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नीयत-ए-शौक़ भर न जाय कहीं - Nasir Kazmi Ghazal Lyrics, Meaning & Deep Secrets

पुरानी लखनऊ के उन गलियों में - Purani Lucknow Ke Unn Galiyon Mein | Harsh Nath Jha

पुरानी लखनऊ के उन गलियों में - Purani Lucknow Ke Unn Galiyon Mein | Harsh Nath Jha पुरानी लखनऊ के उन गलियों में मुझे दुकानें बेशुमार दिखे  पहनावा, खाना, फैशन, मज़हब, मुझे खानदानी व्यापार दिखे।  उन पतली पगडंडियों पे चलकर, पुराने आशिक़ हज़ार दिखे टुंडे-कबाबी, पान-गिलौरी मुझे खानदानी व्यापार दिखे।  गुलाबी शामें, कुल्हड़ की चाय दुकानों पे हलचल, बहार दिखा दिखा लहज़ा, दिखी तहज़ीब मुझे खानदानी व्यापार दिखा।  पैसे की गमक, औ' दशकों की मेहनत वफादारी का कारोबार दिखा  पुरानी लखनऊ की उस शाम में मुझे खानदानी व्यापार दिखे।   - हर्ष नाथ झा Mujh Pe Hain Senkron Ilzaam | मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम छिप-छिप अश्रु बहाने वालों Pingre Ki Chidiya Thi - पिंजरे की चिड़िया थी...

ये जहाँ ख़ुदा का - हर्ष नाथ झा | Ye Jahaan Khuda Ka

ये जहाँ ख़ुदा का ये जहाँ ख़ुदा का कितना नायाब है न जानो तो उलझन और जानो तो ख़्वाब है कितने गुल, कितने अब्र-ए-बहार हैं कुछ को है दर्द कुछ को हक़-ए-इंतिख़ाब है | देखा यहाँ तो ग़म बेशुमार है हद है खुशी की दौलत-ए-खुमार है आरज़ू हैं सबकी दुआएँ हज़ार हैं कुछ को जलन है और कुछ को प्यार है | मुन्तज़िर हैं कईं कई ख़ुद में इज़्तिरार हैं की है उन्होंने मेहनत पर थोड़े बेकरार हैं शिद्दत से चाहा था उन्होंने मंज़िल को अपनी मशक्कत पे उन्हें पूरा ऐतबार है | इंसाफ़-ए-ख़ुदा जहाँ में क्या खूब है है छाँव यहाँ तो वहाँ पर धूप है रंगीन फूलों का है गुलदस्ता बनाया इंसाफ़-ए-ख़ुदा जहाँ में क्या खूब है | - हर्ष नाथ झा Harsh Nath Jha Harsh Nath Jha Poems Poems By Harsh Nath Jha

तुमने मुझसे कहा प्रिय ! Tumne Mujhse Kaha Priya | Love Poems In Hindi | Ishq Shayari

तुमने मुझसे कहा प्रिय ! Tumne Mujhse Kaha Priya अश्रु | Love Poems In Hindi तुमने मुझसे कहा प्रिय ! मुझे पलकों पर बिठा कर रखना साँसों में तेरे रहूँ मैं मन में सदा सजा कर रखना | प्रेम का जो सम्बंध बना है उसे खुशियों से सजा कर रखना यदि कभी आये क्रोध मुझ पर उसे न ख़ुद में छिपा कर रखना | जब आँखों से बात करो तब न ग़म को छिपा कर रखना यदि कभी भी रूठ जाओ मुझ से तब चित्त को न सता कर रखना | और मैं तुमसे माँगू क्या ? मैं तुमको तुमसे मॉंग रही हूँ मैं ख़ुद को, ख़ुद से मॉंग रही हूँ बस! स्थान प्रथम तो मॉंग रही हूँ | आँखें नम हो गईं मेरी माफ़ी माँग सकता नहीं हूँ आँखों में जिसे बसा चूका हूँ उसे हटा सकता नहीं हूँ | माफ़ करना मुझे प्रिय ! तुम्हे हृदय में बसा सकता नहीं हूँ जो स्थान दे दिया है गुरु को वहाँ सजा सकता नहीं हूँ | माफ़ करना मुझे प्रिय ! पलकों पर बिठा सकता नहीं हूँ मातृ, पितृ के स्थान पर आँखों में बसा सकता नहीं हूँ | आत्मा में तो ईश को मैं पूर्णतः स्थापित कर चुका हूँ पर गर्व से किसी और को प्रथम शोभित कर चुका हूँ | माफ़ करना मुझे प्रिय ! रक्त समर्पित कर चुका हूँ अपने देश को, वर्षों पहले साँसें भी अर्पित ...

