राम (Ram)
By Abhi Munde (Psycho Shayar)
"हाथ काट कर रख दूंगा, ये नाम समझ आ जाए तो..."
जय सिया राम! अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय, जब पूरा देश जश्न में डूबा था, एक युवा कवि की आवाज़ ने सन्नाटा खींच दिया। वह आवाज़ थी अभि मुंडे (Abhi Munde) की, जिन्हें दुनिया Psycho Shayar के नाम से जानती है।
एकांत में राम के मर्म की खोज - एक प्रतीकात्मक चित्रण
उनकी कविता "राम" महज़ एक स्तुति नहीं, बल्कि एक आइना है। यह कविता सवाल करती है कि क्या हम सच में राम को जानते हैं? या हमने राम को सिर्फ एक नारा बना दिया है?
यह रचना Contemporary Spoken Word (समकालीन वाचिक कविता) और Ethical Bhakti Reinterpretation (नैतिक भक्ति पुनर्व्याख्या) की श्रेणी में आती है। यहाँ कवि राम को एक 'चमत्कारी देवता' के बजाय 'नैतिक दायित्व' के रूप में प्रस्तुत करता है।
साहित्यशाला के इस विशेष लेख में, हम न केवल इस कविता के बोल (Lyrics) पढ़ेंगे, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक और सामाजिक अर्थ को भी समझेंगे। जैसा कि हमने Angry Ram vs Patient Ram के विश्लेषण में देखा था, राम का चरित्र केवल क्रोध या युद्ध तक सीमित नहीं है, वह त्याग और प्रेम की पराकाष्ठा है।
नीचे दी गई कविता केवल पाठ के लिए नहीं, बल्कि संदर्भ के साथ पढ़ने के लिए है। हर पद ‘राम’ को एक नैतिक अनुशासन (Discipline) के रूप में स्थापित करता है—यहाँ राम केवल पूजने योग्य देवता नहीं, बल्कि जीने योग्य दायित्व हैं।
मौन श्रद्धा बनाम शोरगुल - कविता का केंद्रीय द्वंद्व
हाथ काट कर रख दूंगा,
ये नाम समझ आ जाए तो।
कितनी दिक्कत होगी पता है,
राम समझ आ जाए तो।
राम-राम तो कह लोगे पर,
राम सा दुख भी सहना होगा।
पहली चुनौती ये होगी के,
मर्यादा में रहना होगा।
और मर्यादा में रहना मतलब,
कुछ खास नहीं कर जाना है..
बस..
बस त्याग को गले लगाना है और,
अहंकार जलाना है।
अब अपने रामलला के खातिर,
इतना ना कर पाओगे?
अरे शबरी का जूठा खाओगे,
तो पुरुषोत्तम कहलाओगे।
काम और क्रोध पर विजय: भीतरी युद्ध
काम क्रोध के भीतर रहकर,
तुमको शीतल बनना होगा।
बुद्ध भी जिसकी छांव में बैठे,
वैसा पीपल बनना होगा।
बनना होगा ये सब कुछ और,
वो भी शून्य में रहकर प्यारे।
तब ही तुमको पता चलेगा..
थे कितने अद्भुत राम हमारे।
सोच रहे हो कौन हूं मैं?
चलो.. बता ही देता हूं,
तुमने ही तो नाम दिया था,
मैं.. पागल कहलाता हूं।
नया-नया हूं यहां पे तो ना,
पहले किसी को देखा है।
वैसे तो हूं त्रेता से.. मुझे,
किसने कलयुग भेजा है?
त्रेता युग के त्याग का दर्शन
भई बात वहां तक फैल गई है,
कि यहां कुछ तो मंगल होने को है।
के भरत से भारत हुए राज में,
सुना है राम जी आने को हैं।
बड़े भाग्यशाली हो तुम सब,
नहीं, वहां पे सब यहीं कहते है।
के हम तो रामराज में रहते थे..
पर इन सब में राम रहते है।
अरे पता है तुमको क्या है राम..?
