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15 August Deshbhakti Kavita 2026 | Jab Bharat Azad Hua Tha & 15+ Poems

15 August Deshbhakti Kavita | Independence Day Poems In Hindi 2026

15 August Deshbhakti Kavita - Independence Day Poems in Hindi
स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर वीर रस और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हिंदी कविताओं का पावन संग्रह

स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, वरन हर भारतीय के स्पंदन में गूंजता हुआ राष्ट्रप्रेम का एक शाश्वत राग है। 15 अगस्त के इस पावन पर्व पर, हमें उन महान क्रांतिकारियों और अमर सेनानियों का पुण्य स्मरण होता है, जिनके रक्त से इस अखंड भारतवर्ष की माटी सिंचित हुई है। वैचारिक आज़ादी की बात करें तो फैज़ अहमद फैज़ की 'बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे' जैसी कालजयी रचनाएं भी इसी स्वतंत्र चेतना का उद्घोष करती हैं। साहित्यशाला के इस विशेष मंच पर, हम आपके लिए लेकर आए हैं 15 August Deshbhakti Kavita का सबसे प्रामाणिक, विस्तृत और साहित्यिक संग्रह।

यदि आप विद्यालयों एवं सांस्कृतिक मंचों के लिए राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत कविताओं (School Speech Poems) की खोज कर रहे हैं, या स्वतंत्रता दिवस के शुभ प्रभात पर व्हाट्सएप स्टेटस (WhatsApp Status) के माध्यम से देशप्रेम साझा करना चाहते हैं, तो यहाँ संकलित Independence Day Poems In Hindi आपके अंतस को राष्ट्रभक्ति के दिव्य प्रकाश से आलोकित कर देंगी। नीचे दी गई सारणी से अपनी इच्छित रचना चुनकर सीधे उस तक पहुंच सकते हैं।

👉 नीचे दी गई समस्त कविताओं को आप अपने मित्रों एवं परिवार के साथ WhatsApp और सोशल मीडिया पर निर्बाध साझा कर सकते हैं।


⚡ 15 अगस्त पर छोटी कविताएं (Short Independence Day Poems in Hindi)

यदि आप मंच पर कम समय में समां बांधना चाहते हैं या सोशल मीडिया स्टेटस के लिए 2 मिनट की देशभक्ति कविता खोज रहे हैं, तो नीचे दी गई काव्य पंक्तियां आपके लिए ही रचित हैं।

"खोलकर देख लो इतिहास, वीरों की कहानी कहती है,
यह वो भूमि है भारत, जहाँ रगों में राष्ट्रभक्ति बहती है।
तिरंगे की आन पर मिट जाना मंजूर है हमको,
इसकी तीन पट्टियों में ही हमारी जान रहती है।"

ये छोटी रचनाएं प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों के लिए कंठस्थ करने में अत्यधिक सुगम हैं और राष्ट्रीय उत्सव के भावों को अत्यंत संक्षिप्त रूप में प्रकट करती हैं। और अधिक वृहद संकलन के लिए आप हमारी मुख्य शाखा Patriotic Poems in Hindi पर भी जा सकते हैं।

🏫 स्कूल प्रतियोगिता एवं भाषण हेतु कविताएं (School Competition Selections)

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में विद्यालयों में आयोजित होने वाले काव्य पाठ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वीर रस और ओजपूर्ण रचनाओं की अत्यधिक मांग रहती है। सुभद्रा कुमारी चौहान की कालजयी शैली में रचित रचनाओं की भांति ही, यहाँ प्रस्तुत कविताएं जैसे "जब भारत आजाद हुआ था" अथवा "नमो, नमो, नमो" बाल एवं युवा विद्यार्थियों की वाणी में ओज और तेज स्थापित करने के लिए पूर्णतः उपयुक्त हैं। ये रचनाएं न केवल प्रतियोगिता में उच्च स्थान सुनिश्चित करती हैं बल्कि श्रोताओं के हृदय में राष्ट्रप्रेम का ज्वार उठा देती हैं।


