अगर आपको संघर्ष, आत्मबल और शून्य से उठ खड़े होने की प्रेरणा चाहिए, तो “मैं शून्य पे सवार हूँ” – ज़ाकिर ख़ान की कविता का अर्थ और विश्लेषण ज़रूर पढ़ें।
मैं तूफ़ानों में चलने का आदी हूँ – Hindi Motivational Poem
जीवन एक निरंतर संघर्ष है, जहाँ हर मोड़ पर नई चुनौतियां हमारा इंतज़ार करती हैं। हिंदी साहित्य में ऐसी कई कालजयी रचनाएं हैं जो हमें हताशा के क्षणों में संबल प्रदान करती हैं। जिस प्रकार देशभक्ति कविताएं हमारे भीतर राष्ट्र प्रेम जगाती हैं, उसी प्रकार गोपालदास 'नीरज' की यह कविता—"मैं तूफ़ानों में चलने का आदी हूँ"—हमारे व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों को ऊर्जा देती है।
अक्सर जब हम जीवन की कठिनाइयों से घिर जाते हैं, तो हमें हरिवंश राय बच्चन की अग्निपथ की याद आती है, जो हमें बिना रुके चलने का संदेश देती है। ठीक उसी भावभूमि पर रची गई नीरज जी की यह कविता हमें सिखाती है कि सच्चा नाविक वही है जो शांत लहरों में नहीं, बल्कि तूफानों में रास्ता बनाए। यह कविता कृष्ण की चेतावनी की तरह ही ओजस्वी और प्रभावशाली है।
मैं तूफ़ानों में चलने का आदी हूँ
मैं तूफ़ानों में चलने का आदी हूँ,
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो।
हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते,
मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते।
सच कहता हूँ—जब मुश्किलें न होतीं,
मेरे पग तब चलने में भी शर्माते।
मेरे संग चलें हवाएँ जिससे,
तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो।
मैं तूफ़ानों में चलने का आदी हूँ,
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो।
अंगार अधर पर धर मैं मुस्काया हूँ,
मैं मरघट से ज़िंदगी बुला के लाया हूँ।
किस्मत से आँख-मिचौनी खेल चला हूँ,
सौ बार मृत्यु के गले चूम आया हूँ।
न स्वीकार है दया, अपनी भी,
तुम मत मुझ पर कोई एहसान करो।
फूलों से जग आसान नहीं होता,
रुकने से पग गतिवान नहीं होता।
अवरोध न हों तो प्रगति नहीं,
जहाँ नाश है, वहीं निर्माण होता।
मैं बसा सकूँ नव-स्वर्ग “धरा” पर,
तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो।
— गोपालदास नीरज
कविता का भावार्थ और जीवन में प्रासंगिकता
यह कविता मात्र शब्दों का संयोजन नहीं है, बल्कि एक जीवन दर्शन है। कवि कहते हैं, "जहाँ नाश है, वहीं निर्माण होता"। यह दर्शन हमें सिखाता है कि विपदाओं से घबराना नहीं चाहिए। जैसा कि दिनकर जी ने भी कहा है— "सच है विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है"।
साहित्य, समाज और भविष्य
चाहे वह त्रेता युग में मर्यादित राम का वनवास हो, या आज के आधुनिक युग की आर्थिक उथल-पुथल, संघर्ष हर जगह है। आज हम बाजार की अनिश्चितताओं और मंदी (Market Crash) की भविष्यवाणियों के बीच जी रहे हैं। ऐसे समय में नीरज जी की यह पंक्तियाँ हमें मानसिक संबल देती हैं कि 'अवरोध नहीं तो प्रगति नहीं'।
साहित्य का इतिहास गवाह है—चाहे आप अंग्रेजी साहित्य के विभिन्न युगों (Eras of English Literature) का अध्ययन करें या हिंदी काव्य का—महानतम सृजन हमेशा संकट काल में ही हुए हैं।
कविता पाठ (Video Recitation)
Watch this powerful recitation to feel the true emotion of the poem.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. 'मैं तूफ़ानों में चलने का आदी हूँ' कविता किसने लिखी है?
यह ओजस्वी और प्रेरणादायक कविता प्रसिद्ध हिंदी कवि और गीतकार गोपालदास 'नीरज' द्वारा लिखी गई है।
Q2. इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का मूल संदेश यह है कि कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ (तूफ़ान) मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारती हैं। हमें आसान रास्तों की तलाश करने के बजाय संघर्षों का सामना साहस के साथ करना चाहिए।
Q3. यह कविता हमारे जीवन के लिए कैसे प्रासंगिक है?
यह कविता हमें सिखाती है कि सुख-सुविधाएं हमें कमजोर बना सकती हैं, जबकि संघर्ष हमें मजबूत बनाते हैं। यह छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है।
निष्कर्ष
दोस्तों, तूफ़ान केवल विनाश नहीं लाते, वे हमारे हौसलों की परीक्षा भी लेते हैं। गोपालदास नीरज की यह कविता हमें याद दिलाती है कि 'गति की मशाल आंधी में ही हँसती है'। अपने जीवन की मुश्किलों से भागें नहीं, बल्कि उनका सामना करें।
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