सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

प्रकृति पर 6 हिंदी कविताएँ: वर्षा, बसंत और हरियाली का सौंदर्य | Hindi Poems On Nature

Ek Baar Kaho Tum Meri Ho – Ibn-e-Insha | Lyrics, Meaning & Video

Home › Urdu Poetry › Ek Baar Kaho Tum Meri Ho

"तन्हाई का सफ़र और एक बंजारे की सदा..."

इश्क़ की फितरत है तड़पना, मगर जब यह तड़प Ibn-e-Insha के कलम से उतरती है, तो रूह में एक अजीब सी कसक छोड़ जाती है। अगर आप इंशा जी के मिज़ाज से वाकिफ़ हैं, जिन्होंने इन्शा जी उठो अब कूच करो जैसी कालजयी रचनाएं दीं, तो आप जानते होंगे कि उनका दर्द कितना गहरा है। यह नज़्म महज़ अल्फाज़ नहीं, बल्कि हिज्र (जुदाई) के मारे एक ऐसे बंजारे की गुज़ारिश है, जिसने दुनिया की हर रौनक़ देख ली, मगर सुकून उसे सिर्फ महबूब की एक 'हाँ' में नज़र आता है।

A lonely wanderer visualizing Ibn-e-Insha’s nazm Ek Baar Kaho Tum Meri Ho
"Basti Ban Mein..." – Visualizing the solitude of the wanderer.
मूल नज़्म (Hindi)

इब्न-ए-इंशा 

हम घूम चुके बस्ती बन में
इक आस की फाँस लिए मन में
कोई साजन हो, कोई प्यारा हो
कोई दीपक हो, कोई तारा हो
जब जीवन रात अँधेरी हो...
इक बार कहो तुम मेरी हो

जब सावन बादल छाए हों
जब फागुन फूल खिलाए हों
जब चंदा रूप लुटाता हो
जब सूरज धूप नहाता हो
या शाम ने बस्ती घेरी हो...
इक बार कहो तुम मेरी हो

हाँ दिल का दामन फैला है
क्यूँ गोरी का दिल मैला है
हम कब तक पीत के धोके में
तुम कब तक दूर झरोके में
कब दीद से दिल को सेरी हो...
इक बार कहो तुम मेरी हो

क्या झगड़ा सूद ख़सारे का
ये काज नहीं बंजारे का
सब सोना रूपा ले जाए
सब दुनिया, दुनिया ले जाए
तुम एक मुझे बहुतेरी हो...
इक बार कहो तुम मेरी हो

Hinglish Lyrics

Ibn-e-Insha hum ghoom chuke basti ban mein
Ik aas ki phaans liye mann mein
Koi saajan ho, koi pyaara ho
Koi deepak ho, koi taara ho
Jab jeevan raat andheri ho...
Ik baar kaho tum meri ho

Jab saawan baadal chhaye hon
Jab phaagun phool khilaye hon
Jab chanda roop lutaata ho
Jab suraj dhoop nahata ho
Ya shaam ne basti gheri ho...
Ik baar kaho tum meri ho

Haan dil ka daaman phaila hai
Kyun gori ka dil maila hai
Hum kab tak peet ke dhoke mein
Tum kab tak door jharokhe mein
Kab deed se dil ko seri ho...
Ik baar kaho tum meri ho

Kya jhagda sood khasaare ka
Ye kaaj nahi banjaare ka
Sab sona roopa le jaaye
Sab duniya, duniya le jaaye
Tum ek mujhe bahuteri ho...
Ik baar kaho tum meri ho

Surreal art depicting cosmic love versus a pile of gold, illustrating the verse Sab Sona Roopa Le Jaaye.
"Sab Sona Roopa Le Jaaye..." – When love outweighs the world's riches.

