सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

और फ़राज़ चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे? Ahmad Faraz Ghazal Lyrics & Meaning

“वक़्त आ गया है” पाश की विद्रोही कविता | Meaning, Deep Analysis & Lyrics

पाश की कविता "वक़्त आ गया है": 'मच्छरदानी' का आराम और वैचारिक क्रांति का उद्घोष

जब एक विद्रोही यह समझ लेता है कि सिस्टम की 'किताब' (संविधान) मर चुकी है, तो उसके बाद वह क्या करता है? वह अपने भीतर झाँकता है। पाश की कविता "वक़्त आ गया है" बाहर की सत्ता से लड़ने से पहले, अपने घर, अपने रिश्तों और अपने 'कम्फर्ट ज़ोन' (Comfort Zone) से लड़ने का आह्वान है। यह कविता उन बौद्धिक लोगों (Intellectuals) पर एक मनोवैज्ञानिक चोट है, जो महफूज़ कमरों में बैठकर क्रांति की बातें करते हैं।

साहित्यशाला के मंच पर हमने "हम लड़ेंगे साथी" का शोर सुना है, लेकिन यह कविता उस लड़ाई की पहली और सबसे कठोर शर्त तय करती है—कि वैचारिक लड़ाइयाँ "मच्छरदानी से बाहर निकलकर" ही लड़ी जा सकती हैं। पाश यहाँ पितृसत्ता (Patriarchy), थोपे गए रिश्तों और जैविक (Biological) परिवारों से परे एक नए 'वैचारिक परिवार' के निर्माण की घोषणा करते हैं।

Young portrait of revolutionary poet Avtar Singh Sandhu Pash in black and white

ये आँखें 'मच्छरदानी' के सुकून को नकारकर, सूर्य को बचाने के लिए ख़ुद जलने को तैयार हैं...

कविता का मूल पाठ: वक़्त आ गया है

▶ पूर्ण देवनागरी कविता (यहाँ क्लिक करें)
अब वक़्त आ गया है कि आपसी रिश्ते का इक़बाल करें और विचारों की लड़ाई मच्छरदानी से बाहर निकलकर लड़ें और प्रत्येक गिले की शर्म सामने होकर झेलें वक़्त आ गया है कि अब उस लड़की को जो प्रेमिका बनने से पहले ही पत्नी बन गई, बहन कह दें लहू के रिश्ते का व्याकरण बदलें और मित्रों की नई पहचान करें अपनी-अपनी रक्त की नदी को तैरकर पार करें सूर्य को बदनामी से बचाने के लिए हो सके तो रात-भर ख़ुद जलें।

स्रोत : पुस्तक: लहू है कि तब भी गाता है (पृष्ठ 154) | अनुवाद: चमनलाल

▶ Hinglish Transliteration (Click to read)
Ab waqt aa gaya hai Ki aapsi rishte ka iqbal karein Aur vicharon ki ladai Machhardani se bahar nikalkar ladein Aur pratyek gile ki sharm Saamne hokar jhelein Waqt aa gaya hai Ki ab us ladki ko Jo premika banne se pehle hi Patni ban gayi, behen keh dein Lahoo ke rishte ka vyakaran badlein Aur mitron ki nayi pehchaan karein Apni-apni rakt ki nadi ko tairkar paar karein Surya ko badnaami se bachane ke liye Ho sake toh raat-bhar Khud jalein.

मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विखंडन (Sociological & Psychological Analysis)

इस कविता में पाश ने जो बिंब इस्तेमाल किए हैं, वे आधुनिक 'Hypocrisy' (पाखंड) को तार-तार कर देते हैं। "मच्छरदानी से बाहर निकलकर लड़ना" एक गहरा रूपक (Metaphor) है। मच्छरदानी हमें बाहरी मच्छरों (खतरों) से बचाती है और एक सुरक्षित 'कम्फर्ट ज़ोन' देती है। पाश उन बुद्धिजीवियों पर तंज कस रहे हैं जो सुरक्षित कमरों में बैठकर आर्थिक और सामाजिक क्रांति के लेख लिखते हैं, लेकिन ज़मीन पर उतरकर संघर्ष की 'शर्म' या दर्द नहीं झेलना चाहते।

पितृसत्ता पर प्रहार और "लहू के रिश्ते का व्याकरण"

