सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

Delhi University AEC Hindi Syllabus 2026: PDF, Notes, Exam Guide & PYQs

हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू - Hui Hai Sham To Aankhon Mein | Ahmad Faraz Ki Ghazal

हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू: अहमद फ़राज़ की ग़ज़ल, अर्थ और व्याख्या

Ahmad Faraz Ki Ghazal | Hui Hai Sham To Aankhon Mein

अहमद फ़राज़ की यह ग़ज़ल "हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू" (Hui Hai Sham To Aankhon Mein Bas Gaya Phir Tu) जुदाई, याद और एक ख़ूबसूरत उदासी का आईना है। यह अहमद फ़राज़ (Ahmad Faraz) की सबसे प्रसिद्ध ग़ज़लों में से एक है, जो "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं" की तरह ही मक़बूल है।

यदि आप हिंदी और मैथिली की और भी चुनिंदा कविताएँ पढ़ना चाहते हैं, तो आप हमारा Best Hindi & Maithili Poetry Collection भी देख सकते हैं। आइए, इस मशहूर ग़ज़ल के बोल, रोमन लिपी और इसका विस्तृत भावार्थ (meaning in Hindi) पढ़ते हैं।

हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू (Full Ghazal Lyrics in Hindi)

हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू
कहाँ गया है मिरे शहर के मुसाफ़िर तू

मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ
तिरा ख़याल कि शाख़-ए-चमन का ताइर तू

मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी
मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू

हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है
ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू

फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ
जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू

'फ़राज़' तू ने उसे मुश्किलों में डाल दिया
ज़माना साहब-ए-ज़र और सिर्फ़ शाएर तू |

- अहमद फ़राज़

Hui Hai Sham To Aankhon Mein (Roman Script)

huī hai shaam to āñkhoñ meñ bas gayā phir tū
kahāñ gayā hai mire shahr ke musāfir tū

mirī misāl ki ik naḳhl-e-ḳhushk-e-sahrā huuñ
tirā ḳhayāl ki shāḳh-e-chaman kā taa.ir tū

maiñ jāntā huuñ ki duniyā tujhe badal degī
maiñ māntā huuñ ki aisā nahīñ ba-zāhir tū

hañsī-ḳhushī se bichhaḌ jā agar bichhaḌnā है
ye har maqām pe kyā sochtā hai āḳhir tū

fazā udaas hai rut muzmahil hai maiñ chup huuñ
jo ho sake to chalā aa kisī kī ḳhātir tū

'farāz' tū ne use mushkiloñ meñ Daal diyā
zamāna sāhab-e-zar aur sirf shā.er tū

Ghazal Recitation (Video)

ग़ज़ल का भावार्थ और व्याख्या (Meaning in Hindi)

इस ग़ज़ल में शायर अपने महबूब से बिछड़ने के ग़म और उसकी यादों का ज़िक्र कर रहा है। हर शेर (couplet) का एक गहरा मतलब है:

शेर 1: हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू...

भावार्थ: शायर कहता है कि जैसे ही दिन ढलकर शाम हुई है, तुम्हारी यादें और तुम्हारा चेहरा मेरी आँखों में एक बार फिर से बस गया है। ऐ मेरे शहर को छोड़कर जाने वाले मुसाफिर, तुम आख़िर कहाँ चले गए हो? यहाँ 'शाम' सिर्फ दिन के ढलने का नहीं, बल्कि ज़िंदगी में उदासी और अकेलेपन के आने का भी प्रतीक है।

शेर 2: मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ...

भावार्थ: शायर अपनी तुलना रेगिस्तान के एक सूखे पेड़ (नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा) से करता है—जो बेजान और अकेला है। और अपने महबूब के ख़याल को एक चमन की शाख़ पर बैठे परिंदे (ताइर) जैसा बताता है—जो ज़िंदगी से भरा, आज़ाद और ख़ूबसूरत है। यह एक ज़बरदस्त तनासुब (contrast) है जो शायर की वीरानी और महबूब की रौनक को दिखाता है।

शेर 3: मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी...

भावार्थ: शायर को एक डर है। वह कहता है कि मैं यह बात जानता हूँ कि यह दुनिया और इसके तौर-तरीक़े तुम्हें बदल देंगे। हालाँकि, मैं यह भी मानता हूँ कि अभी तुम ऊपर से (ब-ज़ाहिर) वैसे नहीं लगते हो। यह एक प्रेमी की गहरी अंतर्दृष्टि और असुरक्षा को दिखाता है, जो जानता है कि हालात और वक़्त इंसान को बदल देते हैं।

शेर 4: हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है...

