तुम्हारा लहजा बता रहा है: अभी ये दौलत नई-नई है
(Abhi Ye Daulat Nayi Nayi Hai - Lyrics & Meaning)
सोशल मीडिया और मुशायरों की दुनिया में कुछ रचनाएँ ऐसी होती हैं जो सीधे दिल में उतर जाती हैं। शबीना अदीब (Shabeena Adeeb) की यह गज़ल, "खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें", अपनी सादगी और करारे व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध है। यदि आप ग़ज़ल की संरचना और इतिहास में रूचि रखते हैं, तो यह रचना 'शेर' और 'मतला' का बेहतरीन उदाहरण है।
विशेषकर इसका यह शेर—"तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है"—आज के दौर के उन लोगों पर एक तमाचा है जो थोड़े से पैसे या पद पाकर अहंकार में डूब जाते हैं।
मूल ग़ज़ल (Lyrics in Hindi)
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई-नई है
अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई है॥
अभी न आएगी नींद तुमको, अभी न हमको सुकूं मिलेगा
अभी तो धड़केगा दिल ज्यादा, अभी ये चाहत नई-नई है॥
बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएं
फ़ज़ां में खुशबू नयी-नयी है, गुलों पे रंगत नई-नई है॥
जो खानदानी रईस हैं वो, मिज़ाज़ रखते हैं नरम अपना
तुम्हारा लहज़ा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है॥
जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा, कि आके बैठे हैं पहली सफ़ में
अभी से उड़ने लगे हवा में, अभी तो शोहरत नई-नई है॥
बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं
गुलाम दुनिया को कर रहा वो, जिसकी ताकत नई-नई है॥
कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)
इस ग़ज़ल में प्रयुक्त उर्दू-फ़ारसी शब्दों के सरल अर्थ नीचे दिए गए हैं:
- उल्फत (Ulfat): प्रेम, प्यार, लगाव।
- तक़ल्लुफ़ (Takalluf): औपचारिकता (Formality), झिझक।
- फ़ज़ा (Faza): वातावरण, माहौल, फिज़ा।
- खानदानी रईस (Khandani Raees): जो पीढ़ियों से अमीर हों (Old Money)।
- लहज़ा (Lehja): बात करने का ढंग (Tone of voice)।
- सफ़ (Saf): पंक्ति, कतार (Row/Line)।
भावार्थ और विश्लेषण (Meaning & Analysis)
1. नए अमीर बनाम खानदानी अमीर:
शबीना अदीब ने इस गज़ल के सबसे मशहूर शेर में समाज के दो वर्गों का अंतर बताया है। 'खानदानी रईस' वह है जो पीढ़ियों से समृद्ध है, उसमें विनम्रता और ठहराव होता है। वहीं, जिसे अचानक धन या पद मिलता है ('नई दौलत'), उसके व्यवहार में अहंकार और दिखावा (Show-off) आ जाता है।
2. नए प्रेम की झिझक:
शुरुआती पंक्तियों में ('अभी तकल्लुफ है...') कवयित्री ने नए-नए प्यार की मासूमियत और झिझक का वर्णन किया है। यह भावना वैसी ही है जैसी हमें अनंत गुप्ता की रचना 'दिल के बाज़ार में' या प्रेम कविताओं में देखने को मिलती है।
3. राजनीतिक व्यंग्य और सत्ता की आलोचना:
अंतिम शेर (बमों की बरसात हो रही है...) में कवयित्री ने वैश्विक राजनीति पर तीखा प्रहार किया है। 'जिसकी ताकत नई-नई है' से तात्पर्य उन तानाशाहों या महाशक्तियों से है जो अपनी नई शक्ति के नशे में दुनिया को युद्ध (बमों की बरसात) में धकेल रहे हैं। यह शेर हबीब जालिब की क्रांतिकारी शायरी 'दस्तूर' की याद दिलाता है, जहाँ सत्ता के अहंकार को सीधी चुनौती दी गई थी।
वीडियो देखें (Watch Video)
- रचयिता: शबीना अदीब (Shabeena Adeeb)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: 'अभी ये दौलत नई नई है' गज़ल किसने लिखी है?
A: यह मशहूर गज़ल कवयित्री शबीना अदीब (Shabeena Adeeb) द्वारा लिखी और गायी गई है। इसे कुमार सत्यम ने भी गाया है।
Q: 'खानदानी रईस' शेर का क्या अर्थ है?
A: इसका अर्थ है कि जो लोग पुराने और असली अमीर होते हैं, उनका स्वभाव विनम्र होता है। घमंड केवल उनमे होता है जिनके पास पैसा नया-नया आया है।