सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

'वही त्रिलोचन है' कविता का भावार्थ | फकीरी और स्वाभिमान का आत्मकथ्य (पूर्ण विश्लेषण)

चांद का मुँह टेढ़ा है – किसकी रचना है? | सारांश, व्याख्या, विधा व PDF (मुक्तिबोध)

📌 एक नज़र में (Quick Facts)

  • रचनाकार: गजानन माधव मुक्तिबोध
  • विधा: लंबी कविता (नई कविता / फैंटेसी शिल्प)
  • प्रकाशन वर्ष: 1964 (मरणोपरांत प्रकाशित)
  • मूल विषय: सत्ता की विद्रूपता, जासूसी तंत्र और मध्यमवर्गीय घुटन
For Students: Many students search "Chand Ka Muh Tedha Hai rachna hai kiski?" or ask about its vidha. The direct answer is: It is a famous long poem (लंबी कविता) written by Gajanan Madhav Muktibodh.

हिंदी कविता के आकाश में कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं जिनकी रोशनी आँखों को सुकून नहीं देती, बल्कि आत्मा को बेचैन कर देती है। गजानन माधव मुक्तिबोध की कालजयी रचना "चांद का मुँह टेढ़ा है" एक ऐसा ही दहकता हुआ दस्तावेज़ है। जहाँ रोमांटिक कवियों ने चाँद को सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक माना, वहीं मुक्तिबोध को उस चाँद में पूंजीवादी सत्ता की एक क्रूर विद्रूपता नज़र आती है।

Chand Ka Muh Tedha Hai Rachna Hai Kis Ki? (रचना और विधा)

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है कि यह रचना किसकी है? इसका सीधा उत्तर है—यह गजानन माधव मुक्तिबोध द्वारा रचित एक 'लंबी कविता' है। इसे नई कविता और प्रगतिवादी काव्यधारा के अंतर्गत 'फैंटेसी शिल्प' (Fantasy) का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।

ऐतिहासिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि (Political Context of 1953)

मुक्तिबोध की यह कविता शून्य में नहीं रची गई। इसके पीछे एक गहरा समकालीन राजनीतिक दर्शन (Contemporary Political Philosophy) है। कविता में एक पंक्ति गूँजती है— "भयानक स्याह सन तिरपन का चांद वह !!" यहाँ सन तिरपन (1953) का विशेष ऐतिहासिक महत्व है।

1947 में भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता तो मिल गई थी, लेकिन नेहरू युग के शुरुआती वर्षों (विशेषकर 1950 के दशक) में ही आम नागरिक और बुद्धिजीवियों का तीव्र मोहभंग होने लगा था। पूंजीपतियों का बढ़ता वर्चस्व, मज़दूरों का शोषण, औद्योगिकरण के नाम पर कारखानों की बढ़ती चिमनियाँ और आम आदमी की लाचारी—इन सबने समाज में एक 'करफ़्यू' जैसा सन्नाटा पैदा कर दिया था। वैश्विक स्तर पर यह शीत युद्ध (Cold War) का दौर था। मुक्तिबोध इसी राज्य-प्रायोजित आतंक, जासूसी और भ्रष्टाचार को चाँद के 'टेढ़े मुँह' के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं। यहाँ चाँदनी शीतलता नहीं, बल्कि 'सर्विलांस स्टेट' (Surveillance State) का प्रतीक है।

चांद का मुँह टेढ़ा है (मूल कविता पाठ)

- गजानन माधव मुक्तिबोध -


नगर के बीचों-बीच
आधी रात--अंधेरे की काली स्याह
शिलाओं से बनी हुई
भीतों और अहातों के, काँच-टुकड़े जमे हुए
ऊँचे-ऊँचे कन्धों पर
चांदनी की फैली हुई सँवलायी झालरें।
Chand ka muh tedha hai Muktibodh Hindi poem
सत्ता और अंधेरे का प्रतीकात्मक दृश्य
कारखाना--अहाते के उस पार
धूम्र मुख चिमनियों के ऊँचे-ऊँचे
उद्गार--चिह्नाकार--मीनार
मीनारों के बीचों-बीच
चांद का है टेढ़ा मुँह!!
भयानक स्याह सन तिरपन का चांद वह !!
गगन में करफ़्यू है
धरती पर चुपचाप ज़हरीली छिः थूः है !!
पीपल के खाली पड़े घोंसलों में पक्षियों के,
पैठे हैं खाली हुए कारतूस ।
गंजे-सिर चांद की सँवलायी किरनों के जासूस
साम-सूम नगर में धीरे-धीरे घूम-घाम
नगर के कोनों के तिकोनों में छिपे है !!