देश की लाज बचाने को

[भूमिका: यह मार्मिक रचना सरहद पर खड़े उन प्रहरियों के अदम्य साहस को समर्पित है, जो अपने प्राणों की परवाह किए बिना राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा करते हैं।]

देश की लाज बचाने को, अपनी जान गवाई है,
खा कर गोली सीने में, अपनी कसम निभाई है |
जिनको ये भारतवर्ष, अपने लहू से ज्यादा प्यारा है,
ऐसे उन वीर सपूतों को, शत-शत नमन हमारा है ||

भारत माँ की रक्षा के लिए, अपना कर्तव्य निभाया है,
मातृभूमि के गौरव पर, न्यौछावर उनकी काया है |
जिनको परिवार से ज्यादा, ये देश ,तिरँगा प्यारा है,
ऐसे उन वीर सपूतों को, शत-शत नमन हमारा है ||

लथपथ पड़े जमीं पर, भारत माँ की जय बोली हैं
जिनके सिंहनाद से सहमी, धरती फिर से डोली हैं |
जिनके जज्बे को करता सलाम, देखो ये भारत सारा है,
ऐसे उन वीर सपूतों को, शत-शत नमन हमारा है ||

[उपसंहार: वीर सपूतों का यह सिंहनाद हमें स्मरण कराता है कि हमारी सुख-शांति इन वीरों के सर्वोच्च बलिदानों की ऋणी है।]

15 August Deshbhakti Kavita - Tribute to Indian Army and Martyrs
भारत की पावन धरा के अमर बलिदानियों को कोटि-कोटि वंदन

स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर है

[भूमिका: सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय पर्व के उल्लास को समेटे हुए यह कविता प्रत्येक नागरिक को देश की आंतरिक शक्ति के संवर्धन हेतु ललकारती है।]

स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर है, विजयी-विश्व का गान अमर है,
देश-हित सबसे पहले है, बाकि सबका राग अलग है |

आजादी के पावन अवसर पर, लाल किले पर तिरंगा फहराना है,
श्रद्धांजलि अर्पण कर अमर ज्योति पर, देश के शहीदों को नमन करना है |

देश के उज्ज्वल भविष्य की खातिर, अब बस आगे बढ़ना है,
पूरे विश्व में भारत की शक्ति का, नया परचम फहराना है |

अपने स्वार्थ को पीछे छोड़ककर, राष्ट्रहित के लिए लड़ना है,
बात करे जो भेदभाव की, उसको सबक सिखाना है |

स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर है, विजयी-विश्व का गान अमर है,
देश-हित सबसे पहले है, बाकि सबका राग अलग है |

[उपसंहार: वैयक्तिक स्वार्थों को तिलांजलि देकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानना ही इस पावन दिवस का मुख्य संकल्प है।]

तिरंगा है फहराना

Tiranga Hai Fahrana - Independence Day Poems in Hindi Text
अखंडता और गौरव का प्रतीक - हमारा प्यारा राष्ट्रीय ध्वज

[भूमिका: जाति-पाति और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर संपूर्ण राष्ट्र को अखंडता के सूत्र में पिरोने का आह्वान करती एक अत्यंत प्रासंगिक रचना।]

15 अगस्त का दिन है आया,
लाल किले पर तिरंगा है फहराना |
ये शुभ दिन है हम भारतीयों के जीवन का,
इस दिन देश आजाद हुआ था ||

न जाने कितने शहीदों के बलिदानों पर,
हमने आजादी को पाया था |
भारत माता की आजादी की खातिर,
वीरों ने अपना सर्वश लुटाया था ||

उनके बलिदानों की खातिर ही,
भारत को नई पहचान दिलानी है |
खुद को बनाकर एक विकसित राष्ट्र,
एक नया इतिहास बनाना है ||

जाति-पाति, ऊँच-नीच के भेदभाव को मिटाना है,
हर भारतवासी को अब अखंडता का पाठ है सिखाना ||
वीर शहीदों की कुर्बानियों को अब व्यर्थ नहीं है गवाना,
राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य बनाकर, आजादी का अर्थ है समझाना ||