कविता का सबसे विद्रोही हिस्सा वह है जहाँ पाश कहते हैं—"उस लड़की को / जो प्रेमिका बनने से पहले ही / पत्नी बन गई, बहन कह दें"। यहाँ पाश भारतीय समाज के उस थोपे गए विवाह (Arranged Marriage) तंत्र को नकारते हैं जहाँ एक औरत को बिना 'प्रेम' (Choice) के सीधे 'पत्नी' (Property/Duty) बना दिया जाता है। वे कहते हैं कि इस झूठे रिश्ते को ढोने से बेहतर है उसे आज़ाद कर 'बहन' मान लेना।

इसके साथ ही वे "लहू के रिश्ते का व्याकरण" बदलने की बात करते हैं। कार्ल मार्क्स और लेनिन की तरह, पाश भी मानते हैं कि आपका असली परिवार वह नहीं जिसका खून आपकी रगों में है, बल्कि वह है जो आपके विचारों (Ideology) और संघर्ष में आपके साथ है। अदम गोंडवी की तरह पाश भी ज़मीनी हकीकत को पहचान कर 'मित्रों की नई पहचान' करने की सलाह देते हैं।

ख़ुद जलने का अस्तित्ववादी दर्शन

कविता का अंत रोंगटे खड़े कर देने वाला है: "सूर्य को बदनामी से बचाने के लिए... रात-भर ख़ुद जलें।" यहाँ सूर्य 'क्रांति', 'सच्चाई' या 'उम्मीद' का प्रतीक है। जब समाज में चारों तरफ अँधेरा (तानाशाही) हो, और लोग कहने लगें कि 'अब कोई सूरज नहीं निकलेगा' (सूर्य की बदनामी), तब एक क्रांतिकारी को जुगनू या मोमबत्ती बनकर ख़ुद को जलाना पड़ता है, ताकि सुबह होने तक उम्मीद ज़िंदा रहे। यह विचार दुष्यंत कुमार के "एक कंठ विषपायी" या उनके मशहूर शेर—"सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं" के समानांतर खड़ा होता है।

Pash addressing the masses through a vintage microphone

"लहू के रिश्ते का व्याकरण बदलें..." - मंच से गूँजता एक नया विचार

निष्कर्ष: क्या आप 'मच्छरदानी' से बाहर आने को तैयार हैं?

पाश की यह कविता हमें आईना दिखाती है। आज के सोशल मीडिया (Social Media / Sports) के दौर में जहाँ हर कोई 'आर्मचेयर विद्रोही' बन गया है, पाश चुनौती देते हैं कि असली लड़ाई सड़क पर उतरकर (मच्छरदानी से बाहर) लड़ी जाती है। क्या हम अपने 'लहू के रिश्तों' (जाति, धर्म, परिवार) की संकीर्णता से ऊपर उठकर इंसानों की नई पहचान करने का साहस रखते हैं?

ऐसी ही बौद्धिक और आत्मा को झकझोरने वाली कविताओं के लिए Sahityashala.in और हमारे English Poems तथा Maithili Poems प्रभागों के साथ निरंतर बने रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. पाश ने "मच्छरदानी से बाहर निकलकर" लड़ने की बात क्यों कही है?

'मच्छरदानी' यहाँ हमारे सुरक्षित 'कम्फर्ट ज़ोन' या बौद्धिक विलासिता का प्रतीक है। पाश कहते हैं कि असली वैचारिक क्रांति कमरों में बैठकर या केवल बातें करके नहीं होती, उसके लिए ज़मीन पर उतरकर असली खतरे और 'शर्म' झेलने पड़ते हैं।

2. "लहू के रिश्ते का व्याकरण बदलें" का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि हमें केवल खून (जैविक/Biological) के रिश्तों को ही अपना परिवार मानना छोड़ देना चाहिए। हमें उन लोगों को अपना सच्चा 'मित्र' और परिवार बनाना चाहिए जो हमारे विचारों और संघर्षों में हमारे साथ खड़े हैं (Ideological kinship)।

3. कविता में 'सूर्य को बदनामी से बचाने' के लिए ख़ुद जलने का क्या संदेश है?

