हिंदी साहित्य के गगन में ध्रुव तारे की तरह चमकने वाले, 'एक भारतीय आत्मा' के नाम से विख्यात पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कलम से निकली यह कविता महज शब्दों का समूह नहीं, बल्कि देशप्रेम की एक अमर गाथा है। "पुष्प की अभिलाषा" (Pushp Ki Abhilasha) केवल एक कविता नहीं, बल्कि हर उस भारतीय के मन की आवाज है जो अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का जज्बा रखता है।
अक्सर छात्र परीक्षाओं के लिए Hindi poems on India खोजते हैं, और यह कविता हमेशा शीर्ष पर रहती है। जिस तरह सुभद्रा कुमारी चौहान की झाँसी की रानी (Kadam Ka Ped Era) वीरों में उत्साह भरती है, उसी तरह एक छोटे से फूल की यह इच्छा हमें त्याग का सर्वोच्च पाठ पढ़ाती है। आज हम इस ब्लॉग में "Chah nahi main surbala ke lyrics" के साथ-साथ इसका भावार्थ और NCERT उपयोगी प्रश्नोत्तर समझेंगे।
यह लेख NCERT पाठ्यक्रम और हिंदी साहित्य विशेषज्ञता के आधार पर तैयार किया गया है।
पुष्प की अभिलाषा (Pushp Ki Abhilasha Poem in Hindi)
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में,
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव,
पर हे हरि, डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ।
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक।
— माखनलाल चतुर्वेदी
Pushp Ki Abhilasha Lyrics (Hinglish / Roman)
(Roman Hindi version for students who search and read in English letters)
Gahno mein goontha jaaun,
Chah nahi, premi-mala mein,
Bindh pyari ko lalchaun,
Chah nahi, samraton ke shav,
Par he Hari, dala jaaun,
Chah nahi, devon ke sir par,
Chadhoon bhagya par ithlaun.
Mujhe tod lena vanmali!
Us path par dena tum fenk,
Matrubhoomi par sheesh chadhane,
Jis path jaaven veer anek.
कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)
- सुरबाला: अप्सरा या देवकन्या (Divine Nymph)
- बिंध: छिदकर या पिरोया जाकर (Pierced/Tied)
- सम्राट: महाराजा/राजा (Emperor)
- हरि: ईश्वर/भगवान (God)
- इठलाऊँ: गर्व करूँ (To feel arrogant/proud)
- वनमाली: उपवन का रक्षक/माली (Gardener)
- शीश चढ़ाना: बलिदान देना (Sacrifice)
पुष्प की अभिलाषा का भावार्थ (Summary & Meaning)
इस कविता में कवि ने मानवीकरण (Personification) अलंकार का सुंदर प्रयोग किया है। जहाँ हम अक्सर Nature Poems में फूलों को सुंदरता का प्रतीक मानते हैं, वहीं चतुर्वेदी जी ने फूल को देशभक्ति का प्रतीक बना दिया है।
1. न सौंदर्य का मोह, न प्रेम की चाह
"चाह नहीं मैं सुरबाला के..."
फूल अपने माली से स्पष्ट कहता है कि उसे किसी सुंदर अप्सरा के गहनों में गूँथे जाने की कोई इच्छा नहीं है। उसे यह भी स्वीकार नहीं कि वह किसी प्रेमी की माला का हिस्सा बनकर प्रेमिका को आकर्षित करे। यह त्याग की पहली सीढ़ी है, जहाँ भौतिक सुखों को नकारा गया है।
2. न राजसी सम्मान, न देवत्व का अहंकार
"चाह नहीं, सम्राटों के शव पर..."
भारतीय संस्कृति में हम ईश्वर और धर्म को सर्वोच्च मानते हैं, जिसका जिक्र Hindu Tan Man जैसी रचनाओं में भी मिलता है। किन्तु यहाँ फूल की देशभक्ति इतनी प्रबल है कि वह "हरि" (ईश्वर) के चरणों में या राजाओं के शवों पर चढ़कर सम्मान पाने को भी तुच्छ समझता है। वह देवताओं के सिर पर चढ़कर अपने भाग्य पर घमंड (इठलाना) नहीं करना चाहता।
3. केवल मातृभूमि के लिए समर्पण
"मुझे तोड़ लेना वनमाली..."
यह कविता का सार है। फूल वनमाली से प्रार्थना करता है कि उसे उस रास्ते पर फेंक दिया जाए, जहाँ से देश के वीर जवान गुजरते हैं। उसे वीरों के पैरों तले कुचले जाने में जो गौरव अनुभव होगा, वह स्वर्ग के सिंहासन पर भी नहीं मिलेगा। यह भावना हमें Republic Day और स्वतंत्रता दिवस के महत्व की याद दिलाती है।
काव्य सौंदर्य और प्रासंगिकता
यह कविता 'वीर रस' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चाहे वह ध्वज वंदना हो, जैसा कि हम गगन में लहरता है भगवा हमारा में देखते हैं, या फिर भगवान राम के आदर्शों की बात जो RAM कविता में मिलती है; माखनलाल जी की यह रचना इन सभी भावनाओं का निचोड़ है।
भावनाओं की यह गहराई केवल हिंदी तक सीमित नहीं है। यदि आप क्षेत्रीय भाषाओं की मिठास देखें, जैसे कि मैथिली कविताएँ (Bhaavik Peedhi), तो आप पाएंगे कि संवेदना और त्याग की भाषा हर बोली में एक समान होती है।
वीडियो: पुष्प की अभिलाषा (सस्वर पाठ)
कविता के भाव को गहराई से समझने के लिए यह वीडियो देखें:
वीडियो देखने के बाद ऊपर दिया गया भावार्थ पढ़ना परीक्षा के लिए अधिक उपयोगी होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: 'पुष्प की अभिलाषा' का मुख्य संदेश क्या है?
A: मुख्य संदेश देशभक्ति और आत्म-बलिदान है। यह सिखाती है कि देश के लिए प्राण न्योछावर करना किसी भी सम्मान से बड़ा है।
Q: फूल सुरबाला के गहनों में क्यों नहीं जाना चाहता?
A: क्योंकि फूल विलासिता का साधन बनने के बजाय देश के वीरों के चरणों की धूल बनना अधिक गौरवशाली मानता है।
Q: यह कविता किस कक्षा के पाठ्यक्रम में है?
A: यह कविता मुख्य रूप से NCERT कक्षा 6 (Class 6) और कई राज्य बोर्डों के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल है।
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