[उपसंहार: जब तक भेदभाव का अंधकार नहीं मिटेगा, तब तक स्वतंत्रता का सूर्य पूर्ण रूप से प्रकाशमान नहीं हो सकता।]

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा

[भूमिका: पार्षद जी द्वारा रचित यह अमर ध्वज गीत भारतीय चेतना का प्राण है। यह रचना हमारे कंठ-कंठ में समाहित है और हमें सदैव अपनी संप्रभुता के रक्षण की प्रेरणा देती है।]

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा

सदा शक्ति बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला,
वीरों को हर्षाने वाला, मातृभूमि का तन-मन सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा……..

स्वतंत्रता के भीषण रण में, लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में, मिट जाये भय संकट सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा……….

इस झंडे के नीचे निर्भय, हो स्वराज जनता का निश्चय,
बोलो भारत माता की जय, स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा…………….

आओ प्यारे वीरों आओ, देश-जाति पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ, प्यारा भारत देश हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा……….

इसकी शान न जाने पावे, चाहे जान भले ही जावे,
विश्व-विजय करके दिखलावे, तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा………..

[उपसंहार: राष्ट्रीय ध्वज की यह शान युगों-युगों तक अक्षुण्ण रहे, यही कोटि-कोटि भारतवासियों का एकमात्र ध्येय है।]

Vijayi Vishwa Tiranga Pyara - Patriotic Slogans and Poems in Hindi
"विश्व-विजय करके दिखलावे, तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा"

ऐ मेरे प्यारे वतन

[भूमिका: प्रेम, विरह और अनन्य निष्ठा का एक ऐसा संगम, जो प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ देश की सीमाओं पर तैनात प्रहरियों के अंतर्मन को भी स्पंदित कर देता है।]

ऐ मेरे प्यारे वतन,
ऐ मेरे बिछड़े चमन,
तुझ पे दिल कुरबान ,
तुझ पे दिल कुरबान |

तू ही मेरी आरजू़,
तू ही मेरी आबरू,
तू ही मेरी जान |

तेरे दामन से जो आए,
उन हवाओं को सलाम |
चूम लूँ मैं उस जुबाँ को,
जिसपे आए तेरा नाम ||

सबसे प्यारी सुबह तेरी,
सबसे रंगी तेरी शाम |
तुझ पे दिल कुरबान,

माँ का दिल बनके कभी,
सीने से लग जाता है तू |
और कभी नन्हीं-सी बेटी.
बन के याद आता है तू ||
जितना याद आता है मुझको,
उतना तड़पाता है तू |
तुझ पे दिल कुरबान,

छोड़ कर तेरी ज़मीं को,
दूर आ पहुँचे हैं हम |
फिर भी है ये ही तमन्ना,
तेरे ज़र्रों की कसम ||

हम जहाँ पैदा हुए उस,
जगह पे ही निकले दम |
तुझ पे दिल कुरबान,

[उपसंहार: वतन की यादों का यह कारवां हमें सदैव अपनी जड़ों से जोड़े रखता है और हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करता है।]

अपना देश स्वतंत्र हुआ

Apna Desh Swatantra Hua - Historical Independence Day Poem
"बिस्मिल, सुभाष, आजाद, भगत सिंह दीवाने, सिर कफन बांधकर चलते थे"

[भूमिका: इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे स्वाभिमान को झकझोरती यह कविता अमर क्रांतिकारियों के बलिदान की गाथा को पिरोती है।]

आपसी कलह के कारण से, वर्षों पहले परतंत्र हुआ
पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस, को अपना देश स्वतंत्र हुआ

उन वीरों को हम नमन करें, जिनने अपनी कुरबानी दी
निज प्राणों की परवाह न कर, भारत को नई रवानी दी

उन माताओं को याद करें, जिनने अपने प्रिय लाल दिए
मस्तक मां का ऊंचा करने, को उनने बड़े कमाल किए