Chand Ka Muh Tedha Hai Lyrics (Hinglish)

Nagar ke beechon-beech
Aadhi raat--andhere ki kaali syaah
Shilaon se bani hui
Bhiiton aur aahaton ke, kaanch-tukde jame hue
Unche-unche kandhon par
Chandni ki faili hui sanvlayi jhalarein.

Kaarkhaana--aahate ke us paar
Dhoomra mukh chimniyon ke unche-unche
Udgaar--chihnakaar--meenaar
Meenaaron ke beechon-beech
Chand ka hai tedha muh!!
Bhayanak syaah san tirpan ka chand vah !!
Gagan mein curfew hai
Dharti par chupchap zahreeli chhih: thuh: hai !!

Peepal ke khaali pade ghonslon mein pakshiyon ke,
Paithe hain khaali hue kartoos.
Ganje-sir chand ki sanvlayi kirno ke jasoos
Saam-soom nagar mein dheere-dheere ghoom-ghaam
Nagar ke konon ke tikonon mein chhipe hai !!

वीडियो: कविता का भावपूर्ण पाठ

पीएचडी स्तर की गहन साहित्यिक व्याख्या (PhD Level Analysis)

UPSC, NET-JRF और विश्वविद्यालय स्तर के अकादमिक शोधार्थियों के लिए इस कविता का मार्क्सवादी और अस्तित्ववादी दृष्टिकोण से 'डिकंस्ट्रक्शन' (Deconstruction) नीचे प्रस्तुत है:

प्रथम पद्यांश विश्लेषण
"नगर के बीचों-बीच आधी रात... काँच-टुकड़े जमे हुए ऊँचे-ऊँचे कन्धों पर चांदनी की फैली हुई सँवलायी झालरें।"
अकादमिक विश्लेषण: यहाँ 'नगर के बीचों-बीच' पूंजीवादी सभ्यता के केंद्र का प्रतीक है। 'आधी रात' केवल समय नहीं, बल्कि नव-स्वतंत्र भारत के वैचारिक अंधकार और मोहभंग (Disillusionment) का रूपक है। 'काँच-टुकड़े जमे हुए अहाते' स्पष्ट रूप से निजी संपत्ति (Private Property) की क्रूर सुरक्षा और वर्ग-विभाजन (Class Divide) को दर्शाते हैं। जो दीवारें समाज को बाँटती हैं, वे हिंसक हैं। प्रकृति का सबसे कोमल उपादान 'चांदनी' भी यहाँ दूषित हो चुकी है; वह श्वेत नहीं रही, बल्कि औद्योगिक धुएँ और राजनीतिक भ्रष्टाचार से मलिन होकर 'सँवलायी झालरें' बन गई है। यह प्रकृति पर पूंजीवाद के अतिक्रमण का शानदार बिम्ब है।
द्वितीय पद्यांश विश्लेषण
"कारखाना--अहाते के उस पार धूम्र मुख चिमनियों के... चांद का है टेढ़ा मुँह!! भयानक स्याह सन तिरपन का चांद... गगन में करफ़्यू है, धरती पर ज़हरीली छिः थूः है !!"
अकादमिक विश्लेषण: यह पद्यांश कविता का वैचारिक चरम (Ideological Climax) है। 'धूम्र मुख चिमनियाँ' आधुनिकता के उन स्मारकों ('मीनार') की तरह खड़ी हैं जो मनुष्य का रक्त चूस रही हैं। रोमांटिक कविता का सुंदर चाँद यहाँ 'टेढ़े मुँह' वाला हो गया है। 'टेढ़ा मुँह' सत्ता के पाखंड, कूटनीति और दोहरे चरित्र का प्रतीक है। 'सन तिरपन (1953)' ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) का सटीक संदर्भ है। 'गगन में करफ़्यू' राज्य-सत्ता (State Power) द्वारा वैचारिक स्वतंत्रता के दमन को इंगित करता है, जबकि 'ज़हरीली छिः थूः' उस शोषित समाज की हताशा और आत्मग्लानि का प्रतीक है जहाँ बोलने की आज़ादी छिन चुकी है।
तृतीय पद्यांश विश्लेषण
"पीपल के खाली पड़े घोंसलों में पक्षियों के, पैठे हैं खाली हुए कारतूस । गंजे-सिर चांद की सँवलायी किरनों के जासूस..."
अकादमिक विश्लेषण: यह पद्यांश इको-क्रिटिसिज्म (Eco-criticism) और सत्ता के 'सर्विलांस' (Panopticon) सिद्धांत का अद्भुत उदाहरण है। 'पीपल' भारतीय संस्कृति और जीवन का प्रतीक है। पक्षियों (जीवन और शांति) की जगह अब 'खाली हुए कारतूसों' (राज्य की नग्न हिंसा) ने ले ली है। चाँद यहाँ एक क्रूर तानाशाह या जासूस ('गंजे सिर वाला') बन गया है, जिसकी किरणें हर कोने में घुसकर आम आदमी के विचारों की जासूसी कर रही हैं। 'नगर के कोनों के तिकोनों में छिपे हैं' से तात्पर्य है कि सत्ता का आतंक समाज की ज्यामिति में इस कदर धंस चुका है कि बचने की कोई जगह शेष नहीं है।

