उबलते वक़्त पानी सोचता होगा ज़रूर
"उबलते वक़्त पानी सोचता होगा ज़रूर,
अगर बर्तन न होता तो बताता आग को"
— अश्वनी मित्तल 'ऐश'
अश्वनी मित्तल की अपनी आवाज़ में सुनें (वीडियो)
[00:02:30] पर आप इस मशहूर शेर को सुन सकते हैं.
इस शेर का गहरा मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक अर्थ
अश्वनी मित्तल 'ऐश' का यह शेर मात्र दो पंक्तियों में मानव स्वभाव, विवशता और भीतर दबी असीमित ऊर्जा का सजीव चित्रण करता है। यहाँ "पानी" हमारे भीतर छुपी क्षमताओं, क्रोध या भावनाओं का प्रतीक है, जबकि "बर्तन" समाज की मर्यादाओं, जिम्मेदारियों और उन सीमाओं का प्रतिनिधित्व करता है जो हमें रोके रखती हैं।
अक्सर इंसान परिस्थितियों की आग में उबलता है, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों (बर्तन) के कारण वह उस आग का प्रतिकार नहीं कर पाता। यदि ये बंदिशें न हों, तो इंसान की असली ताकत दुनिया देख ले। यह शेर हमें सहनशीलता और उस मौन संघर्ष की याद दिलाता है, जिसे हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी जरूर महसूस करता है।
Hinglish Lyrics & Best Sher from the Video:
"Ubalte waqt pani sochta hoga zaroor,
Agar bartan na hota to batata aag ko." [00:02:30]
"Tum mujhe kehte ho shayari chhod do,
Seedhe-seedhe kaho zindagi chhod do.
Muddaton baad to milne aaye ho tum,
Meri aankhon mein dekho ghadi chhod do." [00:09:01]
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- जब इंसान अपनी सीमाओं को तोड़कर स्वतंत्र होने की कल्पना करता है, तो मुमताज़ गुरमानी की यह नज़्म मैं कबूतरों को उड़ाता हूँ एक अलग ही सुकून और आज़ादी का एहसास कराती है।
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