सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics – Nusrat Fateh Ali Khan (Meaning & Translation)

प्रभु, मैं पानी: केदारनाथ सिंह | कविता और व्याख्या (Prabhu Main Paani Poem)

प्रभु, मैं पानी: केदारनाथ सिंह | कविता व्याख्या, प्रतिपाद्य और विश्लेषण (NEP/DU Notes)

विषय प्रवेश:

हिंदी कविता के आधुनिक इतिहास में केदारनाथ सिंह (Kedarnath Singh) एक ऐसे कवि हैं जिन्होंने पर्यावरण, प्रकृति और मनुष्य के टूटते रिश्तों को बहुत संवेदनशीलता से उकेरा है। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU Syllabus) और NEP पाठ्यक्रम का हिस्सा बनी उनकी कविता "प्रभु, मैं पानी" (Prabhu Main Paani) केवल एक कविता नहीं, बल्कि पृथ्वी के 'प्राचीनतम नागरिक' यानी जल का एक करुण बयान (Statement) है।

An eagle flying in a barren sky, representing the loss of biodiversity mentioned in the poem.
"प्रभु, कितनी कम चीलें दिखती हैं आजकल" - विलुप्त होती जैव विविधता का प्रतीक।

यह कविता जल संकट, प्रदूषण, और सबसे बढ़कर—पानी के बाज़ारीकरण (Commodification of Water) पर एक तीखा व्यंग्य है। आज के इस विस्तृत लेख में हम इस कविता का पंक्ति-दर-पंक्ति विश्लेषण (Line-by-line Analysis), शिल्प सौंदर्य और परीक्षा उपयोगी प्रश्न देखेंगे।


मूल कविता: प्रभु, मैं पानी

प्रभु,
मैं – पानी – पृथ्वी का
प्राचीनतम नागरिक
आपसे कुछ कहने की अनुमति चाहता हूँ
यदि समय हो तो पिछले एक दिन का
हिसाब दूँ आपको

अब देखिए न
इतने दिनों बाद कल मेरे तट पर
एक चील आई
प्रभु, कितनी कम चीलें
दिखती हैं आजकल
आपको पता तो होगा
मर गईं वे!

पर जैसे भी हो
कल एक वो आई
और बैठ गई मेरे बाजू में
पहले चौंककर उसने इधर-उधर देखा
फिर अपनी लंबी चोंच गड़ा दी मेरे सीने में
और यह मुझे अच्छा लगता रहा प्रभु
लगता रहा जैसे घूँट-घूँट
मेरा जनमांतर हो रहा है एक चील के कंठ में
कंठ से रक्त में
रक्त से फिर एक नई चील में।

फिर काफ़ी समय बाद
दिन के कोई तीसरे पहर
एक जानवर आया हलकासा प्यासा
और मुझे पीने लगा चभर-चभर
इस अशिष्ट आवाज़ के लिए
क्षमा करें प्रभु
यह एक पशु के आनंद की आवाज़ थी
जिससे बेहतर कुछ नहीं था उसके जबड़ों के पास।

इस बीच बहुत से चिरई-चुरुंग
मानव-अनामुष
सब गुजरते रहे मेरे पास से होकर
बल्कि एक बार तो ऐसा लगा
कि सूरज के सातों घोड़े उतर आए हैं –
मेरे क़रीब – प्यास से बेहाल
पर असल में जो आया
वह एक चरवाहा था
अब कैसे बताऊँ प्रभु – क्योंकि आपको तो
प्यास कभी लगती नहीं –
कि वह कितना प्यासा था।

फिर ऐसा हुआ कि उसने हड़बड़ी में
मुझे चुल्लूभर उठाया
और क्या जाने क्या
उसे दिख गया मेरे भीतर
कि हिल उठा वह
और पूरा का पूरा मैं गिर पड़ा नीचे
शर्मिंदा हूँ प्रभु।
और इस घटना पर हिल रहा हूँ अब तक
पर कोई करे तो भी क्या
समय ऐसा ही कुछ ऐसा है
कि पानी नदी में हो
या किसी चेहरे पर
झाँक कर देखो तो तल में कचरा
कहीं दिख ही जाता है।