बिस्मिल, सुभाष, तात्या टोपे, आजाद, भगत सिंह दीवाने
सिर कफन बांधकर चलते थे, आजादी के यह परवाने

देश आजाद कराने को जब, पहना केसरिया बाना
तिलक लगा बहनें बोली, भैया, विजयी होकर आना

माताएं बोल रही बेटा, बन सिंह कूदना तुम रण में
साहस व शौर्य-पराक्रम से, मार भगाना क्षणभर में

दुश्मन को धूल चटा करके, वीरों ने ध्वज फहराया था
जांबाजी से पा विजयश्री, भारत आजाद कराया था

स्वर्णिम इतिहास लिए आया, यह गौरवशाली दिवस आज
श्रद्धा से नमन कर रहा है, भारत का यह सारा समाज

जय हिन्द हमारे वीरों का, सबसे सशक्त शुभ मंत्र हुआ
पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस, को अपना देश स्वतंत्र हुआ

[उपसंहार: केसरिया बाने और विजयश्री के प्रतिरूप ये पंक्तियां प्रत्येक देशवासी के मन में स्वाभिमान का ज्वार जगाती हैं।]

भारत माँ के अमर सपूतो

[भूमिका: राणा प्रताप और भगत सिंह के रक्त की ऊष्मा को समेटे यह रचना भारत के उन्नत भाल को विश्व पटल पर सर्वोच्च शिखर तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती है। राजपूतों के अदम्य पराक्रम और गोरा-बादल की गाथा की भांति ही यह कविता शौर्य का उत्तम उदाहरण है।]

Bharat Maa ke Amar Saputo - Oorja Patriotic Poetry
"भगत सिंह, राणा प्रताप का बहता रक्त तुम्हारे तन में"

भारत माँ के अमर सपूतो, पथ पर आगे बढ़ते जाना
पर्वत, नदिया और समन्दर, हंस कर पार सभी कर जाना

तुममे हिमगिरी की ऊँचाई सागर जैसी गहराई है
लहरों की मस्ती और सूरज जैसी तरुनाई है तुममे

भगत सिंह, राणा प्रताप का बहता रक्त तुम्हारे तन में
गौतम, गाँधी, महावीर सा रहता सत्य तुम्हारे मन में

संकट आया जब धरती पर तुमने भीषण संग्राम किया
मार भगाया दुश्मन को फिर जग में अपना नाम किया

आने वाले नए विश्व में तुम भी कुछ करके दिखाना
भारत के उन्नत ललाट को जग में ऊँचा और उठाना

[उपसंहार: सत्य, अहिंसा और महावीरी पराक्रम का समन्वय ही भारत को पुनः विश्व गुरु के आसन पर स्थापित करेगा।]

मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन

[भूमिका: सिनेमाई परदे से लेकर जन-जन के हृदय का हार बना यह अनुपम गीत भारत भूमि को स्वर्ग बनाने के हमारे साझा स्वप्न को सुंदर लयात्मकता प्रदान करता है।]

मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन
शांति का उन्नति का प्यार का चमन
मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन
शांति का उन्नति का प्यार का चमन
इसके वास्ते निसार है मेरा तन मेरा मन

ए वतन, ए वतन, ए वतन
जानेमन, जानेमन, जानेमन
ए वतन, ए वतन, ए वतन
जानेमन, जानेमन, जानेमन

मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन
शांति का उन्नति का प्यार का चमन

आ.. हा.. आहा.. आ..

इसकी मिट्टी से बने तेरे मेरे ये बदन
इसकी धरती तेरे मेरे वास्ते गगन
इसने ही सिखाया हमको जीने का चलन
जीने का चलन..

इसके वास्ते निसार है मेरा तन मेरा मन
ए वतन, ए वतन, ए वतन
जानेमन, जानेमन, जानेमन
मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन
शांति का उन्नति का प्यार का चमन

अपने इस चमन को स्वर्ग हम बनायेंगे
कोना-कोना अपने देश का सजायेंगे
जश्न होगा ज़िन्दगी का, होंगे सब मगन
होंगे सब मगन..

