सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

New !!

नसीर तुराबी की ये ग़ज़ल आपको रुला देगी: Ye Hai Majlis-e-Shah-e-Ashiqan Meaning

नसीर तुराबी की ये ग़ज़ल आपको रुला देगी: Ye Hai Majlis-e-Shah-e-Ashiqan Meaning

क्या आपने कभी किसी कविता को पढ़ते हुए अपनी रूह को कांपते हुए महसूस किया है?

आधुनिक उर्दू साहित्य के सबसे बड़े नामों में से एक, नसीर तुराबी (Naseer Turabi), जिन्हें दुनिया उनकी रूमानी ग़ज़लों के लिए जानती है, उनका एक ऐसा रूहानी सलाम (मर्सिया) मौजूद है जो आपके अहंकार को राख कर देगा। "ये है मजलिस-ए-शाह-ए-आशिक़ाँ" सिर्फ एक ग़ज़ल नहीं, बल्कि कर्बला के मैदान और इमाम हुसैन (Husayn ibn Ali) के प्रति परम प्रेम और बलिदान का सबसे ज्वलंत प्रमाण है।

आज हम नसीर तुराबी के इस गहरे कलाम के एक-एक शब्द का अर्थ जानेंगे। तैयार हो जाइए, क्योंकि यह महफिल दुनियावी चमक-दमक से बहुत दूर है!

Majlis-e-Shah-e-Ashiqan spiritual Alam setup in 4k for Naseer Turabi poetry explanation

"यहाँ चश्म-ए-तर का रिवाज है..."

📜 मुकम्मल सलाम / ग़ज़ल के बोल (Complete Lyrics)

आप इस कलाम को इसके मूल स्रोत रेख़्ता (Rekhta) पर भी पढ़ सकते हैं।

हिंदी (Devanagari)

ये है मजलिस-ए-शाह-ए-आशिक़ाँ, कोई नज़्र-ए-जाँ हो तो ले के आ
यहाँ चश्म-ए-तर का रिवाज है, दिल-ए-ख़ूँ-चकाँ हो तो ले के आ

ये फ़ज़ा है अंबर-ओ-ऊद की, ये महल है विर्द-ए-दरूद का
ये नमाज़-ए-इश्क़ का वक़्त है, कोई ख़ुश-अज़ाँ हो तो ले के आ

ये जो इक अज़ा का शिआर है, ये अजब दुआ का हिसार है
किसी ना-रसा को तलाश कर, कोई बे-अमाँ हो तो ले के आ

ये अलम है हक़ की सबील का, ये अलम है अहल-ए-दलील का
कहीं और ऐसे क़बील का कोई साएबाँ हो तो ले के आ

ये हुज़ूर-ओ-ग़ैब के सिलसिले, ये मता-ए-फ़िक्र के मरहले
ग़म-ए-राएगाँ की बिसात क्या, ग़म-ए-जावेदाँ हो तो ले के आ

सर-ए-लौह-ए-आब लिखा हुआ किसी तिश्ना-मश्क का माजरा
सर-ए-फ़र्द-ए-रेग लिखी हुई कोई दास्ताँ हो तो ले के आ

तिरे नक़्शा-हा-ए-ख़याल में हद-ए-नैनवा की नज़ीर का
कोई और ख़ित्ता-ए-आब-ओ-गिल तह-ए-आसमाँ हो तो ले के आ

कभी कुंज-ए-हुर के क़रीब जा, कभी ता-ब-सहन-ए-हबीब जा
कभी सू-ए-बैत-ए-शबीब जा, कोई अरमुग़ाँ हो तो ले के आ

मिरे मद्द-ओ-जज़र की ख़ैर हो कि सफ़र है दजला-ए-दहर का
कहीं मिस्ल-ए-नाम-ए-हुसैन भी कोई बादबाँ हो तो ले के आ

न 'अनीस' हूँ न 'दबीर' हूँ, मैं 'नसीर' सिर्फ़ 'नसीर' हूँ
मिरे ज़र्फ़-ए-हर्फ़ को जाँचने, कोई नुक्ता-दाँ हो तो ले के आ