अंत में प्रभु,
अंतिम लेकिन सबसे ज़रूरी बात
वहाँ होंगे मेरे भाई-बन्धु
मंगल ग्रह या चाँद पर
पर यहाँ पृथ्वी पर मैं
यानी आपका मुँहलगा यह पानी
अब दुर्लभ होने के कगार तक
पहुँच चुका है।
पर चिंता की कोई बात नहीं
यह बाजारों का समय है
और वहाँ किसी रहस्यमय स्रोत से
मैं हमेशा मौजूद हूँ
पर अपराध क्षमा हो प्रभु
और यदि मैं झूठ बोलूं
तो जलकर हो जाऊं राख
कहते हैं इसमें—
आपकी भी सहमति है।


कविता का विस्तृत विश्लेषण और व्याख्या (Deep Analysis)

केदारनाथ सिंह ने इस कविता में 'पानी' का मानवीकरण (Personification) किया है। पानी स्वयं अपनी व्यथा 'प्रभु' (ईश्वर/सत्ता) को सुना रहा है। आइए इसे खंडों में समझते हैं:

1. प्राचीनतम नागरिक का परिचय (The Ancient Citizen)

"मैं – पानी – पृथ्वी का / प्राचीनतम नागरिक"

  • कवि ने पानी को पृथ्वी का सबसे पुराना निवासी बताया है। मनुष्य के आने से करोड़ों साल पहले से पानी यहाँ है। यह संबोधन मनुष्य के अहंकार को चोट करता है कि वह पृथ्वी का मालिक नहीं, बल्कि बाद में आया हुआ एक मेहमान मात्र है।

2. चील और जीवन का चक्र (The Eagle and Cycle of Life)

"प्रभु, कितनी कम चीलें / दिखती हैं आजकल / आपको पता तो होगा / मर गईं वे!"

  • यहाँ चील (Eagle) केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का प्रतीक है।
  • पानी बताता है कि जब चील पानी पीती है, तो उसे लगता है कि उसका 'जनमांतर' हो रहा है। यह जल और जीवन के गहरे संबंध को दर्शाता है। "रक्त में फिर एक नई चील में"—यह जीवन की निरंतरता है जो अब संकट में है क्योंकि चीलें मर रही हैं (पर्यावरणीय विनाश)।
A dried river bed with pollution, symbolizing the theme of Kedarnath Singh's poem Prabhu Main Paani.
कविता का केंद्रीय भाव: जल संकट और बढ़ता प्रदूषण।

3. पशु की निश्छलता (Innocence of Animal)

"एक जानवर आया हलकासा प्यासा... क्षमा करें प्रभु / यह एक पशु के आनंद की आवाज़ थी"

  • 'चभर-चभर' की आवाज़ को 'अशिष्ट' (Uncivilized) कहना दरअसल सभ्य समाज पर व्यंग्य है। पशु पानी पीते समय कोई दिखावा नहीं करता, वह शुद्ध आनंद (Pure Joy) में है। केदारनाथ सिंह यहाँ प्राकृतिक सहजता को नागरिक शिष्टाचार से ऊपर रखते हैं।

4. चरवाहा और प्रदूषण (The Shepherd and Pollution)

"हिल उठा वह / और पूरा का पूरा मैं गिर पड़ा नीचे... तल में कचरा / कहीं दिख ही जाता है।"

  • यह कविता का सबसे मार्मिक हिस्सा है। एक प्यासा चरवाहा (आम आदमी) जब पानी पीने के लिए उठाता है, तो उसे पानी (या पानी में अपना चेहरा/प्रतिबिंब) देखकर घृणा होती है।
  • "तल में कचरा": यह कचरा दो तरह का है—एक तो नदियों में फैला वास्तविक प्रदूषण, और दूसरा मनुष्य के मन का मैल (Moral Corruption)। जिस पानी ने सबको जीवन दिया, आज वह इतना मैला हो चुका है कि उसे पीने में भी संकोच हो रहा है।

5. बाज़ारवाद और प्रभु की सहमति (Market & Divine Complicity)

"यह बाजारों का समय है... पर अपराध क्षमा हो प्रभु... कहते हैं इसमें—आपकी भी सहमति है।"

