अदम गोंडवी की 'System Audit' सीरीज़ के इस आखिरी पड़ाव पर हम उस गज़ल की बात करेंगे जो भ्रष्टाचार की इंतहा है। अब तक हमने अपराधी नेताओं, संसद की मंडी, झूठे आँकड़ों और धार्मिक पाखंड पर चर्चा की।
लेकिन यह गज़ल चेतावनी देती है कि अगर "कमीशन" मिले, तो आज के हुक्मरान (शासक) उस काम को भी अंजाम दे सकते हैं जो अंग्रेज़ गवर्नर लॉर्ड डलहौज़ी (Lord Dalhousie) भी नहीं कर पाया—यानी पूरे हिंदुस्तान की नीलामी।
आज साहित्यशाला (Sahityashala) पर पेश है अदम गोंडवी का वह दस्तावेज जो 'वंदेमातरम्' और 'महंगाई' के बीच के विरोधाभास को नंगा करता है।
कमीशन दो तो हिंदुस्तान को नीलाम कर देंगे
दिल्ली को रंगीलेशाह का हम्माम कर देंगे
मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगना दाम कर देंगे
अगली योजना में घूसख़ोरी आम कर देंगे
Hinglish Lyrics (Roman)
Commission do toh Hindustan ko neelam kar denge
Delhi ko Rangeelashah ka hammam kar denge
Magar baazaar mein cheezon ka dugna daam kar denge
Agli yojana mein ghooskhori aam kar denge
🔥 विश्लेषण: डलहौज़ी से रंगीलेशाह तक (Historical Satire)
1. डलहौज़ी का अधूरा काम (Dalhousie's Unfinished Business)
लॉर्ड डलहौज़ी ने 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) से भारत को लूटा था, लेकिन वह एक विदेशी था। अदम गोंडवी कहते हैं कि आज के 'हुक्काम' (शासक) तो अपने ही देश को 'कमीशन' के लिए बेचने को तैयार हैं। यह क्रोनी कैपिटलिज्म (Crony Capitalism) का सबसे शुरुआती और सटीक चित्रण है।
2. दिल्ली बना 'हम्माम' (Decadence of Power)
गोंडवी ने यहाँ मुग़ल बादशाह मुहम्मद शाह 'रंगीला' का रूपक (Metaphor) इस्तेमाल किया है, जो अपनी विलासिता के लिए कुख्यात था। आज के 'रहबर' (नेता) दिल्ली को उसी 'हम्माम' (स्नानागार/ऐशगाह) में बदल रहे हैं, जहाँ जनता की तकलीफों के लिए कोई जगह नहीं है।
3. वंदेमातरम् और बाज़ार (Patriotism vs Inflation)
तीसरा शेर सबसे तीखा है:
मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगना दाम कर देंगे"
यह 'छद्म राष्ट्रवाद' (Fake Nationalism) पर करारा तंज है। एक हाथ में तिरंगा और दूसरे हाथ में महंगाई की सूची—यही आज की राजनीति का सच है। गोंडवी पूछते हैं: क्या भूखे पेट देशभक्ति हो सकती है? (संदर्भ: गर्म रोटी की महक)
4. घूसख़ोरी 'आम' है (Institutionalized Bribery)
अंतिम शेर में 'योजना' (Scheme) शब्द का प्रयोग व्यंग्यात्मक है। सरकारें जनकल्याण की योजना लाती हैं, लेकिन यहाँ 'घूसख़ोरी' को ही अगली पंचवर्षीय योजना बनाने की बात हो रही है।
🎥 सुनें: मनोज बाजपेयी और अदम गोंडवी
इस वीडियो में मनोज बाजपेयी ने अदम गोंडवी की गज़लों को जिस तेवर के साथ पढ़ा है, वह शब्दों में जान डाल देता है।
निष्कर्ष (Verdict)
अदम गोंडवी की यह गज़ल महज़ आलोचना नहीं, बल्कि एक भविष्यवाणी थी जो आज सच साबित हो रही है। जब राजनीति 'कमीशन' पर चलने लगे, तो समझ लीजिए कि देश 'नीलामी' के कगार पर है।
साहित्यशाला पर अदम गोंडवी की 'System Audit' सीरीज़ को पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'रंगीलेशाह' कौन थे?
मुहम्मद शाह 'रंगीला' एक मुगल बादशाह था जो अपने विलासी जीवन और शासन के प्रति लापरवाही के लिए जाना जाता था। गोंडवी ने आज के नेताओं की तुलना उसी से की है।
डलहौज़ी का संदर्भ यहाँ क्यों आया है?
लॉर्ड डलहौज़ी ने भारत के राज्यों को हड़पा था। कवि कहता है कि विदेशी लुटेरों ने जो कसर छोड़ी थी, उसे आज के भ्रष्ट नेता 'कमीशन' के बदले पूरा कर रहे हैं।