Hinglish (Roman Urdu)

ye hai majlis-e-shah-e-ashiqan, koi nazr-e-jaan ho to le ke aa
yahan chashm-e-tar ka riwaj hai, dil-e-khoon-chakan ho to le ke aa

ye faza hai 'ambar-o-'ood ki, ye mahal hai vird-e-darood ka
ye namaz-e-'ishq ka waqt hai, koi khush-azan ho to le ke aa

ye jo ik 'aza ka shi'ar hai, ye 'ajab dua ka hisar hai
kisi na-rasa ko talash kar, koi be-aman ho to le ke aa

ye 'alam hai haq ki sabeel ka, ye 'alam hai ahl-e-daleel ka
kahin aur aise qabeel ka koi sa'ebaan ho to le ke aa

ye huzoor-o-ghaib ke silsile, ye mata-e-fikr ke marhale
gham-e-ra'egan ki bisat kya, gham-e-javedaan ho to le ke aa

sar-e-lauh-e-aab likha hua kisi tishna-mashk ka majra
sar-e-fard-e-reg likhi hui koi dastan ho to le ke aa

tire naqsha-ha-e-khayal mein had-e-nainava ki nazeer ka
koi aur khitta-e-aab-o-gil tah-e-asman ho to le ke aa

kabhi kunj-e-hur ke qareeb ja, kabhi ta-ba-sahn-e-habeeb ja
kabhi su-e-bait-e-shabeeb ja, koi armughaan ho to le ke aa

mire madd-o-jazr ki khair ho ki safar hai dajla-e-dahr ka
kahin misl-e-naam-e-husain bhi koi baadbaan ho to le ke aa

na 'anees' hoon na 'dabeer' hoon, main 'naseer' sirf 'naseer' hoon
mire zarf-e-harf ko jaanchne, koi nukta-daan ho to le ke aa

اردو (Urdu)

یہ ہے مجلسِ شاہِ عاشقاں، کوئی نذرِ جاں ہو تو لے کے آ
یہاں چشمِ تر کا رواج ہے، دلِ خوں چکاں ہو تو لے کے آ

یہ فضا ہے عنبر و عود کی، یہ محل ہے وردِ درود کا
یہ نمازِ عشق کا وقت ہے، کوئی خوش اذاں ہو تو لے کے آ

یہ جو اک عزا کا شعار ہے، یہ عجب دعا کا حصار ہے
کسی نارسا کو تلاش کر، کوئی بے اماں ہو تو لے کے آ

یہ عَلم ہے حق کی سبیل کا، یہ عَلم ہے اہلِ دلیل کا
کہیں اور ایسے قبیل کا کوئی سائباں ہو تو لے کے آ

یہ حضور و غیب کے سلسلے، یہ متاعِ فکر کے مرحلے
غمِ رائیگاں کی بساط کیا، غمِ جاوداں ہو تو لے کے آ

سرِ لوحِ آب لکھا ہوا کسی تشنہ مشک کا ماجرا
سرِ فردِ ریگ لکھی ہوئی کوئی داستاں ہو تو لے کے آ

ترے نقشہ ہائے خیال میں حدِ نینوا کی نظیر کا
کوئی اور خطۂ آب و گل تہِ آسماں ہو تو لے کے آ

کبھی کنجِ حُر کے قریب جا، کبھی تا بہ صحنِ حبیب جا
کبھی سوئے بیتِ شبیب جا، کوئی ارمغاں ہو تو لے کے آ

مرے مد و جزر کی خیر ہو کہ سفر ہے دجلۂ دہر کا
کہیں مثلِ نامِ حسین بھی کوئی بادباں ہو تو لے کے آ

نہ 'انیس' ہوں نہ 'دبیر' ہوں، میں 'نصیر' صرف 'نصیر' ہوں
مرے ظرفِ حرف کو جانچنے، کوئی نکتہ داں ہو تو لے کے آ

तफ़्सीली तशरीह (Line-by-Line Meaning in Hindi)

१. आंसुओं और खून की अदालत

ये है मजलिस-ए-शाह-ए-आशिक़ाँ, कोई नज़्र-ए-जाँ हो तो ले के आ
यहाँ चश्म-ए-तर का रिवाज है, दिल-ए-ख़ूँ-चकाँ हो तो ले के आ

व्याख्या: यह पूरी ग़ज़ल आध्यात्मिक समर्पण का चरम है। शायर आगाह करता है कि यह प्रेमियों के बादशाह (इमाम हुसैन) की महफिल है। यहाँ प्रवेश के लिए दुनियावी दौलत या शोहरत काम नहीं आती। यहाँ आने के लिए अपनी जान की भेंट (नज़्र-ए-जाँ) और दर्द में डूबी नम आँखें (चश्म-ए-तर) लानी पड़ती हैं। जिस दिल से खून टपक रहा हो, वही यहाँ क़ुबूल होता है।

