  धर्म का कैसा कर्ज उतारा है,
शोले होने थे ! 
शोले होने थे ! शोले होने थे !

 आँखो में, पर बहती जल धारा है ||

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ - Aree Kaan Kholkar Suno Parth | Mahabharata Poem On Arjuna
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

गाण्डिव उठाने में पार्थ जितनी भी देर यहाँ होगी,
इंद्रप्रस्थ के राज-भवन में उतनी अंधेर वहाँ होगी |
अधर्म-धर्म की गहराई में खुद को नाप रहा अर्जुन,
अश्रूधार फिर तेज हुई और थर-थर काँप रहा अर्जुन |


हे केशव ! ये रक्त स्वयं का पीना नहीं सरल होगा,
और विजय यदि हुए हम जीना नहीं 
सरल होगा |

 
हे माधव ! मुझे बतलाओ कुल-नाशक कैसे बनजाँऊ,
रख सिंहासन लाशों पर मैं, शासक कैसे बन जाँऊ |
कैसे उठेंगे कर उन पर जो कर पर अधर लगाते है ?
करने को जिनका स्वागत, ये कर भी स्वयं जुड़ जाते है |
इन्हीं करों ने बाल्य-काल में सब के पैर दबाये है,
इन्हीं करों को पकड़ करो में, पितामह मुस्काये है |
अपनी बाणों की नोंक जो इनकी ओर करुंगा मैं,
केशव मुझको मृत्यु दे दो उससे पूर्व मरूंगा मैं || 

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता ||  || Mahabharata Poem On Arjuna ||
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna
बाद युद्ध के मुझे ना कुछ भी पास दिखाई देता है,
माधव ! इस रणभूमि में, बस नाश दिखाई देता है |

 
बात बहुत भावुक थी किंतु जगत गुरु मुस्काते थे,
और ग्यान की गंगा निरंतर चक्रधारी बरसाते थे |
जन्म-मरण की यहाँ योद्धा बिल्कुल चाह नही करते,
क्या होगा अंजाम युद्ध का ये परवाह नही करते,
पार्थ ! यहाँ कुछ मत सोचो बस कर्म मे ध्यान लगाओ तुम !


बाद युद्ध के क्या होगा ये मत अनुमान लगाओ तुम,
इस दुनिया के रक्तपात में कोई तो अहसास नहीं |
निज-जीवन का करें फैसला नर के बस की बात नहीं,
तुम ना जीवन देने वाले नहीं मारने वाले हो |


ना जीत तुम्हारे हाथों में, तुम नहीं हारने वाले हो,
ये जीवन दीपक की भांति, यूँ ही चलता रहता है |
पवन वेग से बुझ जाता है, वरना जलता रहता है,

मानव-वश में शेष नहीं कुछ, फिर भी मानव डरता है,
वह मर कर भी अमर हुआ, जो धर्मं की खातिर मरता है ||

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अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna
ना सत्ता सुख से होता है, ना सम्मान्नों से होता है,
जीवन का सार सफल केवल, बस बलिदानों से होता है |

देह-दान योद्धा ही करते है, ना कोई दूजा जाता है,
रणभूमि में वीर मरे तो शव भी पूजा जाता है ||

 
योद्धा की प्रव्रत्ति जैसे खोटे शस्त्र बदलती है,
वैसे मानव की दिव्य आत्मा दैहिक वस्त्र बदलती है |

कान्हा तो सादा नर को मन के उदगार बताते थे,
इस दुनिया के खातिर ही गीता का सार बताते थे |
हे केशव ! कुछ तो समझ गया, पर कुछ-कुछ असमंजस में हूँ,
इतना समझ गया की मैं न स्वयं के वश में हूँ | 

हे माधव ! मुझे बतलाओ कुल नाशक कैसे बन जाँऊ,
रख सिंहासन लाशों पर, मै शासक कैसे बन जाँऊ |

 ये मान और सम्मान बताओ, जीवन के अपमान बताओ,
जीवन मृत्यु क्या है माधव?