नज़्म का विस्तृत भावार्थ (Detailed Explanation)

पहला बंद: एक बंजारे की कसक
शायर खुद को 'इब्न-ए-इंशा' कहकर संबोधित करते हैं और एक यात्री (बंजारे) की तरह अपनी स्थिति बताते हैं। यह 'बंजारापन' और फकीरी का मिज़ाज हमें अक्सर उर्दू शायरी में मिलता है, जैसा कि हम कच्चा घड़ा (राहगीर) की फिलॉसफी में भी देखते हैं। "बस्ती बन" का अर्थ है शहर और जंगल। वे कहते हैं कि मैं दुनिया भर में भटक चुका हूँ, मगर मेरे मन में एक उम्मीद की "फाँस" अटकी हुई है।

दूसरा बंद: प्रकृति और विरह का संयोग
यहाँ शायर मौसम और प्रकृति की खूबसूरती का ज़िक्र करते हैं—सावन के बादल, फागुन के फूल, चाँदनी रात और धूप। इश्क में इंतजार की यह कैफियत हमें सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं जैसी क्लासिक नज़्मों की याद दिलाती है, जहाँ महबूब की एक झलक के लिए दिल बेकरार रहता है।

तीसरा बंद: इंतज़ार और शिकायत
यहाँ शायर थोड़ी शिकायत करते हैं। "दिल का दामन फैला है" यानी मैं तो प्यार के लिए तैयार खड़ा हूँ, लेकिन "गोरी का दिल मैला है"। इश्क में धोखे और बेरुखी का यह दर्द नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी या फिर सोचता हूँ वो कितने मासूम थे में भी बखूबी बयां किया गया है।

चौथा बंद: दुनियावी मोह का त्याग (सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा)
नज़्म का यह हिस्सा इब्न-ए-इंशा के फकीराना मिज़ाज को दर्शाता है। वे कहते हैं, "क्या झगड़ा सूद ख़सारे का"—यानी नफे-नुकसान का हिसाब लगाना मेरा काम नहीं है। "सब सोना रूपा ले जाए"—दुनिया भले ही सारा धन-दौलत रख ले, मुझे उसकी परवाह नहीं। सच्चा इश्क दुनियावी दौलत से ऊपर होता है, ठीक वैसे ही जैसे मेरे रश्क-ए-क़मर में रूहानी इश्क को सबसे ऊपर रखा गया है।

Sahityashala Editor

Written & Interpreted by:
Sahityashala Editorial Team

Focused on deep literary analysis of Urdu & Hindi poetry. We aim to preserve the essence of classic literature for the modern reader.

Disclaimer: The poem text ("Ek Baar Kaho Tum Meri Ho") is reproduced here for educational, commentary, and literary analysis purposes. The copyrights of the original literary work remain with the estate of Ibn-e-Insha. Sahityashala claims no ownership of the original verses.

Famous Poems

Chalre Chalre Waal Lyrics Meaning & Deep Analysis | चल रे चल रे बाल लिरिक्स : Shafaullah Khan Rokhri

Home » Music » Chalre Chalre Waal Lyrics Meaning Shafaullah Khan Rokhri के अमर गीत 'Chalre Chalre Waal' का गहरा अर्थ और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण क्या आपने कभी सोचा है कि एक काली शॉल और लाल रुमाल किसी को इस कदर दीवाना कैसे बना सकता है? संगीत की दुनिया में कुछ धुनें ऐसी होती हैं जो सिर्फ कानों को नहीं, सीधे रूह को छूती हैं । शफ़ाउल्लाह ख़ान रोखड़ी (Shafaullah Khan Rokhri) का बहुचर्चित सरायकी/पंजाबी लोकगीत 'चलरे चलरे वाल' एक ऐसा ही जादुई तराना है। यह गीत सिर्फ शब्दों का जाल नहीं है; यह एक आशिक के दिल की पुकार है । एक ऐसा प्रेमी जो अपने महबूब की ठेठ सादगी और उसकी कातिलाना अदाओं पर अपनी पूरी दुनिया लुटाने को तैयार है। शफ़ाउल्लाह ख़ान रोखड़ी का अमर ग...

कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत (Kat Jaoge Mit Jaoge): Viral Lyrics & Meaning

कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत: वायरल गीत का खौफनाक सच और सटीक विश्लेषण भारतीय राजनीतिक संगीत के इतिहास में शायद ही किसी गाने ने इंटरनेट पर इतनी तेज़ी से आग लगाई हो जितनी "कट जाओगे मिट जाओगे हो जाएगा अंत" ने लगाई है। प्रेम (Prem) की रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज़ और रुद्र (Rudra) की बेबाक कलम ने एक ऐसा राजनीतिक गान (Political Anthem) तैयार किया है, जो सोशल मीडिया के हर कोने में गूंज रहा है। क्या यह महज़ एक देशभक्ति गीत है, या इसके पीछे कोई गहरा राजनीतिक ध्रुवीकरण छिपा है? साहित्यशाला (Sahityashala) के इस एक्सक्लूसिव लेख में, हम इस वायरल ट्रैक के संपूर्ण बोल (Full Lyrics), इसके प्रत्येक छंद का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Psychological Trigger Formatting) और इसके सामाजिक-राजनीतिक एजेंडे का एक निष्पक्ष और गहन आलोचनात्मक विश्लेषण करेंगे। ▶ वीडियो देखें 📱 WhatsApp पर शेयर करें प्रेम और रुद्र द्वारा रचित इस लोकप्रिय गीत की आधिकारिक कलाकृति। गीत के संपूर्ण बोल और मनोवैज्ञानिक संरचना ...

सुना था कि बेहद सुनहरी है दिल्ली (Lyrics & Meaning) - Imran Pratapgarhi

सुना था कि बेहद सुनहरी है दिल्ली (Lyrics & Meaning) - Imran Pratapgarhi "Suna Tha Ki Behad Sunheri Hai Dilli" – यह सिर्फ एक कविता की पंक्ति नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों पर किया गया एक बेहद तीखा और मार्मिक राजनीतिक व्यंग्य है। इमरान प्रतापगढ़ी की यह रचना एक माँ की तड़प को आवाज़ देती है, जो चकाचौंध से भरी 'सुनहरी' दिल्ली में अपने लापता लाल (बेटे) और इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही है। साहित्यशाला के इस लेख में हम केवल इस मशहूर कविता के पूरे बोल (Lyrics) ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि इसके पीछे छिपे उस गहरे प्रतीकात्मक अर्थ (Metaphorical Meaning) का भी विश्लेषण करेंगे, जिसने भारतीय राजनीति और समाज को झकझोर कर रख दिया था। प्रतीकात्मक चित्र: "सुनहरी" दिल्ली की खामोशी और एक बेबस माँ की गुहार। (Suna Tha Ki Behad Sunheri Hai Dilli - Visual Meaning) कविता की पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ (Context) साहित्य हमेशा समाज का दर्पण होता है। जब भी सत्ता अपनी ज़िम्मेदारियों से मुँह मोड़ती है, तब फैज़ अहमद फैज़ की ...

Baba Jani Poem Lyrics: पिता-पुत्र की इस रुला देने वाली कविता ने लाखों दिलों को छुआ!

साहित्य का मूल उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के उन पृष्ठों को खोलना है जिन पर अक्सर धूल जम जाती है। "बाबा जानी" (Baba Jani) आधुनिक दौर की एक ऐसी ही मार्मिक रचना है, जो पीढ़ियों के बीच पनपते संवादहीनता (Generational Gap) और वृद्धावस्था के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को बड़ी सूक्ष्मता से उकेरती है। जिस तरह सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की 'सरोज स्मृति' ने एक पिता के असीम वात्सल्य और शोक को अमर कर दिया, ठीक उसी तरह यह कविता एक वृद्ध, असहाय पिता और उसके अधीर, युवा बेटे के बीच के उस जटिल संवाद को प्रस्तुत करती है, जो आज के समाज का एक कड़वा यथार्थ बन चुका है। हिंदी साहित्य में जहाँ एक ओर धूमिल की 'किस्सा जनतन्त्र' जैसे रचनाओं में व्यवस्था और रोज़गार का संघर्ष झलकता है, और दिनकर की 'व्याल विजय' में सत्ता का वैचारिक द्वंद्व दिखाई देता है; वहीं, 'बाबा जानी' घर की चारदीवारी के भीतर चलने वाले उस मौन संघर्ष को स्वर देती है जहाँ मनुष्य की शारीरिक लाचारी उसके आत्मसम्मान से टकराती है...

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: October 2026 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...