सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

दोस्ती टूटने का दर्द: "एक दोस्त से यारी छूट गई" | Sonal Yadav Poem

Singh Par Ek Kamal Rajit: भावार्थ, लिरिक्स और साहित्यिक विश्लेषण | Vidyapati Maithili Geet

भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा में देवी की आराधना के अनेक रूप मिलते हैं, लेकिन मिथिला की पावन भूमि पर रचे गए गीतों में जो सौंदर्य बोध है, वह अद्वितीय है। क्या आपने कभी सोचा है कि एक शेर (Lion) के ऊपर कमल (Lotus) कैसे खिल सकता है? भौतिक जगत में यह असंभव प्रतीत होता है, किन्तु साहित्य के महाकाश में यह नायिका के सौंदर्य की पराकाष्ठा है।

Goddess Durga seated on a lotus upon a lion with Brahma, Vishnu, and Mahesh worshipping, illustrating the Vidyapati Maithili song Singh Par Ek Kamal Rajit.
"Brahma, Vishnu, Mahesh Thadh": A visual representation of the verse where the Trinity worships the Goddess.

आज हम बात कर रहे हैं महाकवि विद्यापति द्वारा रचित उस कालजयी रचना की, जो न केवल एक भक्ति गीत है, बल्कि एक साहित्यिक पहेली (कूट काव्य) भी है—"सिंह पर एक कमल राजित" (Singh Par Ek Kamal Rajit)। यह गीत मैथिली लोककंठ का हार है और शारदा सिन्हा जैसी महान गायिकाओं ने इसे अमर बना दिया है। इस लेख में, हम इस गीत के शुद्ध, प्रामाणिक लिरिक्स और इसके गूढ़, बहुआयामी भावार्थ को डिकोड करेंगे।


साहित्यिक संदर्भ और परंपरा

विद्यापति केवल श्रृंगार के कवि नहीं थे, वे भक्त भी थे। उनकी पदावलियों में जहाँ पिया मोर बालक हम तरुणी गे जैसे श्रृंगारिक पद मिलते हैं, वहीं भगवती की स्तुति में ऐसे अलौकिक पद भी हैं। यह गीत नख-शिख वर्णन परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे समझने के लिए हमें सामान्य अर्थ से ऊपर उठकर साधना और तंत्र ज्ञान की दृष्टि भी रखनी होती है, जैसा कि हम अक्सर ज्योतिष और तंत्र साधना के संदर्भों में देखते हैं।

गीत के बोल (शुद्ध और प्रामाणिक)

(स्थायी)
सिंह पर एक कमल राजित, ताहि ऊपर भगवती।
ताहि ऊपर एक कमल राजित, ताहि ऊपर भगवती।।

(अंतरा 1)
हसती खल-खल, दाँत झल-झल,
रूप सुंदर भगवती।
सिंह पर एक कमल राजित, ताहि ऊपर भगवती।।

(अंतरा 2)
शंख गहि-गहि, चक्र गहि-गहि,
खड्ग गहि जगतारिणी।
परशु गहि-गहि, पाश गहि-गहि,
असुर दल संहारिणी।।
सिंह पर एक कमल राजित...।।

(अंतरा 3)
उदित दिनकर लाल छवि,
अति रूप सुंदर शोभती।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश ठाढ़,
करथि स्तुति विनती।।
सिंह पर एक कमल राजित...।।

Hinglish Lyrics (Authentic)

(Sthai)
Singh par ek kamal raajit, taahi upar Bhagwati.
Taahi upar ek kamal raajit, taahi upar Bhagwati..

(Antara 1)
Hasati khal-khal, daant jhal-jhal,
Roop sundar Bhagwati.
Singh par ek kamal raajit, taahi upar Bhagwati..

(Antara 2)
Shankh gahi-gahi, chakra gahi-gahi,
Khadg gahi jag-taarini.
Parshu gahi-gahi, paash gahi-gahi,
Asur dal sanhaarini..
Singh par ek kamal raajit...

(Antara 3)
Udit dinkar laal chhavi,
Ati roop sundar shobhati.
Brahma, Vishnu, Mahesh thaadh,
Karathi stuti vinati..
Singh par ek kamal raajit...

