हे भारत के राम जगो (Hey Bharat Ke Ram Jago) एक अत्यंत ओजस्वी और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित वीर रस कविता है। अभिनेता आशुतोष राणा के ऊर्जावान पाठ ने इसे पूरे देश में वायरल कर दिया है। यदि आप किसी प्रतियोगिता, स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के लिए इसके पूर्ण लिरिक्स (हिंदी और इंग्लिश) या PDF की तलाश कर रहे हैं, तो नीचे पूरी कविता पढ़ें।
📌 कविता के मुख्य तथ्य
- मूल रचयिता: श्याम सुंदर रावत (Shyam Sundar Rawat)
- लोकप्रिय वाचक: आशुतोष राणा (Ashutosh Rana)
- काव्य रस: वीर रस (Patriotic & Heroic)
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हे भारत के राम जगो कविता Lyrics (Hindi)
सौ धर्मों का धर्म एक, बलिदान बताने आया हूँ |
सुनो हिमालय कैद हुआ है, दुश्मन की जंजीरों में,
आज बता दो कितना पानी, है भारत के वीरों में |
खड़ी शत्रु की फौज द्वार पर, आज तुम्हें ललकार रही,
सोये सिंह जगो भारत के, माता तुम्हें पुकार रही ||
रण की भेरी बज रही, उठो मोह निद्रा त्यागो,
पहला शीश चढ़ाने वाले, मां के वीर पुत्र जागो |
बलिदानों के वज्रदंड पर, देशभक्त की ध्वजा जगे,
और रण के कंगन पहने है, वो राष्ट्रभक्त की भुजा जगे ||
अग्निपथ के पंथी जागो, शीश हथेली पर धरकर,
जागो रक्त के भक्त लाडले, जागो सिर के सौदागर |
खप्परवाली काली जागे, जागे दुर्गा, बर्बंडा,
और रक्तबीज का रक्त चाटने, वाली जागे चामुंडा ||
रण की चंडी घर-घर नाचे, मौत कहे प्यासी-प्यासी |
रावण का वध स्वयं करूंगा, कहने वाला राम जगे,
और कौरव शेष न एक बचेगा, कहने वाला श्याम जगे ||
यदुनंदन का चक्र जगे, अर्जुन का धनुष महान जगे |
चोटी वाला चाणक्य जागे, पौरुष पुरुष महान जगे,
और सेल्यूकस को कसने वाला, चन्द्रगुप्त बलवान जगे ||
हठी हमीर जगे जिसने, झुकना कभी नहीं जाना,
जगे पद्मिनी का जौहर, जागे केसरिया बाना |
देशभक्ति का जीवित झंडा, आज़ादी का दीवाना,
और वह प्रताप का सिंह जगे, वो हल्दीघाटी का राणा ||
मरने की हठ ठाना करते, विकट मराठो के राजा |
छत्रसाल बुंदेला जागे, पंजाबी कृपाण जगे,
दो दिन जिया शेर के माफिक, वो टीपू सुल्तान जगे ||
कनवाहे का जगे मोर्चा, पानीपत मैदान जगे,
जगे भगत सिंह की फांसी, राजगुरु के प्राण जगे |
जिसकी छोटी सी लकुटी से, संगीने भी हार गयी,
हिटलर को जीता वे फौजें, सात समुन्दर पार गयी |
मानवता का प्राण जगे, और भारत का अभिमान जगे,
उस लकुटि और लंगोटी वाले, बापू का बलिदान जगे ||
आजादी की दुल्हन को जो, सबसे पहले चूम गया,
स्वयं कफ़न की गाँठ बाँधकर, सातों भांवर घूम गया,
उस सुभाष की शान जगे, उस सुभाष की आन जगे,
ये भारत देश महान जगे, ये भारत की संतान जगे ||
झोली लेकर मांग रहा हूँ, कोई शीश दान दे दो |
भारत का भैरव भूखा है, कोई प्राण दान दे दो ||
खड़ी शत्रु की दुल्हन द्वारी, कोई बियाह रचा लो |
कोई मर्द अपने नाम की, चूड़ी तो पहना लो ||
क्या कहते हो मेरे भारत से चीनी टकराएंगे ??