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अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

रण में जीवन दान बताओ
काम, क्रोध की बात कही मुझको उत्तम काम बताओ,
अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ |

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता ||  || Mahabharata Poem On Arjuna ||
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna
इतना सुनते ही माधव का धीरज पूरा डोल गया,
तीन लोक का स्वामी फिर बेहद गुस्से में बोल गया -
 

सारे सृष्टि को भगवन बेहद गुस्से में लाल दिखे,
देवलोक के देव डरे सब को माधव में काल दिखे |


अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ मैं ही त्रेता का राम हूँ |
कृष्ण मुझे सब कहता है, मैं द्वापर का घनशयाम हूँ ||


रुप कभी नारी का धरकर मैं ही केश बदलता हूँ |
धर्म बचाने की खातिर, मैं अनगिन वेष बदलता हूँ |
विष्णु जी का दशम रुप मै परशुराम मतवाला हूँ ||
नाग कालिया के फन पे मैं मर्दन करने वाला हूँ |
बाँकासुर और महिसासुर को मैने जिंदा गाड़ दिया ||
नरसिंह बनकर धर्म की खातिर हिरण्यकश्यप फाड़ दिया |

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अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

रथ नहीं तनिक भी चलता है, बस मैं ही आगे बढता हूँ |
गाण्डिव हाथ में तेरे है, पर रणभूमि में मैं लड़ता हूँ ||

इतना कहकर मौन हुए, खुद ही खुद सकुचाये केशव,
पलक झपकते ही अपने दिव्य रूप में आये केशव | 

दिव्य रूप मेरे केशव का सबसे अलग दमकता था,
कई लाख सूरज जितना चेहरे पर तेज़ चमकता था |
इतने ऊँचे थे भगवन सर में अम्बर लगता था,
और हज़ारों भुजा देख अर्जुन को डर लगता था ||

माँ गंगा का पावन जल उनके कदमों को चूम रहा था,

और तर्जनी उँगली में भी चक्र सुदर्शन घूम रहा था |
नदियों की कल-कल सागर का शोर सुनाई देता था,
केशव के अंदर पूरा ब्रह्मांड दिखाई देता था ||
 

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ - Aree Kaan Kholkar Suno Parth | Mahabharata Poem On Arjuna
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

जैसे ही मेरे माधव का कद थोड़ा-सा बड़ा हुआ,
सहमा-सहमासा था अर्जुन एक-दम रथ से खड़ा हुआ |
माँ गीता के ग्यान से सीधे ह्रदय पर प्रहार हुआ,
मृत्यु के आलिंगन हेतु फिर अर्जुन तैयार हुआ ||

मैं धर्म भुजा का वाहक हूँ, कोई मुझको मार नहीं सकता |
जिसके रथ पर भगवन हो वो युद्ध हारे नहीं सकता ||


जितने यहाँ अधर्मी है चुन-चुनकर उन्हें सजा दूंगा,
इतना रक्त बहाऊंगा धरती की प्यास बुझा दूंगा||

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता ||  || Mahabharata Poem On Arjuna ||
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna
अर्जुन की आँखों में धर्म का राज दिखाई देता था,
पार्थ में केशव को बस यमराज दिखाई देता था |
रण में जाने से पहले उसने एक काम किया,
चरणों में रखा शीश अर्जुन ने, केशव को प्रणाम किया |

जिधर चले बाण पार्थ के सब पीछे हट जाते थे,
रण्भुमि के कोने कोने लाशो से पट जाते थे |
करुक्षेत्र की भूमि पे नाच नचाया अर्जुन ने,
साड़ी धरती लाल हुई कोहराम मचाया अर्जुन ने |
बड़े बड़े महारथियों को भी नानी याद दिलाई थी,
मृत्यु का वो तांडव था जो मृत्यु भी घबराई थी ||
 
ऐसा लगता था सबको मृत्यु से प्यार हुआ है जी !
ऐसा धर्मयुद्ध दुनिया में पहली बार हुआ है जी !!

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna
अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna

अधर्म समूचा नष्ट किया पार्थ ने कसम निभाई थी,
इन्द्रप्रथ के राजभवन पर धर्म भुजा लहराई थी |
धर्मराज के शीश के ऊपर राज मुकुट की छाया थी,
पर सारी दुनिया जानती थी ये बस केशव की माया थी ||
धर्म किया स्थापित जिसने दाता दया निधान की जय !
हाथ उठा कर सारे बोलो चक्रधारी भगवान की जय !!


- Amit Sharma 


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