भावार्थ: यह शेर जुदाई की कशमकश को दिखाता है। शायर कहता है कि अगर तुमने बिछड़ने का फ़ैसला कर ही लिया है, तो फिर हँसी-ख़ुशी से अलग हो जाओ। तुम हर मोड़ पर, हर मक़ाम पर रुक कर आख़िर इतना क्या सोचते हो? यह हिचकिचाहट और दुविधा दोनों के लिए तकलीफ़देह है।

शेर 5: फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ...

भावार्थ: शायर अपनी तन्हाई का मंज़र पेश करता है। वह कहता है कि मेरे चारों ओर का माहौल (फ़ज़ा) उदास है, मौसम (रुत) बीमार या थका हुआ (मुज़्महिल) है, और मैं ख़ामोश हूँ। सब कुछ बे-रौनक है। अगर हो सके तो तुम 'किसी की ख़ातिर' (यानी मेरी ख़ातिर) वापस चले आओ।

शेर 6: 'फ़राज़' तू ने उसे मुश्किलों में डाल दिया...

भावार्थ: यह ग़ज़ल का मक़्ता (आख़िरी शेर) है। 'फ़राज़' अपना नाम इस्तेमाल करते हुए ख़ुद से कहते हैं कि ऐ फ़राज़, तूने अपने महबूब को मुश्किल में डाल दिया है। क्यों? क्योंकि "ज़माना साहब-ए-ज़र" है, यानी यह दुनिया पैसे वालों की है, दौलत को पूजती है, "और सिर्फ़ शाएर तू" और तुम हो कि बस एक शायर हो, जिसके पास दौलत नहीं, सिर्फ़ अलफ़ाज़ हैं। यह प्यार और दुनियादारी के बीच की उस शाश्वत लड़ाई को दिखाता है, जहाँ अक्सर दौलत प्यार पर हावी हो जाती है।

ग़ज़ल का साहित्यिक विश्लेषण और संदर्भ (Literary Analysis)

अहमद फ़राज़ की शायरी की सबसे बड़ी ख़ासियत उनकी सादगी और सीधापन है। वह बहुत जटिल या भारी शब्दों का प्रयोग किए बिना, आम बोलचाल की भाषा में गहरे से गहरे जज़्बात को बयां कर देते हैं। यह ग़ज़ल ("हुई है शाम...") इसी का एक बेहतरीन उदाहरण है।

भाव और कल्पना (Imagery and Theme):

  • शाम का बिम्ब (Imagery of Evening): ग़ज़ल का पहला ही मिसरा "हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू" एक शक्तिशाली बिम्ब (image) बनाता है। शाम (evening) उर्दू शायरी में अक्सर उदासी, जुदाई (हिज्र), और यादों के उभरने का समय होती है।
  • तन्हाई और याद (Loneliness and Memory): यह पूरी ग़ज़ल तन्हाई में की गई एक बातचीत है। शायर अपने महबूब से सवाल कर रहा है ("कहाँ गया है?"), शिकायत कर रहा है ("कब तक नहीं आएगा?"), और उसे याद कर रहा है।
  • सरलता में गहराई: फ़राज़ साहब ने "तू इस दर्जा दिल-आज़ाद...","तू इक उम्र से...","तू जब आएगा..." जैसे सीधे और सरल वाक्यों का प्रयोग किया है, लेकिन हर शेर में एक गहरी भावनात्मक चोट है।

यह ग़ज़ल आज भी इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि यह प्रेम में जुदाई के सार्वभौमिक (universal) अनुभव को छूती है। यह सिर्फ एक ग़ज़ल नहीं, बल्कि हर उस दिल की आवाज़ है जो किसी का इंतज़ार कर रहा है।

शायर के बारे में: अहमद फ़राज़ (About Ahmad Faraz)

अहमद फ़राज़ (1931-2008) पाकिस्तान के सबसे मक़बूल और पसंद किए जाने वाले उर्दू शायरों में से एक थे। उनका असली नाम सैयद अहमद शाह था। उनकी शायरी में इश्क़, जुदाई, विद्रोह (resistance) और सामाजिक दर्द का एक अनूठा संगम मिलता है।

उनकी भाषा बहुत सीधी और दिल को छू लेने वाली होती थी, जिस वजह से उनकी ग़ज़लें आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुईं। "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं" और "रंजिश ही सही" जैसी उनकी कई ग़ज़लें आज भी ज़बान-ए-ज़द-ए-आम हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. 'हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू' ग़ज़ल किसने लिखी है?
Ans: यह ख़ूबसूरत ग़ज़ल मशहूर शायर अहमद फ़राज़ (Ahmad Faraz) ने लिखी है।

