नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) की लेखनी में जो आध्यात्म और गहराई है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। जहाँ उनकी कविता पिंजरे की चिड़िया थी (Pinjre Ki Chidiya Thi) हमें स्वतंत्रता का महत्व समझाती है, वहीं आज की यह प्रस्तुति 'विविध वासनाएँ हैं मेरी' (गीतांजलि से) हमें ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण सिखाती है।
यह केवल एक कविता नहीं, बल्कि एक प्रार्थना है। यदि आप जीवन में दिशा खोज रहे हैं, तो यह Inspirational Poems In Hindi की श्रेणी में एक अनमोल रत्न है।
विविध वासनाएँ हैं मेरी
Rabindranath Tagore Hindi Poems | गीतांजलि
विविध वासनाएँ हैं मेरी प्रिय प्राणों से भी
वंचित कर उनसे तुमने की है रक्षा मेरी;
संचित कृपा कठोर तुम्हारी है मम जीवन में।
अनचाहे ही दान दिए हैं तुमने जो मुझको,
आसमान, आलोक, प्राण-तन-मन इतने सारे,
बना रहे हो मुझे योग्य उस महादान के ही,
अति इच्छाओं के संकट से त्राण दिला करके।
मैं तो कभी भूल जाता हूँ, पुनः कभी चलता,
लक्ष्य तुम्हारे पथ का धारण करके अन्तस् में,
निष्ठुर! तुम मेरे सम्मुख हो हट जाया करते।
यह जो दया तुम्हारी है, वह जान रहा हूँ मैं;
मुझे फिराया करते हो अपना लेने को ही।
कर डालोगे इस जीवन को मिलन-योग्य अपने,
रक्षा कर मेरी अपूर्ण इच्छा के संकट से।।
कविता का भावार्थ (Critical Analysis)
इस कविता में टैगोर ईश्वर की 'कठोर कृपा' (Cruel Kindness) का वर्णन करते हैं। हम अक्सर अपनी इच्छाओं (Desires) के गुलाम हो जाते हैं, जो हमारे लिए हानिकारक हो सकती हैं। ईश्वर उन इच्छाओं को पूरा न करके वास्तव में हमारी रक्षा करते हैं।
कवि कहते हैं कि ईश्वर हमें Rabindranath Tagore Hindi Poem संग्रह की तरह जीवन में कई अनचाहे उपहार (हवा, प्रकाश, जीवन) देते हैं ताकि हम उस परम 'महादान' (Salvation) के योग्य बन सकें।
साहित्यशाला पर आप अन्य शैलियों का भी आनंद ले सकते हैं। जहाँ टैगोर हमें शांति देते हैं, वहीं झाँसी की रानी (Jhansi Ki Rani) और गणतंत्र दिवस की कविताएं हमें जोश से भर देती हैं। यह विविधता ही हिंदी साहित्य की सुंदरता है।