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नीयत-ए-शौक़ भर न जाय कहीं - Nasir Kazmi Ghazal Lyrics, Meaning & Deep Secrets

Mahatma Gandhi Par Hindi Kavita: "Kaisa Laga Aapko?" (Harsh Nath Jha)

Mahatma Gandhi (Bapu) is not just history; he is a mirror. While many Hindi poems on India celebrate glory, true patriotism asks hard questions.

This poem, "Kaisa Laga Aapko?", is a conversation with Gandhi Ji about the state of the nation—from the pain of Partition to the apathy of modern vote-bank politics.

A solitary candle burning in the dark with a blurred image of Mahatma Gandhi, reflecting the somber tone of the poem.
The silent tears of the Mahatma: Reflections on a changing India.

कैसा लगा आपको ?

- Harsh Nath Jha


गाँधी जी ! गाँधी जी ! कैसा लगा आपको ?
भारत को बाँटा था जब
अपनों को काटा था जब
सपनों को छाँटा था जब
रोयीं थी भारत माता जब |
नेहरू जी को तार दिया
सरदार को हार दिया
दुष्टों को भी प्यार दिया
अपनों ने ही मार दिया |
प्रियदर्शिनी का साम्राज्य हुआ
इमरजेंसी का आगाज़ हुआ
दंगाइयों का ताज हुआ
डर, दहशत का राज हुआ |
A bleeding candle representing the death of Gandhian values with a blurred silhouette of Mahatma Gandhi in the background.
The fading light: A metaphor for the erosion of truth and non-violence in modern politics.

असत्य का प्रसार हुआ
हैवानों का प्रचार हुआ
भारतीयों से दुराचार हुआ
हर तरफ नर-संहार हुआ |
माँ, बेटे को मारा जब
भारत युद्ध था हारा जब
बाबरी को तोड़ा जब
प्रेम, न्याय को छोड़ा जब |
धर्म पर जब दंगे हुए
राजनेता जब नंगे हुए
धर्मगुरु बेढंगे हुए
न्यायाधीश जब गूंगे हुए |
युद्ध जीते, युद्ध हारे
खुद मरे, बहुतों को मारे
गाली जिनको देते सारे
खीर खाकर आते प्यारे |
इतिहास को दोहराते देख
कैसा लगा आपको ?
गाँधी जी ! गाँधी जी !
कैसा लगा आपको ?
जब शहीदों का अपमान हुआ
धूमिल भारत का सम्मान हुआ
आँसू तो आये होंगे न आपके
जब भारतवर्ष बदनाम हुआ |
लाशें को गंगा में बहना पड़ा
बेटियों को कितना सहना पड़ा
चोरों की शरण को गहना पड़ा
लाशों को कतारों में रहना पड़ा |
जब निर्भया चीखती रही
जब दुनिया देखती रही
बस आँखें मीचती रही
और मोमबत्ती बेचती रही |
फिर मारा उन्होंने आपको
रोज़ आपको मारते हैं ये
आपके सिद्धांतों पर हँसतें हैं
आप के नाम पर
बस वोट मांगते हैं ये |
इन्होंने भारत को कंगाली दी
भारत की तिज़ोरी खाली की
महात्माओं को गाली दी
कातिलों को ताली दी |
सुनकर ये सवाल मुड़ गए बापू
उत्तर न मुझको दे पाए
आखों के अश्रु छुपाने को
मेरे समक्ष न रह पाए
इन कटु प्रश्नों को
राष्ट्रपिता न सह पाए
कुछ कुपुत्रों के कर्मों पर
बस मौन ही वो रह पाए |
जिसको न कोई हरा पाया
काल तक न डरा पाया
हर परिस्थिति में खड़ा पाया
जिसको न कोई हरा पाया |
Illustration of a sad Mahatma Gandhi sitting head down amidst the chaos of partition and riots described in the poem Kaisa Laga Aapko.
"Roayi thi Bharat Mata jab" - Bapu witnessing the pain of a divided nation.

हार गया वह बापू मेरा
परदेशियों से जो लड़ता रहा
अपनों ने खंजर भोंक दिया
घुट-घुटकर मरता रहा |
पूछते वो प्रश्न
मेरी आखों में आँसू थे
मैं जानता था बापू हार गया
आत्मा रोयीं होगी उनकी
जब अपनों ने प्रहार किया |

Why this poem matters

This piece is a mirror to society. Just like our poems on the struggles of Lord Ram or the delicate father-daughter bond, we believe literature must provoke thought.

If you connected with this, explore our deeper analysis on Nostalgia, Hindi Linguistics, or Spirituality.

A torn election poster of Mahatma Gandhi with the text 'Vote Do', symbolizing the political exploitation of his name in India.
"Just a name for votes": The commercialization of the Father of the Nation.

Frequently Asked Questions

Who wrote the poem 'Kaisa Laga Aapko'?
The poem was written by Harsh Nath Jha, a poet known for his Hindi and Maithili literary works on Sahityashala.
What is the main theme of this Gandhi Ji poem?
Unlike traditional praise, this poem questions the political degradation of India after independence and asks Gandhi Ji how he feels seeing the current state of the nation.
Where can I find more patriotic poems in Hindi?
You can explore a wide collection of patriotic poetry in our Deshbhakti Kavita section.

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