  • अंतिम पंक्तियाँ सबसे तीखी हैं। पानी अब नदियों में दुर्लभ है, लेकिन 'बाज़ारों' में (बोतलों में) उपलब्ध है।
  • रहस्यमय स्रोत: यह कॉर्पोरेट कंपनियों की ओर इशारा है जो प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा कर रही हैं।
  • "आपकी भी सहमति है": यहाँ 'प्रभु' का अर्थ केवल ईश्वर नहीं, बल्कि 'सत्ता' (Government/Power) भी है। कवि स्पष्ट कह रहा है कि जल का यह बाज़ारीकरण सत्ता की मूक सहमति के बिना संभव नहीं था।

🔗 संबंधित लेख पढ़ें (Related Articles):


परीक्षा उपयोगी समीक्षात्मक बिंदु (Critical Analysis for Exams)

DU और अन्य विश्वविद्यालयों की परीक्षा में उत्तर लिखते समय 'शिल्प-पक्ष' (Craft) में इन बिंदुओं को अवश्य शामिल करें:

  1. मानवीकरण अलंकार: पूरी कविता में पानी एक जीवित पात्र की तरह बोल रहा है।
  2. व्यंग्य (Satire): 'प्रभु' शब्द का प्रयोग दोहरा अर्थ रखता है—ईश्वर और शासक वर्ग। 'बाज़ारों का समय' पूंजीवाद पर सीधा हमला है।
  3. बिम्ब योजना:
    • श्रव्य बिम्ब (Auditory Image): 'चभर-चभर' की आवाज़।
    • दृश्य बिम्ब (Visual Image): चील का चोंच गड़ाना, चरवाहे का चुल्लू भरना।
  4. भाषा: केदारनाथ सिंह की भाषा 'खड़ी बोली' है, जो बातचीत के लहजे (Conversational Tone) में है। यह कविता गद्यात्मक होते हुए भी लयात्मक है।

📥 Exam Notes & Analysis PDF

इस कविता के प्रश्न-उत्तर और विस्तृत नोट्स डाउनलोड करें।

Download Full PDF Notes

कवि केदारनाथ सिंह के बारे में

केदारनाथ सिंह (1934-2018) ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता और हिंदी की 'नई कविता' धारा के सशक्त हस्ताक्षर थे। उनकी कविताओं में बिम्बों का अद्भुत प्रयोग मिलता है। 'अकाल में सारस', 'बाघ', और 'ज़मीन पक रही है' उनके प्रमुख संग्रह हैं। वे आम आदमी के दुख-दर्द और प्रकृति के विनाश को समान शिद्दत से उठाते थे। (अधिक जानकारी: Sahitya Akademi)

निष्कर्ष (Conclusion)

निष्कर्षतः, "प्रभु, मैं पानी" केवल जल संकट की कविता नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यता की नैतिकता (Moral Crisis) के पतन की कहानी है। जिस पानी को हम देवता मानते थे, आज उसे हमने 'कचरे' और 'बाज़ार' के हवाले कर दिया है। केदारनाथ सिंह हमें चेतावनी देते हैं कि यदि अब भी हम नहीं चेते, तो वह दिन दूर नहीं जब पानी सिर्फ मंगल ग्रह पर 'भाई-बंधु' के रूप में नहीं, बल्कि पृथ्वी पर भी एक 'मिथक' बनकर रह जाएगा।

प्रभु, मैं पानी: केदारनाथ सिंह | कविता व्याख्या, प्रतिपाद्य और विश्लेषण (NEP/DU Notes)
कवि केदारनाथ सिंह (1934-2018)

📌 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. 'प्रभु, मैं पानी' कविता का मुख्य संदेश क्या है?

Ans: इसका मुख्य संदेश पर्यावरणीय चेतना जगाना और प्राकृतिक संसाधनों (जल) के अंधाधुंध दोहन व बाज़ारीकरण का विरोध करना है।

Q2. 'पानी' खुद को 'प्राचीनतम नागरिक' क्यों कहता है?