गहन भावार्थ: "सिंह पर कमल" का बहुआयामी रहस्य

यह गीत केवल शब्दों का जमावड़ा नहीं, बल्कि एक तांत्रिक दृश्य (Tantric Visualization) है। इसकी पहली पंक्ति ही श्रोता के मन को झकझोर देती है। आइए, इसकी परतों को खोलते हैं:

Fierce form of Goddess Durga holding a sword and skull, depicting the line Khadag Lelani Maharani from the Maithili folk song Singh Par Ek Kamal Rajit.
"Khadag Gahi Jagtarini": The fierce, protective aspect of the Goddess.

1. शास्त्रीय और साहित्यिक अर्थ (The Riddle Decoded)

सबसे पहले विद्यापति की 'संध्या भाषा' (Twilight Language) को समझते हैं। यह एक कूट शैली है जहाँ शब्द अपने सामान्य अर्थ से अलग कुछ इशारा करते हैं:

  • सिंह (Lion) = कटि (कमर): भारतीय मूर्तिकला और काव्य शास्त्र में आदर्श नायिका की कमर को 'सिंह-कटि' कहा जाता है—यानी शेर जैसी पतली, सुडौल और बलशाली।
  • कमल (Lotus) = मुख (चेहरा): कमल कोमलता, सुंदरता और तेज का शाश्वत प्रतीक है, जिसका उपयोग देवी के मुख-मंडल के लिए हुआ है।

सरल शब्दों में: माँ जगदम्बा की शेर जैसी पतली और शक्तिशाली कमर के ऊपर उनका कमल जैसा सुंदर मुख सुशोभित है। यह उनके विराट स्वरूप का नख-शिख वर्णन है।

2. नारीवादी परिप्रेक्ष्य (Feminist Interpretation: Strength in Grace)

यह आधुनिक युग के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्याख्या है। यहाँ कमल (कोमलता) सिंह (प्रचंड शक्ति) के ऊपर आरूढ़ है। यह इस रूढ़ि को तोड़ता है कि कोमलता कमजोरी की निशानी है। यह दर्शाता है कि स्त्री की सौम्यता और सुंदरता उसकी अदम्य शक्ति और आत्मविश्वास (सिंह) के आधार पर टिकी है। देवी शक्ति का वह स्वरूप हैं जहाँ 'कोमलता' और 'प्रचंडता' एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। वह अबला नहीं, सबला है, जो सिंह जैसी उग्र शक्ति को भी अपना आधार बनाती है। जैसा कि हम झाँसी की रानी जैसी कविताओं में देखते हैं, स्त्री का यह द्वंद्व (Duality) ही उसकी वास्तविक शक्ति है।

3. मनोवैज्ञानिक और भावात्मक दृष्टिकोण (Psychology of Devotion)

विद्यापति ने 'सिंह' और 'कमल' को एक साथ रखकर मनोवैज्ञानिक प्रहार किया है। सिंह 'भय' का प्रतीक है और कमल 'प्रेम' का। जब मन इन दो विरोधी तत्वों को एक साथ देखता है, तो तर्क रुक जाता है। यह साधक को एक ध्यानस्थ अवस्था (Meditative State) में ले जाने की तकनीक है। "खड्ग गहि जगतारिणी" में उनका रौद्र रूप है जो दुष्टों का संहार करता है, और "रूप सुंदर भगवती" में उनका सौम्य रूप है। मिथिला में जगदम्बा घर में दियारा जैसे गीतों में जो अपनापन है, वही अपनापन इस विराट रूप के दर्शन में भी समाहित है।

साहित्यिक विश्लेषण: अलंकार और 'संध्या भाषा'

हिंदी और मैथिली साहित्य के विद्यार्थियों के लिए, विशेषकर जो परशुराम की प्रतीक्षा जैसे ओजस्वी काव्य पढ़ते हैं, विद्यापति का यह माधुर्य अलग अनुभव देता है।