Hindi Poem On Students - एक कागज़ के टुकड़े के लिए | Harsh Nath Jha

Hindi Poem On Students एक कागज़ के टुकड़े के लिए एक कागज़ के टुकड़े के लिए पूरा बचपन बेकार हो गया न जाने क्यों पिताजी पर पढ़ाई का भूत सवार हो गया | खेलने की उम्र में उन्होंने कलम हम को पकड़ाई थी पता नहीं ये ज़िद क्यों और कहाँ से आई थी | A B C D अ आ इ ई सब पर जीत जब पाई थी एक मेंढक के सामने समुद्र की परछाईं थी | सवाल को प्रूव करने में खेल को हम ने भुला दिया  ‘केमिस्ट्री’ के ‘ सल्फ्यूरिक एसिड’ ने बचपन पूरा जला दिया | ख़्वाब दिखाए थे सबने हम को १०वीं, १२वीं, कम्पटीशन, कॉलेज बस अब तो लाइफ सेट ही है बात तो इस कम्बख्त पेट की है | जीतने को इस दुनिया से ख़ुद से ख़ुद को बेग़ाना किया जिससे थी नफरत हमें ख़ुद को उसका दीवाना किया | ये नहीं, वो नहीं क्या सही, क्या नहीं ? अच्छे बुरे के चक्कर में हम खो गए कहीं | तलाश है उस मंज़िल की जिसमें न खुशियों की सौगात है यहाँ स्थिरता में चंचलता है यह कैसी कायनात है ? एक कागज़ के टुकड़े के लिए पूरा बचपन बेकार हो गया  न जाने क्यों पिताजी पर पढ़ाई का भूत सवार हो गया | - HNJ Hindi Poem On Students STUDENTS PAR HINDI KAVITA Hindi Poem On Students STUDENTS PAR HINDI KAVITA...

देखा है मैंने - Short Hindi Poems For Kids With Morals | Bachon Ke Liye Choti Kavita

Short Hindi Poems For Kids With Morals Moral Values Based Hindi Poems For Kids देखा है मैंने… एक शख़्स में शख्सियतों को देखा है मैंने ! वज़ूद की अहमियत को देखा है मैंने ! पीठ पीछे जिनकी हँसी थे उड़ाते सामने सिर झुकाते देखा है मैंने | झूठें आँसुओं को बहते देखा है ! देखा है ! बहुत नकाबों को मैंने दहाड़ते रहते थे तब जो इंसान तड़पते देखा है सैलाबों को मैंने | Short Hindi Poems For Kids With Morals Moral values based Hindi poems for kids

Famous Poems

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत (Kat Jaoge Mit Jaoge): Viral Lyrics & Meaning

कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत: वायरल गीत का खौफनाक सच और सटीक विश्लेषण भारतीय राजनीतिक संगीत के इतिहास में शायद ही किसी गाने ने इंटरनेट पर इतनी तेज़ी से आग लगाई हो जितनी "कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत" ने लगाई है। प्रेम (Prem) की रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज़ और रुद्र (Rudra) की बेबाक कलम ने एक ऐसा राजनीतिक गान (Political Anthem) तैयार किया है, जो सोशल मीडिया के हर कोने में गूंज रहा है। क्या यह महज़ एक देशभक्ति गीत है, या इसके पीछे कोई गहरा राजनीतिक ध्रुवीकरण छिपा है? साहित्यशाला (Sahityashala) के इस एक्सक्लूसिव लेख में, हम इस वायरल ट्रैक के संपूर्ण बोल (Full Lyrics), इसके प्रत्येक छंद का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Psychological Trigger Formatting) और इसके सामाजिक-राजनीतिक एजेंडे का एक निष्पक्ष और गहन आलोचनात्मक विश्लेषण करेंगे। ▶ वीडियो देखें 📱 WhatsApp पर शेयर करें प्रेम और रुद्र द्वारा रचित इस लोकप्रिय गीत की आधिकारिक कलाकृति। गीत के संपूर्ण बोल और मनोवैज्ञानिक संरचना ...

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ | Mahabharata Par Kavita

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ  - Arey Khud Ko Ishwar Kehte Ho To || Mahabharata Par Kavita || तलवार, धनुष और पैदल सैनिक   कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की  प्रतिक्षा  में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखन  में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन   शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव   पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर ...

साहित्यशाला कविता संग्रह: महाभारत, भक्ति, जीवन, प्रेम और प्रेरणा पर 100+ सर्वश्रेष्ठ कविताएँ

🔥 New Release: "संयुक्ताक्षर" (Sanyuktakshar) - Read the viral poem defining Love through Grammar साहित्यशाला कविता संग्रह: महाभारत, भक्ति, जीवन, प्रेम और प्रेरणा पर 100+ सर्वश्रेष्ठ कविताएँ कविताएँ (Poetry) भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे खूबसूरत और सशक्त माध्यम हैं। वे हमारे दिल की गहराईयों से निकलती हैं और सीधे पढ़ने वाले के दिल तक पहुँचती हैं। साहित्यशाला हमेशा से ही कविता और साहित्य का एक घर रहा है, जहाँ हर रोज़ नए और पुराने कवि अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोते हैं। आज, हमने आपके लिए एक विशेष "महा-संग्रह" (Mega Collection) तैयार किया है। इस एक पेज पर, हमने साहित्यशाला पर प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कविताओं, मैथिली कविताओं और अंग्रेजी कविताओं को एक साथ संकलित किया है। 🔥 सर्वाधिक लोकप्रिय (Reader's Choice) Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning सादगी तो हमारी ज़रा देखिए | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics Dar Pe Sudama Garib Aa Gaya Hai Lyrics (Arey Dwarpalo) Kahani Karn Ki Poem Lyrics By Abhi Munde (Psycho Shaya...

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ - Aree Kaan Kholkar Suno Parth | Mahabharata Poem On Arjuna

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi Mahabharata Poem On Arjuna अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna तलवार,धनुष और पैदल सैनिक  कुरुक्षेत्र मे खड़े हुये, रक्त पिपासू महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुये | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महासमर की  प्रतिक्षा  में सारे टाँक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखने में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पाञ्चजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सबका गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन  शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव  पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस ध...