  • मजलिस-ए-शाह-ए-आशिक़ाँ: इमाम हुसैन की अज़ादारी की मजलिस।
  • नज़्र-ए-जाँ: प्राणों की भेंट।
  • दिल-ए-ख़ूँ-चकाँ: वह दिल जिससे दर्द के मारे खून टपक रहा हो।

२. इश्क़ की नमाज़ का बुलावा

ये फ़ज़ा है अंबर-ओ-ऊद की, ये महल है विर्द-ए-दरूद का
ये नमाज़-ए-इश्क़ का वक़्त है, कोई ख़ुश-अज़ाँ हो तो ले के आ

व्याख्या: यह जगह अत्यंत पवित्र है, जहाँ अंबर और ऊद (सुगंध) महक रहे हैं और निरंतर दरूद (पैगंबर पर रहमत की दुआ) पढ़ा जा रहा है। यह 'नमाज़-ए-इश्क' का वक्त है, वह नमाज़ जो कर्बला में तीरों की बारिश में पढ़ी गई थी। शायर कहता है कि इस नमाज़ के लिए किसी ऐसे मुअज़्ज़िन को लाओ जिसकी आवाज़ में रूहानी दर्द (ख़ुश-अज़ाँ) हो।

३. मजलूमों का आसरा

ये जो इक अज़ा का शिआर है, ये अजब दुआ का हिसार है
किसी ना-रसा को तलाश कर, कोई बे-अमाँ हो तो ले के आ

व्याख्या: अज़ा (शोक मनाना) महज़ रस्म नहीं है; यह दुआओं का एक मज़बूत सुरक्षा घेरा (हिसार) है। अगर दुनिया में कोई असहाय (ना-रसा) और बेघर (बे-अमाँ) है, जिसे कहीं न्याय या पनाह न मिली हो, तो उसे यहाँ ले आओ। यह दरबार बेसहारों और मजलूमों को सुकून देता है।

The Ship of Salvation in the Desert of Karbala, Safina e Najat Imam Hussain

"सफ़र है दजला-ए-दहर का... समय की नदी में मोक्ष का जहाज़।"

४. सच्चाई का परचम

ये अलम है हक़ की सबील का, ये अलम है अहल-ए-दलील का
कहीं और ऐसे क़बील का कोई साएबाँ हो तो ले के आ

व्याख्या: यह अलम (ध्वज) केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि सत्य के मार्ग (हक़ की सबील) और तर्कशील लोगों (अहल-ए-दलील) का प्रतीक है। क्या दुनिया में कोई और ऐसा कबीला या समूह है जो सच्चाई के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दे? अगर है, तो उसे सामने लाओ।

५-६. शाश्वत दुख और प्यास का मंज़र

ग़म-ए-राएगाँ की बिसात क्या, ग़म-ए-जावेदाँ हो तो ले के आ

सर-ए-लौह-ए-आब लिखा हुआ किसी तिश्ना-मश्क का माजरा
सर-ए-फ़र्द-ए-रेग लिखी हुई कोई दास्ताँ हो तो ले के आ

व्याख्या: सांसारिक और व्यर्थ दुखों (ग़म-ए-राएगाँ) की यहाँ कोई अहमियत नहीं है। यहाँ सिर्फ ग़म-ए-जावेदाँ (शाश्वत दुख) की बात होती है। यह वह स्थान है जहाँ फरात नदी के पानी पर हज़रत अब्बास की प्यासी मश्क (तिश्ना-मश्क) की कहानी लिखी है। कर्बला की रेत के एक-एक कण पर शहादत की अमर दास्तान दर्ज है। ऐसी कहानी दुनिया में कहीं और नहीं मिल सकती।

७-८. वफ़ादारी की सर्वोच्च मिसाल

तिरे नक़्शा-हा-ए-ख़याल में हद-ए-नैनवा की नज़ीर का...
कभी कुंज-ए-हुर के क़रीब जा, कभी ता-ब-सहन-ए-हबीब जा...

