विष्णु विराट की ग़ज़ल का जादू: "दर्द देंगे वो सिसकियाँ देंगे" (Lyrics & Meaning)
तमीहीद (Introduction): एक नाज़ुक एहसास की दस्तक
साहित्यशाला की इस महफ़िल में आपका इस्तकबाल है। आज हम जिस ग़ज़ल पर गुफ़्तगू करने जा रहे हैं, वो जदीद (आधुनिक) ग़ज़ल के उस्ताद विष्णु विराट के क़लम से निकली है। उनकी ग़ज़ल "दर्द देंगे वो सिसकियाँ देंगे" एक ऐसा शाहकार है जो इश्क़ की नज़ाकत, वक़्त की मार, इंसानी फ़ितरत के खोखलेपन और उम्मीद के फ़लसफ़े को एक साथ समेटे हुए है।
अगर आपको विष्णु विराट की ग़ज़ल 'राह चाहे न मिले' की गहरी दार्शनिकता पसंद आई है, तो यक़ीन मानिए, यह ग़ज़ल आपके दिल के तारों को और भी शिद्दत से छेड़ेगी। आइए, वक़्त की रफ़्तार को थोड़ा धीमा करते हैं, पहले इस ग़ज़ल के मुकम्मल अशआर (Lyrics) पढ़ते हैं और फिर इसकी गहराइयों में उतरते हैं।
पूर्ण ग़ज़ल: दर्द देंगे वो सिसकियाँ देंगे (Full Lyrics)
देवनागरी (Hindi)
दर्द देंगे वो सिसकियाँ देंगे
हम हैं काग़ज़ वो क़ैंचियाँ देंगे
जुगनुओं ने शराब पी ली है
अब ये सूरज को गालियाँ देंगे
आ गई 'इश्क़ पे वो नौबत अब
डाकिये तेरी चिट्ठियाँ देंगे
मेरे बीमार ज़र्द चेहरे को
अपने होंठों की सुर्ख़ियाँ देंगे
हाँ सुना है वो फूल जैसी है
उस को तोहफ़े में तितलियाँ देंगे
आप जो बैठने नहीं देते
आप इक रोज़ कुर्सियाँ देंगे
Hinglish (Roman)
Dard denge wo siskiyan denge
Hum hain kaghaz wo qainchiyan denge
Jugnuon ne sharab pi li hai
Ab ye suraj ko galiyan denge
Aa gai 'ishq pe wo naubat ab
Dakiye teri chitthiyan denge
Mere bimar zard chehre ko
Apne honthon ki surkhiyan denge
Haan suna hai wo phool jaisi hai
Us ko tohfe mein titliyan denge
Aap jo baithne nahin dete
Aap ik roz kursiyan denge
ग़ज़ल और उसकी मुकम्मल तफ़्सीर (Deep Explanation)
"दर्द देंगे वो सिसकियाँ देंगे
हम हैं काग़ज़ वो क़ैंचियाँ देंगे"
तफ़्सीर: मतले (ग़ज़ल के पहले शे'र) में ही शायर ने जो तशबीह (Metaphor) इस्तेमाल की है, वो बेमिसाल है। आशिक़ अपनी बेबसी और महबूब के सितम को बयां कर रहा है। 'हम हैं काग़ज़ और वो क़ैंचियाँ देंगे'—यह महज़ एक पंक्ति नहीं, बल्कि एक मुकम्मल ट्रैजेडी है। मुहब्बत में एक इंसान खुद को काग़ज़ की तरह कोरा और निहत्था कर देता है, और सामने वाला अपने रवैये से उसे काटने (तकलीफ़ देने) का काम करता है। दर्द और सिसकियाँ तो जैसे इस सौदे का लाज़िमी हिस्सा हैं।
"जुगनुओं ने शराब पी ली है
अब ये सूरज को गालियाँ देंगे"
तफ़्सीर: यह शे'र इंसानी फ़ितरत और समाज पर एक बेहद गहरा तंज़ (Satire) है। जुगनू, जिसकी रोशनी की बिसात महज़ एक अंधेरी रात तक होती है, नशे (अहंकार) में आकर खुद को सूरज से भी बड़ा समझने लगता है। आज के दौर में जब कमज़र्फ़ लोग थोड़ा सा रुतबा पा लेते हैं, तो अज़ीम लोगों की तौहीन करने लगते हैं। यह सामाजिक विडंबना कुछ-कुछ वैसी ही है जैसी अदम गोंडवी की 'हिन्दू या मुस्लिम अहसासात' में दिखाई देती है, जहाँ समाज की कड़वी हक़ीक़त को बिना किसी लाग-लपेट के सामने रखा गया है।
"आ गई 'इश्क़ पे वो नौबत अब
डाकिये तेरी चिट्ठियाँ देंगे"
तफ़्सीर: यह शे'र मुहब्बत में आई दूरियों की उदास तस्वीर खींचता है। कभी वो दौर था जब निगाहें ही पैग़ाम पहुँचा दिया करती थीं। लेकिन अब इश्क़ में वो वस्ल (मिलन) नहीं रहा। हालात यहां तक आ पहुँचे हैं कि महबूब के खत किसी अजनबी (डाकिये) के हाथों मिलते हैं। रिश्तों में आई इस औपचारिकता और समय के क्रूर बदलाव को महसूस करना हो तो खुमार बाराबंकवी के 'इक पल में इक सदी का मज़ा' को ज़रूर पढ़ें।
"मेरे बीमार ज़र्द चेहरे को
अपने होंठों की सुर्ख़ियाँ देंगे"
चित्र: "मेरे बीमार ज़र्द चेहरे को..." - वस्ल की उम्मीद और हिज्र की चिट्ठियों का दर्द बयां करती तस्वीर।