या बस हाथ धनुष तर्कश में बाण..
या वन में जिन्होंने किया गुजारा,
या फिर कैसे रावण मारा।
लक्ष्मण जिनको कहते भैया,
जिनकी पत्नी सीता मैया।
फिर ये तो हो गई वो ही कहानी,
एक था राजा एक थी रानी।
क्या सच में तुमको राम पता है?
या वो भी आकर हम बताएं?
राजनीति के शोर पर सत्य का प्रहार
ये राजनीति का दाया बायां,
जितना मर्ज़ी खेलो तुम।
चेतावनी को लेकिन मेरी,
अपने जहन में डालो तुम।
निजी स्वार्थ के खातिर गर,
कोई राम नाम को गाता हो।
तो खबरदार गर जुर्रत की..
और मेरे राम को बांटा तो।
भारत भू का कवि हूं मैं..
तभी निडर हो कहता हूं।
राम है मेरी हर रचना में,
मैं बजरंग में रहता हूं।
अरे प्रसन्न हंसना भी है और,
पल पल रोना भी है राम।
सब कुछ पाना भी है और,
सब पा कर खोना भी है राम।
मंदिर से पहले, मन में राम
राम से मिलना..
राम से मिलना है ना तुमको..?
निश्चित मंदिर जाना होगा!
पर उस से पहले भीतर जा,
संग अपने राम को लाना होगा।
जय सिया राम।
इस काव्य परंपरा को गहराई से समझें:
- राम के मानवीय संघर्ष और पीड़ा को गहराई से जानने के लिए पढ़ें: राम के संघर्ष पर आधारित हिंदी कविता।
- धर्म और मर्यादा के सूक्ष्म अंतर को समझने के लिए देखें: मर्यादित राम की अवधारणा।
- क्या केवल राम ही त्याग की मूर्ति हैं? महाभारत के महानायक कर्ण की तुलना के लिए पढ़ें: Karn - Hindi Poem Analysis।
Ram Poem Lyrics in English (Hinglish)
For our readers who prefer Roman script, here is the transliteration of Abhi Munde's powerful verses.
Haath kaat kar rakh dunga,
Ye naam samajh aa jaye to.
Kitni dikkat hogi pata hai,
Ram samajh aa jaye to.
Ram-Ram to keh loge par,
Ram sa dukh bhi sehna hoga.
Pehli chunauti ye hogi ke,
Maryada mein rehna hoga.
Aur maryada mein rehna matlab,
Kuch khaas nahi kar jana hai..
Bas..
Bas tyag ko gale lagana hai aur,
Ahankar jalana hai.
Ab apne Ramlala ke khatir,
Itna na kar paoge?
Arre Shabri ka jutha khaoge,
To Purushottam kehlaoge.
Kaam krodh ke bhitar rehkar,
Tumko sheetal banna hoga.
Buddha bhi jiski chhanv mein baithe,
Waisa peepal banna hoga.
Soch rahe ho kaun hoon main?
Chalo.. bata hi deta hoon,
Tumne hi to naam diya tha,
Main.. Pagal kehlata hoon.
Ye tum logon ke..
Naam japo mein..
Pehle sa aaram nahi.
Is zabardasti ke Jai Shree Ram mein sab kuch hai..
Bas Ram nahi!
Ye rajneeti ka daya-bayan jitna marzi khelo tum,
Chetawani ko lekin meri apne zehan mein daalo tum.
Niji swarth ke khatir gar koi Ram naam ko gaata ho,
To khabardaar gar jurrat ki.. aur mere Ram ko baanta to.
Ram-Krishna ki pratibha par pehle bhi khade sawal hue,
Ye Lanka aur ye Kurukshetra.. yun hi nahi the laal hue.
Arre prasann hansna bhi hai aur pal pal rona bhi hai Ram,
Sab kuch paana bhi hai aur sab pa kar khona bhi hai Ram.
Ram se milna hai na tumko..?
Nischit mandir jaana hoga!
Par us se pehle bhitar ja,
Sang apne Ram ko laana hoga.
