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Auratein - औरतें By रमाशंकर यादव विद्रोही | Women Empowerment Poems

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai 

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Vacate the throne, for people are coming.

Vacate the throne, for people are coming



On June 25, 1975, Jay Prakash Narayan called for "revolution" from the ground of Ramlila Maidan in Delhi. During his call for "complete revolution", JP recited a poem, a famous poem that has become a symbol of people power and Indian democracy. Written by the famous Hindi writer Ramdhari Singh Dinkar, this song titled "Singhasan Khali Karo ki janata aati hai" is a reminder that in a democracy, the greatest power belongs to the people, to the people. 

It is the day after this call that Ms. Indira Gandhi declared a state of emergency, ushering in a period of widespread lawlessness and the abolition of law.


Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है


25 जून 1975 को जय प्रकाश नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान के मैदान से "क्रांति" का आह्वान किया। "पूर्ण क्रांति" के अपने आह्वान के दौरान, जेपी ने एक कविता का पाठ किया, एक प्रसिद्ध कविता जो जनशक्ति और भारतीय लोकतंत्र का प्रतीक बन गई है। 

हिंदी के प्रसिद्ध लेखक रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखा गया यह गीत "सिंहासन खाली करो की जनता आती है" इस बात की याद दिलाता है कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति जनता की होती है, जनता की होती है। 

इस आह्वान के एक दिन बाद ही सुश्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, व्यापक अराजकता और कानून के उन्मूलन की अवधि की शुरुआत हुई।


Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है


सदियों की ठंढी, बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

जनता? हां,मिट्टी की अबोध मूरतें वही,
जाड़े-पाले की कसक सदा सहनेवाली,
जब अंग-अंग में लगे सांप हो चूस रहे
तब भी न कभी मुंह खोल दर्द कहनेवाली।


जनता? हां, लंबी-बडी जीभ की वही कसम,
"जनता,सचमुच ही, बडी वेदना सहती है।"
"सो ठीक, मगर, आखिर इस पर जनमत क्या है?"
'है प्रश्न गूढ़ जनता इस पर क्या कहती है?"

मानो, जनता ही फूल जिसे अहसास नहीं,
जब चाहो तभी उतार सजा लो दोनों में
अथवा कोई दुधमुंही जिसे बहलाने के
जन्तर-मन्तर सीमित हों चार खिलौनों में।

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है


लेकिन होता भूडोल, बवंडर उठते हैं,
जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती,
सांसों के बल से ताज हवा में उड़ता है,
जनता की रोके राह,समय में ताव कहां?
वह जिधर चाहती,काल उधर ही मुड़ता है।

अब्दों, शताब्दियों, सहस्त्राब्द का अंधकार
बीता; गवाक्ष अंबर के दहके जाते हैं
यह और नहीं कोई,जनता के स्वप्न अजय
चीरते तिमिर का वक्ष उमड़ते जाते हैं।

सब से विराट जनतंत्र जगत का आ पहुंचा,
तैंतीस कोटि-हित सिंहासन तैयार करो
अभिषेक आज राजा का नहीं, प्रजा का है,
तैंतीस कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो।

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

आरती लिये तू किसे ढूंढता है मूरख,
मन्दिरों, राजप्रासादों में, तहखानों में?
देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे,
देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में।

फावड़े और हल राजदण्ड बनने को हैं,
धूसरता सोने से श्रृंगार सजाती है
दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai 

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Vacate the throne, for people are coming.

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है



Centuries’ cold & extinguished fire has ignited,

Wearing a crown of gold, the soil is swaggering,

Give way, listen to the stridor sound of chariots,

Vacate the throne, for people are coming.


Public? Yes, innocent idols of clay,

Those who bear weary of winter snow,

When snakes are sucking each body part,

They also remain silent and pain never shows.


Public? Yes, the same oath of the long-big tongue,

“Public indeed bears great desolation.”

“It’s all right, but what’s the public opinion on this?”

” What public has to say on this esoteric question?


Believe, the public to be emotionless flowers,

To decorate plates anytime when required,

Or to please them like an infant,

All tricks in four toys are confined.

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

But earthquakes happen, tornadoes do occur,

When the public raises eyebrows and are raging,

Give way, listen to the stridor sound of chariots,

Vacate the throne, for people are coming.


Roars crumble the foundations of palaces,

Crown flies in the air with the power of breathing,

Time doesn’t have the power to stop public ways,

Period turns where they want,


Blackout of years, centuries and millenniums

elapsed, windows of the sky are fuming,

They are none other than people’s invincible dreams,

Rupturing darkness thoracic are overflowing.


The largest democracy in the world has arrived,

Decide the throne for the interest of thirty-three crore people,

Today is the anointment of the public and not the king,

Put the crown on the heads of thirty-three crore people.

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

O! Fool! Whom you are searching to worship,

In temples, catacombs and royal offerings,

Gods are breaking stones on roads,

See gods in fields, and barns doing farming.


Shovel and plough are ready to be sceptre,

Mousiness with gold is adorning,

Give way, listen to the stridor sound of chariots,

Vacate the throne, for people are coming.


We still see common people, 

farmers poor suffering at each stage of their life. 

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है


It means we are still away from being a real republic where power resides in the public hands. 

Let's pray this republic day to be a better republic nation in the coming future.

-

Ramdhari Singh Dinkar

रामधारी सिंह दिनकर

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai | सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai 

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Vacate the throne, for people are coming.


Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है


Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

Sinhasan Khali Karo Ki Janta Aati Hai - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

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