इसके वास्ते निसार है मेरा तन मेरा मन
ए वतन, ए वतन, ए वतन
जानेमन, जानेमन, जानेमन

मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन
शांति का उन्नति का प्यार का चमन
मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन
शांति का उन्नति का प्यार का चमन

इसके वास्ते निसार है मेरा तन मेरा मन
ए वतन, ए वतन, ए वतन
जानेमन, जानेमन, जानेमन
ए वतन, ए वतन, ए वतन
जानेमन, जानेमन, जानेमन..

हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे

[भूमिका: बाल सुलभ मासूमियत और पाठशालाओं में मिलने वाली बूँदी (गुलदाना) के मिठास के साथ-साथ पतंगबाज़ी के उल्लास को अभिव्यक्त करती एक मनभावन बाल-कविता। झाँसी की रानी की वीरगाथा की भांति ही यह बाल-मन में राष्ट्र के प्रतीकों के प्रति आदर भाव जगाती है।]

Independence Day Child Poem in Hindi - School Functions
विद्यालयों में गूंजती बाल कविता - भारत माता की जय

हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे,
आजादी का मतलब नहीं है समझते।

इस दिन पर school में तिरंगा है फहराते,
गाकर अपना राष्ट्रगान फिर हम,
तिरंगे का सम्मान है करते,
कुछ देशभक्ति की झांकियों से
दर्शकों को मोहित है करते
हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे,
आजादी का अर्थ सिर्फ यही है समझते।

वक्ता अपने भाषणों में,
न जाने क्या-क्या है कहते,
उनके अन्तिम शब्दों पर,
बस हम तो ताली है बजाते।

हम नन्हें-मुन्ने है बच्चे,
आजादी का अर्थ सिर्फ इतना ही है समझते।

विद्यालय में सभा की समाप्ति पर,
गुलदाना है बाँटा जाता,
भारत माता की जय के साथ,
स्कूल का अवकाश है हो जाता,
शिक्षकों का डाँट का डर,

इस दिन न हमको है सताता,
छुट्टी के बाद पतंगबाजी का,
लुफ्त बहुत ही है आता,
हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे,
बस इतना ही है समझते,
आजादी के अवसर पर हम,
खुल कर बहुत ही मस्ती है करते।।

भारत माता की जय。
-वन्दना शर्मा।

[उपसंहार: बचपन की यादों से लिपटी यह कविता प्राथमिक विद्यालय के बच्चों द्वारा मंच पर पाठ के लिए सर्वोत्तम विकल्प है।]

जब भारत आज़ाद हुआ था

[भूमिका: यह कविता साहित्यशाला के पाठकों द्वारा सर्वाधिक पसंद की जाने वाली रचना है। यह केवल आज़ादी की भोर का स्वागत नहीं करती, बल्कि विभाजन के उस रक्तरंजित दंश का भी प्रामाणिक चित्रण करती है, जिसने हमारे देश की भौगोलिक और भावुक पहचान को सदा के लिए बदल दिया। (सामाजिक विडंबनाओं पर प्रहार करती नवाज़ देवबंदी की गज़ल 'जलते घर को देखने वालो' भी इसी पीड़ा को स्वर देती है)।]

Jab Bharat Azad Hua Tha Poem - Full Lyrics & Partition History
"सरहद नाम की रेखा खींची थी, जिसे कोई पार ना कर पाया था"

जब भारत आज़ाद हुआ था|
आजादी का राज हुआ था||
वीरों ने क़ुरबानी दी थी|
तब भारत आज़ाद हुआ था||

भगत सिंह ने फांसी ली थी|
इंदिरा का janaaza उठा था||
इस मिटटी की खुशबू ऐसी थी
तब खून की आँधी बहती थी||

वतन का ज़ज्बा ऐसा था|
जो सबसे लड़ता जा रहा था||
लड़ते लड़ते जाने गयी थी|
तब भारत आज़ाद हुआ था||

