"मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी, वो झूठ बोलेगा और ला-जवाब कर देगा..."
उर्दू अदब की वो नज़्म जो सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि एक औरत के वजूद की दलील है। परवीन शाकिर (Parveen Shakir) की शायरी में वो नज़ाकत है जो पत्थर को भी मोम कर दे, और वो धार है जो रूह को चीर दे। आज साहित्यशाला पर हम पेश कर रहे हैं उनकी वो ग़ज़ल जिसने टूटे हुए दिलों को भी मुस्कुराने का सलीक़ा सिखाया—"मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी है"। यह महज़ शायरी नहीं, ज़िद्दी हौसलों की एक दास्तान है।
मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी है (Hindi Lyrics)
मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी है
ये आँख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी है
बस अपने वास्ते ही फ़िक्र-मंद हैं सब लोग
यहाँ किसी को किसी का ख़याल थोड़ी है
परों को काट दिया है उड़ान से पहले
ये ख़ौफ़-ए-हिज्र है शौक़-ए-विसाल थोड़ी है
मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो
हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है
लगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहले
ग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है
Malaal Hai Magar Itna Malaal Thodi Hai (Roman Urdu)
Malaal hai magar itna malaal thodi hai
Ye aankh rone ki shiddat se laal thodi hai
Bas apne waaste hi fikr-mand hain sab log
Yahan kisi ko kisi ka khayaal thodi hai
Paron ko kaat diya hai udaan se pehle
Ye khauf-e-hijr hai shauq-e-visaal thodi hai
Maza to tab hai ke tum haar ke bhi hanste raho
Hamesha jeet hi jaana kamaal thodi hai
Lagaani padti hai dubki ubharne se pehle
Ghuroob hone ka matlab zavaal thodi hai
शब्दार्थ (Word Meanings)
| लफ़्ज़ (Word) | अर्थ (Meaning in Hindi/English) |
|---|---|
| Malaal (मलाल) | दुःख, रंज, खेद (Grief, Regret) |
| Shiddat (शिद्दत) | तीव्रता, ज़ोर, अधिकता (Intensity) |
| Hijr (हिज्र) | जुदाई, विरह (Separation) |
| Visaal (विसाल) | मिलन, मुलाक़ात (Union) |
| Ghuroob (ग़ुरूब) | सूर्यास्त, डूबना (Setting/Sinking) |
| Zavaal (ज़वाल) | पतन, गिरावट (Decline/Downfall) |
तशरीह और गहरा विश्लेषण (Deep Analysis)
1. ग़म का वक़ार (The Dignity of Sorrow)
पहली ही पंक्ति, "ये आँख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी है", संयम और स्वाभिमान की एक मिसाल है। परवीन शाकिर अपने दुःख को दुनिया के लिए तमाशा नहीं बनने देतीं। आँखों की यह लालिमा सिर्फ आँसुओं की नहीं, बल्कि रातों की नींद उड़ जाने और जलते हुए ख्यालों की गवाह है। यह ठीक वैसा ही है जैसे खुमार बाराबंकवी की शायरी में यादों का ज़िक्र होता है। यह शेर बताता है कि हर दर्द के लिए आँसू बहाना ज़रूरी नहीं; कुछ दर्द इतने गहरे और वक़ार वाले होते हैं कि उन्हें रोकर हल्का नहीं किया जा सकता।
2. ख़ुदग़र्ज़ ज़माने पर तंज (Critique of Society)
"बस अपने वास्ते ही फ़िक्र-मंद हैं सब लोग" के ज़रिए शायरा आधुनिक रिश्तों के खोखलेपन को उजागर करती हैं। यह एक ऐसी दुनिया का सच है जहाँ सहानुभूति दुर्लभ है। यह भाव अदम गोंडवी के तीखे सामाजिक व्यंग्य जैसा है। जैसे गोंडवी अपनी रचना "काजू भुने प्लेट में" में व्यवस्था की उदासीनता पर सवाल उठाते हैं, वैसे ही शाकिर यहाँ मानवीय संवेदनाओं के पतन पर चोट करती हैं।
3. हार कर जीतने का हुनर (Resilience)
इस ग़ज़ल का सबसे मशहूर शेर, "मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो," जीत की परिभाषा ही बदल देता है। असली ताक़त कभी न हारने में नहीं है, बल्कि हार का सामना मुस्कुराकर करने और अपना हौसला बनाए रखने में है। यह जुझारूपन विष्णु विराट की उस भावना से मेल खाता है जो उनकी ग़ज़ल "राह चाहे न मिले" में दिखती है, जहाँ मंज़िल से ज़्यादा सफ़र और जज़्बा मायने रखता है।
4. उम्मीद की किरण (Hope in Decline)
"ग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है" — सूरज का डूबना उसका अंत नहीं, बल्कि एक नई सुबह की तैयारी है। यह आशावाद जीवन के संघर्षों का सामना कर रहे हर व्यक्ति के लिए संजीवनी है। यह विचार आधुनिक हिंदी कविता में प्रतिरोध और पहचान के स्वरों से भी जुड़ता है। यह एक ऐसी सीख है जिस पर अक्सर साहित्यिक मंचों, जैसे कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल वाद-विवाद, में चर्चा होती है कि हर पतन अस्थायी होता है।
सुनें और देखें (Watch & Listen)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: 'ग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है' पंक्ति का क्या अर्थ है?
Q: क्या "मलाल है मगर" एक रोमांटिक ग़ज़ल है?
Q: "मलाल है मगर" ग़ज़ल की शायरा कौन हैं?
"खुशबू को फैलने का बहुत शौक है मगर, मुमकिन नहीं हवाओं से रिश्ता किए बगैर।"
परवीन शाकिर का यह कलाम हमें सिखाता है कि ज़िंदगी में हारना बुरा नहीं है, हार मान लेना बुरा है। अगर यह ग़ज़ल आपके दिल को छू गई हो, तो इसे उन दोस्तों के साथ ज़रूर साझा करें जिन्हें आज एक उम्मीद की किरण की ज़रूरत है। साहित्यशाला के साथ जुड़े रहें, जहाँ हम लफ़्ज़ों में धड़कनें तलाशते हैं।
और पढ़ें (Further Reading):
- रेख़्ता पर उनका पूरा कलाम पढ़ें: Rekhta (Parveen Shakir)
- जीवन परिचय: Wikipedia
- अन्य ग़ज़लें देखें: Urdu Shayari और HamariWeb