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जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे - Ramdhari Singh Dinkar Motivational Poem

जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे – रामधारी सिंह दिनकर की प्रेरक कविता

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित "जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे" हिंदी साहित्य की सबसे ओजस्वी और लोकप्रिय motivational poems in Hindi में से एक है। यह कविता साहस, संघर्ष, बलिदान और आत्मबल की प्रेरणा देती है तथा रामधारी सिंह दिनकर की सबसे प्रसिद्ध motivational कविता मानी जाती है। यदि आप Ramdhari Singh Dinkar motivational poem खोज रहे हैं, तो यह रचना उनकी सर्वाधिक प्रेरक कविताओं में गिनी जाती है।

यह कविता विशेष रूप से छात्रों, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों में अत्यंत लोकप्रिय है।

Ramdhari Singh Dinkar motivational poem warrior image in Hindi
दिनकर की कविता की तरह संघर्षों से जूझता निर्भीक वीर।

रामधारी सिंह दिनकर की प्रेरणादायक कविता – पूर्ण पाठ

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा सम्भालो

चट्टानों की छाती से दूध निकालो

है रुकी जहाँ भी धार, शिलाएँ तोड़ो

पीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ो |


चढ़ तुँग शैल शिखरों पर सोम पियो रे

योगियों नहीं विजयी के सदृश जियो रे |


Fearless motivational Hindi poem symbolic image inspired by Dinkar
मृत्यु के मुख पर भी निर्भीक होकर चरण धरने का साहस।

जब कुपित काल धीरता त्याग जलता है

चिनगी बन फूलों का पराग जलता है

सौन्दर्य बोध बन नई आग जलता है

ऊँचा उठकर कामार्त्त राग जलता है |


अम्बर पर अपनी विभा प्रबुद्ध करो रे

गरजे कृशानु तब कँचन शुद्ध करो रे |


जिनकी बाँहें बलमयी ललाट अरुण है

भामिनी वही तरुणी, नर वही तरुण है

है वही प्रेम जिसकी तरँग उच्छल है

वारुणी धार में मिश्रित जहाँ गरल है |


उद्दाम प्रीति बलिदान बीज बोती है

तलवार प्रेम से और तेज होती है |


छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाए

मत झुको अनय पर भले व्योम फट जाए

दो बार नहीं यमराज कण्ठ धरता है

मरता है जो एक ही बार मरता है |


तुम स्वयं मृत्यु के मुख पर चरण धरो रे

जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे |


स्वातन्त्रय जाति की लगन व्यक्ति की धुन है

बाहरी वस्तु यह नहीं भीतरी गुण है

वीरत्व छोड़ पर का मत चरण गहो रे

जो पड़े आन खुद ही सब आग सहो रे |


जब कभी अहम पर नियति चोट देती है

कुछ चीज़ अहम से बड़ी जन्म लेती है

नर पर जब भी भीषण विपत्ति आती है

वह उसे और दुर्धुर्ष बना जाती है |


Ramdhari Singh Dinkar motivational poem writing portrait in Hindi literature
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर - हिंदी साहित्य के सूर्य।

चोटें खाकर बिफरो, कुछ अधिक तनो रे

धधको स्फुलिंग में बढ़ अंगार बनो रे |


उद्देश्य जन्म का नहीं कीर्ति या धन है

सुख नहीं धर्म भी नहीं, न तो दर्शन है

विज्ञान ज्ञान बल नहीं, न तो चिन्तन है

जीवन का अन्तिम ध्येय स्वयं जीवन है |


सबसे स्वतन्त्र रस जो भी अनघ पिएगा

पूरा जीवन केवल वह वीर जिएगा ||

Jeena Ho To Marne Se Nahi Daro Re - Hinglish Lyrics

Vairagya chhod baahon ki vibha sambhalo
Chattanon ki chhati se doodh nikalo
Hai ruki jahan bhi dhaar, shilayein todo
Peeyush chandramaon ka pakad nichodo

Chadh tung shail shikharon par som piyo re
Yogiyon nahi vijayi ke sadrish jiyo re

Jab kupit kaal dheerta tyaag jalta hai
Chingi ban phoolon ka paraag jalta hai
Soundarya bodh ban nayi aag jalta hai
Ooncha uthkar kaamart raag jalta hai