व्याख्या: शायर चुनौती देता है कि क्या पूरे आसमान के नीचे कर्बला (नैनवा) की ज़मीन जैसी कोई और जगह है? अगर वफ़ादारी का सच्चा अर्थ समझना है, तो हुर, हबीब और शबीब (इमाम हुसैन के साथी) की कब्रों के पास जाओ। उन्होंने शहादत को तोहफे (अरमुग़ाँ) की तरह कबूल किया।

९. समय की नदी और हुसैन का नाम

मिरे मद्द-ओ-जज़र की ख़ैर हो कि सफ़र है दजला-ए-दहर का
कहीं मिस्ल-ए-नाम-ए-हुसैन भी कोई बादबाँ हो तो ले के आ

व्याख्या (The Masterpiece): शायर कहता है कि ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव (मद्द-ओ-जज़र) से मुझे तभी पार मिल सकता है जब कोई मज़बूत सहारा हो, क्योंकि मैं 'समय की भयंकर नदी' (दजला-ए-दहर) में सफ़र कर रहा हूँ। इस दुनिया रूपी भयंकर समंदर में मुझे पार लगाने के लिए इमाम हुसैन के नाम जैसा कोई और पाल/पतवार (बादबाँ) पूरी दुनिया में नहीं है!

१०. मक़्ता: शायर की आजिज़ी (विनम्रता)

न 'अनीस' हूँ न 'दबीर' हूँ, मैं 'नसीर' सिर्फ़ 'नसीर' हूँ
मिरे ज़र्फ़-ए-हर्फ़ को जाँचने, कोई नुक्ता-दाँ हो तो ले के आ

व्याख्या: मीर अनीस और मिर्ज़ा दबीर उर्दू मर्सिया के सबसे महान स्तंभ माने जाते हैं। नसीर तुराबी निहायत ही विनम्रता से कहते हैं कि मैं उन महान उस्तादों जैसा नहीं हूँ; मैं तो सिर्फ "नसीर" हूँ। लेकिन, मेरे शब्दों और जज़्बातों की रूहानी गहराई को परखने के लिए किसी सच्चे पारखी (नुक्ता-दाँ) को लाओ।

Calligraphy of Ye Hai Majlis-e-Shah-e-Ashiqan Urdu Poetry by Naseer Turabi

"मैं 'नसीर' सिर्फ़ 'नसीर' हूँ..."

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. "ये है मजलिस-ए-शाह-ए-आशिक़ाँ" कलाम का मुख्य विषय क्या है?

यह कलाम कर्बला के शहीदों, विशेषकर इमाम हुसैन को एक भावभीनी श्रद्धांजलि है। यह सांसारिक मोहमाया को छोड़कर सत्य, बलिदान और परम प्रेम (रूहानी इश्क़) के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।

2. 'दजला-ए-दहर' और 'बादबाँ' का इस ग़ज़ल में क्या महत्व है?

'दजला-ए-दहर' का अर्थ है 'समय की खूंखार नदी' और 'बादबाँ' का अर्थ है 'नाव का पाल (सहारा)'। नसीर तुराबी का मानना है कि इस दुनिया की खतरनाक नदी को पार करने के लिए इमाम हुसैन का नाम ही एकमात्र सच्चा सहारा और पतवार है।

3. मीर अनीस और मिर्ज़ा दबीर कौन थे जिनका नाम इस कलाम में आया है?

मीर अनीस और मिर्ज़ा दबीर 19वीं सदी के उर्दू शायरी के दो सबसे महान स्तंभ थे, जिन्हें 'मर्सिया निगारी' (शोकगीत लिखने) का बादशाह माना जाता है। शायर ने उनके सम्मान में अपनी विनम्रता प्रकट की है।

इस कलाम की रूहानी तिलावत सुनें 👇

अपनी आँखें बंद करें और इस दर्द को अपनी रूह में उतरने दें।

निष्कर्ष: आँसुओं की यह वसीयत कभी नहीं मिटेगी

"ये है मजलिस-ए-शाह-ए-आशिक़ाँ" महज़ शब्दों का खेल नहीं है; यह एक आध्यात्मिक दर्पण है। कर्बला का यह दुख हमारी आत्मा की जंजीरों को तोड़ता है और हमें सच्ची आज़ादी का एहसास कराता है।

"कुछ कविताएँ होठों से पढ़ी जाती हैं, लेकिन यह कलाम केवल खून के आँसुओं से पढ़ा जा सकता है।"

📢 Sirf Padhein Nahi, Likhein Bhi!
Article, Kahani, Vichar, ya Kavita — Hindi, English ya Maithili mein. Apne shabdon ko Sahityashala par pehchan dein.

