भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा में देवी की आराधना के अनेक रूप मिलते हैं, लेकिन मिथिला की पावन भूमि पर रचे गए गीतों में जो सौंदर्य बोध है, वह अद्वितीय है। क्या आपने कभी सोचा है कि एक शेर (Lion) के ऊपर कमल (Lotus) कैसे खिल सकता है? भौतिक जगत में यह असंभव प्रतीत होता है, किन्तु साहित्य के महाकाश में यह नायिका के सौंदर्य की पराकाष्ठा है।
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| "Brahma, Vishnu, Mahesh Thadh": A visual representation of the verse where the Trinity worships the Goddess. |
आज हम बात कर रहे हैं महाकवि विद्यापति द्वारा रचित उस कालजयी रचना की, जो न केवल एक भक्ति गीत है, बल्कि एक साहित्यिक पहेली (कूट काव्य) भी है—"सिंह पर एक कमल राजित" (Singh Par Ek Kamal Rajit)। यह गीत मैथिली लोककंठ का हार है और शारदा सिन्हा जैसी महान गायिकाओं ने इसे अमर बना दिया है। इस लेख में, हम इस गीत के शुद्ध, प्रामाणिक लिरिक्स और इसके गूढ़, बहुआयामी भावार्थ को डिकोड करेंगे।
साहित्यिक संदर्भ और परंपरा
विद्यापति केवल श्रृंगार के कवि नहीं थे, वे भक्त भी थे। उनकी पदावलियों में जहाँ पिया मोर बालक हम तरुणी गे जैसे श्रृंगारिक पद मिलते हैं, वहीं भगवती की स्तुति में ऐसे अलौकिक पद भी हैं। यह गीत नख-शिख वर्णन परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे समझने के लिए हमें सामान्य अर्थ से ऊपर उठकर साधना और तंत्र ज्ञान की दृष्टि भी रखनी होती है, जैसा कि हम अक्सर ज्योतिष और तंत्र साधना के संदर्भों में देखते हैं।
गीत के बोल (शुद्ध और प्रामाणिक)
(स्थायी)
सिंह पर एक कमल राजित, ताहि ऊपर भगवती।
ताहि ऊपर एक कमल राजित, ताहि ऊपर भगवती।।
(अंतरा 1)
हसती खल-खल, दाँत झल-झल,
रूप सुंदर भगवती।
सिंह पर एक कमल राजित, ताहि ऊपर भगवती।।
(अंतरा 2)
शंख गहि-गहि, चक्र गहि-गहि,
खड्ग गहि जगतारिणी।
परशु गहि-गहि, पाश गहि-गहि,
असुर दल संहारिणी।।
सिंह पर एक कमल राजित...।।
(अंतरा 3)
उदित दिनकर लाल छवि,
अति रूप सुंदर शोभती।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश ठाढ़,
करथि स्तुति विनती।।
सिंह पर एक कमल राजित...।।
Hinglish Lyrics (Authentic)
(Sthai)
Singh par ek kamal raajit, taahi upar Bhagwati.
Taahi upar ek kamal raajit, taahi upar Bhagwati..
(Antara 1)
Hasati khal-khal, daant jhal-jhal,
Roop sundar Bhagwati.
Singh par ek kamal raajit, taahi upar Bhagwati..
(Antara 2)
Shankh gahi-gahi, chakra gahi-gahi,
Khadg gahi jag-taarini.
Parshu gahi-gahi, paash gahi-gahi,
Asur dal sanhaarini..
Singh par ek kamal raajit...
(Antara 3)
Udit dinkar laal chhavi,
Ati roop sundar shobhati.
Brahma, Vishnu, Mahesh thaadh,
Karathi stuti vinati..
Singh par ek kamal raajit...