Ambar par apni vibha prabuddh karo re
Garje krishanu tab kanchan shuddh karo re

Jinki baahein balmayi lalaat arun hai
Bhamini wahi taruni, nar wahi tarun hai
Hai wahi prem jiski tarang uchhal hai
Vaaruni dhaar mein mishrit jahan garal hai

Uddaam preeti balidaan beej boti hai
Talwaar prem se aur tej hoti hai

Chhodo mat apni aan, sees kat jaye
Mat jhuko anay par bhale vyom phat jaye
Do baar nahi yamraaj kanth dharta hai
Marta hai jo ek hi baar marta hai

Tum swayam mrityu ke mukh par charan dharo re
Jeena ho to marne se nahi daro re

Swatantraya jaati ki lagan vyakti ki dhun hai
Baahari vastu yah nahi bheetari gun hai
Veeratva chhod par ka mat charan gaho re
Jo pade aan khud hi sab aag saho re

Jab kabhi aham par niyati chot deti hai
Kuch cheez aham se badi janm leti hai
Nar par jab bhi bheeshan vipatti aati hai
Wah use aur durdhursh bana jaati hai

Chotein khakar bifro, kuch adhik tano re
Dhadhko sfuling mein badh angaar bano re

Uddeshya janm ka nahi keerti ya dhan hai
Sukh nahi dharm bhi nahi, na to darshan hai
Vigyan gyaan bal nahi, na to chintan hai
Jeevan ka antim dhyey swayam jeevan hai

Sabse swatantra ras jo bhi anagh piyega
Poora jeevan keval wah veer jiyega

कठिन शब्दार्थ (Word Meanings)

  • दुर्धुर्ष = जिसे पराजित करना कठिन हो
  • कृशानु = अग्नि
  • प्रबुद्ध = जागृत
  • गरल = विष

यह कविता छात्रों के लिए क्यों प्रेरक है?

यह कविता विशेष रूप से छात्रों और युवाओं को असफलता से न डरने, संघर्ष में टिके रहने और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा देती है। परीक्षा हो या जीवन का कोई भी कड़ा इम्तिहान, दिनकर जी की यह ओजस्वी वाणी हार न मानने का पाठ पढ़ाती है।

Ramdhari Singh Dinkar motivational lines आज भी विद्यार्थियों, युवाओं, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों और संघर्षरत लोगों के लिए ऊर्जा का स्रोत मानी जाती हैं। यह कविता केवल साहित्य नहीं बल्कि जीवन-संघर्ष का घोष है।

कविता का मर्म और प्रेरणा

राष्ट्रकवि दिनकर की यह ओजस्वी वाणी हमें सिखाती है कि जीवन की सार्थकता केवल साँस लेने में नहीं, बल्कि संघर्षों से टकराने में है। जिस प्रकार महाभारत के महासमर में वीरों ने अपनी आन नहीं छोड़ी, उसी प्रकार हमें भी अडिग रहना चाहिए। दिनकर जी की ही एक और अमर रचना उर्वशी (Urvashi) में भी हमने प्रेम और दर्शन का ऐसा ही अद्भुत संगम देखा है।

चाहे सामने साक्षात मृत्यु हो या तलवार और धनुष लेकर खड़ी कोई बड़ी चुनौती, हमें हार नहीं माननी चाहिए। कहानी कर्ण की हो या फिर रणभूमि में पार्थ (अर्जुन) को दिया गया उपदेश, ये सभी हमें यही सिखाते हैं कि विपत्तियों में घबराकर खुद को ईश्वर के भरोसे छोड़ने के बजाय, कर्म करना ही श्रेष्ठ है। यदि आप जीवन के इस फलसफे को और गहराई से समझना चाहते हैं, तो हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला का भावार्थ अवश्य पढ़ें।

साहित्यशाला की अन्य चुनिंदा और विद्रोही रचनाएँ:

संघर्ष और विद्रोह की भावना केवल रणभूमि तक सीमित नहीं है। समाज की बेड़ियों को तोड़ती पिंजरे की चिड़िया थी और कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से विद्रोही जैसी आधुनिक रचनाएँ भी इसी आज़ाद खयाल की तर्जुमानी करती हैं। वहीं दूसरी ओर, उर्दू अदब में हक़ के लिए आवाज़ उठाने वालों के लिए अब्दुल्लाह ज़रीम की ग़ज़ल दस्ते ताज़ीर चूमने वाले एक बेहतरीन मिसाल है।


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