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Main Pal Do Pal Ka Shayar Hoon Lyrics – Sahir Ludhianvi | Lyrics & Meaning

मैं पल दो पल का शायर हूँ Lyrics (Main Pal Do Pal Ka Shayar Hoon)

साहिर लुधियानवी | Meaning, Analysis & Kabhi Kabhie Song

क्या सच में एक शायर अपनी ही प्रसिद्धि को अस्थायी मान सकता है? साहिर लुधियानवी की यह अमर नज़्म उसी विनम्रता का अद्भुत उदाहरण है।

अगर आप 'main pal do pal ka shayar hoon lyrics' खोज रहे हैं, तो यहाँ आपको हिंदी, Hinglish, अर्थ और पूरा साहित्यिक विश्लेषण मिलेगा। हिंदी सिनेमा और उर्दू शायरी के इतिहास में साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। 1976 में आई फिल्म 'कभी कभी' (Kabhi Kabhie) का यह गीत महज़ एक गाना नहीं, बल्कि जीवन की क्षणभंगुरता का एक जीता-जागता फलसफा है।

Main Pal Do Pal Ka Shayar Hoon Lyrics Sahir Ludhianvi Poetry

मैं पल दो पल का शायर हूँ - लिरिक्स (Hindi)

मैं पल दो पल का शाइ'र हूँ, पल दो पल मिरी कहानी है
पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मिरी जवानी है

मुझ से पहले कितने शाइ'र, आए और आ कर चले गए
कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़्मे गा कर चले गए

वो भी इक पल का क़िस्सा थे, मैं भी इक पल का क़िस्सा हूँ
कल तुम से जुदा हो जाऊँगा, गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ

पल दो पल में कुछ कह पाया, इतनी ही सआ'दत काफ़ी है
पल दो पल तुम ने मुझ को सुना, इतनी ही इनायत काफ़ी है

कल और आएँगे नग़्मों की, खिलती कलियाँ चुनने वाले
मुझ से बेहतर कहने वाले, तुम से बेहतर सुनने वाले

हर नस्ल इक फ़स्ल है धरती की, आज उगती है कल कटती है
जीवन वो महँगी मुद्रा है, जो क़तरा क़तरा बटती है

सागर से उभरी लहर हूँ मैं, सागर में फिर खो जाऊँगा
मिट्टी की रूह का सपना हूँ, मिट्टी में फिर सो जाऊँगा

कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे
मसरूफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बरबाद करे

- साहिर लुधियानवी

Main Pal Do Pal Ka Shayar Hoon - Hinglish Lyrics

Main pal do pal ka shayar hoon, pal do pal meri kahani hai
Pal do pal meri hasti hai, pal do pal meri jawani hai

Mujhse pehle kitne shayar, aaye aur aakar chale gaye
Kuch aahein bhar kar laut gaye, kuch naghme ga kar chale gaye

Wo bhi ik pal ka qissa the, main bhi ik pal ka qissa hoon
Kal tumse juda ho jaunga, go aaj tumhara hissa hoon

Pal do pal mein kuch keh paya, itni hi sa'adat kaafi hai
Pal do pal tumne mujhko suna, itni hi inayat kaafi hai

Kal aur aayenge naghmon ki, khilti kaliyan chunne wale
Mujhse behtar kehne wale, tumse behtar sunne wale

Har nasl ik fasl hai dharti ki, aaj ugti hai kal katti hai
Jeevan wo mehangi mudra hai, jo qatra qatra batti hai

Sagar se ubhri lehar hoon main, sagar mein phir kho jaunga
Mitti ki rooh ka sapna hoon, mitti mein phir so jaunga

Kal koi mujhko yaad kare, kyun koi mujhko yaad kare
Masroof zamana mere liye, kyun waqt apna barbad kare

Kabhi Kabhie Song Mukesh Main Pal Do Pal Ka Shayar Hoon Meaning

भावार्थ और दार्शनिक विश्लेषण (Meaning & Analysis)

नश्वरता का स्वीकार (Acceptance of Mortality)

इस नज़्म में साहिर अपने अस्तित्व की वास्तविकता को बेहद सादगी और विनम्रता से स्वीकार करते हैं। वह कहते हैं कि मेरी कहानी और मेरी हस्ती महज़ "पल दो पल" (कुछ समय) के लिए है। मुझसे पहले भी दुनिया में कई महान शायर आए, और अंततः वे सभी इस दुनिया से चले गए।

कला और पीढ़ियों का प्रवाह

"मुझ से बेहतर कहने वाले, तुम से बेहतर सुनने वाले।" साहिर का यह शे'र उनके विज़न को दर्शाता है। वह अहंकार से कोसों दूर हैं। उन्हें पता है कि भविष्य में उनसे भी महान रचनाकार आएंगे। मनुष्य धरती की एक फसल की तरह है जो आज उगती है और कल कट जाती है।

शिल्प सौंदर्य (Poetic Craft)

कविता में उर्दू के बेहद मीठे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। सआ'दत (सौभाग्य), इनायत (कृपा), और मसरूफ़ (व्यस्त) जैसे शब्दों ने गज़ल के भाव को गहरा कर दिया है। "मिट्टी की रूह का सपना हूँ, मिट्टी में फिर सो जाऊँगा" पंक्ति में रूपक (Metaphor) का ऐसा बेहतरीन इस्तेमाल है जो इंसान के मिट्टी से बने होने के यथार्थ को छू लेता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. 'Main Pal Do Pal Ka Shayar Hoon' का मतलब क्या है?

इस गीत का मतलब है कि जीवन और प्रसिद्धि क्षणभंगुर (अस्थायी) है। शायर स्वीकार करता है कि उसकी कहानी केवल कुछ समय के लिए है, और भविष्य में नए और बेहतर कलाकार आएंगे।

2. 'मैं पल दो पल का शायर हूँ' गीत किसने लिखा है?

यह मशहूर गीत हिंदी और उर्दू के महान शायर साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) ने लिखा है। यह 1976 में आई यश चोपड़ा की फिल्म 'कभी कभी' (Kabhi Kabhie) का हिस्सा है।

3. कविता में 'मसरूफ़ ज़माना मेरे लिए क्यूँ वक़्त अपना बरबाद करे' का क्या अर्थ है?

शायर यह भली-भांति जानता है कि दुनिया बहुत व्यस्त (मसरूफ़) है। किसी के चले जाने से दुनिया नहीं रुकती। इसलिए वह कहता है कि मेरे जाने के बाद यह व्यस्त दुनिया मुझे याद करके अपना समय क्यों बर्बाद करेगी।

Harsh Nath Jha editor sahityashala

Harsh Nath Jha

संपादक, साहित्यशाला | हिंदी साहित्य, उर्दू शायरी व्याख्या और काव्य-समीक्षा पर नियमित लेखन।

About Author

"साहिर लुधियानवी का यह गीत मात्र एक गीत नहीं, बल्कि अहंकार को त्याग कर यथार्थ को अपनाने का एक महान संदेश है। साहित्यशाला (Sahityashala) पर ऐसी ही बेहतरीन शायरी और कविताओं की व्याख्या पढ़ने के लिए हमसे जुड़े रहें।"

अस्वीकरण (Disclaimer): यह गीत केवल साहित्यिक समीक्षा, भावार्थ अध्ययन और शिक्षा के उद्देश्य (Fair Use) से प्रस्तुत किया गया है। गीत के सभी कॉपीराइट इसके मूल रचनाकारों और रिकॉर्ड लेबल्स के पास सुरक्षित हैं।

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