Critical Analysis: Beyond the Verse
परंपरा बनाम प्रदर्शन
अभि मुंडे (Psycho Shayar) की यह कविता समकालीन हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। यह केवल भक्ति रस की नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक यथार्थ पर एक तीखा व्यंग्य (Satire) है।
1. राजनीतिक परिप्रेक्ष्य (Political Perspective)
कविता स्पष्ट रूप से राम के नाम के राजनीतिकरण की आलोचना करती है। "निजी स्वार्थ के खातिर... मेरे राम को बांटा तो" वाली पंक्तियाँ सीधे तौर पर धर्म के चुनावी इस्तेमाल पर प्रहार करती हैं। कवि चेतावनी देते हैं कि राम को 'लेफ्ट और राइट' (Left and Right Wing) की राजनीति में सीमित नहीं किया जा सकता। यह परशुराम की प्रतीक्षा में दिनकर द्वारा उठाए गए राष्ट्रवाद के सवालों की याद दिलाता है।
2. सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण (Social & Economic View)
कविता "शबरी के जूठे बेर" का उदाहरण देकर सामाजिक समरसता की बात करती है। आज के उपभोक्तावादी दौर में, जहाँ भक्ति भी एक 'प्रदर्शन' बन गई है (जैसा कि स्मार्टफोन की फ्लैशलाइट वाली भीड़ दर्शाती है), कवि 'त्याग' और 'अहंकार शून्यता' की बात करते हैं। यह बाज़ारवाद के खिलाफ एक आध्यात्मिक विद्रोह है।
3. दार्शनिक विरोधाभास (Philosophical Paradox)
"सब पाकर खोना भी है राम" — यह पंक्ति राम के जीवन के उस द्वंद्व को दर्शाती है जिसे अस्तित्ववाद (Existentialism) कहा जा सकता है। राम होना मतलब सब कुछ होते हुए भी विरक्त होना है।
About The Poet: Abhi Munde (Psycho Shayar)
Abhijeet Balkrishna Munde, known by his stage name Psycho Shayar, is a spoken word poet and comedian from Ambajogai, Maharashtra. Originally an engineering student, he found his calling in poetry. His aggressive yet soulful delivery style has made him a viral sensation.
Follow him: YouTube Channel | Instagram
For a complete collection of his works, visit Poemswala's Abhi Munde Collection.
Watch the Original Performance
सामूहिक आस्था का केंद्र: अयोध्या
निष्कर्ष (Conclusion)
अभि मुंडे की यह कविता हमें याद दिलाती है कि राम मंदिर में जाने से पहले, हमें अपने मन के मंदिर को स्वच्छ करना होगा। राम बनना आसान नहीं है; यह कांटों भरा ताज है। जैसे महाभारत में कर्ण का संघर्ष था (Karn - Hindi Poem), वैसे ही राम का जीवन मर्यादा और त्याग का उच्चतम उदाहरण है。
यह विश्लेषण भारतीय काव्य परंपरा, रामकथा, और आधुनिक Spoken Word Poetry के गहन अध्ययन पर आधारित है। साहित्य की ऐसी ही और गहराइयों को समझने के लिए, चाहे वो ग़ज़ल का इतिहास हो या English Literature, Sahityashala के साथ बने रहें।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q: Who wrote the viral 'Ram' poem?
A: This poem is written and performed by Abhi Munde, who goes by the stage name 'Psycho Shayar'. He is from Maharashtra.
Q: What is the meaning of "Shabri ka jutha khaoge"?
A: It refers to the Ramayana incident where Lord Ram ate berries tasted by Shabri, a tribal devotee, to ensure they were sweet. It symbolizes casting away ego, caste barriers, and embracing pure love.
Q: Is Abhi Munde's poem available in English?
A: The poem is originally in Hindi. We have provided the Hinglish (Roman script) transliteration above for easy reading.
Q: Where can I read more inspirational poems like this?
A: You can explore our collection of Inspirational Hindi Poems or check out Maithili Poems on our partner site.