शाब्दिक व्याख्या एवं शिल्प (Literary Craft & Rhythm)

मुक्तिबोध का शिल्प हिंदी साहित्य में 'एंटी-रोमांटिक' (Anti-Romantic) परंपरा का शिखर है:

  • मुक्त छंद (Free Verse): यह कविता किसी भी पारंपरिक छंद में नहीं बँधी है। इसमें बाह्य तुकबंदी (rhyme) नहीं है, लेकिन एक तीव्र आंतरिक लय (Internal Rhythm) है, जो पाठक की धड़कन को तेज़ कर देती है।
  • खड़ी बोली और शब्दावली: भाषा मूलतः तत्सम प्रधान खड़ी बोली है, लेकिन 'करफ़्यू', 'कारतूस' और 'जासूस' जैसे शब्दों का प्रयोग आधुनिकता और राज्य के आतंक (State Terror) को उभारता है।
  • बिम्ब योजना (Imagery): कवि ने 'विद्रूप बिम्बों' का अद्भुत संयोजन किया है। 'गंजे सिर वाला चाँद', 'काँच जमे हुए ऊँचे कंधे' — ये सभी कठोर, खुरदरे और यांत्रिक बिम्ब हैं जो शहरी यथार्थ को दर्शाते हैं।
📄 Download PDF (सम्पूर्ण व्याख्या व नोट्स)
UPSC एवं विश्वविद्यालय परीक्षाओं के लिए Free नोट्स

महत्वपूर्ण प्रश्न (Advanced FAQ)

Q1. कविता में 'सन तिरपन (1953) का चांद' का क्या अर्थ है?

1953 का वर्ष भारतीय इतिहास में मोहभंग का दौर था। आज़ादी के बाद जो सुनहरे सपने देखे गए थे, वे पूंजीवाद और भ्रष्टाचार के कारण टूट रहे थे। मुक्तिबोध ने 'सन तिरपन का चांद' कहकर उसी राजनीतिक निराशा और सत्ता के क्रूर चेहरे को दर्शाया है।

Q2. मुक्तिबोध की 'फैंटेसी' (Fantasy) का क्या अर्थ है?

फैंटेसी एक साहित्यिक तकनीक है जहाँ यथार्थ (Reality) को डरावने सपनों और प्रतीकों (जैसे- राक्षसी चांद, ज़हरीली छिः थूः) के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। मुक्तिबोध इसका उपयोग समाज की छिपी हुई विसंगतियों को उजागर करने के लिए करते हैं।

Q3. यह कविता किस छंद में लिखी गई है?

यह कविता 'मुक्त छंद' (Free Verse) में लिखी गई है। इसमें पारंपरिक लय या तुकबंदी नहीं है, लेकिन इसमें एक गहरी 'आंतरिक लय' (Internal Rhythm) है जो कवि के वैचारिक प्रवाह के साथ चलती है।

📢 Sirf Padhein Nahi, Likhein Bhi!
Article, Kahani, Vichar, ya Kavita — Hindi, English ya Maithili mein. Apne shabdon ko Sahityashala par pehchan dein.