Ans: क्योंकि पानी का अस्तित्व पृथ्वी पर मानव और अन्य जीवों से बहुत पहले से है। यह कथन मनुष्य के अहंकार को चुनौती देता है।

📌 इसे भी पढ़ें (Related Posts):

📢 Sirf Padhein Nahi, Likhein Bhi!
Article, Kahani, Vichar, ya Kavita — Hindi, English ya Maithili mein. Apne shabdon ko Sahityashala par pehchan dein.

Submit Your Content →

Famous Poems

Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning Explained

Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning Explained Discover the Soulful Charkha Lyrics in English If you've been searching for Charkha lyrics in English that capture the depth of Punjabi folk emotion, look no further. In this blog, we take you on a journey through the original lyrics, their Hinglish transliteration, Hindi translation, and poetic English translation. We also dive into the symbolism and meaning behind this heart-touching song. Whether you're a lover of Punjabi folk, a poetry enthusiast, or simply curious about the emotions behind the spinning wheel, this complete guide to the "Charkha" song will deepen your understanding. Original Punjabi Lyrics of Charkha Ve mahiya tere vekhan nu, Chuk charkha gali de vich panwa, Ve loka paane main kat di, Tang teriya yaad de panwa. Charkhe di oo kar de ole, Yaad teri da tumba bole. Ve nimma nimma geet ched ke, Tang kath di hullare panwa. Vasan ni de rahe saure peke, Mainu tere pain pulekhe. ...

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics – Nusrat Fateh Ali Khan (Meaning & Translation)

Home › Nusrat Fateh Ali Khan › Saadgi To Hamari Lyrics Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics – Nusrat Fateh Ali Khan (Meaning & Translation) Jump to Section: 📜 Hindi Lyrics 🔤 English Translation 💡 Deep Meaning Famous Line: "Log darte hai katil ki parchai se..." Meaning: "People fear the shadow of a killer, but I have fallen in love with the killer (beloved) herself." Sahityashala welcomes you to the soulful world of Qawwali. Today we explore the masterpiece sung by Ustad Nusrat Fateh Ali Khan — "Saadgi To Hamari Zara Dekhiye" . Written by the legendary poet Qateel Shifai , this Ghazal is a tale of innocent love and brutal betrayal. Below are the complete lyrics in Hindi and English with meaning. Saadgi To Hamari Lyrics in Hindi (हिंदी लिरिक्स) सादगी तो हमारी जरा देखिये, एतबार आपके वादे पे कर लिया | मस्ती में ...

Best Republic Day Poems in Hindi 2026 (26 January Kavita for Students, Teachers & Stage)

The dawn of January 26, 2026 , brings with it more than just a parade; it brings the echo of freedom that resonates in every Indian heart. As we prepare to celebrate our 77th Republic Day, the search for the perfect words—the ultimate best Republic Day poem in Hindi —begins in schools, colleges and community gatherings across the nation.  A heart-touching recitation is the perfect way to win hearts at a school competition. 📝 Editorial Note: As editors who have evaluated school and college-level poetry competitions and published Hindi literature for years, we understand which poems resonate on stage and which fail to connect. This comprehensive guide covers poems for every age group, ensuring you find the perfect verse for your needs. Table of Contents Poems by Class (1 to College) Very Short Poems (Status/Intro) Exclusive Original Poem 2026 The Classics: Timeless Verses How to Win (Performanc...

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) | Karna Poem

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) "Kahani Karn Ki" (popularly known as Sampurna ) is a viral spoken word performance that reimagines the Mahabharata from the perspective of the tragic hero, Suryaputra Karna . Written by Abhi Munde (Psycho Shayar), this poem questions the definitions of Dharma and righteousness. ज़रूर पढ़ें: इसी महाभारत युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया था। पढ़ें रामधारी सिंह दिनकर की वो ओजस्वी कविता: ➤ कृष्ण की चेतावनी: रश्मिरथी सर्ग 3 (Lyrics & Meaning) Quick Links: Lyrics • Meaning • Poet Bio • Watch Video • FAQ Abhi Munde (Psycho Shayar) performing the viral poem "Sampurna" कहानी कर्ण की (Sampurna) - Full Lyrics पांडवों को तुम रखो, मैं कौरवों ...