गहन भावार्थ: "सिंह पर कमल" का बहुआयामी रहस्य
यह गीत केवल शब्दों का जमावड़ा नहीं, बल्कि एक तांत्रिक दृश्य (Tantric Visualization) है। इसकी पहली पंक्ति ही श्रोता के मन को झकझोर देती है। आइए, इसकी परतों को खोलते हैं:
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| "Khadag Gahi Jagtarini": The fierce, protective aspect of the Goddess. |
1. शास्त्रीय और साहित्यिक अर्थ (The Riddle Decoded)
सबसे पहले विद्यापति की 'संध्या भाषा' (Twilight Language) को समझते हैं। यह एक कूट शैली है जहाँ शब्द अपने सामान्य अर्थ से अलग कुछ इशारा करते हैं:
- सिंह (Lion) = कटि (कमर): भारतीय मूर्तिकला और काव्य शास्त्र में आदर्श नायिका की कमर को 'सिंह-कटि' कहा जाता है—यानी शेर जैसी पतली, सुडौल और बलशाली।
- कमल (Lotus) = मुख (चेहरा): कमल कोमलता, सुंदरता और तेज का शाश्वत प्रतीक है, जिसका उपयोग देवी के मुख-मंडल के लिए हुआ है।
सरल शब्दों में: माँ जगदम्बा की शेर जैसी पतली और शक्तिशाली कमर के ऊपर उनका कमल जैसा सुंदर मुख सुशोभित है। यह उनके विराट स्वरूप का नख-शिख वर्णन है।
2. नारीवादी परिप्रेक्ष्य (Feminist Interpretation: Strength in Grace)
यह आधुनिक युग के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्याख्या है। यहाँ कमल (कोमलता) सिंह (प्रचंड शक्ति) के ऊपर आरूढ़ है। यह इस रूढ़ि को तोड़ता है कि कोमलता कमजोरी की निशानी है। यह दर्शाता है कि स्त्री की सौम्यता और सुंदरता उसकी अदम्य शक्ति और आत्मविश्वास (सिंह) के आधार पर टिकी है। देवी शक्ति का वह स्वरूप हैं जहाँ 'कोमलता' और 'प्रचंडता' एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। वह अबला नहीं, सबला है, जो सिंह जैसी उग्र शक्ति को भी अपना आधार बनाती है। जैसा कि हम झाँसी की रानी जैसी कविताओं में देखते हैं, स्त्री का यह द्वंद्व (Duality) ही उसकी वास्तविक शक्ति है।
3. मनोवैज्ञानिक और भावात्मक दृष्टिकोण (Psychology of Devotion)
विद्यापति ने 'सिंह' और 'कमल' को एक साथ रखकर मनोवैज्ञानिक प्रहार किया है। सिंह 'भय' का प्रतीक है और कमल 'प्रेम' का। जब मन इन दो विरोधी तत्वों को एक साथ देखता है, तो तर्क रुक जाता है। यह साधक को एक ध्यानस्थ अवस्था (Meditative State) में ले जाने की तकनीक है। "खड्ग गहि जगतारिणी" में उनका रौद्र रूप है जो दुष्टों का संहार करता है, और "रूप सुंदर भगवती" में उनका सौम्य रूप है। मिथिला में जगदम्बा घर में दियारा जैसे गीतों में जो अपनापन है, वही अपनापन इस विराट रूप के दर्शन में भी समाहित है।
साहित्यिक विश्लेषण: अलंकार और 'संध्या भाषा'
हिंदी और मैथिली साहित्य के विद्यार्थियों के लिए, विशेषकर जो परशुराम की प्रतीक्षा जैसे ओजस्वी काव्य पढ़ते हैं, विद्यापति का यह माधुर्य अलग अनुभव देता है।
- रूपकातिशयोक्ति (Rupakatishayokti): इस पद में मुख्य अलंकार 'रूपकातिशयोक्ति' है। यहाँ 'कमर' और 'मुख' (उपमेय) का लोप कर दिया गया है और केवल 'सिंह' और 'कमल' (उपमान) का वर्णन किया गया है।
- व्यतिरेक अलंकार (Vyatirek Alankar): यहाँ एक सूक्ष्म 'व्यतिरेक' भी है—सिंह (रौद्र/कठोर) और कमल (कोमल/मृदुल) का एक ही आधार पर होना।
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| "Udit Dinkar Lal Chhavi": The radiant beauty of the Mother Goddess. |
विद्यापति अक्सर कूट (Riddles) का प्रयोग करते थे। जैसे उनका प्रसिद्ध पद "उगना रे मोर कतय गेला" में भगवान शिव को साधारण नौकर के रूप में छिपाना, या "जय जय भैरवि" में तांत्रिक प्रतीकों का प्रयोग। यह सिद्धों और नाथों की परंपरा से प्रभावित शैली है।
वीडियो: शारदा सिन्हा की आवाज़ में
इस गीत का आनंद श्रवण के बिना अधूरा है। यहाँ प्रस्तुत है पद्म भूषण शारदा सिन्हा जी द्वारा गाया गया यह अमर गीत और इसका एक लोकप्रिय लोक संस्करण:
शारदा सिन्हा की कालजयी प्रस्तुति
मैथिली लोकगीत संस्करण
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
'सिंह पर एक कमल राजित' का वास्तविक अर्थ क्या है?
साहित्यिक दृष्टि से, इसका अर्थ है कि देवी की सिंह जैसी पतली कमर (कटि) पर उनका कमल जैसा सुंदर मुख सुशोभित है। यह नख-शिख वर्णन का एक रूपक है।
यह गीत किस कवि द्वारा रचित है?
यह गीत मैथिली कोकिल महाकवि विद्यापति द्वारा रचित है।
निष्कर्ष
"सिंह पर एक कमल राजित" महाकवि विद्यापति की उस अदभुत दृष्टि का प्रमाण है जहाँ भक्ति, साहित्य और दर्शन एक हो जाते हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि शक्ति और सौंदर्य एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जिस तरह विद्या तीसरा नेत्र होती है, वैसे ही यह गीत देवी को देखने की एक नई दृष्टि देता है।
"यह गीत केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि शब्दों के माध्यम से देवी के विराट, सशक्त और सौम्य स्वरूप को एक साथ देखने के लिए है।"
संदर्भ व आभार:
1. IGNOU मैथिली साहित्य अध्ययन सामग्री (MHD-1/MHD-5)
2. हिंदी साहित्य का इतिहास (आचार्य रामचंद्र शुक्ल)
3. विद्यापति पदावली (संपादक: रामवृक्ष बेनीपुरी)
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