Submit Your Content →

Famous Poems

Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning Explained

Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning Explained Discover the Soulful Charkha Lyrics in English If you've been searching for Charkha lyrics in English that capture the depth of Punjabi folk emotion, look no further. In this blog, we take you on a journey through the original lyrics, their Hinglish transliteration, Hindi translation, and poetic English translation. We also dive into the symbolism and meaning behind this heart-touching song. Whether you're a lover of Punjabi folk, a poetry enthusiast, or simply curious about the emotions behind the spinning wheel, this complete guide to the "Charkha" song will deepen your understanding. Original Punjabi Lyrics of Charkha Ve mahiya tere vekhan nu, Chuk charkha gali de vich panwa, Ve loka paane main kat di, Tang teriya yaad de panwa. Charkhe di oo kar de ole, Yaad teri da tumba bole. Ve nimma nimma geet ched ke, Tang kath di hullare panwa. Vasan ni de rahe saure peke, Mainu tere pain pulekhe. ...

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

Do Naavon Par Pair Pasare Aise Kaise Lyrics & Meaning - दो नावों पर पाँव पसारे ऐसे कैसे | Asad Akbarabadi

Do Naavon Par Pair Pasare Aise Kaise: The Viral Heartbreak Anthem By Asad Akbarabadi | Unlocking the Meaning of Emotional Duality ⚠️ The Truth Behind the Idiom Have you ever felt the crushing weight of being "just an option"? The phrase "Do Naavon Par Pair Pasare" is more than just a muhavara (idiom); it is a psychological indictment of modern love. It describes the exhausting, impossible act of balancing two conflicting lives, leaving the heart torn at the seams . हिंदी मूल (Full Lyrics) दो नावों पर पाँव पसारे ऐसे कैसे वो भी प्यारा हम भी प्यारे ऐसे कैसे सूरज बोला बिन मेरे दुनिया अंधी है हँस कर बोले चाँद सितारे ऐसे कैसे तेरे हिस्से की ख़ुशियों से बैर नहीं पर मेरे हक़ में सिर्फ ख़सारे ऐसे कैसे गालों पर बोसा दे कर जब चली गई वो कहते रह गए होंठ बिचारे ऐसे कैसे — असद अकबराबादी (Asad Akbarabadi) ...

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) | Karna Poem

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) "Kahani Karn Ki" (popularly known as Sampurna ) is a viral spoken word performance that reimagines the Mahabharata from the perspective of the tragic hero, Suryaputra Karna . Written by Abhi Munde (Psycho Shayar), this poem questions the definitions of Dharma and righteousness. ज़रूर पढ़ें: इसी महाभारत युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया था। पढ़ें रामधारी सिंह दिनकर की वो ओजस्वी कविता: ➤ कृष्ण की चेतावनी: रश्मिरथी सर्ग 3 (Lyrics & Meaning) Quick Links: Lyrics • Meaning • Poet Bio • Watch Video • FAQ Abhi Munde (Psycho Shayar) performing the viral poem "Sampurna" कहानी कर्ण की (Sampurna) - Full Lyrics पांडवों को तुम रखो, मैं कौरवों ...

50+ होली पर कविताएं | Holi Par Hasya Kavita & Best Hindi Poems Collection

होली पर कविता - Holi Par Hindi Poems होली रंगों, उमंगों और प्रेम का त्यौहार है। साहित्यशाला पर प्रस्तुत है हिंदी साहित्य की चुनिंदा और बेहतरीन होली कविताओं का विशाल संग्रह। विषय सूची (Table of Contents) 1. होली पर हास्य कविताएं (Funny Poems) 2. बच्चों के लिए होली कविता (Kids Poems) 3. होली की सर्वश्रेष्ठ कविताएं (Best Collection) 4. पौराणिक और पारंपरिक होली (Ram-Sita & Braj) 5. सामाजिक संदेश और देशभक्ति (Social Message) 6. होली का महत्व और कहानी (Essay & Story) 1. होली पर हास्य कविताएं (Holi Funny Poems) होली का मज़ा हंसी-ठिठोली के बिना अधूरा है। पेश हैं कुछ गुदगुदाने वाली हास्य कविताएं। बैगन जी की होली - कृष्ण कुमार यादव टेढ़े-मेढ़े बैगन जी होली पर ससुराल चले बीच सड़क पर लुढ़क-लुढ़क कैसी ढुलमुल चाल चले...