फिरंगियों ने ये वतन छोड़ा था|
इस देश के रिश्तों को तोडा था||
फिर भारत दो भागो में बाटा था|
एक हिस्सा हिन्दुस्तान था||

दूसरा पाकिस्तान कहलाया था|
सरहद नाम की रेखा खींची थी||
जिसे कोई पार ना कर पाया था|
ना जाने कितनी माये रोइ थी,

ना जाने कितने बच्चे भूके सोए थे,
हम सब ने साथ रहकर
एक ऐसा समय भी काटा था||
विरो ने क़ुरबानी दी थी
तब भारत आज़ाद हुआ था||

[उपसंहार: इतिहास के इस कड़वे सच से आंखें मूंदना संभव नहीं। यह कविता आज़ादी की महिमा के साथ उसके पीछे छिपे विस्थापन के दर्द को संजीदगी से बयां करती है।]

प्यारे भारत देश

[भूमिका: हिंदी साहित्य के मूर्धन्य कवि 'एक भारतीय आत्मा' पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह अमर रचना वेदों से लेकर आज तक के त्याग और हमारी सामासिक संस्कृति का एक भव्य दस्तावेज है।]

Pyare Bharat Desh - Makhanlal Chaturvedi Poem Lyrics
"काबा से कैलाश तलक उमड़ी कविता कल्याणी"

प्यारे भारत देश
गगन-गगन तेरा यश फहरा
पवन-पवन तेरा बल गहरा
क्षिति-जल-नभ पर डाल हिंडोले
चरण-चरण संचरण सुनहरा
ओ ऋषियों के त्वेष
प्यारे भारत देश।।

वेदों से बलिदानों तक जो होड़ लगी
प्रथम प्रभात किरण से हिम में जोत जागी
उतर पड़ी गंगा खेतों खलिहानों तक
मानो आँसू आये बलि-महमानों तक
सुख कर जग के क्लेश
प्यारे भारत देश।।

तेरे पर्वत शिखर कि नभ को भू के मौन इशारे
तेरे वन जग उठे पवन से हरित इरादे प्यारे!
राम-कृष्ण के लीलालय में उठे बुद्ध की वाणी
काबा से कैलाश तलक उमड़ी कविता कल्याणी
बातें करे दिनेश
प्यारे भारत देश।।

जपी-तपी, संन्यासी, कर्षक कृष्ण रंग में डूबे
हम सब एक, अनेक रूप में, क्या उभरे क्या ऊबे
सजग एशिया की सीमा में रहता केद नहीं
काले गोरे रंग-बिरंगे हममें भेद नहीं
श्रम के भाग्य निवेश
प्यारे भारत देश।।

वह बज उठी बासुँरी यमुना तट से धीरे-धीरे
उठ आई यह भरत-मेदिनी, शीतल मन्द समीरे
बोल रहा इतिहास, देश सोये रहस्य है खोल रहा
जय प्रयत्न, जिन पर आन्दोलित-जग हँस-हँस जय बोल रहा,
जय-जय अमित अशेष
प्यारे भारत देश।।

[उपसंहार: गंगा-जमुनी तहज़ीब, बुद्ध की करुणा और कृष्ण की बाँसुरी का यह समन्वय केवल भारत की भूमि पर ही संभव है।]

बच्चा बच्चा राम है

[भूमिका: भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति के एकत्व को रेखांकित करती यह श्रेष्ठ रचना हमारी पावन परंपराओं का दर्शन कराती है। इसके शब्द वैसे ही पावन हैं जैसे गगन में लहराता हुआ हमारा परचम।]

Chandan hai is desh ki mati - Sanatan Patriotic Poem
"चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है"

चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु ||

हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || 1 ||

जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || 2 ||

जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है ||

कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है
सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है
तिलक किया मस्तक चूमा बोली ये ले कफन तुम्हारा
मैं मां हूं पर बाद में, पहले बेटा वतन तुम्हारा

धन्य है मैया तुम्हारी भेंट में बलिदान में
झुक गया है देश उसके दूध के सम्मान में
दे दिया है लाल जिसने पुत्र मोह छोड़कर
चाहता हूं आंसुओं से पांव वो पखार दूं
ए शहीद की मां आ तेरी मैं आरती उतार लूं...

