अगर आपको संघर्ष, आत्मबल और शून्य से उठ खड़े होने की प्रेरणा चाहिए, तो “मैं शून्य पे सवार हूँ” – ज़ाकिर ख़ान की कविता का अर्थ और विश्लेषण ज़रूर पढ़ें।
हम वो हठी अभिमानी है
भारत के गौरव, विज्ञान और स्वाभिमान की हिंदी कविता
भारत केवल एक भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान और परंपराओं की एक अविरल धारा है। यह परंपरा का प्रवाह है जो सदियों से बहता आ रहा है। "हम वो हठी अभिमानी है" (Hum Vo Hathi Abhimani Hai) कवि हर्ष नाथ झा की एक ओजस्वी रचना है।
यह कविता हमें याद दिलाती है कि हमारा इतिहास केवल युद्धों का नहीं, बल्कि शून्य (Zero), सर्जरी और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की खोज का भी है। आइये, पढ़ते हैं यह Patriotic Poems in Hindi जो आपको अपनी जड़ों पर गर्व महसूस कराएगी।
पूरे विश्व को कर्म सिखाया,
हम वो कर्मठ ग्यानी है |
गोवर्धन उठाया था ऊँगली पर,
हम वो हठी अभिमानी है ||
वक्ष-फाड़कर धर्म निभाया,
हम वो कारण महादानी है |
झूले थे जो फांसी पर,
हम वो हठी अभिमानी है ||
ज्ञान-विज्ञानं को जनम दिया,
गिनती हमने दिखाई थी |
विश्व को तारों की भाषा,
हमने ही सिखाई थी ||
सुश्रुत के आशीष को,
हमने सर्जरी का नाम दिया |
२० सहस्त्राब्दी पहले ही,
शल्यचिकित्सा का वरदान दिया ||
आर्यभट्ट के क्या बस,
० का था निर्माण किया ?
कॉपरनिकस से पहले ही,
सूर्य का सिद्धांत दिया ||
माप बताया था परिधि का,
बताया काल जो गुप्त था |
बोधायन ने जो बोध कराया,
वो पाइथागोरस का सूक्त था ||
भास्कराचार्य था वो जिसने,
गुरुत्वाकर्षण बताया था |
NEWTON से ८०० वर्ष पूर्व,
ग्रहण का प्रमाण दिखाया था ||
जिसने परमाणु की खोज की,
वो महर्षि कणाद बड़े ज्ञानी थे |
NEWTON को गति सिखाई थे,
वे हठी अभिमानी थे ||
और बताऊँ और सुनाऊँ,
भारत की अमर कहानी को |
ज्ञान-विज्ञान के जनकों को,
उन हठी अभिमानी को ||
पहला नोबेल लाया था जो,
वो रमन हिन्दुस्तानी था |
परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा देनेवाला,
बोस हठी अभिमानी था ||
बसु और विश्वेश्वर्या थे,
थे रामानुजन साराभाई |
भास्कराचार्य और ब्रह्मगुप्त थे,
थे विज्ञान की परछाई ||
हम बाण भेदकर धरती से,
धारा निकाला करते है |
अपने स्वाभिमान के लिए,
अग्नि को गले लगाया करते है ||
फेककर पत्थर पानी में,
हम तैराया करते हैं |
देश की रक्षा के लिए,
काल तक को झुकाया करते है ||
कविता का भावार्थ: विज्ञान और वीरता का संगम
1. भारत: विज्ञान का जनक (Cradle of Science):
यह कविता इस तथ्य को उजागर करती है कि न्यूटन और कोपरनिकस से सदियों पहले, भारत के ऋषि-मुनियों ने ब्रह्मांड के रहस्य सुलझा लिए थे। जैसा कि महर्षि कणाद का परमाणु सिद्धांत सिद्ध करता है, यह सब "भारतीय हठ" (दृढ़ निश्चय) का परिणाम था। यह विचार हमारे हिंदू तन मन हिंदू जीवन की विचारधारा को पुष्ट करता है।
2. 'हठी' होने का गर्व (Pride in Resilience):
कवि ने 'हठी' शब्द का प्रयोग नकारात्मक रूप में नहीं, बल्कि स्वाभिमान के रूप में किया है। जैसे एक पिंजरे की चिड़िया स्वतंत्रता के लिए तड़पती है, वैसे ही भारत के वीर अपनी भूमि की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।
3. आधुनिक प्रेरणा (Modern Inspiration):
सत्येंद्र नाथ बोस (Satyendra Nath Bose) जैसे वैज्ञानिकों ने दुनिया को जो राह दिखाई, वह आज भी युवाओं को प्रेरित करती है। यह कविता हमें रबिन्द्रनाथ टैगोर की राष्ट्रभक्ति की तरह भर देती है और संकेत देती है कि आज सिंधु में ज्वार उठा है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: 'हम वो हठी अभिमानी है' कविता के रचयिता कौन हैं?
A: इस ओजस्वी कविता के रचयिता युवा कवि हर्ष नाथ झा (Harsh Nath Jha) हैं।
Q: इस कविता का मुख्य विषय क्या है?
A: यह कविता भारतीय स्वाभिमान, देशभक्ति, विज्ञान और सत्य के लिए अडिग रहने की भावना पर केंद्रित है।