आज वीरान अपना घर देखा: अकेलेपन का आईना
हिंदी गज़ल के जनक दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar) की यह गज़ल मनुष्य के आंतरिक अकेलेपन और समाज की क्रूर सच्चाइयों का बेबाक चित्रण है। यह रचना उनके प्रसिद्ध संग्रह 'साये में धूप' का एक अनमोल हिस्सा है।
जब एक संवेदनशील व्यक्ति (शायर) अपने ही घर और समाज को ध्यान से देखता है, तो उसे क्या दिखाई देता है? यही इस गज़ल का मूल भाव है। नीचे हिंदी और हिंग्लिश में लिरिक्स (Lyrics) और इसका गहरा भावार्थ दिया गया है।
आज वीरान अपना घर देखा (Lyrics)
आज वीरान अपना घर देखा
तो कई बार झाँक कर देखा
पाँव टूटे हुए नज़र आए
एक ठहरा हुआ सफ़र देखा
रास्ता काट कर गई बिल्ली
प्यार से रास्ता अगर देखा
नालियों में हयात देखी है
गालियों में बड़ा असर देखा
उस परिंदे को चोट आई तो
आप ने एक-एक पर देखा
हम खड़े थे कि ये ज़मीं होगी
चल पड़ी तो इधर उधर देखा
Aaj Veeraan Apna Ghar Dekha (Hinglish Lyrics)
Aaj veeraan apna ghar dekha
To kai baar jhaank kar dekha
Paaon toote hue nazar aaye
Ek thehra hua safar dekha
Raasta kaat kar gayi billi
Pyar se raasta agar dekha
Naaliyon mein hayaat dekhi hai
Gaaliyon mein bada asar dekha
Us parinde ko chot aayi to
Aap ne ek ek par dekha
Hum khade the ki ye zameen hogi
Chal padi to idhar udhar dekha
शब्दार्थ (Word Meanings):
- वीरान (Veeraan): सुनसान, उजड़ा हुआ।
- हयात (Hayaat): ज़िंदगी, जीवन।
- पर (Par): पंख (Feather/Wing)।
- असर (Asar): प्रभाव।
दुष्यंत कुमार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप दुष्यंत कुमार कविता संग्रह देख सकते हैं।
भावार्थ और व्याख्या (Summary & Meaning)
1. आत्मनिरीक्षण और अकेलापन (Introspection):
"आज वीरान अपना घर देखा..." यहाँ 'घर' केवल ईंट-पत्थर का मकान नहीं, बल्कि कवि का अपना मन या अंतरात्मा है। जब उन्होंने अपने अंदर झाँका, तो उन्हें वहां सन्नाटा और खालीपन (वीरानगी) दिखाई दिया। यह 'वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है' जैसी आत्म-पीड़ा की गूँज है।
2. ठहरा हुआ जीवन (Stagnancy):
"पाँव टूटे हुए नज़र आए, एक ठहरा हुआ सफ़र देखा..." यह शेर जीवन की गतिहीनता (Stagnation) को दर्शाता है। ऐसा लगता है जैसे जीवन का सफ़र कहीं रुक सा गया है, आगे बढ़ने के साधन (पाँव) टूट चुके हैं।
3. सामाजिक विडंबना (Social Irony):
"नालियों में हयात देखी है..." यह दुष्यंत कुमार की तीखी नज़र है। जहाँ जीवन (हयात) को महलों में होना चाहिए था, वह आज नालियों (गंदगी/गरीबी) में बसर कर रही है। यह गरीबी और निम्न-मध्यमवर्गीय जीवन का यथार्थ चित्रण है।
4. संवेदनशीलता का दिखावा (Pretense of Sympathy):
"उस परिंदे को चोट आई तो..." यह शेर समाज की उस फितरत पर तंज है जो किसी के दुख को कुरेद-कुरेद कर (एक-एक पर) देखता है, लेकिन मदद नहीं करता। यह केवल तमाशबीन होने की निशानी है।
5. अस्थिरता (Instability):
"हम खड़े थे कि ये ज़मीं होगी..." अंतिम शेर जीवन की अनिश्चितता को बताता है। जिस ज़मीन (आधार) को हम स्थिर समझते थे, वह भी अचानक चल पड़ी (भूकंप/बदलाव), जिससे सारा संतुलन बिगड़ गया।
दुष्यंत कुमार की शायरी (Video)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: 'आज वीरान अपना घर देखा' का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि कवि ने जब अपने भीतर (मन में) झाँका, तो उन्हें वहां सन्नाटा, अकेलापन और उदासी दिखाई दी।
प्रश्न: 'नालियों में हयात देखी है' से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: कवि कहना चाहते हैं कि आज मनुष्य का जीवन इतना गिर चुका है कि वह गंदगी और गरीबी (नालियों) में जीने को मजबूर है।
प्रश्न: यह गज़ल किसने लिखी है?
उत्तर: यह गज़ल दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar) ने लिखी है।