[उपसंहार: एक माँ का अपने वीर पुत्र को तिलक लगाकर कफ़न सौंप देना, इस धरा की अप्रतिम त्याग परंपरा का सर्वोच्च शिखर है।]

आज तिरंगा लहराता है

[भूमिका: सजीवन मयंक जी द्वारा रचित यह समसामयिक रचना आज़ादी के संघर्षों के साथ हमारे भौगोलिक प्रहरी हिमालय और अध्यात्म के विश्व शांति संदेश को बहुत ही सहज ढंग से सामने रखती है। बापू के अहिंसा के दर्शन को गहराई से समझने हेतु हमारी विशेष प्रस्तुति महात्मा गांधी पर कविता अवश्य पढ़ें।]

Aaj Tiranga Lehrata hai - Sajeevan Mayank Lyric Text
"प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर"

आज तिरंगा लहराता है अपनी पूरी शान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।

व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।

हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।

प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।

लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।

हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।

विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

[उपसंहार: व्यापार के छद्म भेष में आई गुलामी को परास्त कर पुनरुत्थान की ओर बढ़ता यह भारत समस्त विश्व को शांति का संदेश देता है।]

नमो, नमो, नमो

[भूमिका: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की यह ओजस्वी कविता स्वतंत्र भारत की ध्वजा का वंदन करती है। इसके शब्दों की गर्जना वैसी ही ओजपूर्ण है, जैसी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की रचना 'आज सिंधु में ज्वार उठा है' में दिखाई देती है।]

नमो, नमो, नमो।
नमो स्वतंत्र भारत की ध्वजा, नमो, नमो!

नमो नगाधिराज – शृंग की विहारिणी!
नमो अनंत सौख्य – शक्ति – शील – धारिणी!
प्रणय – प्रसारिणी, नमो अरिष्ट – वारिणी!
नमो मनुष्य की शुभेषणा – प्रचारिणी!
नवीन सूर्य की नई प्रभा, नमो, नमो!

हम न किसी का चाहते तनिक अहित, अपकार।
प्रेमी सकल जहान का भारतवर्ष उदार।

सत्य न्याय के हेतु, फहर-फहर ओ केतु
हम विचरेंगे देश-देश के बीच मिलन का सेतु
पवित्र सौम्य, शांति की शिखा, नमो, नमो!

तार-तार में हैं गुँथा ध्वजे, तुम्हारा त्याग!
दहक रही है आज भी, तुम में बलि की आग।
सेवक सैन्य कठोर, हम चालीस करोड़
कौन देख सकता कुभाव से ध्वजे, तुम्हारी ओर
करते तव जय गान, वीर हुए बलिदान,
अंगारों पर चला तुम्हें ले सारा हिंदुस्तान!
प्रताप की विभा, कृषानुजा, नमो, नमो!

[उपसंहार: दिनकर जी की यह काव्य चेतना 'चालीस करोड़' (तत्कालीन जनसंख्या) के त्याग और प्रताप की महागाथा है, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी हमारा मार्गदर्शन करती है।]

हे! राष्ट्रदेव

[भूमिका: यह कविता राष्ट्रीय पर्वों पर केवल उत्सव मनाने की औपचारिकता से परे हटकर, व्यवस्था और देश की सैन्य एवं वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। राष्ट्रीय संकल्पों की शुचिता को दर्शाने वाली ऐसी ही गंभीर अभिव्यक्ति आप हमारे गणतंत्र दिवस (Republic Day) काव्य संग्रह तथा व्यवस्था पर सवाल उठाती राहत इंदौरी की गज़ल 'लश्कर भी तुम्हारा है' में भी पा सकते हैं।]

He Rashtradev Poem Lyrics - Atmanirbhar Bharat Motivation
"आत्मनिर्भरता का वादा कर, हथियार खरीदो विदेशों से"

शहीदों की आत्मा है पुकार रही,
हे! राष्ट्रदेव अब मौन भंग करो |
कब तक लाशें गिनवाओगे ,
क्या जीवन का है मूल्य नहीं ||

कब तलक विदेशी शस्त्रों पर,
हम निर्भर रह पाएंगे |
कब तलक युद्ध निकट आने पर,
'रशिया' को दौर लगाएंगे ||

क्या राष्ट्र हमारा, विज्ञान रहित है !
इंजीनियर नहीं पैदा करता |
या शायद तुम्हें अपनी क्षमता का
है भान नहीं, सम्मान नहीं ||

आत्मनिर्भरता का वादा कर
हथियार खरीदो विदेशों से |
भूल गए होगे शायद ,
या फिर वचनों का है मूल्य नहीं ||

धृतराष्ट्र बने तुम चलते हो,
ऐय्यासी का है अंत नहीं |
कुछ शर्म पिलाओ नयनों को
अपने वादों को पूर्ण करो ||

[उपसंहार: जब तक देश रक्षा और तकनीक के धरातल पर स्वावलंबी नहीं बनता, तब तक आज़ादी का स्वप्न अधूरा है। यह कविता नीति-निर्धारकों के लिए एक सजग चेतावनी है।]


15 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व और प्रासंगिकता

15 August Historical Relevance and Documentaries
आज़ादी के आंदोलन के महानायक - नेताजी सुभाष चंद्र बोस

भारत का स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष १५ अगस्त को मनाया जाता है। सन् 1947 में इसी दिन भारत के निवासियों ने ब्रिटिश शासन से स्‍वतंत्रता प्राप्त की थी। यह भारत का राष्ट्रीय त्यौहार है। प्रतिवर्ष इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हैं।

१५ अगस्त १९४८ के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने, दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लोगों ने काफी हद तक अहिंसक प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में हिस्सा लिया।

स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारत को धार्मिक आधार पर विभाजित किया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान का उदय हुआ। विभाजन के बाद दोनों देशों में हिंसक दंगे भड़क गए और सांप्रदायिक हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं।

विभाजन के कारण मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। भारत की जनगणना 1951 के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए।

इस पावन राष्ट्रीय उत्सव को संपूर्ण देश में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। समस्त सरकारी एवं निजी संस्थानों में भव्य रूप से झंडा फहराने के समारोह (Flag Hoisting), परेड और सांस्कृतिक आयोजनों का संपादन होता है। वर्तमान डिजिटल युग में, युवा पीढ़ी इस गौरवशाली दिवस को अपनी वेशभूषा, वाहनों तथा घरों पर तिरंगा प्रदर्शित कर मनाती है। इसके अतिरिक्त, लोग सगे-संबंधियों के साथ देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत काव्य पाठ करते हैं, देशप्रेम के मधुर गीत सुनते हैं तथा ऐतिहासिक फिल्में देखते हैं। जय हिन्द! वन्दे मातरम!

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साहित्यशाला (Sahityashala): इस लेख में संकलित ऐतिहासिक एवं राष्ट्रकवियों की कालजयी रचनाओं (जैसे पंडित माखनलाल चतुर्वेदी एवं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताएं) का प्रस्तुतीकरण शुद्ध रूप से अकादमिक, साहित्यिक समीक्षा तथा शैक्षणिक उद्देश्यों (Educational Purposes Only) के लिए किया गया है। इन महाकवियों की मूल कृतियों पर बौद्धिक संपदा अधिकार उनके वैध उत्तराधिकारियों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। पाठकों से सादर अनुरोध है कि इन कविताओं का उपयोग केवल सांस्कृतिक, व्यक्तिगत तथा गैर-व्यावसायिक मंचों पर राष्ट्रप्रेम के प्रसार हेतु ही करें। व्यावसायिक उपयोग हेतु मूल प्रकाशक की अनुमति अनिवार्य है।

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