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बिछड़ भी जाएँ तो हाथों में हाथ रह जाए | Haathon Me Haath Reh Jaye Lyrics & Meaning - Shakeel Azmi

शकील आज़मी (Shakeel Azmi) की शायरी में वो जादू है जो बिछड़ने के गम को भी एक खूबसूरत एहसास बना देता है। आज हम उनकी सबसे मकबूल ग़ज़ल "बिछड़ भी जाएँ तो हाथों में हाथ रह जाए" (Haathon Me Haath Reh Jaye) की गहराई में उतरेंगे।

यह ग़ज़ल सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि एक रूहानी अनुभव है। ठीक वैसे ही जैसे खुमार बाराबंकवी ने 'इक पल में इक सदी' के जरिए वक्त को थाम लिया था, शकील साहब यहाँ यादों (Memories) को थाम लेते हैं।

Artistic illustration of a couple holding hands at a railway station during sunset, depicting the pain of separation in Shakeel Azmi's Ghazal Haathon Me Haath Reh Jaye.
"बिछड़ भी जाएँ तो हाथों में हाथ रह जाए..." - A visual representation of Shakeel Azmi's masterpiece.

Haathon Me Haath Reh Jaye Lyrics

कुछ इस तरह से मिलें हम कि बात रह जाए
बिछड़ भी जाएँ तो हाथों में हाथ रह जाए
Kuch is tarah se milein hum ki baat reh jaaye
Bichhad bhi jaayein to haathon mein haath reh jaaye
अब इस के बा'द का मौसम है सर्दियों वाला
तिरे बदन का कोई लम्स साथ रह जाए
Ab is ke baad ka mausam hai sardiyon wala
Tere badan ka koi lams saath reh jaaye
मैं सो रहा हूँ तिरे ख़्वाब देखने के लिए
ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए
Main so raha hoon tere khwaab dekhne ke liye
Ye aarzoo hai ki aankhon mein raat reh jaaye
मैं डूब जाऊँ समुंदर की तेज़ लहरों में
किनारे रक्खी हुई काएनात रह जाए
Main doob jaaun samundar ki tez lehron mein
Kinare rakkhi hui kaaenaat reh jaaye
'शकील' मुझ को समेटे कोई ज़माने तक
बिखर के चारों तरफ़ मेरी ज़ात रह जाए
'Shakeel' mujh ko samete koi zamaane tak
Bikhar ke chaaron taraf meri zaat reh jaaye

Ghazal Meaning & Analysis (तशरीह)

इस ग़ज़ल की खूबसूरती इसके 'लम्स' (Touch) और 'यादों' के इर्द-गिर्द घूमती है। यहाँ जुदाई का मतलब अंत नहीं, बल्कि एक नए रूहानी रिश्ते की शुरुआत है।

1. सर्दियों वाला मौसम (The Winter of Separation)

शायर कहता है कि जुदाई के बाद की जिंदगी 'सर्दियों' (Cold/Lonely) जैसी है। ऐसे में महबूब के बदन की गर्माहट या उसका एहसास (Lams) ही जीने का सहारा बनेगा। यह जज़्बात कैफ़ी आज़मी की उस नज़्म की याद दिलाता है जहाँ वो कहते हैं 'तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो'—दोनों जगह दर्द को छिपाने और जीने की कोशिश है।

2. काएनात और ज़ात (The Universe vs The Self)

चौथे शेर में शायर दुनिया (काएनात) को किनारे रखकर इश्क के समंदर में डूबना चाहता है। यह एक सूफियाना ख्याल है। अक्सर समाज में प्रेम को मांग की सिन्दूर रेखा जैसी रस्मों में बांधा जाता है, लेकिन शकील यहाँ रूह के मिलन की बात करते हैं।

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Conclusion

शकील आज़मी की यह ग़ज़ल बताती है कि सच्चा इश्क वही है जो बिछड़ने के बाद भी रूह में खुशबू की तरह बसा रहे। अगर आप उर्दू अदब के शौकीन हैं, तो Rekhta पर Shakeel Azmi के पूरे कलेक्शन को ज़रूर एक्सप्लोर करें। साहित्यशाला पर हम ऐसी ही नायाब रचनाएँ लाते रहेंगे।

Frequently Asked Questions

What is the meaning of 'Lams' in this Ghazal?

In the context of this Ghazal by Shakeel Azmi, 'Lams' (लम्स) means 'Touch' or 'Physical sensation'. The poet desires that even after separation, the sensation of his lover's touch remains with him to survive the cold loneliness.

Who wrote 'Bichhad Bhi Jayen To'?

This famous Ghazal is written by the renowned contemporary poet Shakeel Azmi. It is one of his most recited works in Mushairas.

What is the central theme of Haathon Me Haath Reh Jaye?

The central theme is separation without bitterness. It explores the idea of keeping the essence and memories of a relationship alive even when physical distance is inevitable.

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