Submit Your Content →

Famous Poems

Jhansi Ki Rani: Full Poem, Meaning & Summary | Subhadra Kumari Chauhan

“झाँसी की रानी” 1857 के विद्रोह को लोक-स्मृति, वीर रस और नारी शक्ति के रूप में रूपांतरित करने वाली अमर कविता है। झाँसी की रानी (Jhansi Ki Rani) केवल एक कविता नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम का 'विजय गीत' है। सुभद्रा कुमारी चौहान की यह रचना 1857 की क्रांति और नारी शक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है। साहित्यशाला (Sahityashala) पर आज हम इस कविता का संपूर्ण पाठ (Full Text) , Hinglish Transliteration , और गहन विश्लेषण (Detailed Analysis) प्रस्तुत कर रहे हैं। "बुझा दीप झाँसी का..." – The fierce defense of Jhansi Fort. यह कविता हमें याद दिलाती है कि कैसे महिलाओं ने अपनी इच्छा से विद्रोह किया और इतिहास बदल दिया, ठीक वैसे ही जैसे हमने कुछ औरतों की विद्रोही कहानियों में पढ़ा है। Exam Relevance (UPSC / NET / Academic) विषय: 1857 का स्वतंत्रता संग्राम (History) साहित्य: वीर रस और राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा (Hindi Literature) महत्व: ...

Chadhde Suraj Dhalde Dekhe Lyrics Meaning in Hindi – Baba Bulleh Shah | Sufi Qawwali

ज़िंदगी की हकीकत और वक्त के बदलाव को जितनी खूबसूरती से सूफी शायरों ने बयां किया है, शायद ही किसी और ने किया हो। बाबा बुल्लेशाह (Baba Bulleh Shah) की कलम से निकली यह रचना— "चढ़दे सूरज ढलदे देखे" —सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि जीवन का एक ऐसा फलसफा है जो इंसान को फर्श से अर्श और अर्श से फर्श तक के सफर की याद दिलाता है। एक तरफ ढलता हुआ सूरज और दूसरी तरफ जलता हुआ दीया—वक्त की करवट का प्रतीक। अक्सर जब हम तनम फरसूदा जां पारा (Tanam Farsooda) जैसी रूहानी रचनाओं को सुनते हैं, तो हमें अहसास होता है कि इंसान का गुरूर कितना क्षणभंगुर है। बुल्लेशाह का यह कलाम हमें सिखाता है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती। जिस तरह नुसरत फतेह अली खान साहब ने तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी गाकर इश्क़ और इबादत का फर्क समझाया, उसी तरह यह कलाम हमें 'शुक्र' (Gratitude) का पाठ पढ़ाता है। इस लेख में हम इस कालजयी रचना के हिंदी बोल (Lyrics), उसके गूढ़ अर्थ और शब्दार्थ को विस्तार से समझेंगे। ...

Mahabharata Poem in Hindi: कृष्ण-अर्जुन संवाद (Amit Sharma) | Lyrics & Video

Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...

100+ Hindi Proverbs & Their English Equivalents: The Ultimate Muhavare Guide

Home » English Literature » Hindi Proverbs & Idioms Have you ever tried to translate a Hindi Muhavara literally and ended up sounding ridiculous? You tell someone "My buffalo is dancing," and they look at you like you’ve lost your mind. That is the tragedy of literal translation. To truly master a language—whether you are analyzing the Eras of English Literature or cracking a joke in a Delhi metro—you need the soul of the saying, not just the body. Stop Saying "My Buffalo is Dancing"! Learn the correct English equivalents for famous Hindi idioms before your next exam. In 2010, the internet struggled to find the meaning of "Sau sonaar ki, ek lohaar ki." We are here to settle that debate once and for all. Whether you are a student eyeing the lucrative RBI Rajbhasha Adhikari Salary & Job Profile , a scholar researching Vidyapati...

Charkha Song Lyrics: Original Punjabi, English Translation & Meaning

Charkha Song Lyrics: Original Punjabi, English Translation & Meaning Traditional Punjabi Folk Masterpiece | Popularized by: Wadali Brothers, Lakhwinder Wadali, Mukhtar Sahota Looking for a specific section? Jump straight to: ↓ Original Punjabi Lyrics | ↓ Hindi Translation | ↓ English Translation | ↓ Deep Symbolism & Meaning Complete guide to Charkha lyrics, translations, and deep poetic explanation. Original Punjabi Lyrics Ve mahiya tere vekhan nu, Chuk charkha gali de vich paanwan, Ve loka paane main katdi, Tand teriyan yaadan de paanwan. Charkhe di oo kar de ole, Yaad teri da tumba bole. Ve nimma nimma geet ched ke, Tand kaat di hullare paanwan. Vassan ni de rahe saure peke, Mainu tere pain pulekhe. Ve hoon mainu das mahiya, Tere baaju kidhar main jaayan. Ho eid aayi, mera yaar na aaya, Tera ve khair h...