Q2. इस ग़ज़ल का मुख्य भाव क्या है?
Ans: इस ग़ज़ल का मुख्य भाव (theme) याद, जुदाई (separation) और अकेलापन है। शायर शाम के वक़्त अपने महबूब को याद कर रहा है जो उसे छोड़कर चला गया है।

Q3. 'ज़माना साहब-ए-ज़र और सिर्फ़ शाएर तू' का क्या मतलब है?
Ans: इस पंक्ति का मतलब है कि "यह दुनिया पैसे वालों की है, यह दौलत को मानती है, और तुम (शायर) सिर्फ़ एक शायर हो।" यह प्यार और भौतिकवाद (materialism) के बीच का टकराव दिखाता है।


आपको इस ग़ज़ल का कौन-सा शेर सबसे ज़्यादा पसंद आया और क्यों?
अपनी राय नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएँ।

📢 Sirf Padhein Nahi, Likhein Bhi!
Article, Kahani, Vichar, ya Kavita — Hindi, English ya Maithili mein. Apne shabdon ko Sahityashala par pehchan dein.

Submit Your Content →

Famous Poems

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

Charkha Song Lyrics: Original Punjabi, English Translation & Meaning

Charkha Song Lyrics: Original Punjabi, English Translation & Meaning Traditional Punjabi Folk Masterpiece | Popularized by: Wadali Brothers, Lakhwinder Wadali, Mukhtar Sahota Looking for a specific section? Jump straight to: ↓ Original Punjabi Lyrics | ↓ Hindi Translation | ↓ English Translation | ↓ Deep Symbolism & Meaning Complete guide to Charkha lyrics, translations, and deep poetic explanation. Original Punjabi Lyrics Ve mahiya tere vekhan nu, Chuk charkha gali de vich paanwan, Ve loka paane main katdi, Tand teriyan yaadan de paanwan. Charkhe di oo kar de ole, Yaad teri da tumba bole. Ve nimma nimma geet ched ke, Tand kaat di hullare paanwan. Vassan ni de rahe saure peke, Mainu tere pain pulekhe. Ve hoon mainu das mahiya, Tere baaju kidhar main jaayan. Ho eid aayi, mera yaar na aaya, Tera ve khair h...

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) | Karna Poem

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) "Kahani Karn Ki" (popularly known as Sampurna ) is a viral spoken word performance that reimagines the Mahabharata from the perspective of the tragic hero, Suryaputra Karna . Written by Abhi Munde (Psycho Shayar), this poem questions the definitions of Dharma and righteousness. ज़रूर पढ़ें: इसी महाभारत युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया था। पढ़ें रामधारी सिंह दिनकर की वो ओजस्वी कविता: ➤ कृष्ण की चेतावनी: रश्मिरथी सर्ग 3 (Lyrics & Meaning) Quick Links: Lyrics • Meaning • Poet Bio • Watch Video • FAQ Abhi Munde (Psycho Shayar) performing the viral poem "Sampurna" कहानी कर्ण की (Sampurna) - Full Lyrics पांडवों को तुम रखो, मैं कौरवों ...

Chadhde Suraj Dhalde Dekhe Lyrics Meaning in Hindi – Baba Bulleh Shah | Sufi Qawwali

ज़िंदगी की हकीकत और वक्त के बदलाव को जितनी खूबसूरती से सूफी शायरों ने बयां किया है, शायद ही किसी और ने किया हो। बाबा बुल्लेशाह (Baba Bulleh Shah) की कलम से निकली यह रचना— "चढ़दे सूरज ढलदे देखे" —सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि जीवन का एक ऐसा फलसफा है जो इंसान को फर्श से अर्श और अर्श से फर्श तक के सफर की याद दिलाता है। एक तरफ ढलता हुआ सूरज और दूसरी तरफ जलता हुआ दीया—वक्त की करवट का प्रतीक। अक्सर जब हम तनम फरसूदा जां पारा (Tanam Farsooda) जैसी रूहानी रचनाओं को सुनते हैं, तो हमें अहसास होता है कि इंसान का गुरूर कितना क्षणभंगुर है। बुल्लेशाह का यह कलाम हमें सिखाता है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती। जिस तरह नुसरत फतेह अली खान साहब ने तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी गाकर इश्क़ और इबादत का फर्क समझाया, उसी तरह यह कलाम हमें 'शुक्र' (Gratitude) का पाठ पढ़ाता है। इस लेख में हम इस कालजयी रचना के हिंदी बोल (Lyrics), उसके गूढ़ अर्थ और शब्दार्थ को विस्तार से समझेंगे। ...

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ | Mahabharata Par Kavita

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ  - Arey Khud Ko Ishwar Kehte Ho To || Mahabharata Par Kavita || तलवार, धनुष और पैदल सैनिक   कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की  प्रतिक्षा  में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखन  में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन   शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव   पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर ...