सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

श्रीकांत वर्मा की यह कविता क्यों है आपका सबसे खौफनाक सच? 'मैं एक अदृश्य दुनिया में' - सम्पूर्ण व्याख्या

काफ़िर हूँ सर-फिरा हूँ - Kafir Hun Sar-Phira Hun Lyrics & Meaning | Ahmad Farhad

बगावत और इश्क़ का ऐलान...

साहित्य की दुनिया में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो सिर्फ कानों को नहीं, रूह को झकझोर देती हैं। अहमद फ़रहाद की यह नज़्म, "काफ़िर हूँ सर-फिरा हूँ मुझे मार दीजिए", आज के दौर में प्रतिरोध का एक नया मुहावरा बन गई है।

जिस बेबाकी से दुष्यंत कुमार ने 'इस नदी की धार में' सत्ता को ललकारा था, वही तेवर यहाँ फ़रहाद की कलम में दिखता है। यह गज़ल उन तमाम लोगों के लिए है जो "जुब्बा-ओ-दस्तार" (धार्मिक दिखावे) के सामने सच बोलने का साहस रखते हैं।

नीचे हम पहले इस नज़्म को शुद्ध हिंदी (देवनागरी) में और फिर रोमन उर्दू (Hinglish) में प्रस्तुत कर रहे हैं। इसे पढ़ें और महसूस करें।

काफ़िर हूँ सर-फिरा हूँ (हिंदी लिरिक्स)

काफ़िर हूँ सर-फिरा हूँ मुझे मार दीजिए
मैं सोचने लगा हूँ मुझे मार दीजिए

है एहतिराम-ए-हज़रत-ए-इंसान मेरा दीन
बे-दीन हो गया हूँ मुझे मार दीजिए

मैं पूछने लगा हूँ सबब अपने क़त्ल का
मैं हद से बढ़ गया हूँ मुझे मार दीजिए

करता हूँ अहल-ए-जुब्बा-ओ-दस्तार से सवाल
गुस्ताख़ हो गया हूँ मुझे मार दीजिए

ख़ुशबू से मेरा रब्त है जुगनू से मेरा काम
कितना भटक गया हूँ मुझे मार दीजिए

मा'लूम है मुझे कि बड़ा जुर्म है ये काम
मैं ख़्वाब देखता हूँ मुझे मार दीजिए

बे-दीन हूँ मगर हैं ज़माने में जितने दीन
मैं सब को मानता हूँ मुझे मार दीजिए

ये ज़ुल्म है कि ज़ुल्म को कहता हूँ साफ़ ज़ुल्म
क्या ज़ुल्म कर रहा हूँ मुझे मार दीजिए

जो ज़ख़्म बाँटते हैं उन्हें ज़ीस्त पे है हक़
मैं फूल बाँटता हूँ मुझे मार दीजिए

Roman Urdu Lyrics

Kafir hoon sar-phira hoon mujhe maar dijiye
Main sochne laga hoon mujhe maar dijiye

👉 Related: इन्सानी फितरत की ऐसी ही एक तस्वीर देखिए इस गज़ल में: वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है

Hai ehtiram-e-hazrat-e-insaan mera deen
Be-deen ho gaya hoon mujhe maar dijiye

Main poochne laga hoon sabab apne qatl ka
Main had se badh gaya hoon mujhe maar dijiye

"अक्सर मोहब्बत और बगावत एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं। पुरानी यादों की कसक के लिए पढ़ें खुमार बाराबंकवी की 'वही फिर मुझे याद आने लगे हैं'।"

Karta hoon ahl-e-jubba-o-dastar se sawaal
Gustakh ho gaya hoon mujhe maar dijiye

Khushboo se mera rabt hai jugnu se mera kaam
Kitna bhatak gaya hoon mujhe maar dijiye

Deep Dive: ज़िंदगी की कशमकश को समझने के लिए यह ज़रूर पढ़ें: दो नावों पर पैर पसारे (Do Naavon Par Pair Pasare)

Maloom hai mujhe ki bada jurm hai ye kaam
Main khwaab dekhta hoon mujhe maar dijiye

Be-deen hoon magar hain zamane mein jitne deen
Main sab ko maanta hoon mujhe maar dijiye

Ye zulm hai ki zulm ko kehta hoon saaf zulm
Kya zulm kar raha hoon mujhe maar dijiye

Jo zakhm baant'te hain unhein zeest pe hai haq
Main phool baant'ta hoon mujhe maar dijiye

Ahmad Farhad

Watch Video

Readers Also Ask (FAQ)

What is the meaning of "Sar-Phira"?

"Sar-phira" literally means someone whose head is turned, but in poetry, it refers to a passionate rebel or a mad lover who defies social norms for their truth.

Why is this poem so controversial?

Ahmad Farhad challenges religious hypocrisy ("Ahl-e-jubba-o-dastar") and political oppression openly, asking to be killed if speaking the truth is a crime. This direct confrontation makes it a modern revolutionary anthem.

निष्कर्ष (Conclusion)

अहमद फ़रहाद की यह गज़ल सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि एक आईना है। यह हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी "पागल" (सर-फिरा) होना ही सबसे बड़ी समझदारी होती है। अगर आपके दिल में भी जज़्बात का समंदर है, तो नवाज़ देवबंदी की रुला देने वाली शायरी और खुमार बाराबंकवी की क्लासिक गज़लों को पढ़ना न भूलें।

साहित्यशाला (Sahityashala) पर हम ऐसे ही नायाब मोतियों को आपके लिए चुनकर लाते रहेंगे। इश्क़ और इंकलाब ज़िंदाबाद!

इश्क़ के एक और रंग को महसूस करें: इक बार कहो तुम मेरी हो - इब्न-ए-इंशा

Famous Poems

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत (Kat Jaoge Mit Jaoge): Viral Lyrics & Meaning

कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत: वायरल गीत का खौफनाक सच और सटीक विश्लेषण भारतीय राजनीतिक संगीत के इतिहास में शायद ही किसी गाने ने इंटरनेट पर इतनी तेज़ी से आग लगाई हो जितनी "कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत" ने लगाई है। प्रेम (Prem) की रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज़ और रुद्र (Rudra) की बेबाक कलम ने एक ऐसा राजनीतिक गान (Political Anthem) तैयार किया है, जो सोशल मीडिया के हर कोने में गूंज रहा है। क्या यह महज़ एक देशभक्ति गीत है, या इसके पीछे कोई गहरा राजनीतिक ध्रुवीकरण छिपा है? साहित्यशाला (Sahityashala) के इस एक्सक्लूसिव लेख में, हम इस वायरल ट्रैक के संपूर्ण बोल (Full Lyrics), इसके प्रत्येक छंद का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Psychological Trigger Formatting) और इसके सामाजिक-राजनीतिक एजेंडे का एक निष्पक्ष और गहन आलोचनात्मक विश्लेषण करेंगे। ▶ वीडियो देखें 📱 WhatsApp पर शेयर करें प्रेम और रुद्र द्वारा रचित इस लोकप्रिय गीत की आधिकारिक कलाकृति। गीत के संपूर्ण बोल और मनोवैज्ञानिक संरचना ...

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ | Mahabharata Par Kavita

अरे! खुद को ईश्वर कहते हो तो जल्दी अपना नाम बताओ  - Arey Khud Ko Ishwar Kehte Ho To || Mahabharata Par Kavita || तलवार, धनुष और पैदल सैनिक   कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की  प्रतिक्षा  में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखन  में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन   शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव   पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस धरती पर ...

साहित्यशाला कविता संग्रह: महाभारत, भक्ति, जीवन, प्रेम और प्रेरणा पर 100+ सर्वश्रेष्ठ कविताएँ

🔥 New Release: "संयुक्ताक्षर" (Sanyuktakshar) - Read the viral poem defining Love through Grammar साहित्यशाला कविता संग्रह: महाभारत, भक्ति, जीवन, प्रेम और प्रेरणा पर 100+ सर्वश्रेष्ठ कविताएँ कविताएँ (Poetry) भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे खूबसूरत और सशक्त माध्यम हैं। वे हमारे दिल की गहराईयों से निकलती हैं और सीधे पढ़ने वाले के दिल तक पहुँचती हैं। साहित्यशाला हमेशा से ही कविता और साहित्य का एक घर रहा है, जहाँ हर रोज़ नए और पुराने कवि अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोते हैं। आज, हमने आपके लिए एक विशेष "महा-संग्रह" (Mega Collection) तैयार किया है। इस एक पेज पर, हमने साहित्यशाला पर प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कविताओं, मैथिली कविताओं और अंग्रेजी कविताओं को एक साथ संकलित किया है। 🔥 सर्वाधिक लोकप्रिय (Reader's Choice) Charkha Lyrics in English: Original, Hinglish, Hindi & Meaning सादगी तो हमारी ज़रा देखिए | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics Dar Pe Sudama Garib Aa Gaya Hai Lyrics (Arey Dwarpalo) Kahani Karn Ki Poem Lyrics By Abhi Munde (Psycho Shaya...

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ - Aree Kaan Kholkar Suno Parth | Mahabharata Poem On Arjuna

अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi Mahabharata Poem On Arjuna अरे ! कान खोल कर सुनो पार्थ Lyrics In Hindi - Mahabharata Poem On Arjuna तलवार,धनुष और पैदल सैनिक  कुरुक्षेत्र मे खड़े हुये, रक्त पिपासू महारथी  इक दूजे सम्मुख अड़े हुये | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महासमर की  प्रतिक्षा  में सारे टाँक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं  हाँक  रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे  देखने में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास  लगे | कुरुक्षेत्र का  महासमर  एक पल में तभी सजा डाला, पाञ्चजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ  शंखनाद  जैसे ही सबका गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका  मर्दन  शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को  मीच  जड़ा, गाण्डिव  पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की  तासीर  यहाँ, इस ध...