अरे चीनी को तो हम पानी में घोल-घोल पी जाएंगे |
वह बर्बर था, वह अशुद्ध था, हमने उनको शुद्ध किया,
हमने उनको बुद्ध दिया था, उसने हमको युद्ध दिया ||
चाओ-माओ चीनी-मीनी, जिसमें दम हो टकराओ |
जिसके रण से बनता है, रण का केसरिया बाना,
ओ कश्मीर हड़पने वालों, कान खोल सुनते जाना ||
भारत के केसर की कीमत तो केवल सर है,
कोहिनूर की कीमत जूते पांच अजर अमर हैं |
रण के खेतो में जब छायेगा, अमर मृत्यु का सन्नाटा,
लाशों की जब रोटी होंगी, और बारूदों का आटा |
सन-सन करते वीर चलेंगे, जो बामी से फन वाला,
फिर चाहे पेकिंग हो, या रावलपिंडी वाला ||
जो हमसे टकराएगा, वो चूर चूर हो जायेगा,
इस मिट्टी को छूने वाला, मिट्टी में मिल जायेगा |
मैं घर-घर में इन्कलाब की, आग लगाने आया हूँ,
हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हे जगाने आया हूँ ||
Hey Bharat Ke Ram Jago Lyrics in English (Hinglish)
Sau Dharmo Ka Dharm Ek, Balidaan Batane Aaya Hoon.
Suno Himalay Kaid Hua Hai, Dushman Ki Janjeeron Mein,
Aaj Bata Do Kitna Paani, Hai Bharat Ke Veeron Mein.
Khadi Shatru Ki Fauj Dwar Par, Aaj Tumhein Lalkar Rahi,
Soye Singh Jago Bharat Ke, Mata Tumhein Pukar Rahi.
Ran Ki Bheri Baj Rahi, Utho Moh Nidra Tyago,
Pehla Sheesh Chadhane Wale, Maa Ke Veer Putra Jago.
Balidano Ke Vajradand Par, Deshbhakt Ki Dhvaja Jage,
Aur Ran Ke Kangan Pehne Hai, Wo Rashtrabhakt Ki Bhuja Jage.
Agnipath Ke Panthi Jago, Sheesh Hatheli Par Dharkar,
Jago Rakt Ke Bhakt Laadle, Jago Sir Ke Saudagar.
Khapparwali Kali Jage, Jage Durga, Barbanda,
Aur Raktabeej Ka Rakt Chaatne, Wali Jage Chamunda.
Nar-Mundo Ki Mala Wala, Jage Kapali Kailashi,
Ran Ki Chandi Ghar-Ghar Naache, Maut Kahe Pyasi-Pyasi.
Ravan Ka Vadh Swayam Karunga, Kehne Wala Ram Jage,
Aur Kaurav Shesh Na Ek Bachega, Kehne Wala Shyam Jage.
Parshuram Ka Parshu Jage, Raghunandan Ka Baan Jage,
Yadunandan Ka Chakra Jage, Arjun Ka Dhanush Mahaan Jage.
Choti Wala Chanakya Jage, Paurush Purush Mahaan Jage,
Aur Seleucus Ko Kasne Wala, Chandragupta Balwaan Jage.
Hathi Hamir Jage Jisne, Jhukna Kabhi Nahi Jaana,
Jage Padmini Ka Jauhar, Jage Kesariya Baana.
Deshbhakti Ka Jeevit Jhanda, Azaadi Ka Deewana,
Aur Wo Pratap Ka Singh Jage, Wo Haldighati Ka Rana.
Dakkhan Wala Jage Shivaji, Khoon Shahaji Ka Taaza,
Marne Ki Hath Thaana Karte, Vikat Maratho Ke Raja.
Chhatrasal Bundela Jage, Punjabi Kirpaan Jage,
Do Din Jiya Sher Ke Maafik, Wo Tipu Sultan Jage.
Kanwahe Ka Jage Morcha, Panipat Maidan Jage,
Jage Bhagat Singh Ki Phansi, Rajguru Ke Praan Jage.
Jiski Chhoti Si Lakuti Se, Sangeene Bhi Haar Gayi,
Hitler Ko Jeeta Ve Faujein, Saat Samundar Paar Gayi.
Manavta Ka Praan Jage, Aur Bharat Ka Abhimaan Jage,
Us Lakuti Aur Langoti Wale, Bapu Ka Balidaan Jage.
Azaadi Ki Dulhan Ko Jo, Sabse Pehle Choom Gaya,
Swayam Kafan Ki Gaanth Baandhkar, Saaton Bhanwar Ghoom Gaya.
Us Subhash Ki Shaan Jage, Us Subhash Ki Aan Jage,
Ye Bharat Desh Mahaan Jage, Ye Bharat Ki Santaan Jage.
Jholi Lekar Maang Raha Hoon, Koi Sheesh Daan De Do,
Bharat Ka Bhairav Bhookha Hai, Koi Praan Daan De Do.
