सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

लकीरें - हर्ष नाथ झा | नियति, गरीबी और जातिवाद पर मार्मिक हिंदी कविता

Harivansh Rai Bachchan Ki Hindi Poem | क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी - Kya Karu Samvedna Le Kar Tumhari

Harivansh Rai Bachchan Ki Hindi Poem

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी - Kya Karu Samvedna Le Kar Tumhari

हरिवंश राय बच्चन हिंदी कविता

Harivansh Rai Bachchan Ki Hindi Poem | क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी - Kya Karu Samvedna Le Kar Tumhari

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी ?

क्या करूँ ?

मैं दुःखी जब-जब हुआ
संवेदना तुमने दिखाई,
मैं कृतज्ञ हुआ हमेशा
रीति दोनों ने निभाई,
किंतु इस आभार का अब
हो उठा है बोझ भारी

Harivansh Rai Bachchan Ki Hindi Poem | क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी - Kya Karu Samvedna Le Kar Tumhari

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी ?

क्या करूँ ?

एक भी उच्छ्वास मेरा
हो सका किस दिन तुम्हारा?
उस नयन से बह सकी कब
इस नयन की अश्रु-धारा?

सत्य को मूँदे रहेगी
शब्द की कब तक पिटारी?
क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी?
क्या करूँ?

कौन है जो दूसरे को
दुःख अपना दे सकेगा?
कौन है जो दूसरे से
दुःख उसका ले सकेगा?
क्यों हमारे बीच धोखे
का रहे व्यापार जारी?

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी?
क्या करूँ?

Harivansh Rai Bachchan Ki Hindi Poem | क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी - Kya Karu Samvedna Le Kar Tumhari

क्यों न हम लें मान, हम हैं
चल रहे ऐसी डगर पर,
हर पथिक जिस पर अकेला,
दुःख नहीं बँटते परस्पर,
दूसरों की वेदना में
वेदना जो है दिखाता,
वेदना से मुक्ति का निज
हर्ष केवल वह छिपाता,
तुम दुःखी हो तो सुखी मैं
विश्व का अभिशाप भारी!

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी?
क्या करूँ?

Harivansh Rai Bachchan Ki Hindi Poem | क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी - Kya Karu Samvedna Le Kar Tumhari

Harivansh Rai Bachchan Ki Hindi Poem | क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी - Kya Karu Samvedna Le Kar Tumhari

Harivansh Rai Bachchan Ki Hindi Poem | क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी - Kya Karu Samvedna Le Kar Tumhari

📢 Sirf Padhein Nahi, Likhein Bhi!
Article, Kahani, Vichar, ya Kavita — Hindi, English ya Maithili mein. Apne shabdon ko Sahityashala par pehchan dein.

Submit Your Content →

Famous Poems