साहित्यशाला में आपका स्वागत है। हिंदी साहित्य जगत में जिस तरह हम हरिवंश राय बच्चन की कविताओं में जीवन का संघर्ष देखते हैं, उसी तरह रबिन्द्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) की कविताओं में हमें आत्मा और परमात्मा के मिलन का एक अद्भुत संगीत सुनाई देता है।
आज हम आपके लिए गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर की एक ऐसी ही Motivational Hindi Poem लेकर आए हैं, जो निराशा के बादलों को हटाकर जीवन में नई उमंग भर देती है। यदि आप जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की तलाश में हैं, तो हमारी अन्य प्रेरणादायक हिंदी कविताएं (Motivational Poems) भी अवश्य पढ़ें।
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| प्रेम, प्राण और गीत - रबिन्द्रनाथ टैगोर |
यह कविता 'प्रेम, प्राण, गीत और गंध' के माध्यम से उस अनंत शक्ति (ईश्वर) के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
प्रेम, प्राण, गीत, गन्ध, आभा और पुलक में
- रबिन्द्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore)
प्रेम, प्राण, गीत, गन्ध, आभा और पुलक में,
आप्लावित कर अखिल गगन को, निखिल भुवन को,
अमल अमृत झर रहा तुम्हारा अविरल है।
दिशा-दिशा में आज टूटकर बन्धन सारा-
मूर्तिमान हो रहा जाग आनंद विमल है;
सुधा-सिक्त हो उठा आज यह जीवन है।
शुभ्र चेतना मेरी सरसाती मंगल-रस,
हुई कमल-सी विकसित है आनन्द-मग्न हो;
अपना सारा मधु धरकर तब चरणों पर।
जाग उठी नीरव आभा में हृदय-प्रान्त में,
उचित उदार उषा की अरुणिम कान्ति रुचिर है,
अलस नयन-आवरण दूर हो गया शीघ्र है।।
कविता का भावार्थ (Meaning of the Poem)
रबिन्द्रनाथ टैगोर की यह कविता आध्यात्म और आत्म-जागृति (Self-awakening) का एक सुंदर उदाहरण है। यहाँ कवि ईश्वर की उस सत्ता का अनुभव कर रहे हैं जो सृष्टि के कण-कण में समाई है।
- प्रथम पद्यांश: कवि कहते हैं कि प्रेम, गीत और गंध (सुगंध) के रूप में ईश्वर का पवित्र अमृत (अमल अमृत) पूरे आकाश और धरती (निखिल भुवन) पर लगातार बरस रहा है।
- द्वितीय पद्यांश: आज सारे सांसारिक बंधन टूट गए हैं। जीवन में एक निर्मल आनंद (आनंद विमल) साक्षात् मूर्तिमान हो उठा है, जिससे यह जीवन अमृत से भीग गया है (सुधा-सिक्त)।
- तृतीय पद्यांश: कवि की चेतना एक सफेद कमल (शुभ्र चेतना) की तरह खिल उठी है। जैसे कमल अपना सारा मधु समर्पित कर देता है, वैसे ही कवि अपनी चेतना को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर रहे हैं।
- चतुर्थ पद्यांश: हृदय के भीतर एक नई सुबह (उषा) की लालिमा जाग उठी है। अज्ञानता और आलस्य का पर्दा (नयन-आवरण) अब आँखों से हट गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविता 'प्रेम, प्राण, गीत' का क्या अर्थ है?
उत्तर: इस कविता का अर्थ है कि ईश्वर का प्रेम और आनंद पूरी सृष्टि में बरस रहा है। जब मनुष्य अपने अहंकार के बंधन तोड़ देता है, तो उसकी चेतना कमल की तरह खिल उठती है।
प्रश्न: रबिन्द्रनाथ टैगोर की मोटिवेशनल कविता का संदेश क्या है?
उत्तर: टैगोर की यह कविता संदेश देती है कि निराशा और आलस्य को छोड़कर आत्म-जागृति (Self-awakening) की ओर बढ़ना चाहिए। सकारात्मक ऊर्जा ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग है।
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रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविताएं हमें मुक्ति का अहसास दिलाती हैं। यदि आप स्वतंत्रता और देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत कविताएं पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी देशभक्ति कविताओं का संग्रह जरूर देखें।
इसके अलावा, जीवन के बंधनों से मुक्ति पर आधारित उनकी एक और प्रसिद्ध रचना, 'पिंजरे की चिड़िया' भी पाठकों द्वारा बहुत पसंद की गई है।
अधिक रचनाओं के लिए आप हमारे रबिन्द्रनाथ टैगोर हिंदी कविता संग्रह पेज पर जा सकते हैं।