सूर्य यहाँ 'उम्मीद' और 'सत्य' का प्रतीक है। जब अन्याय का अँधेरा छा जाए और लोग उम्मीद हारने लगें (सूर्य की बदनामी), तब एक व्यक्ति को ख़ुद मोमबत्ती की तरह जलकर (बलिदान देकर) उस सत्य और रोशनी को ज़िंदा रखना पड़ता है।

पाश को सुनें और समझें (Video Analysis)

Explore the profound sociological depth of Pash's poetry on YouTube

Famous Poems

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत (Kat Jaoge Mit Jaoge): Viral Lyrics & Meaning

कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत: वायरल गीत का खौफनाक सच और सटीक विश्लेषण भारतीय राजनीतिक संगीत के इतिहास में शायद ही किसी गाने ने इंटरनेट पर इतनी तेज़ी से आग लगाई हो जितनी "कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत" ने लगाई है। प्रेम (Prem) की रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज़ और रुद्र (Rudra) की बेबाक कलम ने एक ऐसा राजनीतिक गान (Political Anthem) तैयार किया है, जो सोशल मीडिया के हर कोने में गूंज रहा है। क्या यह महज़ एक देशभक्ति गीत है, या इसके पीछे कोई गहरा राजनीतिक ध्रुवीकरण छिपा है? साहित्यशाला (Sahityashala) के इस एक्सक्लूसिव लेख में, हम इस वायरल ट्रैक के संपूर्ण बोल (Full Lyrics), इसके प्रत्येक छंद का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Psychological Trigger Formatting) और इसके सामाजिक-राजनीतिक एजेंडे का एक निष्पक्ष और गहन आलोचनात्मक विश्लेषण करेंगे। ▶ वीडियो देखें 📱 WhatsApp पर शेयर करें प्रेम और रुद्र द्वारा रचित इस लोकप्रिय गीत की आधिकारिक कलाकृति। गीत के संपूर्ण बोल और मनोवैज्ञानिक संरचना ...

Charkha Song Lyrics: Original Punjabi, English Translation & Meaning

Charkha Song Lyrics: Original Punjabi, English Translation & Meaning Traditional Punjabi Folk Masterpiece | Popularized by: Wadali Brothers, Lakhwinder Wadali, Mukhtar Sahota Looking for a specific section? Jump straight to: ↓ Original Punjabi Lyrics | ↓ Hindi Translation | ↓ English Translation | ↓ Deep Symbolism & Meaning Complete guide to Charkha lyrics, translations, and deep poetic explanation. Original Punjabi Lyrics Ve mahiya tere vekhan nu, Chuk charkha gali de vich paanwan, Ve loka paane main katdi, Tand teriyan yaadan de paanwan. Charkhe di oo kar de ole, Yaad teri da tumba bole. Ve nimma nimma geet ched ke, Tand kaat di hullare paanwan. Vassan ni de rahe saure peke, Mainu tere pain pulekhe. Ve hoon mainu das mahiya, Tere baaju kidhar main jaayan. Ho eid aayi, mera yaar na aaya, Tera ve khair h...

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ | Mahabharata Par Kavita

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ  - Arey Khud Ko Ishwar Kehte Ho To || Mahabharata Par Kavita || तलवार, धनुष और पैदल सैनिक   कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की  प्रतिक्षा  में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखन  में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन   शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव   पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर ...

'स्नेह-निर्झर बह गया है' भावार्थ: निराला का वह अनकहा दर्द जो रुला देगा!

'स्नेह-निर्झर बह गया है!': उस महाकवि का आंसुओं से लिखा अंतिम दर्द , जिसने दुनिया को सब कुछ दे दिया! क्या आपने कभी उस इंसान की आत्मा का खालीपन महसूस किया है, जिसने दुनिया को अपने जीवन का सारा रस निचोड़ कर दे दिया, और अंत में खुद एक सूखी, निष्प्राण डाल बनकर रह गया? सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की यह कविता केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन का सबसे भयानक और सच्चा शोकगीत है। जो कवि 'वह तोड़ती पत्थर' में श्रमिक स्त्री के स्वाभिमान की गर्जना करता है, और 'भिक्षुक' कविता में भूख के नग्न यथार्थ से सत्ता को हिला देता है— वही निराला यहाँ अपने भीतर के टूटते हुए इंसान को बेपर्दा कर रहे हैं। आइए, निराला का जीवन परिचय और उस ढलती हुई शाम में प्रवेश करें, जहाँ वसंत जा चुका है, और हृदय में केवल 'अमा' (अमावस्या) शेष है। यह विश्लेषण (BA, MA, UGC-NET) के छात्रों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक सम्पूर्ण मार्गदर्शिका है। 📌 एक नजर में: 'स्नेह-निर्झर बह गय...