परिवर्तन (Change)
प्रकृति का शाश्वत नियम
प्रस्तावना: गीता में श्री कृष्ण ने कहा है, "परिवर्तन ही संसार का नियम है।" यह कविता (Hindi Poem on Parivartan) इसी सत्य को उजागर करती है। चाहे वह ऋतुओं का बदलना हो, या मानव सभ्यता का उत्थान-पतन—बदलाव ही एकमात्र सत्य है। कवि हर्ष नाथ झा ने यहाँ प्रकृति के रौद्र रूप और मानवीय भूलों का चित्रण करते हुए हमें सचेत किया है।
परिवर्तन स्वाभाविक काल चक्र का वरदान है|
सामाजिक जीवन ऋतु में परिवर्तन ही उपादान है||
नियम सुना है प्रकृति का,
परिवर्तन इसका नाम है|
हर युग से पहले आता,
प्रकृति का ईनाम है||
हर नव-निर्माण से पहले,
खंडहर ढाये जाते है|
हर नव-जीवन आने से पहले,
हम पीड़ा ही पाते है।।
अमृत के आने से पहले,
हलाहल ही तो आता है|
सृष्टि के निर्माण से पहले,
काल गीत कुछ गाता है||
स्वयं बना विध्वंसक मानव,
खुद ही का घर जलाता है|
अपनी ही मूर्खता से,
तांडव को स्वयं बुलाता है।।
वृक्षों को वो रहा उखाड़,
औरों का जीवन रहा उजाड़|
अपने स्वार्थ के लिए मानव,
विश्व के साथ कर रहा खिलवाड़||
जनसंख्या का विस्फोट हो,
या हो कूड़ा दाह संस्कार|
जन्म देने वाली माँ (धरती) पर,
हम कर रहे है अत्याचार||
आ-गया दौर बड़ा विकराल,
मौत खड़ी है रूप विशाल|
कल ज्योति देता था जो दीपक,
जला रहा बन धधकती मशाल।।
केवल एक विषाणु ने,
लाखों को है मार दिया|
पर माँ ने स्वयं परिवर्तन से,
खुद को है सवार लिया।।
डरने और घबराने से,
नहीं बनेगी बात, आओ,
मिलकर हम सब करे,
परिवर्तन साथ साथ|
परिवर्तन का सुखद संदेसा,
घर घर तक पहुंचना है|
मानवता के लिए सदा,
खुशहाली ही लाना है||
- हर्ष नाथ झा (Harsh Nath Jha)
कविता का भावार्थ (Summary & Meaning)
1. प्रकृति का नियम: कवि कहते हैं कि बदलाव प्रकृति का उपहार है। जिस तरह पुरानी इमारत को गिराकर ही नई इमारत (नव-निर्माण) बनाई जा सकती है, उसी तरह नए युग के आरम्भ के लिए पुराने का अंत आवश्यक होता है। इसमें पीड़ा जरूर होती है, जैसे अमृत मंथन से पहले विष (हलाहल) निकला था।
2. मानवीय भूल और दंड: कविता का मध्य भाग मनुष्य द्वारा प्रकृति के शोषण (Deforestation, Pollution) पर केंद्रित है। कवि चेतावनी देते हैं कि जब हम धरती माँ पर अत्याचार करते हैं, तो प्रकृति अपना संतुलन खुद बनाती है।
3. आशा की किरण: अंत में, कवि कोरोना काल (विषाणु) का उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि विपत्तियां हमें सुधारने आती हैं। हमें डरने के बजाय एकजुट होकर सकारात्मक परिवर्तन (Positive Change) लाने का संकल्प लेना चाहिए।