तफ़्सीर: रोमानियत (Romance) की इंतिहा है यह शे'र! 'ज़र्द' का मतलब है पीला पड़ जाना। हिज्र (जुदाई) की बीमारी ने आशिक़ के चेहरे का रंग उड़ा दिया है। लेकिन उसे यक़ीन है कि जब महबूब क़रीब आएगा, तो उसके लबों का बोसा इस मुर्दा, पीले चेहरे में फिर से लाल सुर्ख़ रंग भर देगा। प्रेम में शिफा (इलाज) ढूंढने का यह ख़याल उतना ही गहरा है जितना परवीन शाकिर की ग़ज़लों में छिपा मलाल और उम्मीद।
"हाँ सुना है वो फूल जैसी है
उस को तोहफ़े में तितलियाँ देंगे"
तफ़्सीर: यह शे'र अपनी मासूमियत से दिल जीत लेता है। मेरी महबूबा इतनी नाज़ुक और खूबसूरत है, बिलकुल किसी ताज़ा खिले फूल की मानिंद। ऐसे फूल को कोई बाज़ारू चीज़ कैसे दी जा सकती है? उसे तो तोहफ़े में 'तितलियाँ' देनी चाहिए। औरतों की नज़ाकत और उनके वजूद के नाज़ुक पलों को जिस ख़ूबसूरती से दीप्ति मिश्रा ने अपनी ग़ज़लों में पिरोया है, यह शे'र उसी नाज़ुक रिवायत की याद दिलाता है।
"आप जो बैठने नहीं देते
आप इक रोज़ कुर्सियाँ देंगे"
तफ़्सीर: मक्ते (आख़िरी शे'र) में शायर ने खुददारी और उम्मीद का एक ऐसा झंडा गाड़ा है जो हर संघर्ष करने वाले इंसान को हिम्मत देता है। आज दुनिया भले ही आपकी अहमियत न समझे, लेकिन एक दिन आपका हुनर इतना शोर मचाएगा कि यही लोग आपको इज़्ज़त के साथ सबसे ऊँची कुर्सी पर बिठाएंगे। यह बगावती तेवर कुछ-कुछ 'काफ़िर हूँ सर फिरा हूँ मुझे मार दीजिए' वाले विद्रोही अहसास से मेल खाता है, जहाँ इंसान अपने वजूद पर सीना तान कर खड़ा होता है और समाज को आईना दिखाता है, ठीक वैसे ही जैसे अदम गोंडवी ने 'आँख पर पट्टी रहे' में समाज के पाखंड को चुनौती दी है।
इस बेहतरीन ग़ज़ल को सुनें (Watch the Recitation)
हासिल-ए-कलाम (Conclusion): जो दिल से निकले, वो दिल तक पहुँचे
विष्णु विराट की यह ग़ज़ल एक ही वक़्त में आपको इश्क़ की कोमल वादियों में भी ले जाती है और ज़िंदगी की सख़्त ज़मीन पर भी खड़ा कर देती है। एक तरफ "तितलियाँ तोहफ़े में देने" का रूमानी ख़याल है, तो दूसरी तरफ "जुगनुओं के सूरज को गालियां देने" की कड़वी हक़ीक़त। यही बात एक साधारण कविता को एक अज़ीम ग़ज़ल में तब्दील करती है।
हमें उम्मीद है कि साहित्यशाला की यह तफ़्सीर आपके दिल में उतर गई होगी। आपको इस ग़ज़ल का कौन सा शे'र सबसे ज़्यादा पसंद आया? क्या "काग़ज़ और क़ैंची" वाली बेबसी ने आपको छुआ, या "एक रोज़ कुर्सियाँ देंगे" वाली उम्मीद ने आपके भीतर एक आग जलाई? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!
— हर्ष नाथ झा
संपादक, साहित्यशाला नेटवर्क
प्रामाणिक बाह्य स्रोत (Authoritative External References):
https://www.rekhta.org/poets/vishnu-virat/ghazals, https://hindwi.org/poets/vishnu-virat/all, https://en.wikipedia.org/wiki/Ghazal
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. "जुगनुओं ने शराब पी ली है" इस शेर का असल मतलब क्या है?
यह शेर समाज के उस पाखंडी वर्ग पर एक तंज़ है जहाँ अयोग्य और कमज़र्फ़ लोग थोड़ा सा पद या ताक़त पाकर अहंकार में अंधे हो जाते हैं और महान लोगों (सूरज) का अपमान करने लगते हैं। जुगनू यहाँ झूठे अहंकार का प्रतीक है।
2. विष्णु विराट की शायरी की मुख्य विशेषता क्या है?
विष्णु विराट की शायरी में इश्क़ की नज़ाकत के साथ-साथ जीवन का कड़वा यथार्थ और खुददारी नज़र आती है। वे आम बोलचाल की हिंदुस्तानी भाषा का इस्तेमाल करके बहुत गहरी दार्शनिक बातें कह जाते हैं।
3. "आप जो बैठने नहीं देते, आप इक रोज़ कुर्सियाँ देंगे" से क्या संदेश मिलता है?
यह ग़ज़ल का मक़्ता है जो संघर्षरत इंसानों को असीम प्रेरणा देता है। यह बताता है कि आज भले ही दुनिया आपका तिरस्कार करे, लेकिन जब आप अपने हुनर से कामयाब होंगे, तो वही दुनिया आपको सर-आँखों पर बिठाएगी।