INSPIRATIONAL POEMS IN HINDI
ये वक्त की पाबन्दियां
ये वक्त की पाबन्दियां भी
चीज क्या नायाब है !
है कोई जो नर सुधरता,
याकि कोई बर्बाद है ।
शिद्दतों से मिन्नतों से,
है न पिघला ये कभी !
पाश का बन्धन भी टूटा,
जब भी उलझा है कभी ।
क्या रोकना, क्या टोकना
वक्त में घुलते चलो !
खुद को संभालो आप ही,
वह कैद में आ जायेगा ।
ये वो घड़ी है वक्त की
अब जंग का आगाज हो !
इस तरफ याकि उस तरफ
कर फैसला, जो आज हो
ये वक्त की पाबन्दियां भी
चीज क्या नायाब है ।
✍ Rakesh Jha