Khadi Shatru Ki Dulhan Dwaari, Koi Biyah Racha Lo,
Koi Mard Apne Naam Ki, Choodi Toh Pehna Lo.
Kya Kehte Ho Mere Bharat Se Cheeni Takrayenge?
Arre Cheeni Ko Toh Hum Paani Mein Ghol-Ghol Pee Jayenge.
Wah Barbar Tha, Wah Ashuddh Tha, Humne Unko Shuddh Kiya,
Humne Unko Buddh Diya Tha, Usne Humko Yuddh Diya.
Aaj Bandha Hai Kafan Sheesh Par, Jisko Aana Hai Aa Jao,
Chao-Mao Cheeni-Meeni, Jismein Dum Ho Takrao.
Jiske Ran Se Banta Hai, Ran Ka Kesariya Baana,
O Kashmir Hadapne Walo, Kaan Khol Sunte Jaana.
Bharat Ke Kesar Ki Keemat Toh Keval Sar Hai,
Kohinoor Ki Keemat Joote Paanch Ajar Amar Hain.
Ran Ke Kheto Mein Jab Chhayega, Amar Mrityu Ka Sannata,
Laasho Ki Jab Roti Hongi, Aur Baroodo Ka Aata.
San-San Karte Veer Chalenge, Jo Baami Se Phan Wala,
Phir Chahe Peking Ho, Ya Rawalpindi Wala.
Jo Humse Takrayega, Wo Choor Choor Ho Jayega,
Is Mitti Ko Chhoone Wala, Mitti Mein Mil Jayega.
Main Ghar-Ghar Mein Inquilab Ki, Aag Lagane Aaya Hoon,
Hey Bharat Ke Ram Jago, Main Tumhein Jagane Aaya Hoon.
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विद्यालय, कॉलेज वाद-विवाद प्रतियोगिता या राष्ट्रीय पर्व पर ओजस्वी पाठ के लिए स्पष्ट प्रिंट-अनुकूल फॉर्मेट यहाँ उपलब्ध है।
📥 PDF Download Hereकविता का अर्थ और ऐतिहासिक सन्दर्भ
इस कविता में भारत के युवाओं को "राम" के प्रतीक के रूप में संबोधित किया गया है। यह 'राम' केवल एक आराध्य नहीं, बल्कि एक मर्यादा पुरुषोत्तम योद्धा हैं जो धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए अन्याय के खिलाफ शस्त्र उठाना जानते हैं।
जब कविता में भगत सिंह और राजगुरु की शहादत का ज़िक्र आता है, तो यह स्वाभाविक रूप से अवतार सिंह संधू 'पाश' की कविताएं और उनके क्रांतिकारी विचारों की याद दिलाता है। 'Peking' (चीन) और 'Rawalpindi' (पाकिस्तान) का संदर्भ इसे केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि एक आधुनिक भू-राजनीतिक चेतावनी भी बनाता है।
राष्ट्रनिर्माण केवल बाहरी शत्रुओं को हराने से नहीं होता। जहाँ एक ओर हम वीर रस से शत्रुओं को ललकारते हैं, वहीं दूसरी ओर लकीरें (Lakirein) जैसी रचनाएं समाज के आंतरिक जातिवाद और भेदभाव पर गहरा प्रहार करती हैं। यह ओजस्वी कविता निश्चित रूप से इंटरनेट पर उपलब्ध श्रेष्ठ Hindi poems on India के संग्रह का एक अनमोल हिस्सा है।
Ashutosh Rana Viral Recitation Video
इस कविता को राष्ट्रव्यापी ख्याति तब मिली जब प्रख्यात अभिनेता आशुतोष राणा ने इसे अपनी ऊर्जावान और आक्रामक शैली में प्रस्तुत किया। उनका यह पाठ नीचे देखें:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. 'हे भारत के राम जगो' कविता के असली लेखक कौन हैं?
लोकप्रिय मान्यता के अनुसार इस कविता के रचयिता श्याम सुंदर रावत हैं। इसकी आक्रामक वीर रस शैली के कारण अक्सर लोग इसे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचना मान लेते हैं, जो कि एक भ्रांति (confusion) है।
Q2. क्या आशुतोष राणा ने यह कविता लिखी है?
नहीं, आशुतोष राणा इस कविता के रचयिता नहीं बल्कि इसके सबसे प्रसिद्ध वाचक (Reciter) हैं। उनके द्वारा 'साहित्य आज तक' के मंच पर किए गए सशक्त पाठ ने ही इस कविता को वर्तमान समय में वायरल किया है।