भारतीय राजनीति में 'रामराज' शब्द का इस्तेमाल अक्सर एक आदर्श व्यवस्था (Ideal State) के लिए किया जाता है, लेकिन अदम गोंडवी (Adam Gondvi) के लिए यह शब्द एक तीखा व्यंग्य है। जब सत्ता के गलियारों में व्हिस्की और काजू का दौर चलता है, तब बाहर फुटपाथ पर कोई 'राम' घर की तलाश में भटक रहा होता है।
आज साहित्यशाला (Sahityashala) पर हम पढ़ रहे हैं अदम गोंडवी की वह गज़ल जो संसद को 'नख़ाश' (घोड़ों का बाज़ार) घोषित करती है। यह कविता नहीं, लोकतंत्र का बैलेंस शीट (Audit Report) है।
उतरा है रामराज विधायक निवास में॥
इतना असर है खादी के उजले लिबास में॥
जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में॥
संसद बदल गई है यहाँ के नख़ाश में॥
ये बात कह रहा हूँ मैं होश-ओ-हवास में॥
Hinglish Lyrics (Roman)
Utra hai Ramraj vidhayak niwas mein
Itna asar hai khadi ke ujle libaas mein
Jo aa gaye footpath par ghar ki talaash mein
Sansad badal gayi hai yahan ke nakhkhaas mein
Ye baat keh raha hoon main hosh-o-hawas mein
🔥 विश्लेषण: 'नख़ाश' से 'निवास' तक (Literary Audit)
1. रामराज बनाम व्हिस्की (The Irony of Ramraj)
पहला ही शेर व्यवस्था के मुँह पर तमाचा है। राम का नाम त्याग और मर्यादा का प्रतीक है, लेकिन यहाँ 'रामराज' विधायक निवास में 'व्हिस्की और काजू' (विलासिता) के रूप में उतरा है। यह विरोधाभास (Paradox) बताता है कि धर्म अब राजनीति के लिए केवल एक मुखौटा है।
2. खादी का 'वाइट-वॉशिंग' (Whitewashing Crime)
अदम गोंडवी कहते हैं कि खादी अब विचारधारा नहीं, बल्कि अपराध छुपाने की वर्दी बन गई है। तस्कर और डकैत जब खादी पहन लेते हैं, तो वे 'समाजवादी' कहलाने लगते हैं। यह राजनीति के अपराधीकरण का सबसे सटीक चित्रण है।
3. 'नख़ाश' और लोकतंत्र की ख़रीद-फ़रोख्त (Horse Trading)
सबसे महत्वपूर्ण और गहरा शेर चौथा है:
संसद बदल गई है यहाँ के नख़ाश में।"
यहाँ 'नख़ाश' (Nakhkhaas) शब्द का प्रयोग अद्भुत है। नख़ाश उस बाज़ार को कहते हैं जहाँ घोड़े या गुलाम बेचे जाते थे।
अदम गोंडवी वित्त और बाज़ार (Finance) की भाषा में कह रहे हैं कि सांसद अब जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि बिकाऊ कमोडिटी (Commodity) हैं। जिसे आधुनिक मीडिया 'Horse Trading' कहता है, गोंडवी ने उसे दशकों पहले 'नख़ाश' कह दिया था।
4. बगावत ही विकल्प (The Call for Revolution)
दुष्यंत कुमार जहाँ 'हंगामा खड़ा करना' चाहते हैं, वहीं अदम गोंडवी सीधे 'बगावत' (Revolt) का रास्ता दिखाते हैं। "होश-ओ-हवास" शब्द का प्रयोग यह बताता है कि यह गुस्सा जज्बाती नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया फैसला है। (और पढ़ें: शहर की खुद्दारी और फाके)।
🎥 देखें: मनोज बाजपेयी की आवाज़ में (Full Recitation)
इस वीडियो में मनोज बाजपेयी अदम गोंडवी की कई मशहूर गज़लें पढ़ रहे हैं, जिनमें यह गज़ल भी शामिल है। उनकी आवाज़ का भारीपन इन शब्दों को और भी धारदार बना देता है।
निष्कर्ष (Verdict)
'काजू भुने प्लेट में' सिर्फ शायरी नहीं है, यह सत्ता की आँखों में डाली गई एक ऐसी रोशनी है जो उन्हें चुभती है। आज जब हम आज़ादी का जश्न मनाते हैं, तो हमें खुद से पूछना चाहिए—क्या हम 'नख़ाश' (बाज़ार) का हिस्सा हैं या एक जागरूक नागरिक?
साहित्यशाला पर अदम गोंडवी की यह बेबाकी जारी रहेगी।
संदर्भ: Hindwi, Kavita Kosh.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'संसद बदल गई है यहाँ के नख़ाश में' का क्या अर्थ है?
'नख़ाश' (Nakhkhaas) एक अरबी/उर्दू शब्द है जिसका अर्थ है 'घोड़ों या गुलामों का बाज़ार'। अदम गोंडवी यहाँ कह रहे हैं कि संसद अब लोकतंत्र का मंदिर नहीं, बल्कि एक बाज़ार बन गई है जहाँ सांसदों की खरीद-फरोख्त (Horse Trading) होती है।
अदम गोंडवी ने 'रामराज' पर क्या व्यंग्य किया है?
कवि ने दिखाया है कि नेताओं के लिए 'रामराज' का मतलब जनता का कल्याण नहीं, बल्कि अपनी विलासिता (काजू और व्हिस्की) और सत्ता सुख है।