कहाँ तो तय था चराग़ाँ - Kahan To Tay Tha Chiraga: Lyrics, Meaning & Class 11 Summary | दुष्यंत कुमार
कहाँ तो तय था चराग़ाँ: राजनीतिक विद्रूपता का आईना
हिंदी गज़ल को उर्दू के दरबार से निकालकर आम आदमी की चौपाल तक लाने का श्रेय दुष्यंत कुमार को जाता है। उनकी यह प्रसिद्ध गज़ल 'साये में धूप' संग्रह से ली गई है और आज यह NCERT कक्षा 11 (Hindi Aroh) के पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यदि आप गज़ल का इतिहास और शास्त्र समझते हैं, तो आप पाएंगे कि दुष्यंत ने बहर और रदीफ का प्रयोग करते हुए कैसे सत्ता के खोखले वादों पर चोट की है। यह गज़ल सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि आधुनिक हिंदी गज़ल के यथार्थ का सबसे बेहतरीन उदाहरण है।
कहाँ तो तय था चराग़ाँ (Hindi Lyrics)
कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये
कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये
यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है
चलो यहाँ से चले और उम्र भर के लिये
न हो क़मीज़ तो घुटनों से पेट ढक लेंगे
ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिये
ख़ुदा नहीं न सही आदमी का ख़्वाब सही
कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिये
वो मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता
मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिये
तिरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की
ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिये
जियें तो अपने बग़ीचे में गुलमोहर के तले
मरें तो ग़ैर की गलियों में गुलमोहर के लिये
Kahan To Tay Tha Chiraga (Hinglish Lyrics)
Kahan to tay tha chiragan har ek ghar ke liye
Kahan chirag mayssar nahin shahar ke liye
Yahan darkhton ke saye main dhoop lagti hai
Chalo yahan se chalen aur umar bhar ke liye
Na ho kameez to ghutno se pet dhak lenge
Ye log kitne munasib hain, is safar ke liye
Khuda nahin, n sahi, aadmi ka khwab sahi
Koi haseen nazara to hai nazar ke liye
Woh mutmaeen hain ki patthar pighal nahi sakta
Main bekrar hoon aawaz men asar ke liye
Tera nizam hai sil de zuban shayar ki
Ye ehtiyat zaruri hai is bahar ke liye
Jiyen to apne bagheeche main gulmohar ke tale
Maren to gair ki galiyon main gulmohar ke liye
शब्दार्थ (Word Meanings & Notes):
- चराग़ाँ (Chiragan): बहुत सारे दीपक, रोशनी (यहाँ 'विकास' और 'सुख-सुविधाओं' का प्रतीक)।
- मयस्सर (Mayassar): उपलब्ध, हासिल होना।
- दरख़्त (Darkhat): पेड़ (यहाँ 'शासन व्यवस्था' या 'नेताओं' का प्रतीक)।
- निज़ाम (Nizam): शासन, राज-व्यवस्था (The System)।
- बहर (Bahar): गज़ल का छंद (Metre), या यहाँ 'सत्ता की गद्दी' के संदर्भ में।
- गुलमोहर (Gulmohar): एक फूलदार पेड़ (यहाँ 'सपनों' और 'स्वाभिमान' का प्रतीक)।
दुष्यंत की अन्य कविताओं के कठिन शब्दों को समझने के लिए आप दुष्यंत कुमार कविता संग्रह देख सकते हैं।
भावार्थ और व्याख्या (Summary & Explanation)
1. राजनीतिक विफलता (Political Failure):
कवि कहते हैं, "कहाँ तो तय था चराग़ाँ..."। स्वतंत्रता के बाद वादा किया गया था कि हर घर में खुशहाली आएगी, लेकिन आज स्थिति यह है कि पूरे शहर के लिए भी बुनियादी सुविधाएँ (चराग) उपलब्ध नहीं हैं। यह ठीक वैसी ही पीड़ा है जो हमें 'हो गई है पीर पर्वत-सी' में देखने को मिलती है।
2. व्यवस्था का विरोधाभास (Irony of the System):
"यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है..." यह शेर सबसे गहरा है। पेड़ का काम छाया देना है, लेकिन यहाँ पेड़ (सरकार/सिस्टम) ही धूप (कष्ट) दे रहा है। ऐसे में कवि का मन करता है कि वह इस समाज को छोड़कर हमेशा के लिए चला जाए। इसी एकाकीपन का ज़िक्र 'आज वीरान अपना घर देखा' में भी मिलता है।
3. दमन और प्रतिरोध (Oppression & Resistance):
"तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की..." सत्ता को अपनी गद्दी बचाने के लिए विरोध के स्वरों को दबाना ज़रूरी लगता है। लेकिन दुष्यंत हार मानने वालों में से नहीं हैं, वे 'आवाज़ में असर' के लिए बेक़रार हैं।
दुष्यंत कुमार का जीवन दर्शन उनकी रचना 'ओ मेरी ज़िन्दगी' में और विस्तार से समझा जा सकता है।
काव्य पाठ सुनें (Audio/Video)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: 'तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की' का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि सत्ता (System) अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को दबाने की कोशिश करती है ताकि उसका शासन सुरक्षित रहे।
प्रश्न: 'यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है' से कवि का क्या आशय है?
उत्तर: इसका आशय है कि जिन संस्थाओं से जनता को सुख और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वही अब जनता के कष्टों का कारण बन गई हैं।