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Mujh Pe Hain Senkron Ilzaam | मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम - शकील आज़मी की ग़ज़ल

Mujh Pe Hain Senkron Ilzaam | मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम

शकील आज़मी की ग़ज़ल

मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल 

तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल 

Mujh Pe Hain Senkron Ilzaam  मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम - शकील आज़मी की ग़ज़ल

तू नई सुबह के सूरज की है उजली सी किरन 

मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल 


अपनी ख़ुशियाँ मिरे आलाम से मंसूब न कर 

मुझ से मत माँग मिरा नाम मिरे साथ न चल 


तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह 

देख ऐ गर्दिश-ए-अय्याम मिरे साथ न चल 


मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा 'शकील' 

टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल 

-

शकील आज़मी

Paro Ko Khol Zamana Udaan Dekhta Hai - परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है | शकील आज़मी

mujh pe haiñ saikḌoñ ilzām mire saath na chal
tū bhī ho jā.egā badnām mire saath na chal

tū na.ī subah ke sūraj kī hai ujlī sī kiran
maiñ huuñ ik dhuul bharī shaam mire saath na chal

apnī ḳhushiyāñ mire ālām se mansūb na kar
mujh se mat maañg mirā naam mire saath na chal

tū bhī kho jā.egī Tapke hue aañsū kī tarah
dekh ai gardish-e-ayyām mire saath na chal

merī dīvār ko tū kitnā sambhālegā 'shakīl'
TūTtā rahtā huuñ har gaam mire saath na chal 

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