  • रूपकातिशयोक्ति (Rupakatishayokti): इस पद में मुख्य अलंकार 'रूपकातिशयोक्ति' है। यहाँ 'कमर' और 'मुख' (उपमेय) का लोप कर दिया गया है और केवल 'सिंह' और 'कमल' (उपमान) का वर्णन किया गया है।
  • व्यतिरेक अलंकार (Vyatirek Alankar): यहाँ एक सूक्ष्म 'व्यतिरेक' भी है—सिंह (रौद्र/कठोर) और कमल (कोमल/मृदुल) का एक ही आधार पर होना।
Beautiful Goddess Durga in a red saree seated on a lion, representing the verse Udit Dinkar Lal Chhavi from Sharda Sinha's Maithili song.
"Udit Dinkar Lal Chhavi": The radiant beauty of the Mother Goddess.
विद्यापति की 'संध्या भाषा': अन्य उदाहरण

विद्यापति अक्सर कूट (Riddles) का प्रयोग करते थे। जैसे उनका प्रसिद्ध पद "उगना रे मोर कतय गेला" में भगवान शिव को साधारण नौकर के रूप में छिपाना, या "जय जय भैरवि" में तांत्रिक प्रतीकों का प्रयोग। यह सिद्धों और नाथों की परंपरा से प्रभावित शैली है।

वीडियो: शारदा सिन्हा की आवाज़ में

इस गीत का आनंद श्रवण के बिना अधूरा है। यहाँ प्रस्तुत है पद्म भूषण शारदा सिन्हा जी द्वारा गाया गया यह अमर गीत और इसका एक लोकप्रिय लोक संस्करण:

शारदा सिन्हा की कालजयी प्रस्तुति

मैथिली लोकगीत संस्करण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'सिंह पर एक कमल राजित' का वास्तविक अर्थ क्या है?

साहित्यिक दृष्टि से, इसका अर्थ है कि देवी की सिंह जैसी पतली कमर (कटि) पर उनका कमल जैसा सुंदर मुख सुशोभित है। यह नख-शिख वर्णन का एक रूपक है।

यह गीत किस कवि द्वारा रचित है?

यह गीत मैथिली कोकिल महाकवि विद्यापति द्वारा रचित है।

निष्कर्ष

"सिंह पर एक कमल राजित" महाकवि विद्यापति की उस अदभुत दृष्टि का प्रमाण है जहाँ भक्ति, साहित्य और दर्शन एक हो जाते हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि शक्ति और सौंदर्य एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जिस तरह विद्या तीसरा नेत्र होती है, वैसे ही यह गीत देवी को देखने की एक नई दृष्टि देता है।

"यह गीत केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि शब्दों के माध्यम से देवी के विराट, सशक्त और सौम्य स्वरूप को एक साथ देखने के लिए है।"


संदर्भ व आभार:
1. IGNOU मैथिली साहित्य अध्ययन सामग्री (MHD-1/MHD-5)
2. हिंदी साहित्य का इतिहास (आचार्य रामचंद्र शुक्ल)
3. विद्यापति पदावली (संपादक: रामवृक्ष बेनीपुरी)
और अधिक साहित्यिक विश्लेषण (जैसे आधुनिक कविताएं या सोहर गीत) के लिए Sahityashala.in के साथ बने रहें।

📢 Sirf Padhein Nahi, Likhein Bhi!
Article, Kahani, Vichar, ya Kavita — Hindi, English ya Maithili mein. Apne shabdon ko Sahityashala par pehchan dein.

Submit Your Content →

Famous Poems

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

Charkha Song Lyrics: Original Punjabi, English Translation & Meaning

Charkha Song Lyrics: Original Punjabi, English Translation & Meaning Traditional Punjabi Folk Masterpiece | Popularized by: Wadali Brothers, Lakhwinder Wadali, Mukhtar Sahota Looking for a specific section? Jump straight to: ↓ Original Punjabi Lyrics | ↓ Hindi Translation | ↓ English Translation | ↓ Deep Symbolism & Meaning Complete guide to Charkha lyrics, translations, and deep poetic explanation. Original Punjabi Lyrics Ve mahiya tere vekhan nu, Chuk charkha gali de vich paanwan, Ve loka paane main katdi, Tand teriyan yaadan de paanwan. Charkhe di oo kar de ole, Yaad teri da tumba bole. Ve nimma nimma geet ched ke, Tand kaat di hullare paanwan. Vassan ni de rahe saure peke, Mainu tere pain pulekhe. Ve hoon mainu das mahiya, Tere baaju kidhar main jaayan. Ho eid aayi, mera yaar na aaya, Tera ve khair h...

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) | Karna Poem

Kahani Karn Ki Lyrics (Sampurna) – Abhi Munde (Psycho Shayar) "Kahani Karn Ki" (popularly known as Sampurna ) is a viral spoken word performance that reimagines the Mahabharata from the perspective of the tragic hero, Suryaputra Karna . Written by Abhi Munde (Psycho Shayar), this poem questions the definitions of Dharma and righteousness. ज़रूर पढ़ें: इसी महाभारत युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया था। पढ़ें रामधारी सिंह दिनकर की वो ओजस्वी कविता: ➤ कृष्ण की चेतावनी: रश्मिरथी सर्ग 3 (Lyrics & Meaning) Quick Links: Lyrics • Meaning • Poet Bio • Watch Video • FAQ Abhi Munde (Psycho Shayar) performing the viral poem "Sampurna" कहानी कर्ण की (Sampurna) - Full Lyrics पांडवों को तुम रखो, मैं कौरवों ...

कॉकरोच जनता पार्टी क्या है? संस्थापक, घोषणापत्र और वायरल पॉलिटिक्स का पूरा सच

कॉकरोच जनता पार्टी क्या है? संस्थापक, घोषणापत्र और वायरल पॉलिटिक्स का पूरा सच एक अदालती टिप्पणी ने कैसे एक डिजिटल आंदोलन को जन्म दिया, और युवाओं की निराशा को इंटरनेट के सबसे परिष्कृत राजनीतिक व्यंग्य में बदल दिया—एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट। मई 2026 में, भारतीय डिजिटल परिदृश्य में एक बेहद अजीबोगरीब और अत्यधिक संगठित घटना देखने को मिली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जन्म। इस डिजिटल आंदोलन की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान की गई मौखिक टिप्पणी से हुई। फर्जी डिग्री और जाली दस्तावेजों के सहारे मीडिया और कानून जैसे पेशेवर क्षेत्रों में घुसपैठ करने वाले लोगों को फटकार लगाते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने 'परजीवी' (parasites) और ' कॉकरोच ' (cockroaches) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। हालाँकि, CJI ने तुरंत स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी केवल जालसाजों और फर्जी डिग्री धारकों के लिए थी, और उन्होंने भारत के बेरोजगार युवाओं को "विकसित भारत का स्तंभ" बताया। लेकिन, तेज़ रफ़्तार वाले इंटरनेट युग में इस कानूनी बारीकी को दरकिनार कर दिया गय...

Chadhde Suraj Dhalde Dekhe Lyrics Meaning in Hindi – Baba Bulleh Shah | Sufi Qawwali

ज़िंदगी की हकीकत और वक्त के बदलाव को जितनी खूबसूरती से सूफी शायरों ने बयां किया है, शायद ही किसी और ने किया हो। बाबा बुल्लेशाह (Baba Bulleh Shah) की कलम से निकली यह रचना— "चढ़दे सूरज ढलदे देखे" —सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि जीवन का एक ऐसा फलसफा है जो इंसान को फर्श से अर्श और अर्श से फर्श तक के सफर की याद दिलाता है। एक तरफ ढलता हुआ सूरज और दूसरी तरफ जलता हुआ दीया—वक्त की करवट का प्रतीक। अक्सर जब हम तनम फरसूदा जां पारा (Tanam Farsooda) जैसी रूहानी रचनाओं को सुनते हैं, तो हमें अहसास होता है कि इंसान का गुरूर कितना क्षणभंगुर है। बुल्लेशाह का यह कलाम हमें सिखाता है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती। जिस तरह नुसरत फतेह अली खान साहब ने तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी गाकर इश्क़ और इबादत का फर्क समझाया, उसी तरह यह कलाम हमें 'शुक्र' (Gratitude) का पाठ पढ़ाता है। इस लेख में हम इस कालजयी रचना के हिंदी बोल (Lyrics), उसके गूढ़ अर्थ और शब्दार्थ को विस्तार से समझेंगे। ...